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शिक्षा (82)

40 नामांकन वाले स्कूल भी होंगे आवंटित

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, अस्सी नामांकन वाले राजकीय उच्च प्राथमिक व चालीस नामांकन वाले प्राथमिक विद्यालय भी बीएड प्रशिक्षार्थियों को इंटर्नशिप के लिए आवंटित किए जा सकेंगे। राज्य सरकार ने सोमवार को प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशक, रमसा व एसएसए को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। यह आदेश बीएड प्रशिक्षणार्थियों की अधिक संख्या को देखते हुए दिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने न्यायालय के आदेश की पालना में डीईएसईडी के प्रशिक्षार्थियों की इंटर्नशिप को स्थगित कर दिया है। गतत सत्र में पहले बीएड प्रशिक्षार्थियों के इंटर्नशिप के लिए उप्रावि में १०० व प्रावि में ६० नामांकन अनिवार्य किया गया था। बीएड प्रशिक्षणार्थियों की संख्या अधिक होने तथा नामांकन के आधार पर स्कूल कम होने के कारण आवश्यकता से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को स्कूलों में लगाना पड़ता था। इससे सरकार की मंशा के अनुसार प्रत्येक सरकारी विद्यालय में बीएड प्रशिक्षणार्थियों का लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल पाता था। इस आदेश के बाद लगभग सभी सरकारी स्कूलों में बीएड प्रशिक्षणार्थियों को लगाया जा सकेगा।

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शिक्षा के स्तर की जांच के लिए होगा सर्वे

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, सरकारी स्कूलों में प्रारंभिक शिक्षा की कक्षाओं में बच्चों के शैक्षिक स्तर को ऊंचा उठाने के लिए चलाई गई योजनाओं की क्रियान्विति की सचाई शीघ्र ही सामने आएगी। केन्द्र सरकार की ओर से देशभर के सरकारी स्कूलों में कक्षा तीसरी, पांचवीं व आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर की जांच के लिए नेशनल अचीवमेंट सर्वे (एनएएस) करवाया जाएगा।

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एक हजार में से 400 प्रधानाध्यापकों ने नहीं किया कार्यग्रहण

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, गत माह २८-२९ अगस्त तथा इस माह ३ सितम्बर को द्वितीय श्रेणी शिक्षक से प्रधानाध्यापक स्तर पर हुई वर्ष २०१७-१८ की डीपीसी में पदोन्नत एक हजार अभ्यर्थियों में से चार सौ ने निर्धारित तिथि तक कार्यग्रहण नहीं किया है। हालांकि कार्यग्रहण के लिए इन्हें पुन: मौका नहीं दिया गया है परन्तु विभाग ने इन चार सौ पदों को डीपीसी २०१७-१८ से निर्मित आरआर सूची से भरने का मानस बना लिया है। इसके लिए शीघ्र ही काउंसलिंग का आयोजन किया जा सकता है। 

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एमजीएसयू के नवीन पाठ्यक्रमों का विमोचन

बीकानेर। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के नवीन पाठ्यक्रमों का विमोचन स्थानीय डूंगर महाविद्यालय में किया गया। कुलपति प्रो. भगीरथ सिंह एवं विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता यथा सामाजिक विज्ञान अधिष्ठाता डॅा.बेला भनोत, विज्ञान संकाय अधिष्ठाता डॅा. अनिल कुमार छंगाणी, विधि संकाय अधिष्ठाता डॉ. विभा शर्मा, शिक्षा संकाय अधिष्ठाता डॅा.सुरेन्द्र कुमार सहारण एवं विभिन्न विषयों के अध्ययन मण्डल के संयोजकों ने संयुक्त रूप से किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पिछले काफी वर्षो से संचालित पाठ्यक्रम एवं परीक्षा प्रणाली में वर्तमान समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए परिवर्तन एवं उन्हें संकायवार प्रकाशित करवाकर एक नई पहल की है। उक्त पहल से शिक्षक एवं विद्यार्थी दोनों को फायदा मिलेगा और शैक्षणिक गुणवत्ता में वृद्धि होगी। ज्ञात रहे कि पिछले दिनों विश्वविद्यालय के अध्ययन मण्डल की बैठकों में पाठ्यक्रम एवं परीक्षा प्रणाली के प्रस्ताव तैयार करके उनका अनुमोदन विद्या परिषद् एवं प्रबन्ध बोर्ड की बैठकों में किया गया था। उपरोक्त प्रस्ताव अनुसार ही नवीन परीक्षा प्रणाली के अनुरूप पाठ्यक्रमों का प्रकाशन करवाया गया है। इस अवसर पर कॉलेज शिक्षा के सहायक निदेशक डॉ. दिग्विजय सिंह, उप-प्राचार्य डॉ. सतीश कौशिक, डॉ. शिशिर शर्मा, नारायण सिंह राव, रवीन्द्र मंगल, जीपी ंिसंह, आर.पी. माथुर, डॉ. मीरा श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे।

