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शिक्षा (77)

असमिया संस्कृति से रूबरू होंगे कॉलेज विद्यार्थी, 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' संकल्पना के तहत असम बना स्टेट पार्टनर

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर। केंद्र सरकार के एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान के तहत अब पूर्वोतर का प्रमुख राज्य असम हमारा स्टेट पार्टनर होगा। इसके तहत अब कॉलेज विद्यार्थियों को असमी संस्कृति, भाषा, विरासत का ज्ञान कराया जाएगा। इसको लेकर कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय ने एक आदेश जारी किया है। विविधता में एकता के नारे को साकार करने के उद्देश्य से इस अभियान को कॉलेज स्तर पर लागू किया गया है। अभियान के तहत पूरे देश में दो दो राज्यों की जोड़ी बनाई गई थी। पहले राजस्थान के साथ पश्चिम बंगाल को जोड़़ा गया था लेकिन अब बंगाल के स्थान पर असम को जोड़ा गया है।

असम में लेंगे शपथ राष्ट्रीय एकता की शपथ
अभियान के तहत 31 अक्टूबर को दी जाने वाली राष्ट्रीय एकता की शपथ हिन्दी के साथ असमी भाषा में दिलाई जाएगी इसका असमी अनुवाद आयुक्तालय स्तर पर करवाकर कॉलेजों को भिजवाया जाएगा।

प्रतियोगिताएं होगी आयोजित
अभियान के तहत कॉलेजों में समय समय पर असम की कला, संस्कृति, भाषा, परंपरा, साहित्य, प्रमुख घटनाएं इतिहास, भौगोलिक विरासत, महापुरूषों के बारे में क्विज,पोस्टर लेखनी संबंधित प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी ताकि विद्यार्थी उनके बारे में जान सकें।

रहेगी दो सीटें रिजर्व
अगले साल से हर कॉलेज में प्रथम वर्ष में असमी विद्यार्थियों के लिए दो सीटें आरक्षित रहेंगी। प्रवेश नीति के साथ ही रिजर्व रहने वाली सीटें अंतिम तिथि से पन्द्रह दिन तक रिजर्व रखी जाएगी और उसके बाद में खाली रहने पर स्थानीय विद्यार्थियों से भरी जाएगी।

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"गुरुजी" की कुंडली कब देखेगा विभाग

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, बोर्ड परीक्षा परिणामों में फिसड्डी रहे माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों के कुशल समन्वय को लेकर निदेशक के प्रयास दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। एक माह पूर्व निदेशक ने आदेश जारी कर जिला शिक्षा अधिकारियों व समकक्ष अधिकारियों को जिलों के कमजोर स्कूलों में प्रतिदिन मॉनिटरिंग के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए थे, जिसकी क्रियान्विति भी हो गई लेकिन विडम्बना की बात है कि किसी भी अधिकारी ने स्कूल में जाकर यह नहीं देखा कि 'बच्चे कैसे पढ़ रहे हैं और गुरुजी कैसे पढ़ा रहे हैं।Ó निदेशालय स्तर पर समीक्षा के दौरान बीकानेर सहित कई जिलों में ऐसी अव्यवस्था सामने आने को गंभीरता से लेते हुए निदेशक ने फटकार लगाई है और मिथ्या रिपोर्ट पेश करने वालों की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शिक्षा सत्र २०१६-१७ में सरकारी स्कूलों का दसवीं, बारहवीं बोर्ड का परीक्षा परिणाम बेहतर रहा लेकिन प्रत्येक जिले में कई ऐसे स्कूलों में परीक्षा परिणाम काफी कमजोर रहा। राज्य स्तर पर बोर्ड परीक्षा परिणामों की समीक्षा के बाद कमजोर परिणामों वाले स्कूलों का सत्र पर्यंत पर्यवेक्षण करने का निर्णय किया गया। जिला शिक्षा अधिकारियों, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारियों, रमसा के अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक हर रोज स्कूलों में शैक्षिक स्तर सुधारेंगे।

