Menu

शिक्षा (82)

माध्यमिक कक्षाओं में प्रवेश तिथि 15 तक बढ़ाई

बीकानेर। प्रदेश में माध्यमिक कक्षाओं में प्रवेश की तिथि १५ अगस्त तक बढ़ा दी गई है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक नथमल डिडेल ने बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी किए। इससे पहले प्रवेश की ंअंतिम तिथि ३१ जुलाई निर्धारित की गई। इसके बाद भी सरकारी स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदन आने की जानकारी के मद्देनजर निदेशक ने इसे १५ अगस्त तक बढ़ाया है।

Read more...

जीएसटी ने बिगाड़ा छात्राओं की साइकिल का बजट छात्राओं को वितरित होगी भगवां रंग की नीलम साइकिल, दूसरी बार नेगोसिएशन में मिली ३१५१ रुपए प्रति साइकिल की दर

बीकानेर। जीएसटी का असर पेट्रोल से चलने वाले वाहन ही नहीं बल्कि साइकिलों की कीमत पर भी पड़ा है। इसका आंकलन माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से सत्र २०१७-१८ में खरीदी जाने वाली साइकिलों की कीमत से लगाया जा सकता है। राज्य सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में कक्षा 9 में अध्ययरत बालिकाओं के लिए इस बार ३१५१ रुपए प्रति साइकिल खरीद की जाएगी। राज्य स्तरीय क्रय समिति ने सत्र २०१७-१८ में साइकिल खरीद प्रक्रिया में नेगोसिएशन के बाद सेठ इंडस्ट्रीयल (नीलम साइकिल) की कीमत पर संतोष जताते हुए साइकिल खरीद का निर्णय कर लिया है। हालांकि अब तक कार्यादेश जारी नहीं हुए हैं लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि सितम्बर माह में साइकिलों का वितरण शुरू हो जाएगा।
राज्य सरकार की ओर से इस बार ३.२५ लाख छात्राओं को साइकिल का वितरण किया जाएगा। हालांकि ९० करोड़ का बजट जारी हुआ है लेकिन ३१५१ रुपए प्रति साइकिल खरीद होने पर सरकार को १०२ करोड़ से अधिक का भुगतान करना पड़ेगा। हालांकि छात्राओं की संख्या में भी कमी-वृद्धि हो सकती है।
जीएसटी से बढ़ी दर
जीएसटी लागू होने से इस बार करीब २०० रुपए प्रति साइकिल महंगी पड़ेगी। राज्य स्तरीय क्रय समिति ने भी मीटिंग की कार्रवाई में इस बात का उल्लेख किया है कि फर्म को पहले ५.५ प्रतिशत टैक्स देना पड़ता था। जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स १२ प्रतिशत हो गया है। ऐसे में ३१५१ रुपए प्रति साइकिल दर सही है।

दूसरी बार नेगोसिएशन पर संतोष
राज्य स्तरीय क्रय समिति की ओर से २४ जुलाई को वित्तीय बिड खोलने के बाद सबसे कम ३३९० रुपए प्रति साइकिल दर प्रस्तुत करने वाली सेठ इंडस्ट्रीयल को नेगोसिएशन के लिए निर्देश दिए गए। फर्म की ओर से नेगोसिएशन में ३१९० रुपए प्रति साइकिल दर प्रस्तुत की गई, जिसे क्रय समिति ने अधिक मानते हुए और अधिक दर कम करने की बात कही। इस पर फर्म प्रतिनिधि ने ३१५१ रुपए प्रति साइकिल आपूर्ति की अंतिम दर प्रस्तुत की, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।
चार माह में करना होगा वितरण
राज्य सरकार के निर्देशानुसार बालिकाओं को ओरेंज (भगवां) रंग की लेडिज साइकिल का वितरण करना होगा। फर्म को प्रत्येक जिले के नोडल विद्यालयों में जाकर साइकिल असेम्बल करनी होगी। फर्म को अनुमानित ३.२५ लाख साइकिलों की आपूर्ति १२० दिन में करनी होगा।

Read more...

