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बीकानेर समाचार

झंवर अध्यक्ष और लोहिया बने महामंत्री, माहेश्वरी समाज में खुशी की लहर

बीकानेर। उत्तरी राजस्थान प्रादेशिक माहेश्वरी युवा संगठन की नई कार्यकारिणी घोषित हो गई है। कार्यकारिणी में अब तक महामंत्री का पद संभाल रहे नोखा के युवा सुनील झंवर अध्यक्ष और बीकानेर के किशन लोहिया को महामंत्री बने हैं। झंवर और लोहिया के मनोनयन पर बीकानेर सहित प्रवासी माहेश्वरी समाज के लोगों ने खुशी जताई है।kishan lohia

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भाजपा नेता द्घारका प्रसाद तिवाड़ी की सातवीं पुण्यतिथि नौ सितंबर को

बीकानेर। भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष रहे और करणी औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष रहे द्घारका प्रसाद तिवाड़ी की सातवीं पुण्यतिथि नौ सितंबर को है। एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश कोठारी ने बताया कि इस दौरान करणी औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन भवन में सुबह १० बजे श्रद्घांजलि सभा आयोजित होगी। एसोसिएशन के सचिव विजय कुमार जैन ने बताया कि बीकानेर के औद्योगिक विकास को लेकर तिवाड़ी ने बहुत संघर्ष किया था और उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।

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पुष्करणा गौरव सम्मान 8 सितम्बर को

बीकानेर। पुष्करणा समाज के होनहार विद्यार्थियों को 8 सितम्बर को धरणीधर रंगमंच पर 'पुष्करणा गौरवÓ के रूप में सम्मानित किया जाएगा। अब तक करीब सौ विद्यार्थी आवेदन कर चुके हैं, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर अब छह सितम्बर कर दी गई है।
पुष्करणा ब्राह्मण समाज संस्थान (मुंबई) की अध्यक्ष सेणुका हर्ष और पुष्करणा वेलफेयर फाउंडेशन के गोविन्द जोशी ने बताया कि योग्यता में भी शिथिलन किया गया है। अब दसवीं और बारहवीं कक्षा में 80 फीसदी, स्नातक और स्नातकोतर में ६५ फीसदी, नीट, आईआईटी, सीए, आरजेएस, आरएएस में चयन व अन्य शैक्षिक योग्यताओं के लिए पुरस्कार दिए जा रहे हैं। विद्यार्थियों को ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दी गई है। पुष्करणा प्रोफेशनल सोसायटी के संयोजक अमित व्यास ने बताया कि सभी वर्गों में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छह विद्यार्थियों को रमेश इंग्लिश स्कूल की ओर से चांदी के सिक्के दिए जाएंगे। कार्यक्रम शाम पांच बजे शुरू होगा और 8.30बजे संपन्न होगा।

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पारीक समाज करेगा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का भव्य स्वागत

बीकानेर। राजस्थान गौरव यात्रा को लेकर बीकानेर आ रही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का
बीकानेर पारीक समाज स्वागत करेगा। इस बारे में पारीक समाज के अध्यक्ष भंवरलाल
व्यास के अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह निर्णय किया गया। 
बैठक में भाजपा नेता पंडित लक्ष्मीनारायण पारीक, संपत पारीक, चंचल व्यास,
भाजपा नेता दीपक पारीक, पंकज पारीक समेत अनेक लोग मौजूद रहे। बैठक में तय किया गया कि सादुल
सिंह सर्किल के आगे शांति टावर के पास मुख्यमंत्री के रोड शो के दौरान मुख्यमंत्री
का फूलों की माला और चुनरी ओढ़ाकर स्वागत किया जाएगा  साथ ही
राजनीतिक रूप से पारीक समाज को प्रतिनिधित्व देने
की भी मांग की जाएगी। पीले चावल से दिया जाएगा बैठक में मौजूद
छः न्याति महिला महासंघ प्रकोष्ठ की अध्यक्षा आशा
पारीक ने बताया कि मुख्यमंत्री कि गौरव यात्रा को लेकर समाज
की ओर से किए जाने वाले स्वागत कार्यक्रम को लेकर 5 सितंबर
को पीले चावल देकर न्यौता दिया जाएगा।
 
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डिजिटल रथ के शुरूआत में ही हाथापाई

