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शिक्षा (82)

एनएएस सर्वे की तैयारियों में जुटा शिक्षा विभाग

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, ेकेन्द्र सरकार की ओर से आगामी १३ नवम्बर को प्रदेश के पांच हजार स्कूलों में कराए जाने वाले नेशनल एचीवमेंट सर्वे (एनएएस) को लेकर शिक्षा विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी है। सर्वे के आधार पर पूरे भारत में राज्यों की शैक्षिक गुणवत्ता की रैंकिंग तैयार की जाएगी। सर्वे के दौरान विद्यार्थियों का शैक्षिक व बौद्धिक स्तर कमजोर न मिले। इसके लिए विभाग ने पदेन पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों (पीईईओ) के माध्यम से संस्था प्रधानों को सहायक सामग्री उपलब्ध कराई है, जिसके माध्यम से बच्चों को प्रतिदिन अभ्यास कराना होगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक नथमल डिडेल ने शनिवार को इस आशय के आदेश जारी किए हैं। ताकि एनएएस मूल्यांकन में राजस्थान सर्वोच्च स्थान हासिल कर सके।

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बीएलओ संवाद के बीच द्वितीय परख बनी मजाक

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, स्कूलों में प्रथम टेस्ट से लेकर वार्षिक परीक्षा तक कार्यक्रम पूर्व निर्धारित होता है। परीक्षा की गोपनीयता को लेकर निदेशालय की ओर से निर्देश भी जारी किए गए हैं परन्तु राजकीय लेडिएल्गिन स्कूल में द्वितीय परख परीक्षा मजाक बनती नजर आ रही है। गुरुवार सुबह ९.३० बजे से अपराह्न ३ बजे तक छात्राओं के सैकिंड टेस्ट है। इसी बीच विद्यालय के हॉल में जिले के करीब दो सौ बीएलओ का प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।

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कर्मचारियों के फरलों पर लगेगा अंकुश

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, माध्यमिक व प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में कर्मचारियों की लेटलतीफी पर अंकुश लगने वाला है। पूर्व में किए गए प्रयासों के सफल नहीं होने पर दोनों निदेशालयों में बायोमेट्रीक मशीनें लगाने की योजना बनाई जा रही है। बताया जा रहा है कि इसके लिए बाकायदा एक एजेंसी से चर्चा की गई है। सब कुछ ठीक रहा तो दिसम्बर माह में निदेशालय में कर्मचारियों के अंगूठे से उपस्थिति दर्ज होनी शुरू हो जाएगी और इससे प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले कर्मचारियों को सबसे अधिक राहत मिलेगी। निदेशालय में विभिन्न अनुभागों में दोपहर बाद सन्न्नाटा छा जाता है। कार्यालय के निर्धारित समय से आखिरतक उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने बायोमेट्रीक उपस्थिति की व्यवस्था करने का मानस बनाया है।

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सरकारी स्कूलों के गणवेश में स्वेटर-कोट शामिल

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, शिक्षा सत्र २०१७-१८ में बदले गए सरकारी स्कूलों के गणवेश (यूनिफार्म) में स्वेटर-कोट को शामिल किया गया है। गणवेश निर्धारण कमेटी की अनुशंसा पर सत्र के शुरूआत में राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के गणवेश में परिवर्तन किया गया, जो गर्मी के मौसम के लिहाज से था। अब गणवेश समिति की ओर से सर्दी के लिहाज से छात्र-छात्राओं के कोट-स्वेटर का रंग निर्धारित किया है, जिसकी अनुपालना में निदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर क्रियान्विति के निर्देश दिए हैं। सरकारी स्कूलों में दशकों पुरानी नीली शर्ट-कुर्ता व खाकी पेंट की परम्परा को बदलते हुए राज्य सरकार ने शिक्षा सत्र २०१७-१८ में शाला गणवेश का पुनर्निधारण किया। इसके तहत पेंट-सलवार, स्कर्ट कथई रंग का और तथा कुर्ता, शर्ट हल्के भूरे रंग का निर्धारित किया। सर्दी के समय गणवेश के ऊपर पहनने के लिए गर्म पोशाक का निर्धारण नहीं किया था। सर्दी की आहट के साथ ही गणवेश समिति ने इसकी सिफारिश की है।

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सत्तर फीसदी स्कूलों को नहीं मिला पुनर्भरण