स्पोर्ट्स स्कूल में अब आएंगे "अच्छे दिन"

सार्दुल स्पोटर््स स्कूल में सात महत्वपूर्ण खेलों के कोच लगाने के लिए वाक्-इन-इंटरव्यू की तारीख घोषित
डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर। राज्य के एक मात्र राजकीय स्पोटर््स स्कूल के अच्छे दिन जल्दी ही आने वाले हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने सार्दुल स्पोटर््स स्कूल में सात महत्वपूर्ण खेलों से संबंधित कोच के रिक्त पदों को भरने की कवायद शुरू की है। इन पदों पर वाक्-इन-इंटरव्यू के माध्यम से कोच का चयन किया जाएगा। स्पोटर््स स्कूल व माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में विभिन्न पदों पर साक्षात्कार के लिए निदेशक ने ९ व १० अगस्त की तारीख घोषित की है। इसमें स्पोटर््स स्कूल के लिए साक्षात्कार १० को होंगे। राजकीय स्पोटर््स स्कूल में विभिन्न खेलों से संबंधित कोच के पद लम्बे समय से रिक्त चल रहे हैं। हालांकि प्रतिनियुक्ति पर लगे शारीरिक शिक्षक भी खिलाडिय़ों के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं परन्तु कई खेलों में जहां प्रतिवर्ष खिलाड़ी मेडल लाते थे, उनमें विगत कई सालों से स्थिति गिरती जा रही है। स्कूल स्तर पर रिक्त पदों को भरने के लिए लम्बे समय से प्रयास किए जा रहे थे।

एक साल से अटका मामला
सार्दुल स्पोटर््स स्कूल में हॉकी, कुश्ती, बास्केटबॉल, खो-खो, क्रिकेट, जिम्नास्टिक, वॉलीबाल के कोच के पद भरने की कवायद एक वर्ष से चल रही है। तत्कालीन निदेशक बीएल स्वर्णकार ने वाक्-इन-इंटरव्यू के लिए टाईमफ्रेम जारी किया था, लेकिन निदेशालय के मंत्रालयिक व अधिकारी संवर्ग के कार्मिकों की ओर से विरोध करने पर इंटरव्यू स्थगित करने पड़े। इसके करीब दो माह बाद राज्य सरकार ने पुन: वाक्-इन-इंटरव्यू के लिए तारीख घोषित की लेकिन वह मामला भी अटक गया। अब वर्तमान निदेशक के प्रयासों से वाक्-इन-इंटरव्यू की तारीख घोषित हुई है, जिसके सिरे चढऩे पर स्पोटर््स स्कूल के दिन फिर सकते हैं।
शीघ्र भरेंगे पद
सार्दुल स्पोटर््स स्कूल व निदेशालय में विभिन्न संवर्गों के रिक्त पदों को भरने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। ९-१० अगस्त को वाक्-इन-इंटर-व्यू के बाद योग्यताधारी कार्मिकों का चयन किया जाएगा।
नथमल डिडेल, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर।

Read more...

शिक्षक व शिक्षार्थी का ठहराव करेंगे सुनिश्चित किराड़ू ने ग्रहण किया डीईईओ प्रारंभिक का कार्यभार

बीकानेर। उमाशंकर किराड़ू ने जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) के पद पर बुधवार को कार्यभार ग्रहण कर लिया। इससे पहले ब्रह्मानंद शर्मा डीईईओ प्रारंभिक थे। कार्यभार ग्रहण करने के बाद किराड़ू ने बताया कि जिले में शैक्षणिक गुणात्मक सुधार को सुनिश्चित करने के साथ ही बंद स्कूलों को अतिशीघ्र खोलना प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं का विधिसम्मत समाधान निकाला जाएगा औ सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं पर फोकस किया जाएगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों का ठहराव सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
स्वागत के साथ बताई समस्याएं
किराडू के कार्यग्रहण के बाद उनके स्वागत के लिए अधिकारियों के साथ-साथ शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी भी पहुंचे। शिक्षक नेता सुभाष आचार्य, गुरूचरण सिंह मान, शिक्षक संघ शेखावत के श्रवण पुरोहित, संजय पुरोहित, शिक्षक संघ भगतसिंह के किशोर पुरोहित, राजस्थान शारीरीक शिक्षक संघ के ओम आचार्य, राजेन्द्र व्यास, अविनाश व्यास, दिलीप जोशी, कर्मचारी नेता जयगोपाल जोशी, लक्ष्मण पुरोहित सहित अनेक संगठनों के पदाधिकारियों ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया तथा अनोपचारिक बातचीत में समस्याओं से अवगत कराया। इस दौरान नीतिश वर्मा, आनन्द पारीक, रूबी जूसावत आदि भी मौजूद थे।

Read more...

प्रशिक्षण में लिया ज्ञान, फिर भी गुरुजी अज्ञान!

