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नीरा राडिया को ले जा रहे हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिग

चमोली। देहरादून से बदरीनाथ जा रहीं उद्योगपति नीरा राडिया के हेलीकॉप्टर को मौसम खराब होने के कारण गोपेश्वर के खेल मैदान में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। हेरीटेज कंपनी के इस हेलीकॉप्टर में नीरा राडिया समेत दिल्ली के छह यात्री सवार थे। पुलिस के अनुसार हेरीटेज ऐविएशन का हेलीकॉप्टर यात्रियों को लेकर बदरीनाथ जा रहा था। इस दौरान गोपेश्वर के आसपास तेज बारिश के चलते इस इमरजेंसी लैंडिग करनी पड़ी। थानाध्यक्ष कुंदनराम ने बताया कि आधा घंटा रुकने के बाद यह हेलीकॉप्टर बदरीनाथ के बजाय केदारनाथ के लिए रवाना हुआ है।

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श्रीनगर में आतंकियों ने चाचा-भतीजा की हत्या की

श्रीनगर। बांडीपोर के हाजिन में आतंकियों ने शनिवार तड़के चाचा-भतीजे का अपहरण कर उनको मौत के घाट उतार दिया। दोहरे हत्याकांड के लिए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। सुरक्षाबलों ने आतंकियों की तलाश में अभियान चलाया, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला।

शुक्रवार आधी रात के बाद स्वचालित हथियारों से लैस आतंकियों का दल हाजिन के शाहगुंड इलाके में घुसा। आतंकियों ने पहले गुलशन मोहल्ले में रहने वाले गुलाम हसन डार उर्फ हसन रस्सा को और फिर बशीर अहमद डार नामक युवक को उनके घरों से अगवा किया।

दोनों ही रिश्ते में चाचा-भतीजा हैं और पेशे से चालक हैं। बताया जाता है कि दोनों को छुड़ाने के लिए उनके परिजनों ने आतंकियों के आगे कई बार हाथ-पांव जोड़े, लेकिन वे नहीं माने।

आतंकियों ने कहा कि दोनों के वाहन में कहीं जाना चाहते हैं, इसलिए साथ ले जा रहे हैं। जल्द छोड़ दिया जाएगा। इसके बाद आतंकी हसन डार और बशीर अहमद को अपने साथ अगवा कर ले गए।

करीब दो घंटे बाद तड़के रहीम डार मस्जिद के पास गोलियां चलने की आवाज सुनी। यह जगह गुलशन मोहल्ले से एक किलोमीटर की दूरी पर है।

निकटवर्ती शिविर से सुरक्षाबल तुरंत मौके पर पहुंचे तब तक आसपास रहने वाले लोग भी वहां पहुंच गए थे। उन्होंने गुलाम हसन और बशीर के गोलियों से छलनी शव पड़े देखे।

पुलिस ने दोनों शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिए। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि यह वारदात लश्कर के आतंकियों ने अंजाम दी है।

इन्हीं आतंकियों ने बीते माह हाजिन में दो युवकों मुंतजिर और मंजूर को अगवा कर मौत के घाट उतारा था। इन वारदातों में लश्कर पांच सदस्यीय माड्यूल का हाथ माना जाता है।

इसमें दो स्थानीय और तीन विदेश आतंकी हैं। गौरतलब है कि शुक्रवार को आतंकियों ने सूमो चालक की हत्या कर दी थी।

लंबित मामले निपटाने के लिए तड़के साढ़े तीन तक सुनवाई

मुंबई। बांबे हाई कोर्ट के जस्टिस शाहरुख जे कथावाला ने लंबित मुकदमों को निपटाने के लिए तड़के साढ़े तीन बजे तक सुनवाई कर एक मिसाल कायम कर दी है। शनिवार से हाई कोर्ट में गर्मी की छुट्टी पड़ रही है। शुक्रवार को सामान्य समय से हाई कोर्ट की कार्यवाही शुरू हुई।

शाम पांच बजे तक ज्यादातर अन्य जज अपने घर चले गए। लेकिन, जस्टिस कथावाला अगले दिन सुबह तीन बजकर 30 मिनट तक सुनवाई करते रहे। वे इस कोशिश में लगे रहे कि गर्मी की छुट्टियों से पहले महत्वपूर्ण और ज्यादा से ज्यादा मामलों का निपटारा कर दिया जाए। इस दौरान कई मामलों की सुनवाई के साथ-साथ उन्होंने याचिकाओं पर जरूरी निर्देश भी दिए।