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स्कूलों में दान की राशि पर नहीं मिलेगी आयकर छूट

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद के निर्देशों के बावजूद ९० फीसदी स्कूलों ने नहीं दिखाई ८०जी में पंजीयन कराने में रूचि
बीकानेर। सरकारी स्कूलों में दान की जाने वाली राशि को आयकर से मुक्त रखने की सरकार की योजना ठंडे बस्ते में चली गई है। योजना को लेकर राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (रमसा) की ओर से विगत छह माह से निर्देश जारी किए जा रहे हैं लेकिन अब तक दस फीसदी स्कूलों ने भी ८०जी के तहत पंजीयन कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। यह तभी संभव होगा, जब एसडीएमसी अथवा एसएमसी के नाम से पेनकार्ड जारी करवाया जाएगा परन्तु ऑनलाइन आवेदन व्यवस्था होने के बावजूद अधिकांश ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई है। विगत दो माह से इसको लेकर एकदम उदासीनता नजर आ रही है। समीक्षा के दौरान संस्था प्रधानों की ओर से ८०जी के तहत पंजीकरण से पूर्व तीन साल के लेखा-जोखा की फाइलें तैयार करने को लेकर समस्या सामने रखी गई, जिसके आधार पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने संस्था प्रधानों को चार्टेड एकाउंटेंट की सशुल्क सेवाएं लेने के निर्देश दिए हैं। हालांकि इसके बाद भी ८०जी के तहत पंजीयन का आंकड़ा बढ़ता नजर नहीं आ रहा है।
विगत कुछ सालों में सरकारी स्कूलों में आमजन की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभाग की ओर से अभिभावक-शिक्षक मीटिंग, सामूहिक समारोह के आयोजन आदि करवाए जा रहे हैं। जिसके दौरान अभिभावकों व ग्रामीणों की ओर से स्कूल में आर्थिक सहयोग भी किया गया है परन्तु लाखों के एक मुश्त आर्थिक सहयोग में आयकर के डर से भामाशाह आगे नहीं आ रहे हैं। यही कारण है कि राज्य सरकार ने विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति अथवा विद्यालय विकास समिति को ८०जी के तहत पंजीकृत कराने की योजना बनाई लेकिन सिरे नहीं चढ़ पा रही है।
सहकारी समितियों में पंजीकरण नहीं
राज्य सरकार ने एसडीएमसी के प्रस्तावों को सर्वमान्य कर रखा है। इसके लिए ८०जी से पहले एसडीएमसी/एसएमसी को रजिस्ट्रार सहकारी समितियों के अंतर्गत पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए ताकि एसडीएमसी और शक्तिशाली बन सके परन्तु महज पच्चीस फीसदी एसडीएमसी का भी पंजीकरण नहीं कराया गया है। ऐसे में ८जी के तहत पंजीयन की कल्पना ही बेमानी है।

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असमिया संस्कृति से रूबरू होंगे कॉलेज विद्यार्थी, 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' संकल्पना के तहत असम बना स्टेट पार्टनर

