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बीकानेर जिला परिषद - उधेड़ी छत की नहीं ली सुध फिर टपकने लगी लाखों खर्च, फिर भी सुविधा नहीं

बीकानेर। जिला परिषद कार्यालय परिसर में सुधारने की नियत से छत को उखाड़ दिया गया। छत उखाडऩे के बाद उसकी सुध नहीं ली गई। जिसके कारण बारिश के दिनों पानी टपकने से कम्प्यूटर सहित आवश्यक मशीनरी भीगने से खराब हो गई। इसके बावजूद अधिकारियों को इसकी परवाह तक नहीं है। समय रहते उधेड़ी छत की यदि सुध नहीं ली गई तो पानी टपकने से बड़े नुकसान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
जिला परिषद कार्यालय परिसर में दूसरी मंजिल स्थित जिला प्रमुख के कक्ष तथा संचालित हो रहे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना (मनरेगा) कार्यालय की छत को सुधारने की नियत से करीबन तीन माह पूर्व छत्त पर लगी टाइल्स को उखाड़ दिया गया था। टाइल्स उखाडऩे के तीन माह बाद भी परिषद प्रशासन ने इसकी सुध नहीं ली है। इस छत का आलम ये है कि टाइल्स उखाडऩे के बाद टूटी हुई टाइल्स को तो बाहर डाल दिया गया। किंतु उसके नीचे के मलबे की छत पर जगह-जगह ढेरियां बनी हुई है। बारिश के दौरान छत के पानी की समुचित निकासी नहीं होने के कारण कमजोर होती छत्त का पानी रिस-रिस कर जिला प्रमुख चैम्बर तथा मनरेगा कार्यालय में टपकने लगा है।
पिछली बारिश में हुआ था नुकसान
पिछले दिनों हुई बारिश में छत से पानी टपकने के बावजूद जिला परिषद प्रशासन इसके प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहा है। पिछली बारिश में मनरेगा कार्यालय की छत से जगह-जगह से पानी टपकने के कारण इन्टरनेट सेवा, कम्प्यूटर, कार्यालय की टेबलें, कुर्सियां, टेबलों पर रखी आवश्यक फाइलें भीग गई थी। जानकारों की माने तो 15 जुलाई से फिर से एक बार मानसून सक्रिय होने की संभावना है। ऐसे में उधड़ी छत तथा उस पर बनी मलबे की ढेरियों की वजह से समुचित पानी की निकासी के अभाव में बड़ा नुकसान भी हो सकता है। यदि कार्यालय समय में बारिश हुई तो फिर भी मशीनरी व फाइलों को बचाया जा सकता है। किंतु यदि बारिश अवकाश के दिन तथा शाम के बाद बारिश हुई तो मनरेगा कार्यालय की आवश्यक मशीनरी, डॉटा तथा फाइलें भीग जाएगी।
पर्याप्त बजट, फिर भी काम नहीं
वित्त आयोग पंचम के तहत आवंटित होने वाली राशि से जिला परिषद कार्यालय में भी कर्य करवाए जाने की स्वीकृति मिलने के बाद जिला प्रमुख ने जिला परिषद कार्यालय के जीर्णोद्धार कार्यों के लिए करीबन 90 लाख रूपयों की राशि स्वीकृत की थी। जिसके तहत एकबारगी जोरशोर से काम भी शुरू हो गया। किंतु बाद में यह मामला उठने पर परिषद ने जारी स्वीकृतियों में कटौती भी की थी। जिसके कारण निर्माण कार्य अटक गए थे। जिसके तहत ही मनरेगा कार्यालय व प्रमुख चैम्बर की छत को उधेड़ा गया था। हाल फिलहाल परिषद कार्यालय में कामकाज पूरी तरह से ठप पड़े है।
अधिकारियों की संवेदनहीनता!
लाखों रूपए खर्च करने के बावजूद भी जिला परिषद कार्यालय में सावर्जनिक शौचालय की सुविधा महिला कार्मिकों, महिला जनप्रतिनिधियों तथा समय-समय पर होने वाली भर्तियों के दौरान महिला संभागियों को नहीं मिल पा रही है। हाल ही में जिला परिषद कार्यालय में रीट-2018 तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती को लेकर सम्पन्न हुई तीन दिवसीय काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान जिला स्तरीय अधिकारियों की संवेदनहीनता देखने को मिली। दिलचस्प बात तो ये है कि काउंसलिंग के दौरान मौके पर दो-दो जिला स्तरीय अधिकारियों के होने के बावजूद काउंसलिंग के लिए बीकानेर सहित विभिन्न जिलों से पहुंची महिला संभागियों को लघु शंका निवृति के लिए परेशान होना पड़ा। जबकि परिषद में हाल ही में लाखों की लागत से शौचालय बनाया गया है, किंतु आवश्यक कार्य अभी भी शेष होने के कारण इन पर ताला लटका रहा। दो-दो जिला स्तरीय अधिकारी होने के बावजूद काउंसलिंग के लिए पहुंची महिला संभागियों के लिए निगम में उपलब्ध चल शौचालय तक की व्यवस्था करना उचित नहीं समझा।
काम समय पर शुरू नहीं हुआ
' कार्य में विलंब हुआ है। ठेकेदार की वजह से काम समय पर पूरा नहीं हो पाया है। परिषद कार्यालय में ठप निर्माण कार्यों को जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा।Ó
अजीत सिंह राजावत, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद

DNR Reporter

DNR desk

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