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शिक्षा (75)

सबसे कम उम्र का आईएएस बनने का जुनून

-परीक्षा से दो दिन पहले गले का ऑपरेशन करवाकर भी ९७.४० प्रतिशत अंक लाया मुकेश

-आईआईटी कर आईएएस बनने का सफर लंबा था, इसलिए कला संकाय ले लिया

Gravity

डीएनआर रिपोर्टर.सीकर
जब इंसान ठान लेता है तो वो पत्थर को चीर कर लक्ष्य हासिल करने की क्षमता रखता है। ऐसे में किसी परीक्षा को हर संकट के बाद भी पार करने की क्षमता भी उसे मिल जाती है। ऐसे ही एक होनहार छात्र ने भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया है। अपनी योग्यता साबित करने के लिए उसने विज्ञान छोड़ बारहवीं कक्षा में कला संकाय लिया और शुक्रवार को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर द्वारा घोषित 12वीं कला परीक्षा परिणाम में 97 फीसदी अंक लाकर स्वयं को साबित कर दिखाया। चौंकाने वाली बात यह है कि परीक्षा के दिनों में ही मुकेश को गले में बनी एक सिस्ट का ऑपरेशन करवाना पड़ा, लेकिन इस पीड़ादायक समय में भी उसने पुस्तकों का साथ नहीं छोड़ा।
मुकेश के सपनों को पंख लगाए सीकर के प्रतिष्ठित प्रिंस स्कूल ने। इस स्कूल ने एक बार फिर प्रदेश का ऐतिहासिक परिणाम दिया है। स्कूल के निदेशक डॉ. पीयूष सुंडा ने बताया कि छात्र मुकेश ने 97.40 प्रतिशत अंक हासिल कर कला संकाय में सर्वोच्च अंक का इतिहास रचा है। उसके पिता पिता हनुमान राम सामान्य कृषक है।
उन्होंने बताया कि बोर्ड परीक्षा के बीच मुकेश के गले की सिस्ट का ऑपरेशन हुआ था लेकिन मुकेश ने हिम्मत नहीं हारी। वह लगातार संघर्षशील रहा और अंत में ऐतिहासिक सफलता हासिल की। मुकेश को इस परिणाम की पहले से ही अपेक्षा थी।
21 साल की उम्र में बनना है आईएएस
मुकेश को लगता था कि विज्ञान संकाय रखकर वो २२ साल की उम्र में आईएएस बनेगा लेकिन कला संकाय में वो २१ साल की उम्र में ही इस पद पर पहुंच सकता है। इसीलिए उसने विज्ञान छोडक़र कला संकाय ले लिया।
प्रिंस ने फिर जमाई धाक
परीक्षा परिणाम के तहत प्रिंस स्कूल की पूजा जांगिड़ ने 95.40 प्रतिशत, शिवपाल सिंह ने 93.40 प्रतिशत, आकांक्षा ने 93.20 प्रतिशत, अंजली चौधरी ने 93.00 प्रतिशत, शिखा मील ने 92.40 प्रतिशत, सुनील राजपुरोहित ने 92.40 प्रतिशत, रहिश कुमार ने 92.40 प्रतिशत, कल्पना मीणा ने 92.00 प्रतिशत, अशोक कुमार ने 90.60 प्रतिशत, निखिल यादव ने 90.40 प्रतिशत, प्रियल सेवदा ने 90.00 प्रतिशत अंक हासिल किये हैं। शानदार परीक्षा परिणाम आने पर प्रिंस स्कूल में जश्न का माहौल रहा। विद्यार्थियों को बधाईयाँ दी गई और मिठाइयां वितरित की गई।

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फाउंडेशन कोर्स में प्रदर्शन आधारित कैडर आवंटन का प्रस्ताव सिविल सेवा मेरिट को बर्बाद करेगा : कांग्रेस

