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बीकानेर समाचार

यूथ कांग्रेस का संभाग सम्मेलन अब 23 को

बीकानेर। बीकानेर भारतीय युवा कांग्रेस का 21 अगस्त को श्रीडूंगरगढ़ में आयोजित होने वाला संभाग स्तरीय सम्मेलन राष्ट्रीय शोक होने की वजह से दो दिन आगे बढ़ा दिया गया है। अब यह संभाग स्तरीय सम्मेलन 23 अगस्त को आयोजित होगा।
भारतीय युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि सम्मेलन को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

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बज्जू का किसान सम्मेलन स्थगित

बीकानेर। कोलायत तहसील के बज्जू में 22 अगस्त को प्रस्तावित किसान सम्मेलन स्थगित कर दिया गया है। श्रीकोलायत विधायक भंवर सिंह भाटी ने बताया कि 22 अगस्त को श्रीकोलायत विधानसभा क्षेत्र के बज्जू तहसील मुख्यालय पर आयोजित होने वाला किसान सम्मेलन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन होने के कारण 22 अगस्त तक 7 दिवसीय राष्ट्रीय शोक होने के कारण स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि जल्द ही सम्मेलन की अगली तिथि तय की जाएगी।

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जोधपुर को छोड़कर प्रदेश में 31 अगस्त को होंगे छात्रसंघ चुनाव

बीकानेर। प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव 31 अगस्त को होंगे। इसको लेकर 23 अगस्त से छात्रसंघ चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी। छात्रसंघ चुनाव के परिणाम 11 सितम्बर को जारी होंगे। 23 अगस्त को मतदाता सूचियों का प्रकाशन होगा व 24 अगस्त को उन पर आपत्ति ली जाएगी और दोपहर 1 बजे के बाद मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन होगा। वहीं मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की जोधपुर संभाग में गौरव यात्रा के चलते जोधपुर में चुनाव प्रक्रिया 1 सितम्बर से शुरू होगी। वहां दो चरणों में चुनाव होंगे।

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बीकानेर - केरल आपदा में एक दिन का वेतन देने का आग्रह, रेस्टा ने लिखा सीएम को पत्र

बीकानेर-केरल में भारी बारिश से आई बाढ़ से वहां के लोगो का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया जिससे उनके सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है इसको लेकर राजस्थान वरिष्ट शिक्षक संघ (रेस्टा) के प्रदेश उप सभाध्यक्ष व कर्मचारी महासंघ के जिला उपाध्यक्ष मोहरसिंह सलावद ने राज्य की सीएम वसुंधरा राजे को पत्र लिखकर राज्य के शिक्षा विभाग में कार्यरत सभी कर्मचारियों से एक दिन का वेतन केरल में आई आपदा में देने की मांग की व साथ ही राज्य के सभी शिक्षक व कर्मचारी संघो व शिक्षा विभाग के कर्मचारियों से अपील की है आप भी इस माँग का समर्थन करते हुए इस माँग को उठाये व सीएम पर दबाब बनाएं जिससे केरल में आई बाढ़ से पीड़ितों को सहयोग मिल सके ,सलावद ने राज्य सरकार से इस माँग को जल्द जल्द पूरा करने की मांग की ,केरल में आठ अगस्त से तेज हो रही बारिश से बाढ़ व भूस्खलन के कारण हजारों मकान प्रलय में समा गए व आपदा से ३५७ से अधिक लोग मौत के शिकार हो गए जिससे उन्हें रहने खाने पीने की समस्याओ का सामना करना पड़ रहा है इसलिए राज्य की ओर से शिक्षा विभाग के कर्मचारियों का एक दिन का वेतन इनके सहयोग हेतु दिया जाता है तो इनको आर्थिक संबल मिलेगा इससे पहले भी राज्य सरकार उतराखंड में हुई आपदा के लिए राज्य के सभी कर्मचारियों का एक दिन का वेतन दिया गया था ,इसलिए सीएम इस मामले को प्राथमिकता से करे ,सगठन आपका आभारी रहेगा !