यहां दीपक तले अंधेरा
बीकानेर जिले में कमजोर परीक्षा परिणामों वाले दसवीं व बारहवीं के विद्यालयों की संख्या करीब पचास है, जिनमें जिला शिक्षा अधिकारियों, एडीईईओ, एडीपीसी व समकक्ष अधिकारियों की जिम्मेवारी तय की हुई है लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि अधिकांश ने अपनी रिपोर्ट में पर्यवेक्षण का जिक्र किया है लेकिन हकीकत में अधिकांश स्कूलों तक गए ही नहीं। ऐसे में बोर्ड परीक्षा परिणाम उन्नयन को लेकर निदेशक की योजना दम तोड़ती नजर आ रही है।
नहीं शुरू हुआ मिशन मैरिट
गत सत्र में बीकानेर मंडल में मिशन मैरिट योजना शुरू हुई, जिसका बोर्ड परीक्षाओं में सार्थक परिणाम भी देखने को मिला लेकिन इस बार बीकानेर मंडल में मिशन मैरिट शुरू करने का मानस अधिकारी नहीं बना पाए हैं। निदेशालय स्तर पर भी प्रयास २०१८ को लेकर कोई काम नहीं हो रहा है। यही स्थिति रही, तो गत सत्र की तुलना में इस बार बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती।
समीक्षा की जाएगी
न्यून बोर्ड परीक्षा परिणामों वाले स्कूलों में सत्र पर्यंत पर्यवेक्षण के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेशभर में इसकी क्रियान्विति हो रही है, जहां उदासीनता बरती जा रही है, वहां कार्रवाई की जाएगी।
- -नथमल डिडेल, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर।

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रोक के बावजूद बैकडोर से शिक्षा विभाग में तबादले

वर्षभर से चल रहा तबादलों का खेल
डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर, प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से निर्धारित अवधि तक तबादलों से रोक हटाई गई लेकिन शिक्षा विभाग में विगत एक वर्ष से तबादलों का खेल चल रहा है। कभी परिवेदनाओं के नाम पर तो कभी संशोधित आदेशों के तहत चहेतों को इच्छित स्थान पर पदस्थापित किया जा रहा है। चालू माह में प्रधानाचार्यों के बैकडोर तबादलों की कवायद चल रही है। जबकि पदस्थापन हुए लम्बा समय बीत चुका है। ऐसे में संशोधित आदेशों के चक्कर में संस्था प्रधान स्कूलों को छोड़कर कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। जहां प्रदेशभर में शैक्षिक उन्नयन को लेकर शिक्षा निदेशक ने अभी से तैयारियां शुरू करने के आदेश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर व्याख्याता व द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के प्रतिदिन इक्का-दुक्का संशोधित आदेश जारी हो रहे हैं। 

अब शिक्षकों का इंतजार
जहां गत सत्र में पर्याप्त स्टाफ के चलते ग्रामीण स्कूलों में बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट परिणाम रहा, वहीं इस बार बैकडोर तबादलों के कारण जिले के दो दर्जन से अधिक स्कूलों में शिक्षकों की की से मिशन मैरिट तो दूर शत प्रतिशत परीक्षा परिणाम भी संभव नहीं लग रहा है।
काउंसलिंग के निर्देश हवा
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, उपनिदेशक व जिला शिक्षा अधिकारियों की ओर से विगत एक वर्ष में राज्य सरकार के निर्देशों के तहत काउंसलिंग की गई। निदेशालय ने आरपीएससी चयनित व्याख्याता व व्याख्याता तथा प्रधानाचार्य स्तर पर पदोन्नत अधिकारियों के पदस्थापन काउंसलिंग के माध्यम से किए। वहीं मंडल कार्यालयों में तृतीय श्रेणी से द्वितीय श्रेणी तथा जिला शिक्षा अधिकारी स्तर पर स्टाफिंग पैटर्न के तहत काउंसलिंग के माध्यम से पदस्थापन किया। आश्चर्य की बात यह है कि जितना समय विभाग को काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी करने में नहीं लगा, उससे अधिक समय संशोधित आदेशों में लग रहा है। स्थिति यह है कि काउंसलिंग के दौरान स्पष्ट निर्देशों के बावजूद चहेतों को पहले ऐसे स्कूलों में पदस्थापित कर दिया गया जहां पद ही नहीं था। जहां विधवा-परित्यकताओं को दूरस्थ स्कूलों में लगाया गया, वहीं स्वस्थ पुरुष शिक्षकों को कुछ माह तक वेतन व्यवस्था के बाद अब संशोधित आदेशों में शहर के स्कूलों में लाया जा रहा है।

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मूल वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर रेस्टा ने किया प्रदर्शन