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर। केंद्र सरकार के एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान के तहत अब पूर्वोतर का प्रमुख राज्य असम हमारा स्टेट पार्टनर होगा। इसके तहत अब कॉलेज विद्यार्थियों को असमी संस्कृति, भाषा, विरासत का ज्ञान कराया जाएगा। इसको लेकर कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय ने एक आदेश जारी किया है। विविधता में एकता के नारे को साकार करने के उद्देश्य से इस अभियान को कॉलेज स्तर पर लागू किया गया है। अभियान के तहत पूरे देश में दो दो राज्यों की जोड़ी बनाई गई थी। पहले राजस्थान के साथ पश्चिम बंगाल को जोड़़ा गया था लेकिन अब बंगाल के स्थान पर असम को जोड़ा गया है।

असम में लेंगे शपथ राष्ट्रीय एकता की शपथ
अभियान के तहत 31 अक्टूबर को दी जाने वाली राष्ट्रीय एकता की शपथ हिन्दी के साथ असमी भाषा में दिलाई जाएगी इसका असमी अनुवाद आयुक्तालय स्तर पर करवाकर कॉलेजों को भिजवाया जाएगा।

प्रतियोगिताएं होगी आयोजित
अभियान के तहत कॉलेजों में समय समय पर असम की कला, संस्कृति, भाषा, परंपरा, साहित्य, प्रमुख घटनाएं इतिहास, भौगोलिक विरासत, महापुरूषों के बारे में क्विज,पोस्टर लेखनी संबंधित प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी ताकि विद्यार्थी उनके बारे में जान सकें।

रहेगी दो सीटें रिजर्व
अगले साल से हर कॉलेज में प्रथम वर्ष में असमी विद्यार्थियों के लिए दो सीटें आरक्षित रहेंगी। प्रवेश नीति के साथ ही रिजर्व रहने वाली सीटें अंतिम तिथि से पन्द्रह दिन तक रिजर्व रखी जाएगी और उसके बाद में खाली रहने पर स्थानीय विद्यार्थियों से भरी जाएगी।

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"गुरुजी" की कुंडली कब देखेगा विभाग

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, बोर्ड परीक्षा परिणामों में फिसड्डी रहे माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों के कुशल समन्वय को लेकर निदेशक के प्रयास दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। एक माह पूर्व निदेशक ने आदेश जारी कर जिला शिक्षा अधिकारियों व समकक्ष अधिकारियों को जिलों के कमजोर स्कूलों में प्रतिदिन मॉनिटरिंग के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए थे, जिसकी क्रियान्विति भी हो गई लेकिन विडम्बना की बात है कि किसी भी अधिकारी ने स्कूल में जाकर यह नहीं देखा कि 'बच्चे कैसे पढ़ रहे हैं और गुरुजी कैसे पढ़ा रहे हैं।Ó निदेशालय स्तर पर समीक्षा के दौरान बीकानेर सहित कई जिलों में ऐसी अव्यवस्था सामने आने को गंभीरता से लेते हुए निदेशक ने फटकार लगाई है और मिथ्या रिपोर्ट पेश करने वालों की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शिक्षा सत्र २०१६-१७ में सरकारी स्कूलों का दसवीं, बारहवीं बोर्ड का परीक्षा परिणाम बेहतर रहा लेकिन प्रत्येक जिले में कई ऐसे स्कूलों में परीक्षा परिणाम काफी कमजोर रहा। राज्य स्तर पर बोर्ड परीक्षा परिणामों की समीक्षा के बाद कमजोर परिणामों वाले स्कूलों का सत्र पर्यंत पर्यवेक्षण करने का निर्णय किया गया। जिला शिक्षा अधिकारियों, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारियों, रमसा के अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक हर रोज स्कूलों में शैक्षिक स्तर सुधारेंगे।

