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शिक्षा (82)

मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर परोक्ष,प्रत्यक्ष रूप से तीन अखबारों का मालिक


मुजफ्फरपुर, 31 जुलाई :भाषा: बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एक बालिका गृह यौन शोषण मामले का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू में प्रकाशित होने वाले तीन अखबारों का मालिक भी है। उस पर इन अखबारों की कुछ प्रतियां छपवाकर उस पर बडाबडा सरकारी विज्ञापन पाने में कामयाब होने के आरोप हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ब्रजेश तीन अखबारों मुजफ्फरपुर से प्रकाशित एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र प्रात:कमल, पटना से प्रकाशित एक अंग्रेजी अखबार न्यूज नेक्स्ट और समस्तीपुर जिला से उर्दू में प्रकाशित एक अखबार हालात ए बिहार से प्रत्यक्ष या परोक्ष से जुडा हुआ है।
ब्रजेश को प्रात: कमल के विशेष संवाददाता के रूप में भी सूचीबद्ध किया गया है, उसके पुत्र राहुल आनंद न्यूज नेक्स्ट के संवाददाता और हलात-ए-बिहार के संवाददाता के रूप में एक शाईस्ता परवीन तथा संपादक के रूप में रामशंकर सिंह का नाम दर्शाया गया है।
ब्रजेश को पीआईबी और राज्य सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (आईपीआरडी) दोनों से मान्यता प्राप्त पत्रकार का दर्जा प्राप्त था, जो कि उनके खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद उनकी मान्यता दोनों जगहों से रद्द कर दी गई।
आईपीआरडी सूत्रों ने बताया कि उत्तर बिहार से जुडी परियोजनाओं का सरकारी विज्ञापन प्रात: कमल अखबार का प्रकाशन शुरू होने के समय से प्रकाशित हो रहा है।
मीडिया रिपोर्टों का दावा किया गया है कि ब्रजेश के स्वामित्व वाले हिंदी दैनिक की 300 से अधिक प्रतियां प्रकाशित नहीं होती हैं लेकिन प्रतिदिन इसके 60,862 प्रतियां बिक्री दिखाया गया था जिसके आधार पर उसे बिहार सरकार से प्रति वर्ष करीब 30 लाख रुपए के विज्ञापन मिलते थे।

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बीए और बीकॉम में व्यवसायिक कौशल की पढ़ाई शुरू करने पर विचार कर रही है सरकार : मंत्री

नई दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) सरकार ने आज कहा कि व्यवसायिक कौशल पर आधारित बीए, बीकॉम और बीएससी पाठ्यक्रम शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। लोकसभा में सुनील गायकवाड़ के प्रश्न के लिखित उत्तर में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा कि बीए(प्रोफेशनल), बीकॉम (प्रोफेशनल) और बीएससी(प्रोफेशनल) शुरू करने के संदर्भ में विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत बड़ी संख्या भारतीय युवाओं को लघुकालीन, उद्योग जगत की मांग के मुताबिक प्रशिक्षण दिया गया है।

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च्चों की पिक्चर बुक के रूप में प्रकाशित होगी बीटल्स की ऑल यू नीड इज लव

लॉस एंजिलिस , 20 जुलाई (भाषा) जॉन लेनन और पॉल मैक्कार्टनी के लिखे दो गीतों को बच्चों की एक पिक्चर बुक का रूप दिया जाएगा।
साइमन एंड शस्टर चिल्ड्रेंस पब्लिशिंग ने इस तरह की दो किताबों का प्रकाशन करने की घोषणा की है।
बीटल्स का हिट गीत ऑल यू नीड इज लव से श्रृंखला की शुरूआत की जाएगी और किताब में मार्क रोजेनथल द्वारा बनाई गई तस्वीरें शामिल की जाएंगी। यह किताब अगले साल जनवरी में आएगी।
प्रकाशन समूह की उपाध्यक्ष वलेरी गारफील्ड ने एक बयान में कहा , यह सदाबहार गीत इस समय कहीं ज्यादा प्रासंगिक है। हमें लगता है कि उम्मीद के बारे में लिखी गईं किताबें हमेशा पसंद की जाती हैं और जॉन लेनन एवं पॉल मैक्कार्टनी ने जो गाने लिखे हैं वे अभिभावकों एवं बच्चों के मन में गूंजते हैं जो दुनिया को उम्मीद तथा प्यार की नजर से देखना चाहते हैं।