नई दिल्ली, 21 मई (भाषा) यूपीएससी रैंक की बजाय फाउंडेशन कोर्स में नंबरों के आधार पर कैडर आवंटित किए जाने की सरकार की योजना की आलोचना करते हुए कांग्रेस ने आज कहा कि सरकार का यह कदम सिविल सेवा मेरिट को बर्बाद कर देगा।
पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, मोदी जी एक ऐसा खतरनाक प्रस्ताव सामने लाए हैं जो अखिल भारतीय सिविल सेवा की मेरिट को ही खत्म कर देगा।
उन्होंने कहा, मोदी का मतलब मेन ऑब्जेक्टिव टू डिस्ट्रॉय इंस्टीट्यूशंस है।
इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने कहा कि इस प्रस्तावित कदम को स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे ओबीसी, दलित और आदिवासी पृष्ठभूमि के सफल अभ्यर्थियों को पहले की तरह अवसर नहीं मिल पाएंगे।
पटेल ने सवाल किया कि क्या यह आरक्षण की व्यवस्था को कमजोर करने का एक और प्रयास नहीं है?
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को फाउंडेशन कोर्स के नंबरों के आधार पर चयनित आवेदकों को कैडर देने का सुझाव दिया गया है। अब तक यूपीएससी की परीक्षा में अंकों के आधार पर सफल आवेदकों को कैडर आवंटित किए जाते थे।

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सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को मिलेगा पन्द्रह हजार का पुरस्कार

शिक्षा विभाग : आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को मिलेगा पुरस्कार, 19 जिलों को मिले 9.40 लाख रुपए,
बीकानेर। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की वर्ष 2016-17 की दसवीं व बारहवीं की परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को शीघ्र ही 15-15 हजार रुपए का पुरस्कार मिलेगा। मुख्यमंत्री ने 2016-17 के बजट में सामान्य वर्ग के होनहार विद्यार्थियों के लिए प्रोत्साहन की घोषणा की थी। जिसके मद्देनजर माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के 19 जिला शिक्षा अधिकारियों को पुरस्कार राशि का बजट आवंटित किया है। इन जिलों के 63 विद्यार्थियों के लिए 9 लाख 40 हजार रुपए का बजट आवंटित किया गया है।
सरकारी स्कूलों में अध्यययनरत विद्यार्थियों की ओर से माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने पर 15-15 हजार रुपए के नकद पुरस्कार की घोषणा की थी। इसके तहत उन विद्यार्थियों को 15-15 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाना है, जिन्होंने राÓय सरकार की अन्य किसी योजना का लाभ न लिया हो।
छात्राओं के लिए पहली योजना
सामान्य वर्ग की बालिकाओं के लिए राÓय सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही है लेकिन सामान्य वर्ग के बालकों को पहली योजना है, जिसमें प्रोत्साहन पुरस्कार मिलेगा। प्रदेश के 19 जिलों के 63 विद्यार्थियों का इस योजना के तहत चयन किया गया है।
इन जिलों में इनको लाभ
1. अजमेर 01
2. नागौर 01
3. धौलपुर 01
4. सवाई माधोपुर 08
5. बीकानेर 02
6. गंगानगर 02
7. झुंझुनूं 04
8. अलवर 04
9. दौसा 03
10. जयपुर 14
11. बाड़मेर 04
12. जोधपुर 03
13. बूंदी 01
14. बारां 01
15. जालौर 01
16. पाली 03
17. बांसवाड़ा 03
18. राजसमंद 02
19. उदयपुर 05
कुल बजट 63

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पांचवीं बोर्ड की परीक्षा बनेगी मजाक

आठवीं में फ्री और पांचवीं में फीस, अंग्रेजी माध्यम के बच्चों के लिए पुस्तकें नहीं
डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर

