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शिक्षा (73)

कॉलेज पर जड़ा ताला, थालियां बजाकर प्रदर्शन

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, राजकीय डूंगर महाविद्यालय में खेल मैदान निर्माण एंव शारीरिक शिक्षक की नियुक्ति की मांग को लेकर कई दिनो से चल रहे आंदोलन की कड़ी में मंगलवार को एनएसयूआई ने प्राचार्य कक्ष पर ताला जड़कर बहरे प्रशासन को जगाने के लिए थालियां एवं पीपे बजाकर प्रदर्शन किया। डूंगर महाविद्यालय में एनएसयूआई के बैनर तले मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया। इसमें छात्र नेताओं ने कहा कि खेल मैदान व पीटीआई नहीं होने से खेल प्रतिभाओं को मौका नहीं मिल पा रहा है। समय रहते मंग पूरी नहीं हुई, तो आंदोलन तेज किया जाएगा। प्रदर्शन में मदन कस्वा, मनोज सिहाग, श्रीकृष्ण गोदारा, कुलदीप बिश्नोई, रोहित बाना, विजयपाल सारण, धनराज गोदारा, मनीष डूडी, करण चौधरी, बाबूलाल, शंकर गोदारा सहित एनएसयूआई के अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे।

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बड़ी स्कूलों के निजीकरण की तैयारी

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, प्रदेश में १००० से अधिक नामांकन वाले शहरी क्षेत्र के सरकारी स्कूलों को निजी हाथों में देने की कवायद शुरू हो रही है। इसमें बीकानेर शहर के पांच बड़े सरकारी स्कूलों को निशाने पर रखा गया है। मंगलवार को पीपीपी मोड की प्रथम सूची के नाम से प्रदेश के शहरी क्षेत्र में १०९ स्कूलों की सूची जारी हुई। दावा किया गया कि इन्हीं स्कूलों का निजीकरण हो रहा है। जिसमें बीकानेर शहर के पांच स्कूल शामिल है। हालांकि माध्यमिक शिक्षा निदेशक व अधीनस्थ अधिकारियों ने इस सूची की पुष्टि नहीं की है।

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विज्ञान व गणित विषय की काउंसलिंग स्थगित

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, जिला परिषद परिसर में मंगलवार को तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती 2013 लेवल प्रथम की काउंसलिंग सम्पन्न हुई। जबकि बुधवार को द्वितीय लेवल की विज्ञान व गणित विषय की होने वाली काउंसलिंग को निरस्त कर दिया गया है। इस काउंसलिंग में 170 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। जिसमें से काउंसलिंग के लिए 158 अभ्यार्थी पहुंचे। 12 अभ्यार्थी अनुपस्थित रहे। सवेरे से ही परिषद कार्यालय में अभ्यार्थी पहुंचने शुरू हो गए थे। अभ्यर्थियों के लिए बाहर खुले में टेंट लगाकर बैठने की व्यवस्था की गई तथा मौके पर एलईडी लगाई गई जिसमें काउंसलिंग से लेकर तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती वर्ष 2013 के प्रथम लेवल के चयनित शिक्षकों की सूची रही। ताकि अभ्यर्थी को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हो।  जिला शिक्षा अधिकारी उमाशंकर किराड़ू ने बताया कि काउंसलिंग के लिए पहुंचे सभी अभ्यार्थियों को पदस्थापन स्थान आवंटित कर दिया गया है।