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में शिक्षा सत्र २०१६-१७ में अध्ययनरत हजारों विद्यार्थियों के पुनर्भरण का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। सबसे अधिक दयनीय हालत माध्यमिक शिक्षा के निजी स्कूलों की है, जिनमें अधिकांश स्कूलों को गत सत्र की पुनर्भरण की राशि नहीं मिली है। इसको लेकर निजी स्कूल संचालकों में रोष व्याप्त है। जिले में माध्यमिक शिक्षा के करीब चार सौ निजी विद्यालय संचालित है, जिन्हें शिक्षा सत्र २०१६-१७ में पुनर्भरण की द्वितीय किश्त के रूप में १.८० करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना है लेकिन माध्यमिक शिक्षा विभाग ने केवल ३१ लाख रुपए का ही बजट जारी किया है। ऐसे में सत्तर फीसदी से अधिक स्कूलों को गत सत्र की पुनर्भरण की द्वितीय किश्त का भुगतान नहीं हुआ है। हालांकि प्रारंभिक शिक्षा के अधिकांश स्कूलों को द्वितीय किश्त का भुगतान हो चुका है।

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आंकलन सेे पता चलेगा, शिक्षकों के दावों में कितनी सच्चाई?

बीकानेर। मिशन मेरिट को लेकर सरकारी स्कूलों के दावों का आंकलन बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित होने के छह माह बाद किया जाएगा। उम्मीद के अनुरूप परिणाम वाले स्कूलों की पीठ थपथपाई जाएगी, वहीं कमचोर परिणाम वाले शिक्षकों के साथ संस्था प्रधान पर भी गाज गिरेगी। गत सत्र में बीकानेर मंडल में चलाए गए मिशन मेरिट को राज्य स्तर पर मिली वाहवाही के बाद उपनिदेशक ने परिणाम के तुलनात्मक आंकलन का निर्णय किया है, जिससे सभी संस्था प्रधानों व शिक्षकों को अवगत कराया गया है। शिक्षा सत्र २०१६-१७ के बोर्ड परीक्षा परिणाम की समीक्षा के दौरान शिक्षण व्यवस्था में मामूली सी कमियां सामने आई, जिन्हें दूर करने पर सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों के मेरिट में पहुंचने की संभावना नजर आई। इसी के मद्देनजर उपनिदेशक ने बीकानेर मंडल के बोर्ड परीक्षा परिणाम की समीक्षा का ध्येय बनाया है। इसके बाद शीतकालीन अवकाश के दौरान सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ओर से बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए विज्ञान, गणित व अंग्रेजी विषय की विशेष कक्षाएं लगाने के भी निर्देश जारी हो सकते हैं।

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आदर्श स्कूलों के हालात की होगी समीक्षा!

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, पंचायत मुख्यालय पर आदर्श शिक्षा व्यवस्था कायम करने के लिए राज्य सरकार ने एक बार फिर प्रयास शुरू किए हैं। उपखंड अधिकारी की अध्यक्षता में पंचायत समितिवार हर महीने समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें नोडल संस्था प्रधानों को उनके अधीन आने वाले विद्यालयों के बारे में तमाम जानकारी देनी होगी। यह जानकारी प्रति माह सरकार को भेजनी होगी, जिसकी समीक्षा के बाद आदर्श शिक्षा व्यवस्था को और प्रभावी ढंग से लागू करने की योजना बनाई जाएगी। हालांकि इस संबंध में पहले भी आदेश जारी हुए थे लेकिन उनकी क्रियान्विति इक्का-दुक्का स्थानों पर ही हुई। जिले में करीब साढ़े तीन सौ माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय संचालित है। राज्य सरकार की घोषणा के मुताबिक ग्राम पंचायत स्तर पर आदर्श विद्यालय गठित किया गया है। जिले में २९० आदर्श विद्यालय है, जिनमें व्याप्त अव्यवस्थाओं की सूचना रमसा की ओर से निर्धारित प्रपत्र में उपखंड अधिकारी की अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में देनी होगी। बैठक में स्कूलों में संसाधनों की स्थिति एवं शिक्षण व्यवस्था में सुधार को लेकर सुझाव मांगे जाएंगे।

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इसी सत्र में स्थापित होगी डिसपेेंसर व इंसीरेटर मशीन