जज के साथ मौजूद रहे एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि कोर्ट रूम वरिष्ठ वकीलों से खचाखच भरा हुआ था, जिनके मामलों की सुनवाई चल रही थी। इस दौरान तकरीबन 100 सिविल याचिकाओं पर तत्काल अंतरिम राहत की मांग की गई थी।

एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता प्रवीण समदानी ने कहा कि न्यायमूर्ति कथावाला उस समय भी उतने ही तरोताजा दिख रहे थे जैसा कि सुबह कार्यालय आने पर कोई लगता है। मेरा मामला सबसे अंत में सुने जाने वाले मामलों में शामिल था। तब भी उन्होंने धैर्यपूर्वक हमारी बात सुनी और आदेश पारित किया।

उनके स्टाफ के ही एक सदस्य ने बताया कि देर तक मामले की सुनवाई करने के बावजूद अगले दिन न्यायाधीश सुबह तय समय पर अपने कक्ष में लंबित मामलों को निपटाने के लिए पहुंच गए।

सामान्य दिनों में भी एक घंटा पहले आ जाते हैं सुनवाई करने जस्टिस कथावाला-

आमतौर पर दूसरे न्यायाधीशों के मुकाबले करीब एक घंटा पहले सुबह 10 बजे अदालती कार्यवाही शुरू कर देते हैं और पांच बजे के बाद भी सुनवाई करते रहते हैं। उस समय तक अदालत बंद हो चुका होता है। यह पहला मौका था जब जस्टिस कथावाला ने इतनी देर तक मामलों की सुनवाई की। हालांकि, दो हफ्ते पहले भी वह अपने चैंबर में आधी रात तक मामलों को सुनते रहे थे।

उत्‍तरप्रदेश में धूल भरी आंधी, बारिश की चेतावनी, मौसम विभाग ने किया अलर्ट

लखनऊ। पश्चिम से पूरब तक पिछले कुछ दिनों के दौरान तबाही मचाने वाला मौसम अभी राहत देने के मूड में नहीं है। अगले दो-तीन दिनों तक इसका मिजाज बिगड़ा ही रहेगा। खासकर पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में।

इन क्षेत्रों के कई जिलों के लिए मौसम विभाग ने अलर्ट भी जारी किया है। मौसम केंद्र लखनऊ के प्रभारी निदेशक जेपी गुप्ता के अनुसार अगले 48 घंटों के दौरान पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के कुछ क्षेत्रों में तेज हवा और गरज के साथ बारिश हो सकती है।

इन क्षेत्रों में ओला वृष्टि संंभव

मौसम के अप्रत्याशित रवैये से गोरखपुर, बस्ती, मऊ, गाजीपुर, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, पीलीभीत, रामपुर, बरेली, बदायूं, अलीगढ़, एटा, महामाया नगर, मथुरा, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, मुरादाबाद, मेरठ, बिजनौर, मुजफ्फरनगर और बागपत जिले प्रभावित हो सकते हैं। बिहार, उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा से सटे इलाकों में मौसम अधिक अप्रत्याशित हो सकता है।

पश्चिमी उप्र में धूल भरी आंधी के साथ बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ और बागपत में धूल भरी आंधी के साथ बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

मौसम विभाग के निदेशक जेपी गुप्ता के मुताबिक पाकिस्तान के पास सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का राजधानी लखनऊ में कोई खास असर नहीं है। यहां मौसम अब साफ रहने के आसार हैं। पारे में बढ़़ोतरी के साथ गर्मी का असर भी बढ़ेगा, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के

सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ और बागपत में धूल भरी आंधी के साथ बारिश होने की संभावना है। अगले 48 घंटे तक मौसम ऐसा ही बने रहने के आसार हैं।

प्रदेश के अन्य जिलों में बादलों की आवाजाही के साथ हल्की बारिश के आसार जताए जा रहे हैं। प्रदेश में सबसे गर्म जिले झांसी और इटावा (41 डिग्री) रहे। वहीं दूसरे नंबर पर सबसे गर्म उरई और बनारस (39 डिग्री) रहे।

भारी बारिश वाले क्षेत्रों में फसलों, फलों और सब्जियों को क्षति

हालांकि अधिकांश क्षेत्रों में गेहूं की फसल कट चुकी है। गन्ना वाले क्षेत्र में जहां देर में बोआई होती है, वहीं पांच से 10 फीसद फसल या तो खेत में खड़ी है या कट कर पड़ी है। दोनों स्थितियों में किसानों को क्षति होगी।

