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शहर हो फिर गांव यह भी बड़ा मुद्दा

बीकानेर। शहर हो या फिर गांव। बारिश के दिनों में दोनेां ही स्थानों पर जलभराव की समस्या रहती है। आजादी के सात दशक बीत जाने के बावजूद सरकारें चिह्नित इस समस्या का कोई समुचित हल नहीं निकाल पाई। जिसके कारण हर बार बारिश में लोगों को जल भराव जैसी समस्या से रूबरू होना पड़ता है। यह समस्या मानव जीवन से भी जुड़ी है। कई बार तो बारिश के दिनों में जिले के कई गांवों में तो बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो जाते है। असंख्य मकान ध्वस्त हो जाते है। इसके बावजूद समस्या आज भी जहां थी। वहीं पर बनी हुई है। किसी भी सरकार या राजनीतिक दल ने इस समस्या के समाधान के लिए अभी तक आगे आई है और न ही पहल की है। दिलचस्प बात तो ये है कि हर वर्ष गांवों में अरबों रूपए के कार्य हो रहे है। किंतु आम लोगों की जान तथा माल की सुरक्षा की दृष्टि से जुड़ी इस समस्या के समाधान के लिए कोई भी आगे नहीं आ रहा है। बारिश के दिनों कई बार तो जलकटाव इतना अधिक हो जाता है कि बरसाती नली, नालों का रूख तक बदल जाता है और गांव पानी से लबालब भर जाते है। जिसके कारण लोगों को खासा परेशानी होती है। स्थानीय जनप्रतिनिधि भी निर्माण कार्यों में तो दिलचस्पी ले रहे है, किंतु गांव की बसावट से लेकर आज तक चली आ रही इस समस्या के स्थाई समाधान करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है। जिसके कारण लोगों में आक्रोश भी है। कमोबेश यही स्थिति शहर पर लागू होती है। लम्बे-चौड़े संसाधन होने के बावजूद जल भराव जैसी समस्या से प्रशासन नहीं निपट पा रहा है।

DNR Reporter

DNR desk

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