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा के सभी १३६५९ विद्यालयों में इसी सत्र में ऑटोमेटिक सेनेटरी नेपकीन वैडिंग मशीन लगाई जाएंगी। मुख्यमंत्री की गत वर्ष शिक्षक दिवस पर बालिकाओं के लिए की गई घोषणा की न्यून क्रियान्विति पर फटकार लगने के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में इस आशय के आदेश जारी किए हैं। पहले सेनेटरी नेपकीन मशीन बालिका विद्यालयों में लगाए जाने के आदेश दिए गए लेकिन कुछ ही स्कूलों को बजट मिला। ऐसे में बालिका विद्यालयों में शत-प्रतिशत क्रियान्विति नहीं हुई। हालही में समीक्षा के दौरान अनेक स्कूलों में को-एज्युकेशन वाले विद्यालयों में भी ऑटोमेटिक सेनेटरी नेपकीन मशीन स्थापित करने के आदेश दिए गए हैं। जिसके तहत शुक्रवार को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। कॉ-एज्युकेशन स्कूलों में ऑटोमेटिक सीनेटरी नेपकीन मशीन स्थापित होने का लाभ इन स्कूलों में अध्ययनरत छात्रओं को मिल सकेगा।

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विद्यार्थियों को मिल सकते हैं लेनेवो के लेपटॉप

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की आठवीं, दसवीं व बारहवीं की परीक्षा में श्रेष्ठ २७९०० विद्यार्थियों को इस बार लेनेवो कम्पनी के लेपटॉप मिल सकते हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग की राज्य स्तरीय क्रय समिति ने लेपटॉप आपूर्ति के लिए ऑनलाइन प्रस्ताव आमंत्रित किए थे जिनमें केवल दो फर्मों ने ही प्रस्ताव प्रस्तुत किए, जिनकी वित्तीय दरों की जांच के बाद लेनेवो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की दरों को सबसे कम मानते हुए नेगोसिएशन (संशोधित दर) के लिए लिखा गया है। दसवीं, बारहवीं, आठवीं की परीक्षा में राज्य स्तर पर प्रथम छह-छह हजार विद्यार्थियों को राज्य सरकार की ओर से लेपटॉप दिए जाते हैं। इसी प्रकार जिला स्तर पर प्रथम १००-१०० विद्यार्थियों को लेपटॉप का वितरण किया जाता है। लेपटॉप का वितरण हर वर्ष जनवरी के बाद किया जाता है। ऐसे में लम्बी टेंडर प्रक्रिया चलती है। दो माह पूर्व निदेशक की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय क्रय समिति की ओर से लेपटॉप आपूर्ति के लिए फर्मों से ऑनलाइन प्रस्ताव मांगे गए। इनमें लेनेवो ने प्रति लेपटॉप २०६४९ रुपए की दर प्रस्तुत की है। इसे भी अधिक मानते हुए क्रय समिति ने फर्म से २६ अक्टूबर तक संशोधित दर प्रस्तुत करने को कहा है। 

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बकाया एरियर मिले तो रोशन हो दीपावली

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, तीन साल तक संघर्ष करने वाले २०१२ में नियुक्त करीब चालीस हजार शिक्षकों को भले ही स्थायीकरण की सौगात मिल गई हो लेकिन तीन साल के बोनस व एरियर का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। इन शिक्षकों के लिए प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को केन्द्रीय मद में १२ अरब रुपए से भी अधिक के बजट की दरकार है। ऐसे में उच्च स्तर से निर्देश मिलने के बाद ही बकाया बोनस-एरियर का भुगतान संभव हो पाएगा। हालांकि प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय इसके लिए प्रयास जारी होने की बात कह रहा है लेकिन वर्षों तक १३२०० फिक्स वेतन में दीपावली मनाने वाले इन शिक्षकों को बकाया एरियर व बोनस का भुगतान हो जाए, तो इनकी खुशियों में चार चांद लग जाएंगे। शिक्षक संगठन राज्य सरकार पर बकाया एरियर-बोनस के भुगतान के लिए दबाव बना रहे हैं लेकिन प्रयास अब तक सिरे नहीं चढ़ पाए हैं। संगठनों का कहना है कि सरकार को इन शिक्षकों के बकाया एरियर-बोनस पर विचार कर दीपावली से पहले इन्हें सौगात देनी चाहिए, ताकि वर्षों तक फिक्स वेतन की इनकी पीड़ा कुछ हद तक दूर हो सके।

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