बीकानेर। भाजपा आईटी सेल की ओर से निकाले जा रहे डिजिटल रथ के शुरूआत के मौके छंटनी में निकाले गए ईसीबी के अशैक्षणिक कर्मचारियों और भाजपाईयों में हाथापाई हो गई। नत्थूसर गेट के पास बड़ा गणेशजी मंदिर पर शहर में रवाना होने से पहले रथ की पूजा अर्चना के चल रहे कार्यक्रम के बीच वहां मौजूद भाजपा नेताओं से मिलने पहुंचे कर्मचारियों और वहां खड़े भाजपाईयों में हाथापाई हो गई। ईसीबी के पूर्व कर्मचारी शशिशेखर ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर मारपीट का आरोप लगाया है।

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आवारा सांड के मुद्दे को लेकर भाजपा पाषदों ने किया आयुक्त का घेराव

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर

शहर की दो स्वंयसेवी संस्थाओं की ओर से पकड़े जा रहे आवारा सांड के लिए जगह नहीं होने के चलते सांड पकडऩे ेेेके काम में आई रूकावट को लेकर भाजपा पार्षदों ने बुधवार को आयुक्त डॉ. प्रदीप गंवाडे का घेराव किया। इस दौरान भाजपा पार्षदों ने नगर निगम की कार्यशैली को ढीला बताते हुए कहा कि नगर निगम के स्तर पर काम नहीं होने पर पार्षद आगे आए लेकिन अब निगम असहयोग दिखा रहा है। पार्षद ताहिर हुसैन ने आयुक्त से कहा कि संस्थाओं के सहयोग से खुद पार्षद सांड को पकड़ रहे हैं लेकिन गौशाला संचालक सांड को रखने के लिए तैयार नहीं है और नगर निगम इस स्तर पर कुछ भी काम नहीं कर पा रही है। पार्षद राजेन्द्र शर्मा ने तो सीधे सीधे महापौर पर मामले में रूचि नहीं दिखाने का आरोप लगाते हुए आयुक्त को कहा कि अगर अब भी हालात नहीं सुधरे तो पार्षद चुप नहीं बैठेंगे। पार्षद राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि काम करने के बाद भी पार्षदों के खिलाफ नकारात्मक माहौल तैयार किया जा रहा है। लेकिन अब भी हालात जस के तस है।
इस दौरान आयुक्त डॉ. प्रदीप गंवाडे ने पार्षदों को आश्वस्त किया कि स्वंयसेवी संस्थाओं की ओर से किए जा रहे काम में आ रही दिक्कत को जल्द दूर किया जाएगा। इस दौरान उपमहापौर अशोक आचार्य, पार्षद भगवती गौड़, ताहिर हुसैन, आनंद सोनी, शंभू गहलोत, मधुसुदन शर्मा मौजूद रहे। इस दौरान नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष जावेद पडि़हार और निर्दलीय पार्षद आदर्श भी वहां पहले से मौजूद नजर आए।

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शहर की समस्याओं को लेकर पार्षद प्रतिनिधि ने दी आत्मदाह की चेतावनी

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर

शहर की विभिन्न समस्याओं को लेकर बुधवार को वार्ड नं. ५१ पार्षद प्रतिनिधि पंकज गहलोत ने बुधवार को नगर निगम में धरना शुरू किया। धरने के दौरान पार्षद प्रतिनिधि पंकज गहलोत ने बताया कि शहर में जगह-जगह सीवर लाइन जाम पड़ी है, जिससे आए दिन गंदा पानी एकत्रित सड़कों पर फैल जाता है। सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे होने के कारण गंदे पानी के एकत्रित होने से कई बार हादसे की स्थिति बन जाती है। शहर के मुख्य मार्गों से लेकर गलियारों में रोशनी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण रात्रिकालीन में घरों से निकलना दूभर सा हो गया है। ऐसे में आये दिन राहगीरों को दुर्घटना का शिकार होना पड़ रहा है। पंकज गहलोत ने बताया कि शहर की समस्याओं को लेकर महापौर व निगम अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। जिसके कारण मजबूर होकर यह कदम उठाना पड़ा है।
गहलोत ने कहा कि वे हर रोज निगम कार्यालय खुलने के साथ ही धरना शुरू करेंगे और कार्यालय समय तक धरने पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि अगर पांच सितंबर तक उनकी मांगों को नहीं माना गया तो ६ सितंबर को आत्मदाह करेंगे।