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बॉक्स लगाकर मांगे सुझाव

बालिका शिक्षा में सुधार की कवायद एमएस कॉलेज में डिमांड व सुझाव बॉक्स
डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, महारानी सुदर्शना कन्रूा महाविद्यालय में छात्रसंघ महासचव एकता पारीक के नेतृत्व में डिमांड एवं सुझाव कार्यक्रम की शुरूआत की गई। खुलकर अपनी मांग व सुझाव नहीं रख पाने वाली छात्राओं के लिए अलग से बॉक्स रखा गया, जिसमें छात्राओं ने लिखित में सुझाव डाले। सुझाव कॉलेज से जुड़ी समस्याओं व उनके निराकरण से संबंधित मांगे गए। महासचिव ने बताया कि महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं की मांगें, समस्याएं तथा उनके निराकरण को लेकर सुझाव मांगे गए हैं। इसके लए बॉक्स तैयार किया गया है। इसमें प्रत्येक कक्षा की छात्राएं अपने सुझाव दे सकेंगी। छात्रसंघ की ओर से इन सुझावों पर मंथन किय जाएगा तथा उन पर कार्रवाई के लिए प्रयास किया जाएगा। महासचिव ने बताया कि इसके माध्यम से हम प्रत्येक छात्रा की समस्या को जान सकेंगे। कार्यक्रम में हनी साध, अनिषा राठौड़, सुमन जोधा, प्रकाश कंवर, ममता कंवर,ज्योतिषणा कंवर, रिया गौतम आदि ने सहयोग किया।

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शिक्षा में गुणात्मक सुधार का लेना होगा प्रमाण!

रमसा में करना होगा आवेदन, दस प्रश्नों से होगा निर्धारण
डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, प्राथमिक शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए प्रदेश के सरकारी स्कूलों में चल रही एसआईक्यूई योजना के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्कूलों की रैंकिंग तय होगी। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद (रमसा) से इन स्कूलों को प्रमाण-पत्र लेना होगा। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इस सत्र में प्रथम चरण के १३४० आदर्श विद्यालयों व द्वितीय चरण के कुछ आदर्श व लैब स्कूलों का चयन किया गया है। जिसमें २० अक्टूबर तक आवेदन करना होगा। माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में कक्षा पहली से पांचवीं तक एसआईक्यूई के तहत अध्यापन कराया जाता है। इसके तहत विद्यार्थियों का चरणबद्ध शैक्षिक उन्नयन के लिए कार्ययोजना के तहत कार्य किया जाता है। हालांकि अधिकांश स्कूलों में एसआईक्यूई के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं परंतु कुछ स्कूलों में एसआईक्यूई को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। यही कारण है कि एसआईक्यूई सर्टिफिकेशन का निर्णय किया गया है।

जिले में हैं अठावन विद्यालय
एसआईक्यूई सर्टिफिकेशन के लिए प्रदेश के १३४० विद्यालयों का चयन किया गया है। इसमें बीकानेर जिले के ५८ आदर्श विद्यालय शामिल है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से इन सभी आदर्श विद्यालयों को निर्धारित तारीख तक ऑनलाइन आवेदन के निर्देश दिए गए हैं।
यह रहेगी आवेदन की प्रक्रिया
विद्यालयों को शाला दर्पण पोर्टल पर जाकर एसआईक्यूई सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन करना होगा। इसके लिए विद्यालय लोगिन आईडी से प्रसस्ति मॉड्यूल पर क्लिक कर एसआईक्यूई सर्टिफिकेशन पर आवेदन करना होगा। आवेदन के दौरान दस प्रश्नों के उत्तर देने होंगे। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से संस्था प्रधानों को ऑनलाइन आवेदन से पूर्व एसआईक्यूई के तहत कराए गए कार्यों की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
२५ प्रतिशत से कम तो दोबारा आवेदन
मॉड्यूल पर आवेदन के दौरान एसआईक्यूई की विद्यालय में संचालित गतिविधियों से जुड़े दस प्रश्नों के उत्तर देने होंगे। इनमें एसआईक्यूई विद्यालय में वर्ष पर्यन्त गतिविधियों, विद्यार्थियों की प्रोफाइल, मूल्यांकन से संबंधित जानकारी होगी। इन प्रश्नों के उत्तर में २५ प्रतिशत से कम अंक आने पर आवेदन स्वत: निरस्त हो जाएगा। एक बार आवेदन निरस्त होने के बाद १५ दिन बाद पुन: आवेदन किया जा सकेगा।
निर्देश दिए गए हैं
एसआईक्यूई सर्टिफिकेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। संबंधित विद्यालयों को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। जिले में ५८ विद्यालयों का प्रथम चरण में चयन किया गया है।
- हेतराम सारण, अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक, रमसा, बीकानेर