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उच्चतम न्यायालय ने नीट छात्रों को कृपांक देने के मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश पर लगाई रोक

नई दिल्ली , 20 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने तमिल भाषा में नीट की परीक्षा देने वाले छात्रों को 196 कृपांक देने के मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के आदेश पर आज रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने सीबीएसई की याचिका पर उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने के साथ ही नोटिस जारी किया।
पीठ इस मामले को दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध करते हुए पक्षकारों से कहा कि वे इस स्थिति से निबटने के सुझाव दें। पीठ ने कहा , हम इस तरह से अंक नहीं दे सकते हैं।
पीठ ने टिप्पणी की कि ऐसा लगता है कि इस फैसले के बाद तमिल भाषा में परीक्षा देने वाले छात्र दूसरे छात्रों की तुलना में लाभ की स्थिति में है।।
उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने 10 जुलाई को सीबीएसई को आदेश दिया था कि नीट की परीक्षा में क्षेत्रीय भाषा का चयन करने वाले छात्रों को 49 प्रश्नों के तमिल में अनुवाद में गलतियों के सिलसिले में प्रत्एक सवाल के लिए चार अंक के हिसाब से 196 अंक प्रदान किए जाएं।

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गुडग़ांव में छात्र की हत्य का मामला: न्यायालय ने किशोर की जमानत याचिका खारिज की

नई दिल्ली , 20 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने गुडग़ांव में एक निजी स्कूल में सात वर्षीय छात्र की हत्या के आरोपी किशोर की जमानत याचिका आज खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा की पीठ ने जमानत याचिका खारिज की। किशोर ने इस आधार पर जमानत का अनुरोध किया था कि जांच एजेन्सी ने 60 दिन के भीतर आरोप पत्र दाखिल नहीं किया था।
पीठ ने कहा कि यह भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत गंभीर अपराध का मामला है और आरोप पत्र दाखिल करने की अवधि 60 दिन नहीं बल्कि 90 दिन थी।
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने छह जून को 16 वर्षीय इस छात्र की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इस पर पिछले सल सितंबर में निजी स्कूल में सात वर्षीय छात्र की हत्या करने का आरोप है।
उच्च न्यायालय ने आरोपी की इस दलील को भी ठुकरा दिया था कि चूंकि केन्द्रीय जांच ब्यूरो 60 दिन के भीतर अपनी जांच पूरीर करने में विफल रहा है , इसलिए वह जमानत का हकदार है।
आरोपी ने उच्च न्यायालय में सत्र अदालत के पांच फरवरी के आदेश को चुनौती दी थी। सत्र अदालत ने भी उसे जमानत देने से इंकार कर दिया था।
सत्र अदालत ने 21 मई को कहा था कि 16 वर्षीय इस किशोर पर हत्या के मामले में वयस्क की तरह ही मुकदमा चलेगा। अदालत ने किशोर न्याय बोर्ड के फैसले को बरकरार रखा था जिसने सारे तथ्यों और पहलुओं पर विचार के बाद कहा था कि आरोपी शारीरिक और मानसिक रूप से अपराध करने में सक्षम है ओर इसमें इस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।
आरोपी ने किशोर न्याय बोर्ड के पिछले साल 20 दिसंबर के फैसले को चुनौती दी थी जिसने कहा था कि किशोर पर वयस्क की तरह ही मुकदमा चलेगा।
हत्या का शिकार हुए सात वर्षीय छात्र का शव भोंडसी इलाके में स्थित एक प्राइवेट स्कूल के शौचालय में मिला था।
इस मामले में अदालत ने अपराध का शिकार बच्चे , आरोपी और स्कूल का नाम इस्तेमाल करने से मीडिया को रोक दिया था। अब इस मामले में पीड़ित को प्रिंस , आरोपी को भोलू और स्कूल को विद्यालय कहा जा रहा है।
जांच ब्यूरो ने अदालत में दायर आरोप पत्र में कहा था कि इस छात्र ने परीक्षा और अभिभावक - शिक्षक बैठक स्थगित कराने के इरादे से ही पिछले साल आठ सितंबर को सात वर्षीय छात्र की हत्या की थी।
पुलिस ने पहले इस मामले में स्कूल बल के ड्राइवर अशोक कुमार को गिरफ्तार किया था परंतु केन्द्रीय जांच ब्यूरो को इस अपराध में उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला था।