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आरटीई प्रवेश वाले बच्चों के 'आधार' की जांच

डीएनआर रिपोर्टर.बीकानेर

अगर आपने बच्चे का प्रवेश शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी विद्यालय की निशुल्क सीट पर करवाया है तो जल्दी ही आपके बच्चे के आधार कार्ड की जांच होने वाली है। अगर आधार कार्ड में कोई भी गड़बड़ी मिली तो न सिर्फ आपको बच्चे की फीस भरनी पड़ सकती है बल्कि विद्यालय को भी उन बच्चों के शुल्क से वंचित होना पड़ेगा।
दरअसल, शिक्षा विभाग ने गत शिक्षा सत्र में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों का भुगतान निजी विद्यालयों को नहीं किया है। गत सत्र की एकमात्र किश्त का भुगतान हुआ है। शेष किश्त लेने के लिए स्कूल संचालकों ने विभाग में संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि पहले आधार कार्ड की जांच होगी।
अगर यह जांच सिर्फ लिपिकीय त्रुटि की जांच के रूप में हो रही है तो ज्यादा परेशानी नहीं है लेकिन अगर आधार कार्ड के रूप में अभिभावक के आय का ब्यौरा आयकर विभाग के रिटर्न के आधार पर किया जाता है तो समस्या बढ़ सकती है। फर्जी आय प्रमाण पत्र पेश करने और आयकर विभाग को विभिन्न कारणों से अधिक आय का विवरण देने वाले अभिभावकों पर गाज गिर सकती है। ऐसे अभिभावकों पर फर्जीवाड़ा करने का मामला भी बन सकता है।
हालांकि अब तक शिक्षा विभाग ने ऐसे कोई संकेत नहीं दिए हैं कि वो आय का ब्यौरा जांच रहा है या नहीं? आशंका जताई जा रही है कि आधार कार्ड की जांच में सभी तथ्य स्पष्ट हो जाएंगे।
नाम में है अंतर
स्कूल में दर्ज बच्चों के नाम और आधार कार्ड के नाम में भारी अंतर के मामले भी सामने आएंगे। दरअसल, आधार कार्ड बनाने वाली निजी फर्मों के लोगों ने व्याकरण संबंधित अनेक त्रुटियां की है। अब नाम सही नहीं होने पर इसका खामियाजा स्कूल संचालकों को भुगतना पड़ेगा। निजी शिक्षण संस्थाओं के संगठन के अध्यक्ष कोडाराम भादू का कहना है कि इस संबंध में निदेशक से जल्द ही मुलाकात की जाएगी।

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बीकानेर - इलाज की जरूरत है दवा बेचने वालों को

डीएनआर रिपोर्टर.बीकानेर

बीकानेर सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार की स्थापना इसलिए की गई थी कि आम आदमी को सस्ती सामग्री मिल जाए और सहकारिता के मूल उद्देश्य की पूर्ति भी होती रहे। इसके विपरीत होलसेल भंडार एक बीमार संस्था के रूप में अपनी पहचान बनाता जा रहा है। कुप्रबंधन का शिकार भंडार कभी हर महीने १८ से २० लाख रुपए की दवाएं बेच लेता था लेकिन आज बदले हालात में यह आंकड़ा महज १०-१२ लाख रुपए तक पहुंच गया है।
बंद पड़ी है दुकानें
हालात यह है कि भंडार की कुछ दुकानें बंद पड़ी है और इसे पुन: शुरू करने की कोर्ई योजना नहीं है। शहर के लोगों को अस्पताल में सस्ती दवा मिल रही है लेकिन वहां उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में निजी दुकानों पर जेब कटवाने के लिए ही जाना पड़ता है।

बिना लाइसेंस दुकान

कई बार तो यह भी देखने में आया कि भंडार ने दवा की दुकान चलाने के लिए जिन लोगों को म्मिा सौंपा, उनके पास लाइसैंस तक नहीं था। ऐसे ेमें नोटिस देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहा है।

बंद दवा दुकानें

भुजिया बाजार, जिला अस्पताल के पास, नोखा, खाजूवाला, श्रीडूंगरगढ़ में दुकानें हैं लेकिन बंद पड़ी है।