बीकानेर। राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ (रेस्टा) के प्रदेश उप सभाध्यक्ष मोहरसिंह मीना के नेतृत्व में शिक्षकों ने बुध्वार को मूल वेतन 16290 करने की मांग को लेकर कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और अतिरिक्त जिला कलक्टर के मार्फत मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। शिक्षक नेताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि लम्बे समय से वरिष्ठ अध्यापकों की मांग को लेकर आश्वासनों की गोली दी जा रही है। मीना ने बताया कि 1 जुलाई 2013 से सभी का वेतन बढ़ाया गया लेकिन वरिष्ठ शिक्षकों को केवल ग्रेड पे 3600 की जगह केवल ग्रेड पे बदलकर 4200 कर केवल 600 ग्रेड पे का लाभ देकर 14430 किया गया, जबकि मूल वेतन 16290 होना था, जो नहीं किया गया। इससे वरिष्ठ अध्यापकों को हर माह 4 से 5 हजार का नुकसान हो रहा है। प्रदर्शन में प्रदेश महासचिव राघवेंद्र सिंह चौहान, जिला संरक्षक रामगोपाल, जिला उप सभाध्यक्ष मदन कड़वासरा, मुकेश जेवरिया, पूर्व जिलाध्यक्ष शिवचरण जोशी, श्याम सुंदर विश्नोई आदि शामिल थे।

 

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9876.85 लाख का बजट पारित

9876.85 लाख का बजट पारित
महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में बोम की बैठक, विभिन्न विषयों पर मंथन के बाद किया गया निर्णय
बीकानेर। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय प्रबंध मंडल (बोम) की बैठक बुधवार को कुलपति प्रो. भगीरथसिंह की अध्यक्षता में हुई। इसमें वर्ष 2017-18 के लिए 9876.85 लाख रुपए का बजट पारित किया गया। बैठक में एकेडमिक कौंसिल की बैठक में हुए निर्णयों का अनुमोदन किया गया। बैठक में विश्वविद्यालय की ओर से इस सत्र में शुरू किए जाने वाले नए कोर्सेज, परीक्षा स्कीम आदि पर मुहर लगाई गई।
इसके अलावा विश्वविद्यालय में पानी की कमी को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त जलापूर्ति के लिए 621 लाख रूपये की लागत से पाइप लाइन डलवाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। कर्मचारियों के कल्याण के लिए जोखिम निधि, छात्रों के लिए संचित निधि कोष (कोर्पस फंड), आकस्मिक व्यय व भामाशाहों की ओर से प्रदान किए जाने वाले आर्थिक सहयोग के लिए लोक अंशदान कोष की स्थापना के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

परिवेदनाओं का होगा निस्तारण
बैठक में शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सेवा संबंधी परिवेदनाओं के निस्तारण के लिए ग्रिवांस कमेटी के गठन का अनुमोदन किया गया। इसके अलावा छात्र-संघ संविधान का अनुमोदन किया गया। विवि कर्मचारियों की पेंशन, ग्रेच्युटी एवं सेवानिवृति लाभ सुनिश्चित करने के लिए पेंशन व ग्रेच्युटी फंड निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई।

संशोधित बजट स्वीकृत
विश्वविद्यालय में नवीन अकादमिक भवन, 1500 दर्शकों की क्षमता का ऑडिटोरियम एवं स्पोर्टस कॉम्पलेक्स के निर्माण के लिए संशोधित बजट की स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अलावा विवि कार्यों के लिए आने वाले विभिन्न विशेषज्ञों-अतिथियों के लिए वाहन की नवीन दरों का निर्धारण किया गया। बैठक में बीकानेर पश्चिम विधायक डॉ. गोपाल जोशी, राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में डॉ दिग्विजय सिंह, डॉ सुशील कुमार बिस्सु, डॉ राजीव सक्सेना व अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।

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फिर गुरुजी को कैसे पहचानेंगे अभिभावक!