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40 नामांकन वाले स्कूल भी होंगे आवंटित

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, अस्सी नामांकन वाले राजकीय उच्च प्राथमिक व चालीस नामांकन वाले प्राथमिक विद्यालय भी बीएड प्रशिक्षार्थियों को इंटर्नशिप के लिए आवंटित किए जा सकेंगे। राज्य सरकार ने सोमवार को प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशक, रमसा व एसएसए को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। यह आदेश बीएड प्रशिक्षणार्थियों की अधिक संख्या को देखते हुए दिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने न्यायालय के आदेश की पालना में डीईएसईडी के प्रशिक्षार्थियों की इंटर्नशिप को स्थगित कर दिया है। गतत सत्र में पहले बीएड प्रशिक्षार्थियों के इंटर्नशिप के लिए उप्रावि में १०० व प्रावि में ६० नामांकन अनिवार्य किया गया था। बीएड प्रशिक्षणार्थियों की संख्या अधिक होने तथा नामांकन के आधार पर स्कूल कम होने के कारण आवश्यकता से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को स्कूलों में लगाना पड़ता था। इससे सरकार की मंशा के अनुसार प्रत्येक सरकारी विद्यालय में बीएड प्रशिक्षणार्थियों का लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल पाता था। इस आदेश के बाद लगभग सभी सरकारी स्कूलों में बीएड प्रशिक्षणार्थियों को लगाया जा सकेगा।

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शिक्षा के स्तर की जांच के लिए होगा सर्वे

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, सरकारी स्कूलों में प्रारंभिक शिक्षा की कक्षाओं में बच्चों के शैक्षिक स्तर को ऊंचा उठाने के लिए चलाई गई योजनाओं की क्रियान्विति की सचाई शीघ्र ही सामने आएगी। केन्द्र सरकार की ओर से देशभर के सरकारी स्कूलों में कक्षा तीसरी, पांचवीं व आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर की जांच के लिए नेशनल अचीवमेंट सर्वे (एनएएस) करवाया जाएगा।

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एक हजार में से 400 प्रधानाध्यापकों ने नहीं किया कार्यग्रहण

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, गत माह २८-२९ अगस्त तथा इस माह ३ सितम्बर को द्वितीय श्रेणी शिक्षक से प्रधानाध्यापक स्तर पर हुई वर्ष २०१७-१८ की डीपीसी में पदोन्नत एक हजार अभ्यर्थियों में से चार सौ ने निर्धारित तिथि तक कार्यग्रहण नहीं किया है। हालांकि कार्यग्रहण के लिए इन्हें पुन: मौका नहीं दिया गया है परन्तु विभाग ने इन चार सौ पदों को डीपीसी २०१७-१८ से निर्मित आरआर सूची से भरने का मानस बना लिया है। इसके लिए शीघ्र ही काउंसलिंग का आयोजन किया जा सकता है। 

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एमजीएसयू के नवीन पाठ्यक्रमों का विमोचन