यहां दीपक तले अंधेरा
बीकानेर जिले में कमजोर परीक्षा परिणामों वाले दसवीं व बारहवीं के विद्यालयों की संख्या करीब पचास है, जिनमें जिला शिक्षा अधिकारियों, एडीईईओ, एडीपीसी व समकक्ष अधिकारियों की जिम्मेवारी तय की हुई है लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि अधिकांश ने अपनी रिपोर्ट में पर्यवेक्षण का जिक्र किया है लेकिन हकीकत में अधिकांश स्कूलों तक गए ही नहीं। ऐसे में बोर्ड परीक्षा परिणाम उन्नयन को लेकर निदेशक की योजना दम तोड़ती नजर आ रही है।
नहीं शुरू हुआ मिशन मैरिट
गत सत्र में बीकानेर मंडल में मिशन मैरिट योजना शुरू हुई, जिसका बोर्ड परीक्षाओं में सार्थक परिणाम भी देखने को मिला लेकिन इस बार बीकानेर मंडल में मिशन मैरिट शुरू करने का मानस अधिकारी नहीं बना पाए हैं। निदेशालय स्तर पर भी प्रयास २०१८ को लेकर कोई काम नहीं हो रहा है। यही स्थिति रही, तो गत सत्र की तुलना में इस बार बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती।
समीक्षा की जाएगी
न्यून बोर्ड परीक्षा परिणामों वाले स्कूलों में सत्र पर्यंत पर्यवेक्षण के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेशभर में इसकी क्रियान्विति हो रही है, जहां उदासीनता बरती जा रही है, वहां कार्रवाई की जाएगी।
- -नथमल डिडेल, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर।

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रोक के बावजूद बैकडोर से शिक्षा विभाग में तबादले

वर्षभर से चल रहा तबादलों का खेल
डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से निर्धारित अवधि तक तबादलों से रोक हटाई गई लेकिन शिक्षा विभाग में विगत एक वर्ष से तबादलों का खेल चल रहा है। कभी परिवेदनाओं के नाम पर तो कभी संशोधित आदेशों के तहत चहेतों को इच्छित स्थान पर पदस्थापित किया जा रहा है। चालू माह में प्रधानाचार्यों के बैकडोर तबादलों की कवायद चल रही है। जबकि पदस्थापन हुए लम्बा समय बीत चुका है। ऐसे में संशोधित आदेशों के चक्कर में संस्था प्रधान स्कूलों को छोड़कर कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। जहां प्रदेशभर में शैक्षिक उन्नयन को लेकर शिक्षा निदेशक ने अभी से तैयारियां शुरू करने के आदेश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर व्याख्याता व द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के प्रतिदिन इक्का-दुक्का संशोधित आदेश जारी हो रहे हैं। 

अब शिक्षकों का इंतजार
जहां गत सत्र में पर्याप्त स्टाफ के चलते ग्रामीण स्कूलों में बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट परिणाम रहा, वहीं इस बार बैकडोर तबादलों के कारण जिले के दो दर्जन से अधिक स्कूलों में शिक्षकों की की से मिशन मैरिट तो दूर शत प्रतिशत परीक्षा परिणाम भी संभव नहीं लग रहा है।
काउंसलिंग के निर्देश हवा
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, उपनिदेशक व जिला शिक्षा अधिकारियों की ओर से विगत एक वर्ष में राज्य सरकार के निर्देशों के तहत काउंसलिंग की गई। निदेशालय ने आरपीएससी चयनित व्याख्याता व व्याख्याता तथा प्रधानाचार्य स्तर पर पदोन्नत अधिकारियों के पदस्थापन काउंसलिंग के माध्यम से किए। वहीं मंडल कार्यालयों में तृतीय श्रेणी से द्वितीय श्रेणी तथा जिला शिक्षा अधिकारी स्तर पर स्टाफिंग पैटर्न के तहत काउंसलिंग के माध्यम से पदस्थापन किया। आश्चर्य की बात यह है कि जितना समय विभाग को काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी करने में नहीं लगा, उससे अधिक समय संशोधित आदेशों में लग रहा है। स्थिति यह है कि काउंसलिंग के दौरान स्पष्ट निर्देशों के बावजूद चहेतों को पहले ऐसे स्कूलों में पदस्थापित कर दिया गया जहां पद ही नहीं था। जहां विधवा-परित्यकताओं को दूरस्थ स्कूलों में लगाया गया, वहीं स्वस्थ पुरुष शिक्षकों को कुछ माह तक वेतन व्यवस्था के बाद अब संशोधित आदेशों में शहर के स्कूलों में लाया जा रहा है।