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22 को बीकानेर बंद का एलान

बीकानेर। मरू प्रदेश निर्माण मोर्चा द्वारा मरू प्रदेश की निर्माण की मांग और बीकानेर को राजधानी बनाने की मांग को लेकर 22 अगस्त 2018 को बीकानेर बंद की घोषणा के बाद मरू प्रदेश निर्माण मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जयवीर गोदारा ने महात्मा गांधी मार्ग, कोटगेट, मोहता चौक सहित बजार में जन संपर्क कर मरू प्रदेश के निर्माण और विकास के लिए 22 अगस्त को बीकानेर बंद रख अपनी मांग सरकारों तक पहुचाने की अपील की वही न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं से जन सम्पर्क कर मरू प्रदेश की विकास की मांग के लिए बीकानेर बन्द के लिए समर्थन माँगा, जिसमे एडवोकेट जगदीश गोड़, हनुमान चौधरी, रामकिशन गोयतान, मनीष गोड़, अजय शर्मा सहित अधिवक्ताओं ने बंद का समर्थन किया। मरू सेना के प्रदेश अध्यक्ष जयंत मूण्ड ने बताया की लंम्बे समय से मरू प्रदेश निर्माण की मांग को लेकर मोर्चा आन्दोलन कर रहा है और अब 22 को बीकानेर शांति पूर्वक बंद रख कर मरू प्रदेश के निर्माण की मांग की और केंद्र सरकार का ध्यान आर्कषित करवांने का प्रयास कर रहा है इस मांग के समर्थन में आम आदमी पार्टी के एडवोकेट हनुमान चौधरी, बार एसोसिएशन, ड्रीम सोसायटी, यूथ क्लब, मरू विकास मंच, कुमावत महासभा सहित कई वरिष्ठ जन और संस्थाओं ने अपना समर्थन व्यक्त किया है। 22 अगस्त 2018 को बीकानेर बंद के लिये मरू प्रदेश निर्माण मोर्चा 21 अगस्त शाम किर्ती स्तम्भ से कोटगेट होते मोहता चौक तक अपील रैली निकाल व्यपारियो से बन्द को समर्थन देने का आग्रह करेगा ।।

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बीकानेर से बाढ़ पीडि़तों के लिए भेजी दवाएं

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर

केरल में आई बाढ़ से पीडि़तों को चिकित्सा सुविधा देने के लिए राजस्थान भी अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। खासकर चिकित्सा विभाग ने भारी मात्रा में दवाएं पहुंचाने का सिलसिला शुरू किया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों पर बीकानेर, जयपुर और जोधपुर से भारी मात्रा में दवाएं जयपुर में एकत्र की जा रही है। यहां से दवाएं केरल भेजी जाएगी। अकेले बीकानेर से रविवार को अवकाश के दिन भी 276 कार्टून दवाएं भेजी गई। कमोबेश इतनी ही दवाएं जोधपुर से भी जयपुर भेजी जा रही है। वहीं जयपुर में इससे अधिक मात्रा में दवाएं एकत्र होगी। यह दवाएं जयपुर से हवाई जहाज के माध्यम से केरल भेजी जाएगी।
यह हैं दवाएं
निशुल्क दवा योजना के जिला परियोजना समन्वयक डॉ. नवल गुप्ता ने बताया कि अधिकांश दवाएं बाढ़ के दौरान और बाढ़ के बाद फैलने वाले रोगों को ध्यान में रखते हुए भेजी जा रही है। इसमें विभिन्न तरह के एंटीबायोटिक, मलेरिया, बुखार आदि रोगों की दवाएं हैं। साथ ही कई तरह की दवाएं भी भेजी जा रही है।

जिले में 52 लाख रुपए के सेनेटरी पेड्स वितरित

बीकानेर। बालिकाओं के लिए बीकानेर जिले में जनवरी 2018 से अब तक करीब 52 लाख रुपए के सेनेटरी नेपकिन वितरित किए जा चुके हैं। निशुल्क दवा योजना के जिला परियोजना समन्वयक डॉ. नवल गुप्ता ने बताया कि राजस्थान मेडिकल सर्विस कार्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से बालिका स्वच्छता योजनान्तर्गत पेड्स वितरित किए जा रहे हैं। समस्त पेड्स राजकीय विद्यालयों में वितरित किए जा रहे हैं। वहीं स्कूल नहीं जाने वाली बालिकाओं को भी पेड्स दिए जा रहे हैं। प्रत्येक बालिका को हर महीने के बारह पेड दिए जा रहे हैं। बीकानेर में अब तक 51 लाख 99 हजार 143 रुपए का खर्च इस काम पर किया गया है।

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दो हजार स्कूलों को मिलेंगे वरिष्ठ अध्यापक!