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चिकित्सा कॉलेज के निरीक्षण की तमाम रिपोर्ट छह हफ्ते में सार्वजनिक की जाए : सीआईसी ने एमसीआई से कहा

नई दिल्ली , चार जुलाई (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (एमसीआई) को देश में सभी चिकित्सा संस्थानों की निरीक्षण रिपोर्ट को छह हफ्ते में सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है।
एमसीआई देश में चिकित्सा शिक्षा ढांचे का संवैधानिक नियामक है। परिषद सीट , पाठ्यक्रम ढांचे और शिक्षा की गुणवत्ता की निगरानी और नियमन करती है।
सीबीआई एमसीआई की ऐसी निरीक्षण रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में कथित भ्रष्टाचार संबंधी कई मामलों की जांच कर रही है, जिस आधार पर पाठ्यक्रम और दाखिला लेने के लिए चिकित्सा कॉलेज को मंजूरी दी जाती है।
सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद ने अपने आदेश में कहा कि लोगों की नजरों से दूर फाइलों में ऐसी आकलन रिपोर्ट को छिपाकर रखना देश में मौजूद चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था की कार्यकुशलता को कम करता है।
दीपक एस मरावी ने आरटीआई याचिका दायर कर भोपाल में गांधी मेडिकल कॉलेज की निरीक्षण रिपोर्ट की मांग की थी और एमसीआई ने इससे इंकार करते हुए कहा था कि आकलन रिपोर्ट परिषद की पोस्टग्रेजुएट कमेटी के विचाराधीन है , इसलिए यह साझा नहीं की जा सकती।
संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मरावी ने आयोग का रूख किया।
आजाद की ओर से पूछे जाने पर एमसीआई अधिकारियों ने कहा कि एमसीआई द्वारा तैयार चिकित्सा कॉलेज की निरीक्षण रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का दस्तूर नहीं है।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उच्च शिक्षा वित्त एजेंसी के कार्य क्षेत्र में विस्तार के प्रस्ताव को मंजूरी दी

नई दिल्ली, 4 जुलाई :भाषा: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2022 तक उच्च शिक्षा में अवसंरचना और प्रणालियों (आरआईएसई) को मजबूत बनाने एवं शैक्षणिक अवसंरचना की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए उच्च शिक्षा वित्त एजेंसी के कार्य विस्तार को आज मंजूरी प्रदान कर दी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इसके तहत देश में शैक्षणिक अवसंरचना की बढ़ती वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उच्च शिक्षा वित्त एजेंसी (एचईएफए) के कार्य क्षेत्र को विस्तार दिया गया।
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, इसके तहत वित्त एजेंसी के पूंजी आधार को बढ़ाकर 10,000 करोड़ रुपए कर दिया गया है और इसे 2022 तक शिक्षा में अवसंरचना और प्रणालियों को मज़बूत करने के लिए।,00,000 करोड़ रुपए की निधि निर्माण करने का निर्देश दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि इस सुविधा का सभी संस्थानों तक विस्तार करने के लिए आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने एचईएफए के अंतर्गत निम्न पांच योग्यताओं तथा मूलधन के मुख्य अंश के पुनर्भुगतान की प्रक्रियाओं को मंजूरी दी है। इन सभी मामलों में सरकारी अनुदान के माध्यम से ब्याज का लगातार भुगतान किया जाएगा।
यह सुविधा 2014 के बाद स्थापित संस्थान, ऐसे केन्द्रीय विश्वविद्यालय जिनके पास बहुत कम आंतरिक संसाधन हैं और स्कूली शिक्षाास्वास्थ्य शिक्षा अवसंरचना जैसे एम्स, केन्द्रीय विद्यालय आदि के संदर्भ में है।
इसके तहत 10 साल से अधिक पुराने तकनीकी संस्थान के संदर्भ में संपूर्ण मूलधन का पुनर्भुगतान आंतरिक रूप से संग्रह किए गए बजट संसाधनों के द्वारा होगा।
2008 और 2014 के बीच शुरू किए गए तकनीकी संस्थान के संदर्भ में मूलधन की 25 प्रतिशत राशि का पुनर्भुगतान आंतरिक संसाधनों द्वारा तथा मूलधन की शेष राशि के लिए अनुदान प्राप्त करके होने की बात कही गई है।
2014 के पहले शुरू किए गए केन्द्रीय विश्ववि़द्यालय के संदर्भ में मूलधन की 10 प्रतिशत राशि का पुनर्भुगतान आंतरिक संसाधनों द्वारा तथा मूलधन की शेष राशि के लिए अनुदान प्राप्त करके पूरा करने की बात कही गई है।
इसके साथ ही नए स्थापित संस्थान (2014 के बाद प्रारंभ) के संदर्भ में स्थाई परिसर के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता मूलधन और ब्याज के भुगतान के लिए अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने सरकारी बांड के जरिए धनराशि संग्रह करने की प्रक्रियाओं को भी मंजूरी दी है।