माल पड़ा है काम नहीं

कुछ दवा दुकानों में भंडार के पास दवा सहित अन्य सामान तो पड़ा है लेकिन वहां बेचने वाला नहीं है।

सेंट्रल स्टोर नाकाम
भंडार ने सेंट्रल स्टोर तो बनाया है लेकिन वहां पर किसी तरह का नियंत्रण ही नहीं है।

स्टाफ का अभाव

स्टाफ के अभाव में विभाग के पास मानव श्रम के लिए कोई ठोस नीति नहीं है।

दवा कंपनी बनाती हैं जबर्दस्त दबाव

अव्यवस्थित प्रबंधन व्यवस्था के चलते दवा कंपनियों को समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा। ऐसे में दवा कंपनियां माल देने से पहले भंडार पर जबर्दस्त दबाव बनाती है। ऐसे में कई बार प्रशासनिक निर्णय तक बदलने पड़ जाते हैं। भंडार को आर्थिक नुकसान होता है, वो अलग है।

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बीकानेर राजनीति - जातीय आधार पर बंटा है श्रीडूंगरगढ़

अनुराग हर्ष. बीकानेर

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कभी चूरू का हिस्सा रहा श्रीडूंगरगढ़ एक लंबे आंदोलन के बाद बीकानेर जिले का हिस्सा बना। दशकों पुराने इस आंदोलन के वक्त इस क्षेत्र ने जो एकता दिखाई थी, वो वापस नजर नहीं आई। अपने छोटे-बड़े काम के लिए बीकानेर प्रशासन तक पहुंच आसान होने के अलावा श्रीडूंगरगढ़ को बीकानेर का हिस्सा बनने से कोई खास लाभ नहीं हुआ। सरकारी कर्मचारी भले ही खुश हो लेकिन आम श्रीडूंगरगढ़ निवासी अपने कस्बे के विकसित नहीं होने से आज भी दुखी नजर आता है। जातीय आधार पर बंटे श्रीडूंगरगढ़ से वर्तमान में किसनाराम नाई विधायक है और इससे पहले कांग्रेस के मंगलाराम गोदारा विधायक रहे हैं। दोनों फिर दावेदार हैं और दोनों के योगदान की गणना जनता शुरू कर चुकी है।

पूरी तरह खेती पर आधारित यह विधानसभा क्षेत्र बीकानेर में सर्वाधिक भूमिगत जल का दोहन करने वाला है। यहां मूंगफली से लेकर अन्य खेती का बड़ा हिस्सा भूमिगत पानी से ही सींचा जाता है। ऐसे में यहां की राजनीति को भी यह किसान ही प्रभावित करते हैं। नहरी क्षेत्र में जहां पानी की मांग को लेकर किसान आंदोलन करते हैं, ठीक वैसे ही खाजूवाला में बिजली की मांग को लेकर आंदोलन आम बात है। यहां किसानों को खेती के लिए पानी नहीं बल्कि बिजली चाहिए ताकि खेत के पम्प चल सकें। पूरी तरह से डार्क जोन घोषित हो चुके श्रीडूंगरगढ़ में किसानों राजनीति मंशा बदलते हैं, इस बार परिणाम चौंकाने वाले होंगे।

क्या मिला श्रीडूंगरगढ़ को

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श्रीडूंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र को पिछले पांच वर्षों में कुछ ग्रीड सब स्टेशनों के अलावा कुछ खास नहीं मिला है। एक सरकारी महाविद्यालय खुला, विद्यार्थियों को प्रवेश भी मिला लेकिन अब तक यहां व्याख्याता व प्राचार्य नहीं होने से शैक्षिक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। हालात यह है कि कॉलेज नाम मात्र का रह गया।

पांच साल में यह नहीं मिला

श्रीडूंगरगढ़ में सीवरेज की समस्या का निपटारा करने का यकीन विधायक सहित समूचे प्रशासन ने दिलाया। कुछ हद तक काम भी हुआ लेकिन बाद में यह कागजों में सिमट कर रह गया। श्रीडूंगरगढ़ के बाशिन्दों के पास गिनाने के लिए कोई काम नहीं है। आज भी सड़कें वैसे ही टूटी हुई है, मुख्य मार्ग तक मिट्टी से अटा पड़ा है। मौहल्लों की हालत बदतर है।