चालू शिक्षा सत्र में अनिवार्य की गई पांचवीं बोर्ड परीक्षा के नाम पर शिक्षा विभाग विद्यार्थियों के मजाक कर रहा है। अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए भी परीक्षा अनिवार्य करने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि स्कूलों में पांचवीं की अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकें अलग-अलग पब्लिसर्स की लगाई हुई है। ऐसे में विद्यार्थी बिना पुस्तक पढ़े कैसे परीक्षा देंगे। यह बड़ा सवाल है। हालांकि इसको लेकर निजी विद्यालयों ने निदेशक को ज्ञापन भी सौंपा है।
निजी से मूल्यांकन शुल्क
सरकारी विद्यार्थियों के लिए पांचवीं बोर्ड परीक्षा निशुल्क व निजी विद्यार्थियों के लिए प्रति छात्र चालीस रुपए शुल्क निर्धारण की विभाग के दोहरे मानदंडों को प्रदर्शित कर
रहा है। निजी विद्यार्थियों से ४० रुपए शुल्क मूल्यांकन के नाम पर लिया जाएगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं पर ही खर्च आता है या विभाग पांचवीं बोर्ड परीक्षा का तमाम खर्च निजी विद्यालयों के माध्यम से पूरा करने का प्रयास कर रहा है।

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आठवीं बोर्ड में आधे छात्रों के लॉक हुए आवेदन

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की आठवीं की परीक्षा के आवेदन पत्र भरने की अंतिम तारीख भले ही बढ़ गई हों लेकिन एक पखवाड़े से चल रही प्रक्रिया ने सरकारी स्कूलों की ढिलाई की पोल खोल दी है। प्रदेश में सरकारी व निजी विद्यालयों में सत्र 2017-18 में करीब बारह लाख विद्यार्थी नामांकित है परन्तु आवेदन की पूर्व में घोषित अंतिम तिथि सोमवार को केवल ५.९६ लाख विद्यार्थियों के आवेदन ही लॉक किए गए। हालांकि रात्रि बारह बजे आवेदन लॉक करने का समय था। तिथि बढऩे से राहत मिली है।

20 नवम्बर तक कर सकेंगे आवेदन
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की ओर से आठवीं बोर्ड परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर २० नवम्बर कर दी गई है। इस बार बोर्ड में आठवीं के करीब बारह लाख विद्यार्थी शामिल होंगे। हालांकि इसके लिए फीस का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। अंतिम तिथि बढऩे से स्कूल संचालकों ने राहत की सांस ली है।
शाला दर्पण आईडी की उलझन
आठवीं बोर्ड परीक्षा के ऑनलाइन आवेदन में इस बार शाला दर्पण व शाला दर्शन आईडी का उल्लेख किया जाना था परन्तु जानकारी के अभाव में किसी भी विद्यालय ने आईडी नहीं भरी। एच्छिक होने के कारण ऑनलाइन आवेदन में भी समस्या नहीं आई। पंजीयक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार शाला दर्पण व शाला दर्शन आईडी नम्बर लिखने पर आवेदनों के डाटा का पोर्टल से मिलान होता, जिससे यदि आवेदन में गलती रह गई है, तो वह भी दुरूस्त हो सकती है।

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निजी हाथों में होगी तीन सौ सरकारी स्कूलों की बागडोर

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, सरकारी स्कूलों को सीबीएसई स्कूलों की तर्ज पर विकसित करने में जुटी सरकार शायद अपने ही प्रयासों में विफल हो गई है। यही कारण है कि प्रदेश के बड़े सरकारी स्कूलों को निजी हाथों में (पीपीपी मॉडल) देने की कवायद शुरू कर दी है। राज्य सरकार के निर्देश पर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद (रमसा) की ओर से बिना तारीख लिखा पीपीपी मोड के अनुबंध का प्रारूप जारी किया गया है। माना जा रहा है कि दिसम्बर माह में अनुबंध की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और अप्रेल २०१८ से प्रदेश के १०० बड़े सरकारी स्कूल पीपीपी मोड पर सौंप दिए जाएंगे।

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बोर्ड के पोर्टल में वॉकेशनल एज्युकेशन का विकल्प नहीं