बीकानेर। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के नवीन पाठ्यक्रमों का विमोचन स्थानीय डूंगर महाविद्यालय में किया गया। कुलपति प्रो. भगीरथ सिंह एवं विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता यथा सामाजिक विज्ञान अधिष्ठाता डॅा.बेला भनोत, विज्ञान संकाय अधिष्ठाता डॅा. अनिल कुमार छंगाणी, विधि संकाय अधिष्ठाता डॉ. विभा शर्मा, शिक्षा संकाय अधिष्ठाता डॅा.सुरेन्द्र कुमार सहारण एवं विभिन्न विषयों के अध्ययन मण्डल के संयोजकों ने संयुक्त रूप से किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पिछले काफी वर्षो से संचालित पाठ्यक्रम एवं परीक्षा प्रणाली में वर्तमान समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए परिवर्तन एवं उन्हें संकायवार प्रकाशित करवाकर एक नई पहल की है। उक्त पहल से शिक्षक एवं विद्यार्थी दोनों को फायदा मिलेगा और शैक्षणिक गुणवत्ता में वृद्धि होगी। ज्ञात रहे कि पिछले दिनों विश्वविद्यालय के अध्ययन मण्डल की बैठकों में पाठ्यक्रम एवं परीक्षा प्रणाली के प्रस्ताव तैयार करके उनका अनुमोदन विद्या परिषद् एवं प्रबन्ध बोर्ड की बैठकों में किया गया था। उपरोक्त प्रस्ताव अनुसार ही नवीन परीक्षा प्रणाली के अनुरूप पाठ्यक्रमों का प्रकाशन करवाया गया है। इस अवसर पर कॉलेज शिक्षा के सहायक निदेशक डॉ. दिग्विजय सिंह, उप-प्राचार्य डॉ. सतीश कौशिक, डॉ. शिशिर शर्मा, नारायण सिंह राव, रवीन्द्र मंगल, जीपी ंिसंह, आर.पी. माथुर, डॉ. मीरा श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे।

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स्कूलों में दान की राशि पर नहीं मिलेगी आयकर छूट

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद के निर्देशों के बावजूद ९० फीसदी स्कूलों ने नहीं दिखाई ८०जी में पंजीयन कराने में रूचि
बीकानेर। सरकारी स्कूलों में दान की जाने वाली राशि को आयकर से मुक्त रखने की सरकार की योजना ठंडे बस्ते में चली गई है। योजना को लेकर राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (रमसा) की ओर से विगत छह माह से निर्देश जारी किए जा रहे हैं लेकिन अब तक दस फीसदी स्कूलों ने भी ८०जी के तहत पंजीयन कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। यह तभी संभव होगा, जब एसडीएमसी अथवा एसएमसी के नाम से पेनकार्ड जारी करवाया जाएगा परन्तु ऑनलाइन आवेदन व्यवस्था होने के बावजूद अधिकांश ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई है। विगत दो माह से इसको लेकर एकदम उदासीनता नजर आ रही है। समीक्षा के दौरान संस्था प्रधानों की ओर से ८०जी के तहत पंजीकरण से पूर्व तीन साल के लेखा-जोखा की फाइलें तैयार करने को लेकर समस्या सामने रखी गई, जिसके आधार पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने संस्था प्रधानों को चार्टेड एकाउंटेंट की सशुल्क सेवाएं लेने के निर्देश दिए हैं। हालांकि इसके बाद भी ८०जी के तहत पंजीयन का आंकड़ा बढ़ता नजर नहीं आ रहा है।
विगत कुछ सालों में सरकारी स्कूलों में आमजन की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभाग की ओर से अभिभावक-शिक्षक मीटिंग, सामूहिक समारोह के आयोजन आदि करवाए जा रहे हैं। जिसके दौरान अभिभावकों व ग्रामीणों की ओर से स्कूल में आर्थिक सहयोग भी किया गया है परन्तु लाखों के एक मुश्त आर्थिक सहयोग में आयकर के डर से भामाशाह आगे नहीं आ रहे हैं। यही कारण है कि राज्य सरकार ने विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति अथवा विद्यालय विकास समिति को ८०जी के तहत पंजीकृत कराने की योजना बनाई लेकिन सिरे नहीं चढ़ पा रही है।
सहकारी समितियों में पंजीकरण नहीं
राज्य सरकार ने एसडीएमसी के प्रस्तावों को सर्वमान्य कर रखा है। इसके लिए ८०जी से पहले एसडीएमसी/एसएमसी को रजिस्ट्रार सहकारी समितियों के अंतर्गत पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए ताकि एसडीएमसी और शक्तिशाली बन सके परन्तु महज पच्चीस फीसदी एसडीएमसी का भी पंजीकरण नहीं कराया गया है। ऐसे में ८जी के तहत पंजीयन की कल्पना ही बेमानी है।

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