विद्यालय स्टाफ की फोटोयुक्त सूचना चस्पा करने के आदेशों की निकली हवा, नए संस्था प्रधान आदेशों से अनभिज्ञ
बीकानेर। विद्यालय में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को स्टाफ के बारे में बिना पूछे जानकारी मुहैया कराने के लिए शुरू की गई फोटोयुक्त सूचना चस्पा करने की योजना ठंडे बस्ते में चली गई है। गत सत्र में पहले माध्यमिक शिक्षा निदेशक और बाद में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (रमसा) की ओर से इसके लिए आदेश जारी किए गए, जिनकी एकबारगी क्रियान्विति भी हो गई लेकिन अब अधिकांश स्कूलों में कहीं गुरुजी का फोटो गायब है, तो कहीं फोटो वाले गुरुजी स्थानांतरित होकर अन्यत्र जा चुके हैं। आश्चर्य की बात यह है कि लगातार प्रशिक्षण शिविरों में शामिल होने के बाद भी कई संस्था प्रधानों को इस बारे में जानकारी तक नहीं है।
क्या है योजना
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने सितम्बर २०१६ में आदेश जारी कर सभी संस्था प्रधानों को उनके यहां कार्यरत स्टाफ की फोटोयुक्त सूचना ऑफिस के आगे बोर्ड पर चस्पा करने के निर्देश दिए। आदेश में कहा गया कि अधिकांश अभिभावकों को पता नहीं है कि स्कूल में कौन-कौन से गुरुजी कार्यरत है। ऐसे में स्कूल आने-जाने के दौरान अभिभावकों से संवाद नहीं हो पाता। फोटो युक्त सूचना लगी होने पर स्कूल में आने वालों को जानकारी हो सकेगी कि फलां शिक्षक विद्यालय में किस विषय का अध्यापन कराता है।
दर्पण हो गया धुंधला
इसी योजना के साथ माध्यमिक शिक्षा के प्रत्येक विद्यालय में आदमकद दर्पण लगाने के आदेश दिए गए, ताकि विद्यालय में प्रवेश के समय विद्यार्थी अपना चेहरा देख सके और स्वच्छता के लिए प्रेरित हो। जानकारी के अनुसार अधिकांश स्कूलों में दर्पण की खरीद हो गई लेकिन स्कूल में प्रवेश द्वार के समीप लगे होने के कारण धूप व बारिश में दर्पण धुंधले हो गए हैं, वहीं अनेक स्कूलों में टूट चुके हैं। हालांकि संस्था प्रधान नए दर्पण की खरीद कर सकते हैं परन्तु नए निर्देशों के अभाव में संस्था प्रधान भी दर्पण की खरीद से मुंह छिपा रहे हंै।

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मुख्यमंत्री का पुतला फूंकेगें पुतला, मोहन सियाग ने की घोषणा

बीकानेर। वेतन कटौती के आदेश के विरोध में रेसला की ओर से शुरू किए गए आंदोलन के तहत मंगलवार को कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री का पुतला फूंका जाएगा। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष मोहन सियाग का कहना है कि एक तरफ सातवें वेतन आयोग व पूर्व की वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग लम्बे समय से कर्मचारी कर रहे हैं, दूसरी ओर सरकार ने वेतनवृद्धि रोकने का आदेश दिया है, जिससे कर्मचारियों ने रोष व्याप्त है। संगठन के जिलाध्यक्ष गिरधारी गोदारा ने बताया कि सोमवार को सभी जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन व मुख्यमन्त्री का पुतला दहन किया जाएगा। संगठन के डॉ. जगदीश का कहना है कि आगामी 21 अगस्त को जयपुर में आक्रोश रैली निकाली जाएगी। इसमें प्रदेश के करीब 50 हजार व्याख्याता शामिल होंगे।

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क्लिक योजना को लगा 'ग्रहण'

-जिले के 197 माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में शुरू होनी है योजना, अब तक 12 में ही हुआ एमओयू
बीकानेर। माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में कक्षा छह से दसवीं तक के बच्चों को कम्प्यूटर साक्षर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई क्लिक योजना को ग्रहण लग गया है। प्रदेश में करीब 7500 स्कूलों में क्लिक योजना शुरू होनी है लेकिन अब तक पांच फीसदी स्कूलों में ही आईटी ज्ञान केन्द्र से अनुबंध हुआ है। बीकानेर जिले में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति है। यहां 197 स्कूलों में से केवल बारह में ही अनुबंध हुआ है लेकिन वह भी दिखावे के लिए। ऐसे में चालू सत्र में क्लिक योजना का संचालन खटाई में नजर आ रहा है।
प्रदेश के करीब साढ़े सात हजार स्कूलों में वर्षों से स्थापित कम्प्यूटर लैब का व्यापक उपयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सत्र 2017-18 में क्लिक योजना शुरू की गई। योजना का उद्देश्य निजी स्कूलों की भांति सरकारी स्कूलों में छोटी कक्षाओं के विद्यार्थियों को कम्प्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराना है। पूर्व में कम्प्यूटर शिक्षा का खर्च राज्य सरकार वहन करती थी लेकिन विगत कुछ सालों से सरकार ने हाथ खड़े कर दिए। ऐसे में कम्प्यूटर कबाड़ बन रहे हैं। इनके सार्थक उपयोग के लिए क्लिक योजना बनाई गई है। लेकिन योजना स्ववित्त पोषित होने के कारण विद्यार्थियों से फीस वसूलने की बात पर संस्था प्रधान हाथ पीछे खींच रहे हैं।
अनुबंध की खानापूर्ति
जिले के 197 माध्यमिक शिक्षा के विद्यालयों में कम्प्यूटर लैब स्थापित है, जहां सत्र 2017-18 में क्लिक योजना शुरू करने के आदेश दिए गए हैं लेकिन केवल १२ स्कूलों में ही आईटी ज्ञान केन्द्रों के साथ अनुबंध हुआ है। लेकिन अनुबंध के बाद भी कम्प्यूटर शिक्षा शुरू नहीं हुई है।
संस्था प्रधान नहीं ले रहे रूचि
क्लिक योजना को लेकर शुरूआत से ही संस्था प्रधान अरूचि दिखा रहे हैं। पहले 200 नामांकन का बहाना बनाया जा रहा था लेकिन रमसा की ओर से 100 नामांकन पर क्लिक योजना शुरू करने की छूट देने के बाद अब विद्यार्थियों से कम्प्यूटर फीस नहीं मिलने की बात कहकर ंअनुबंध नहीं किया जा रहा है। हालांकि रमसा की ओर से योजना की क्रियान्विति को लेकर संस्था प्रधानों को कई बार आदेश दिए जा चुके हैं।
निर्देश दिए जाएंगे
क्लिक योजना की क्रियान्विति में संस्था प्रधान ढिलाई बरत रहे हैं। बहुत कम स्कूलों में अनुबंध हुआ है। पुन: निर्देश दिए जाएंगे