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में सत्र २०१७-१८ में शुरू किए गए व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम के ऑनलाइन फार्म माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की साइट पर उपलब्ध नहीं होने से स्कूलों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। आवेदन की अंतिम तिथि १० नवम्बर तक निर्धारित है, जबकि इस सत्र में वॉकेशनल एज्युकेशन शुरू करने वाले स्कूलों की लॉगिन में इस विषय का उल्लेख नहीं है।  माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की ओर से कक्षा 9 व 11 के व्यावसायिक शिक्षा के विद्यार्थियों के आवेदन भरवाए जा रहे हैं। करीब एक सप्ताह से चल रही प्रक्रिया के तहत तीन साल पहले जिन स्कूलों में वॉकेशनल एज्युकेशन शुरू की गई, उन स्कूलों के ग्यारहवीं के विद्यार्थियों के फार्म भरे जा रहे हैं, जबकि इस सत्र में जिन स्कूलों में वॉकेशनल एज्युकेशन शुरू की गई है, वहां लेवल प्रथम (कक्षा 9) के ऑनलाइन व्यावसायिक शिक्षा का विकल्प नहीं दर्शाया जा रहा है।

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एनएएस सर्वे की तैयारियों में जुटा शिक्षा विभाग

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, ेकेन्द्र सरकार की ओर से आगामी १३ नवम्बर को प्रदेश के पांच हजार स्कूलों में कराए जाने वाले नेशनल एचीवमेंट सर्वे (एनएएस) को लेकर शिक्षा विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी है। सर्वे के आधार पर पूरे भारत में राज्यों की शैक्षिक गुणवत्ता की रैंकिंग तैयार की जाएगी। सर्वे के दौरान विद्यार्थियों का शैक्षिक व बौद्धिक स्तर कमजोर न मिले। इसके लिए विभाग ने पदेन पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों (पीईईओ) के माध्यम से संस्था प्रधानों को सहायक सामग्री उपलब्ध कराई है, जिसके माध्यम से बच्चों को प्रतिदिन अभ्यास कराना होगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक नथमल डिडेल ने शनिवार को इस आशय के आदेश जारी किए हैं। ताकि एनएएस मूल्यांकन में राजस्थान सर्वोच्च स्थान हासिल कर सके।

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बीएलओ संवाद के बीच द्वितीय परख बनी मजाक

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, स्कूलों में प्रथम टेस्ट से लेकर वार्षिक परीक्षा तक कार्यक्रम पूर्व निर्धारित होता है। परीक्षा की गोपनीयता को लेकर निदेशालय की ओर से निर्देश भी जारी किए गए हैं परन्तु राजकीय लेडिएल्गिन स्कूल में द्वितीय परख परीक्षा मजाक बनती नजर आ रही है। गुरुवार सुबह ९.३० बजे से अपराह्न ३ बजे तक छात्राओं के सैकिंड टेस्ट है। इसी बीच विद्यालय के हॉल में जिले के करीब दो सौ बीएलओ का प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।

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कर्मचारियों के फरलों पर लगेगा अंकुश

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, माध्यमिक व प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में कर्मचारियों की लेटलतीफी पर अंकुश लगने वाला है। पूर्व में किए गए प्रयासों के सफल नहीं होने पर दोनों निदेशालयों में बायोमेट्रीक मशीनें लगाने की योजना बनाई जा रही है। बताया जा रहा है कि इसके लिए बाकायदा एक एजेंसी से चर्चा की गई है। सब कुछ ठीक रहा तो दिसम्बर माह में निदेशालय में कर्मचारियों के अंगूठे से उपस्थिति दर्ज होनी शुरू हो जाएगी और इससे प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले कर्मचारियों को सबसे अधिक राहत मिलेगी। निदेशालय में विभिन्न अनुभागों में दोपहर बाद सन्न्नाटा छा जाता है। कार्यालय के निर्धारित समय से आखिरतक उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने बायोमेट्रीक उपस्थिति की व्यवस्था करने का मानस बनाया है।

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