कहां किसका असर

पिछले विधानसभा चुनाव में श्रीडूंगरगढ़ तहसील के साथ ही 55 गांवों में भाजपा का प्रभाव रहा, वहीं 47 गांवों में कांग्रेस आगे रही। कुछ गांवों में वामपंथी उम्मीदवार ने सर्वाधिक वोट लिए।

125 गांवों में फैला है क्षेत्र

श्रीडूंगरगढ़ 125 गांवों वाला विधानसभा क्षेत्र है। यहां कस्बाई क्षेत्र सिर्फ अकेला श्रीडूंगरगढ़ है। शेष सभी गांव है। ऐसे में इस विधानसभा क्षेत्र में चुनाव लडऩा आसान नहीं है। मतदाताओं तक पहुंचने के लिए प्रत्याशियों को पूरा जोर लगाना पड़ता है। आमतौर पर अधिकांश प्रत्याशी पूरे चुनाव प्रचार के दौरान एक बार ही सभी गांवों में पहुंच पाते हैं। वैसे भी यहां गांव एक दिशा में रहकर ही मतदान करते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे साबित करते हैं कि गांव एकमत होकर मतदान करते हैं।

त्रिकोणीय मुकाबला, निर्णय दो दलों में

बीकानेर जिले में श्रीडूंगरगढ़ और लूणकरनसर ही ऐसे क्षेत्र हैं, जहां कुछ हद तक वामपंथी संघर्ष करते नजर आते हैं। श्रीडूंगरगढ़ में इसका असर अधिक है। दरअसल, किसानों से जुड़े इस विधानसभा क्षेत्र में बिजली अंादोलन का झंडा वामपंथी नेता ही उठाते हैं। काफी हद तक वो अपनी मांगे मनवाने में सफल भी होते हैं। ऐसे में एक तबका वामपंथियों के साथ है। सालभर वामपंथियों के साथ संघर्ष करने के बाद भी चुनाव के वक्त वो ही किसान भाजपा-कांग्रेस में बंट जाता है।

फिर चुनाव लडऩा चाहते हैं किसनाराम

भाजपा अगर उम्र के आधार पर टिकट काटती है तो बीकानेर जिले में बीकानेर पश्चिम और श्रीडूंगरगढ़ में प्रत्याशी बदलना पड़ सकता है। इसके बाद भी यहां किसनाराम नाई उम्मीद रखते हैं कि अंतिम क्षण में जिताऊ उम्मीदवार के रूप में उनका ही नाम आएगा। पिछले दिनों पुत्र की दुर्घटना में मौत के बाद शोकमग्न किसनाराम राजनीतिक रूप से अभी गतिविधियों में शामिल नहीं हो रहे हैं लेकिन उनके नजदीकी बताते हैं कि 'नेताजीÓ फिर टिकट लेने की इच्छा रखते हैं।

गुटबाजी में पार्टियां

श्रीडूंगरगढ़ में राजनीतिक पार्टियां कांग्रेस और भाजपा के साथ माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी भी है। यहां सीधा मुकाबला भाजपा के किसानाराम नाई और कांग्रेस के मंगलाराम गोदारा के बीच होता है। आमतौर पर चुनाव को जाट और नॉन जाट में बांट कर लड़ा जाता है। वैसे जातीय आधार पर यहां समीकरण बदलना टिकट वितरण पर निर्भर है।

नए दावेदार लगा सकते हैं नैया पार

श्रीडूंगरगढ़ में अर्से से एक ही नेता चुनाव लड़ रहे हैं। यहां तक वामपंथियों की तरफ से भी गिरधारी महिया ही एकमात्र उम्मीदवार है। एकबार फिर कांग्रेस से मंगलाराम गोदारा का नाम सबसे आगे हैं, वहीं रामेश्वर डूडी का नाम भी चल रहा है। इसके अलावा हरिराम बाना व बिशनाराम सियाग का भी नाम है। भाजपा से किसनराम के अलावा तोलाराम जाखड़, छैलू सिंह शेखावत, ताराचंद सारस्वत, श्रीराम भादू का नाम दौड़ में है।

किसनाराम नाई : 78278 वोट
मंगलाराम गोदारा : 62076 वोट
जीत का अंतर : 16202 वोट

pillars of inspiration

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