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर

प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा के दो हजार स्कूलों को शीघ्र ही वरिष्ठ अध्यापक मिलने वाले हैं। ये वरिष्ठ अध्यापक मूल रूप से इन्हीं विद्यालय में पदस्थापित थे लेकिन सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) व राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) में लम्बे समय से प्रतिनियुक्ति पर कार्यक्रम अधिकारी व अन्य पदों पर लगे हुए थे। अब प्रदेश में एसएसए व रमसा को समन्वित कर समग्र शिक्षा अभियान (समसा) संचालित किया जा रहा है। साथ ही एकीकृत शिक्षा संकुलों की स्थापना की कार्ययोजना में भी जिला कार्यालयों आदि में वरिष्ठ अध्यापकों के पद लगभग समाप्त हो गए हैं। ऐसे में अगले माह तक प्रतिनियुक्ति पर लगे वरिष्ठ अध्यापकों को कार्यमुक्त किया जाना निश्चित है। हालांकि समसा में भी कार्यालय व्यवस्था के तौरपर शिक्षकों को लगाया जाएगा लेकिन इसमें वरिष्ठ अध्यापक की बजाए कार्यक्रम अधिकारी के रूप में व्याख्याताओं को लगाया जाएगा। हालांकि पूर्व में भी कार्यक्रम अधिकारी के पद पर व्याख्याताओं को लगाने की योजना बनाई गई थी परन्तु राज्य स्तर पर योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। अब समग्र शिक्षा अभियान में इसकी क्रियान्विति की जा रही है।

फिर नहीं आएगी समस्या

सर्व शिक्षा अभियान में गत वित्तीय वर्ष में बजट की समस्या रहने तथा रमसा में योजनाओं के लिए अरबों रुपए का बजट होने तथा प्रारंभिक शिक्षा के स्कूलों का माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में एकीकरण करने, पीईईओ को प्रारंभिक शिक्षा का प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार दिए जाने के बाद समग्र शिक्षा अभियान की क्रियान्विति में समस्या नहीं आने वाली है। हालांकि नए वित्तीय वर्ष में बड़े बजट के नाम पर समग्र शिक्षा अभियान ने राशि जारी नहीं की है। साथ ही पुराने विकास कार्यों के बजट अटके पड़े हैं।
अटके विकास कार्य
समग्र शिक्षा अभियान से प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों के विकास के दावे किए जा रहे हैं लेकिन नए वित्तीय वर्ष में अब तक मामूली बजट ही जारी हुआ है। पूर्व में रमसा के माध्यम से संचालित योजनाओं के बजट में भी कटौती की जा रही है। जहां विगत तीन सत्रों में हर वर्ष प्रदेश के सभी जिलों में व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम शुरू किया गया, वहीं महज एक दर्जन जिलों में ही वॉकेशनल एज्युकेशन शुरू की गई जबकि ५०० स्कूलों के प्रस्ताव भेजे गए थे।

स्कूलों में होगी शिक्षण व्यवस्था

रमसा के राज्य परियोजना कार्यालय व जिला परियोजना कार्यालयों में कार्यक्रम अधिकारी के रूप में करीब २००० वरिष्ठ अध्यापक कार्यरत है। समग्र शिक्षा अभियान में कार्यक्रम अधिकारी का पद व्याख्याता स्तर का निर्धारित किए जाने के बाद इन वरिष्ठ अध्यापकों के स्कूलों में जाने से शिक्षण व्यवस्था में भी सुधार होगा।