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सबसे कम उम्र का आईएएस बनने का जुनून

-परीक्षा से दो दिन पहले गले का ऑपरेशन करवाकर भी ९७.४० प्रतिशत अंक लाया मुकेश

-आईआईटी कर आईएएस बनने का सफर लंबा था, इसलिए कला संकाय ले लिया

Gravity

डीएनआर रिपोर्टर.सीकर
जब इंसान ठान लेता है तो वो पत्थर को चीर कर लक्ष्य हासिल करने की क्षमता रखता है। ऐसे में किसी परीक्षा को हर संकट के बाद भी पार करने की क्षमता भी उसे मिल जाती है। ऐसे ही एक होनहार छात्र ने भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया है। अपनी योग्यता साबित करने के लिए उसने विज्ञान छोड़ बारहवीं कक्षा में कला संकाय लिया और शुक्रवार को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर द्वारा घोषित 12वीं कला परीक्षा परिणाम में 97 फीसदी अंक लाकर स्वयं को साबित कर दिखाया। चौंकाने वाली बात यह है कि परीक्षा के दिनों में ही मुकेश को गले में बनी एक सिस्ट का ऑपरेशन करवाना पड़ा, लेकिन इस पीड़ादायक समय में भी उसने पुस्तकों का साथ नहीं छोड़ा।
मुकेश के सपनों को पंख लगाए सीकर के प्रतिष्ठित प्रिंस स्कूल ने। इस स्कूल ने एक बार फिर प्रदेश का ऐतिहासिक परिणाम दिया है। स्कूल के निदेशक डॉ. पीयूष सुंडा ने बताया कि छात्र मुकेश ने 97.40 प्रतिशत अंक हासिल कर कला संकाय में सर्वोच्च अंक का इतिहास रचा है। उसके पिता पिता हनुमान राम सामान्य कृषक है।
उन्होंने बताया कि बोर्ड परीक्षा के बीच मुकेश के गले की सिस्ट का ऑपरेशन हुआ था लेकिन मुकेश ने हिम्मत नहीं हारी। वह लगातार संघर्षशील रहा और अंत में ऐतिहासिक सफलता हासिल की। मुकेश को इस परिणाम की पहले से ही अपेक्षा थी।
21 साल की उम्र में बनना है आईएएस
मुकेश को लगता था कि विज्ञान संकाय रखकर वो २२ साल की उम्र में आईएएस बनेगा लेकिन कला संकाय में वो २१ साल की उम्र में ही इस पद पर पहुंच सकता है। इसीलिए उसने विज्ञान छोडक़र कला संकाय ले लिया।
प्रिंस ने फिर जमाई धाक
परीक्षा परिणाम के तहत प्रिंस स्कूल की पूजा जांगिड़ ने 95.40 प्रतिशत, शिवपाल सिंह ने 93.40 प्रतिशत, आकांक्षा ने 93.20 प्रतिशत, अंजली चौधरी ने 93.00 प्रतिशत, शिखा मील ने 92.40 प्रतिशत, सुनील राजपुरोहित ने 92.40 प्रतिशत, रहिश कुमार ने 92.40 प्रतिशत, कल्पना मीणा ने 92.00 प्रतिशत, अशोक कुमार ने 90.60 प्रतिशत, निखिल यादव ने 90.40 प्रतिशत, प्रियल सेवदा ने 90.00 प्रतिशत अंक हासिल किये हैं। शानदार परीक्षा परिणाम आने पर प्रिंस स्कूल में जश्न का माहौल रहा। विद्यार्थियों को बधाईयाँ दी गई और मिठाइयां वितरित की गई।