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मूल वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर रेस्टा ने किया प्रदर्शन

बीकानेर। राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ (रेस्टा) के प्रदेश उप सभाध्यक्ष मोहरसिंह मीना के नेतृत्व में शिक्षकों ने बुध्वार को मूल वेतन 16290 करने की मांग को लेकर कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और अतिरिक्त जिला कलक्टर के मार्फत मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। शिक्षक नेताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि लम्बे समय से वरिष्ठ अध्यापकों की मांग को लेकर आश्वासनों की गोली दी जा रही है। मीना ने बताया कि 1 जुलाई 2013 से सभी का वेतन बढ़ाया गया लेकिन वरिष्ठ शिक्षकों को केवल ग्रेड पे 3600 की जगह केवल ग्रेड पे बदलकर 4200 कर केवल 600 ग्रेड पे का लाभ देकर 14430 किया गया, जबकि मूल वेतन 16290 होना था, जो नहीं किया गया। इससे वरिष्ठ अध्यापकों को हर माह 4 से 5 हजार का नुकसान हो रहा है। प्रदर्शन में प्रदेश महासचिव राघवेंद्र सिंह चौहान, जिला संरक्षक रामगोपाल, जिला उप सभाध्यक्ष मदन कड़वासरा, मुकेश जेवरिया, पूर्व जिलाध्यक्ष शिवचरण जोशी, श्याम सुंदर विश्नोई आदि शामिल थे।

 

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9876.85 लाख का बजट पारित

9876.85 लाख का बजट पारित
महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में बोम की बैठक, विभिन्न विषयों पर मंथन के बाद किया गया निर्णय
बीकानेर। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय प्रबंध मंडल (बोम) की बैठक बुधवार को कुलपति प्रो. भगीरथसिंह की अध्यक्षता में हुई। इसमें वर्ष 2017-18 के लिए 9876.85 लाख रुपए का बजट पारित किया गया। बैठक में एकेडमिक कौंसिल की बैठक में हुए निर्णयों का अनुमोदन किया गया। बैठक में विश्वविद्यालय की ओर से इस सत्र में शुरू किए जाने वाले नए कोर्सेज, परीक्षा स्कीम आदि पर मुहर लगाई गई।
इसके अलावा विश्वविद्यालय में पानी की कमी को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त जलापूर्ति के लिए 621 लाख रूपये की लागत से पाइप लाइन डलवाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। कर्मचारियों के कल्याण के लिए जोखिम निधि, छात्रों के लिए संचित निधि कोष (कोर्पस फंड), आकस्मिक व्यय व भामाशाहों की ओर से प्रदान किए जाने वाले आर्थिक सहयोग के लिए लोक अंशदान कोष की स्थापना के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

परिवेदनाओं का होगा निस्तारण
बैठक में शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सेवा संबंधी परिवेदनाओं के निस्तारण के लिए ग्रिवांस कमेटी के गठन का अनुमोदन किया गया। इसके अलावा छात्र-संघ संविधान का अनुमोदन किया गया। विवि कर्मचारियों की पेंशन, ग्रेच्युटी एवं सेवानिवृति लाभ सुनिश्चित करने के लिए पेंशन व ग्रेच्युटी फंड निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई।

संशोधित बजट स्वीकृत
विश्वविद्यालय में नवीन अकादमिक भवन, 1500 दर्शकों की क्षमता का ऑडिटोरियम एवं स्पोर्टस कॉम्पलेक्स के निर्माण के लिए संशोधित बजट की स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अलावा विवि कार्यों के लिए आने वाले विभिन्न विशेषज्ञों-अतिथियों के लिए वाहन की नवीन दरों का निर्धारण किया गया। बैठक में बीकानेर पश्चिम विधायक डॉ. गोपाल जोशी, राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में डॉ दिग्विजय सिंह, डॉ सुशील कुमार बिस्सु, डॉ राजीव सक्सेना व अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।

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