मंत्रालयिक कर्मचारी उठा रहे हैं मांग

एकीकृत शिक्षा संकुलों की स्थापना से जहां मंत्रालयिक संवर्ग के करीब तीन हजार पदों के समाप्त होने का आरोप लगाते हुए मंत्रालयिक कर्मचारी विरोध कर रहे हैं, वहीं समसा में कार्यक्रम अधिकारियों के पद मंत्रालयिक संवर्ग के स्वीकृत करने की मांग उठने लगी है। संगठनों का कहना है कि मंत्रालयिक कर्मचारी योजनाओं की क्रियान्विति का अनुभव रखते हैं। ऐसे में कार्यक्रम अधिकारी के रूप में अनुभव काम आ सकता है।

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बीकानेर - थोड़ी सी चूक और बड़ा हादसा तय

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर

सार्वजनिक निर्माण विभाग की लापरवाही नौनिहालों पर भारी पड़ सकती है। एक हजार से अधिक नामांकन वाले राजकीय एमएम उच्च माध्यमिक विद्यालय में सानिवि की ओर से वर्षा जल संचय के लिए टैंक का निर्माण कराया जा रहा है। इसके चलते करीब एक पखवाड़ा पहले विद्यालय की दीवार को तोड़ दिया गया और एक सप्ताह पहले टैंक निर्माण के लिए दस फीट से अधिक गहरा गड्ढ़ा खोद दिया गया। उसके बाद से काम बंद है। स्थिति यह है कि विद्यालय में प्रवेश द्वार के समीप गड्ढा कभी भी नौनिहालों के जीवन को संकट में डाल सकता है। प्रधानाचार्य दुर्गाशंकर पुरोहित ने बताया कि इस संबंध में सानिवि व संबंधित ठेकेदार को अवगत कराया जा चुका है। रविवार को एमएम स्कूल के परीक्षा केन्द्र पर लिपिक ग्रेड द्वितीय की परीक्षा आयोजित हुई, जिसमें परीक्षार्थियों की सुरक्षा के लिए स्कूल प्रबंधन ने अपने स्तर पर बैरीकेड्स आदि लगवाए।

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लाखों की खरीद के साथ मेला संपन्न

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर

पुष्करणा महिला मंडल की ओर से किए गए प्रयासों से आयोजित सावन मेला रविवार को भारी भीड़ और खरीदारी के बीच संपन्न हो गया। मेले में रविवार को मंडल रेल प्रबंधक अनिल दूबे ने भी निरीक्षण किया।
क्लब की अध्यक्ष अर्चना थानवी ने बताया कि दो दिन के मेले में हजारों की संख्या में लोगों ने पहुंचकर इसका लुत्फ उठाया। वहीं समाज के लोगों ने अपने उत्पाद भी जमकर बेचे। महिलाओं में व्यवसाय के प्रति रुचि जागृत करने के उद्देश्य में मंडल को पूरी तरह से सफलता मिली है। मंडल की प्रवक्ता सेणुका हर्ष ने बताया कि दूसरे दिन भी भारी खरीदारी से अनुमान है कि लाखों रुपए की खरीदारी इस दौरान हुई। ऐसे में महिलाओं में सामाजिक कार्यों के प्रति रुचि बढ़ी है। मेले में विभिन्न उत्पादों के साथ ही एडवेंचर में भी बच्चों ने विशेष उत्साह दिखाया। देश की विख्यात महिला पर्वतारोही सुषमा बिस्सा के प्रयासों से बच्चों ने यहां एडवेंचर गतिविधियों का लुत्फ उठाया। मेले में बच्चों की संख्या भी काफी रही।

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गुरुजी दूध पिलाएंगे, तो बच्चों को कब पढ़ाएंगे?