हेतराम सारण, अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक, आरएमसए

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शिक्षकों की वेतनवृद्वि रोकने के आदेश वापिस लेने की मांग

 बीकानेर। वित्त विभाग की ओर से शिक्षकों के ग्रेड पे में कटौती करने तथा वेतन वृद्वि रोकने के जारी आदेश को अपास्त करने एवं द्वितीय वेतन श्रृखला तथा अन्य सवंर्गो के वेतनमान में ंरही विसंगति को दूर करने व सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन दिलवाने आदि की मांग को लेकर राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रान्तीय आव्हान पर शुक्रवार को शिक्षकों ने अतिरिक्त जिला कलक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदेशमंत्री रवि आचार्य ने कहा कि गत 2-3 वर्षो में शिक्षा क्षेत्र में शिक्षकों की ओर से शिक्षा के विकास के लिए नवाचारों से नामांकन भी बढ़ा है, तो परीक्षा परिणाम में भी वृद्धि हुई है। जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश विश्नोई ने कहा कि सरकार मे बैठक उच्च अधिकारी शिक्षकों के धैर्य को कमजोरी मानकर नित नये आदेश जारी करवाकर शिक्षकों को कमजोर करने पर तुले हुए है। नगर अध्यक्ष शिवकुमार व्यास नगरमंत्री दिनेश आचार्य, त्रिपुरारी चतुर्वेदी, सुरेश कुमार, प्रवीण टॉक आदि शिक्षक नेताओं ने भी आदेशों की क्रियान्विति रोकने की मांग की।

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पोर्टल को शीघ्र शुरू करने की मांग

बीकानेर। जिले के पचास फीसदी स्कूलों की मान्यता खटाई में होने के संबंध में दैनिक नेशनल राजस्थान में प्रकाशित समाचार के बाद स्वयंसेवी शिक्षण संस्था संघ हरकत में आया है। संगठन के जिलाध्यक्ष कोडाराम भादू ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक को ज्ञापन देकर निजी विद्यालयों की मान्यता के १४ जुलाई को बंद किए गए पोर्टल को शीघ्र शुरू करने की मांग की है। ज्ञापन में बताया कि शिक्षा विभाग की ओर से सत्र 2017-18 में नवीन मान्यता क्रमोन्नति, अतिरिक्त विषय, स्थान परिवर्तन के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे। अनेक विद्यालयों का अभी तक निरीक्षण नहीं हुआ है। 14 जुलाई को अचानक पोर्टल बन्द कर देने से आधे से अधिक विद्यालयों के निरीक्षण के लिए पैनल दल गठित नहीं हो पाए। जिसके बिना मान्यता संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि गत वर्ष ऐसी ही स्थिति 25 मार्च 201७ को अचानक पोर्टल बन्द कर दिया गया। जिसके कारण पैनल निरीक्षण दलों की अनुशंसा के बावजूद जिले के 42 निजी विद्यालयों को मान्यता नहीं मिल पाई।

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