गेहूं के दाने काले पड़ जाएंगे। फसल दो-तीन दिन तक पड़ी रही तो जमीन से संपर्क के नाते उनका अंकुरण भी हो सकता है। हरे चारे के लिए यह बारिश उपयोगी है। बारिश से मिली नमी के सहारे किसान खरीफ की तैयारियां भी शुरू कर सकते हैं।

उद्यान विभाग के पूर्व निदेशक डा. एसपी जोशी के अनुसार लता वर्ग की उन सब्जियों को क्षति पहुंचेंगी जहां खेत में पानी लगा हो। आम की फसल भी वहीं प्रभावित होगी जहां फल सीधे हवा के सामने पड़े होंगे।

डा.जोशी के अनुसार इस साल आम की फसल ठीक-ठाक है जिन क्षेत्रों में सिर्फ बारिश हुई है वहां फलों के लिए यह ठीक है।

बारिश के पानी से धुलने के कारण कीटों और रोगों का बहुत हद तक प्राकृतिक नियंत्रण हो जाता है। पत्ते धुल जाते हैं। इससे पौधों के भोजन बनाने की प्रक्रिया (फोटो सिंथेसिस) के साथ फलों की बढ़वार भी तेज हो जाती है।

किसानों की क्षतिपूर्ति के लिए टोल फ्री नंबर

सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमित किसानों को क्षतिपूर्ति के लिए टोल फ्री नंबर आवंटित किया है। सभी जिलों में संचालित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत ओलावृष्टि, जलभराव अथवा फसल कटाई के उपरांत (आगामी 14 दिनों तक खेत में रखी फसल को) बेमौसम चक्रवाती वर्षा, चक्रवात से क्षति की स्थिति में बीमित किसानों को आपदा के 48 घंटे के अंदर जिले की बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर व्यक्तिगत दावा करना जरूरी है।

अलग-अलग बीमा कंपनियों के लिए जिले आवंटित हैं। हर कंपनी का अलग-अलग टोल फ्री नंबर है। बरेली, भदोही, जालौन, खीरी, कुशीनगर, लखनऊ, महोबा, मैनपुरी, मेरठ, पीलीभीत, सिद्धार्थनगर और सुल्तानपुर के लिए बजाज कंपनी है जिसका टोल फ्री नंबर 18002095858 है।

बागपत, बाराबंकी, चित्रकूट, फीरोजाबाद, गौतमबुद्धनगर, गोंडा, हापुड़, झांसी, कौशाम्बी, मुजफ्फरनगर, संतकबीरनगर और श्रावस्ती के लिए न्यू इंडिया कंपनी है, जिसका नंबर 18002091415 है। अलीगढ़, अंबेडकरनगर, बहराइच, बलरामपुर, बस्ती, बुलंदशहर, चंदौली, फैजाबाद, गोरखपुर, कन्नौज, मीरजापुर, सोनभद्र, उन्नाव के लिए रिलायंस कंपनी है, जिसका नंबर 18002700462 है।

आगरा, अमेठी, औरैया, बलिया, बांदा, बिजनौर, देवरिया, फतेहपुर, कानपुर नगर, प्रतापगढ़, सहारनपुर, सम्भल, वाराणसी के लिए एसबीआइ कंपनी है, जिसका नंबर 18001232310 है। इलाहाबाद, अमरोहा, आजमगढ़, इटावा, गाजियाबाद, गाजीपुर, हरदोई, कानपुर देहात, महराजगंज, मथुरा, मुरादाबाद, रामपुर, शाहजहांपुर के लिए टाटा कंपनी ने टोल फ्री 18002667780 नंबर दिया है।

बदायूं एटा, फर्रुखाबाद, हमीरपुर, हाथरस, जौनपुर, कासगंज, ललितपुर, मऊ, रायबरेली, शामली, सीतापुर के लिए यूनीवर्सल सोमपो कंपनी ने 180030000088 टोल फ्री नंबर दिया है।

सरकारी प्रवक्ता ने कहा है कि बीमित किसान निर्धारित 48 घंटे के भीतर बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर अपनी फसल की क्षति की सूचना दे दे ताकि बीमा कंपनी द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर प्राथमिकता पर क्षतिपूर्ति का आकलन कर भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।

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