एक सितम्बर से पहली से आठवीं तक के बच्चों को पूरे सप्ताह मिलेगा दूध, एकल अध्यापक वाले स्कूलों में बढ़ी समस्या
बीकानेर। राज्य सरकार ने जहां बच्चों को शिक्षा से जोडऩे तथा स्कूलों में ठहराव बढ़ाने के लिए महत्वकांक्षी अन्नपूर्णा दूध योजना शुरू की है, वहीं यह योजना प्रारंभिक शिक्षा के एकल अध्यापकों वाले स्कूलों में बच्चों की शिक्षा में बाधा खड़ी कर सकती है। योजना एक जुलाई से शुरू हुई, जिसमें सप्ताह में तीन दिन दूध पिलाने के निर्देश दिए गए लेकिन अब एक सितम्बर से पूरे सप्ताह बच्चों को दूध पिलाने की योजना एकल अध्यापक स्कूलों में पढ़ाई चौपट कर सकती है। प्रार्थना सभा के साथ दूध लाने, फेट व गुणवत्ता जांचने, दूध गर्म कर उसे पुन: पीने योग्य ठंडा करने, बच्चों को पिलाने तथा पूरा हिसाब रखने में आधी छुट्टी हो जाती है। उसके बाद पोषाहार की व्यवस्था कर वितरित करने में स्कूल की छुट्टी हो जाएगी। जबकि गुरुजी के पास एसआईक्यूई की पांच कक्षाओं के प्रतिदिन की फाइलों का कार्य शिक्षा से अलग पड़ा है। शिक्षक मुख्यमंत्री की महत्वकांक्षी योजना का विरोध तो नहीं कर रहे हैं लेकिन उनका कहना है कि दूध योजना नोडल एजेंसी के माध्यम से लागू की जाए, ताकि स्कूलों में शिक्षण कार्य प्रभावित न हो।
चुनावी साल होने के कारण राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में नित नई घोषणाएं कर रही है। एक जुलाई से पूरे प्रदेश में कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए अन्नपूर्णा दूध योजना लागू की गई। हालांकि बच्चों को केवल कागजों में ही गुणवत्तापूर्ण दूध मिल रहा है, क्योंकि अधिकांश स्कूलों में दूध जांच का समय तक नहीं रहता है। स्वतंत्रता दिवस पर राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री ने पोषाहार के साथ प्रतिदिन बच्चों को दूध पिलाने की घोषणा की, जिसकी क्रियान्विति को लेकर जिला शिक्षा अधिकारियों ने प्रयास शुरू कर दिए हैं।
एक अनार, सौ बीमार
ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे सैंकड़ों प्राथमिक विद्यालय हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या सौ के आसपास है परन्तु दूरस्थ स्थान पर होने के कारण एक अथवा दो शिक्षक ही कार्यरत है। जहां एकल अध्यापक है, वहां दूध लाने, फेट निकालने, गर्म करवाने व वितरित करवाने, हिसाब रखने आदि का कार्य शिक्षक के पास है, वहीं बाद में पोषाहार तैयार करवाने, हिसाब रखने, एसएमएस करने आदि का दायित्व भी उसी शिक्षक का है। उसी विद्यालय में सीसीई संचालित है। ऐसे में चार विषयों के पाठ्यक्रमों को प्रतिदिन तैयार कर डायरियां तैयार करने का कार्य भी उसी शिक्षक को करना पड़ता है। ऐसे में सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि शिक्षक के इन कार्यों में व्यस्त रहने के दौरान कक्षाओं में पढ़ाई के नाम पर केवल खानापूर्ति ही होती है। हालांकि अधिकारी इससे अनभिज्ञ नहीं है लेकिन राज्य सरकार की महत्वकांक्षी योजना होने के कारण वे कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं।
पोषाहार के साथ दूध की समस्या
शिक्षक संगठन अबतक शिक्षकों को पोषाहार कार्य से मुक्त करने की मांग कर रहे हैं लेकिन अब पोषाहार के साथ प्रतिदिन अन्नपूर्णा दूध का वितरण भी शिक्षकों के जिम्मे आ गया है। शिक्षक नेता किशोर पुरोहित का कहना है कि अन्नपूर्णा दूध योजना मुख्यमंत्री की महत्वकांक्षी योजना है। दूध से बच्चों का शारीरिक विकास भी होगा लेकिन यह कार्य किसी एजेंसी के माध्यम से कराया जाना चाहिए, ताकि दूध की एक समान गुणवत्ता रहे और शिक्षक को भी पढ़ाने का समय मिले।
आंगनबाड़ी में भी सप्ताह में तीन दिन दूध
स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी केन्द्रों पर तीन से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती, धात्री महिलाओं, किशोरी बालिकाओं को सप्ताह में तीन दिन दूध पिलाया जाएगा। हालांकि आंगनबाड़ी केन्द्रों पर इस योजना की सफल क्रियान्विति हो सकती है, क्योंकि कार्यकर्ता ऐसे आयोजन से लगातार जुड़ी रहती है।

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