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फाउंडेशन कोर्स में प्रदर्शन आधारित कैडर आवंटन का प्रस्ताव सिविल सेवा मेरिट को बर्बाद करेगा : कांग्रेस

नई दिल्ली, 21 मई (भाषा) यूपीएससी रैंक की बजाय फाउंडेशन कोर्स में नंबरों के आधार पर कैडर आवंटित किए जाने की सरकार की योजना की आलोचना करते हुए कांग्रेस ने आज कहा कि सरकार का यह कदम सिविल सेवा मेरिट को बर्बाद कर देगा।
पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, मोदी जी एक ऐसा खतरनाक प्रस्ताव सामने लाए हैं जो अखिल भारतीय सिविल सेवा की मेरिट को ही खत्म कर देगा।
उन्होंने कहा, मोदी का मतलब मेन ऑब्जेक्टिव टू डिस्ट्रॉय इंस्टीट्यूशंस है।
इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने कहा कि इस प्रस्तावित कदम को स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे ओबीसी, दलित और आदिवासी पृष्ठभूमि के सफल अभ्यर्थियों को पहले की तरह अवसर नहीं मिल पाएंगे।
पटेल ने सवाल किया कि क्या यह आरक्षण की व्यवस्था को कमजोर करने का एक और प्रयास नहीं है?
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को फाउंडेशन कोर्स के नंबरों के आधार पर चयनित आवेदकों को कैडर देने का सुझाव दिया गया है। अब तक यूपीएससी की परीक्षा में अंकों के आधार पर सफल आवेदकों को कैडर आवंटित किए जाते थे।

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सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को मिलेगा पन्द्रह हजार का पुरस्कार

शिक्षा विभाग : आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को मिलेगा पुरस्कार, 19 जिलों को मिले 9.40 लाख रुपए,
बीकानेर। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की वर्ष 2016-17 की दसवीं व बारहवीं की परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को शीघ्र ही 15-15 हजार रुपए का पुरस्कार मिलेगा। मुख्यमंत्री ने 2016-17 के बजट में सामान्य वर्ग के होनहार विद्यार्थियों के लिए प्रोत्साहन की घोषणा की थी। जिसके मद्देनजर माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के 19 जिला शिक्षा अधिकारियों को पुरस्कार राशि का बजट आवंटित किया है। इन जिलों के 63 विद्यार्थियों के लिए 9 लाख 40 हजार रुपए का बजट आवंटित किया गया है।
सरकारी स्कूलों में अध्यययनरत विद्यार्थियों की ओर से माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने पर 15-15 हजार रुपए के नकद पुरस्कार की घोषणा की थी। इसके तहत उन विद्यार्थियों को 15-15 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाना है, जिन्होंने राÓय सरकार की अन्य किसी योजना का लाभ न लिया हो।
छात्राओं के लिए पहली योजना
सामान्य वर्ग की बालिकाओं के लिए राÓय सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही है लेकिन सामान्य वर्ग के बालकों को पहली योजना है, जिसमें प्रोत्साहन पुरस्कार मिलेगा। प्रदेश के 19 जिलों के 63 विद्यार्थियों का इस योजना के तहत चयन किया गया है।
इन जिलों में इनको लाभ
1. अजमेर 01
2. नागौर 01
3. धौलपुर 01
4. सवाई माधोपुर 08
5. बीकानेर 02
6. गंगानगर 02
7. झुंझुनूं 04
8. अलवर 04
9. दौसा 03
10. जयपुर 14
11. बाड़मेर 04
12. जोधपुर 03
13. बूंदी 01
14. बारां 01
15. जालौर 01
16. पाली 03
17. बांसवाड़ा 03
18. राजसमंद 02
19. उदयपुर 05
कुल बजट 63

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