संयुक्त निदेशक कार्मिक ने किया जिले की तीन स्कूलों का औचक निरीक्षण, अव्यवस्थाओं पर लगाई फटकार, अनुपस्थित मिले तीन शिक्षकों पर कार्रवाई के निर्देश
बीकानेर। कक्षा एक से पांच तक के बच्चों के शैक्षिक स्तर में सुधार को लेकर चलाई जा रही एसआईक्यूई योजना के क्रियान्वयन में कितना झोल है, इसकी बानगी बुधवार को संयुक्त निदेशक (कार्मिक) नूतन बाला कपिला के निरीक्षण में देखने को मिली। संयुक्त निदेशक ने जिले के तीन स्कूलों का औचक निरीक्षण किया, इनमें से दो स्कूलों में एसआईक्यूई के नाम पर खानापूर्ति सामने आई। इस पर संयुक्त निदेशक ने फटकार लगाते हुए सुधार के निर्देश दिए।



प्रत्युतर में अटके गुरुजी
संयुक्त निदेशक ने नापासर के राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान वहां चल रहे एसआईक्यूई प्रशिक्षण का भी अवलोकन किया। संयुक्त निदेशक ने इस दौरान प्रशिक्षणार्थी शिक्षकों से एसआईक्यूई के बारे में प्रश्न किए, तो शिक्षक सही प्रत्युत्तर नहीं दे पाए। शिक्षकों को फटकार लगाते हुए उन्होंने गंभीरता पूर्वक प्रशिक्षण लेने के निर्देश दिए, साथ ही संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षण की मॉनिटरिंग के निर्देश दिए।
अध्यापन का तरीका गलत
नापासर में ही राजकीय गीतादेवी बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के निरीक्षण के दौरान संयुक्त निदेशक ने एसआईक्यूई व लहर कक्ष का अवलोकन किया। इस दौरान लहर कक्ष में एसआईक्यूई पैटर्न पर कराए जा रहे अध्यापन के तरीके को संयुक्त निदेशक ने गलत बताते हुए फटकार लगाई। संयुक्त निदेशक ने इसे संस्था प्रधान के उत्तरदायित्व में लापरवाही मानते हुए नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए।
आखिरी बार कब हुई शौचालय की सफाई?
रिडमलसर के राजकीय माध्यमिक विद्यालय में संयुक्त निदेशक ने सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने शौचालय के निरीक्षण के बाद स्टाफ से पूछा कि आखिरी बार कब हुई थी, सफाई। उन्होंने सफाई व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए।
तीन शिक्षक मिले नदारद
रिडमलसर के रामावि में निरीक्षण के दौरान कार्यवाहक संस्था प्रधान सहित तीन शिक्षक नदारद मिले। इस पर शिक्षकों की अनुपस्थिति दर्ज करते हुए उपनिदेशक को संबंधित को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। संयुक्त निदेशक ने बताया कि तीन शिक्षक बिना सूचना के अनुपस्थित पाए गए। इसमें कार्यवाहक संस्था प्रधान व वरिष्ठ अध्यापिका रेखा गुप्ता, वरिष्ठ अध्यापक ओंकारङ्क्षसह व तृतीय श्रेणी लेवल द्वितीय की अध्यापिका आशा बागवानी को नोटिस जारी करने के उपनिदेशक को निर्देश दिए गए।

Read more...

स्कूलों में जाकर अधिकारी चखेंगे पोषाहार का स्वाद!

बीकानेर। पोषाहार के मीन्यू से छेड़छाड़ करने वाले स्कूलों पर आगामी दो दिन भारी पडऩे वाले हैं। राज्य स्तर पर गुरुवार से स्कूलों में मिड-डे-मील के निरीक्षण के लिए सघन जांच अभियान शुरू होगा। जिसमें स्कूल में संबंधित वार के अनुसार मीन्यू से गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं पाया गया, तो संस्था प्रधान के साथ-साथ पोषाहार प्रभारी पर भी गाज गिरेगी। हालांकि कौन सी स्कूल में कौन सा अधिकारी गुरुवार व शुक्रवार को निरीक्षण करेंगे। इसकी जानकारी स्वयं अधिकारियों को भी नहीं मिली है। ऐसे में आकस्मिक निरीक्षण कइयों पर भारी पड़ सकता है।
पोषाहार योजना के तहत सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिड-डे-मील दिया जाता है। राज्य सरकार की ओर से इसके लिए मीन्यू तय किया गया है, जिसमें मीन्यू को आगे-पीछे कर आंशिक परिवर्तन स्कूल अपने स्तर पर कर सकते हैं लेकिन पोषाहार निर्धारित मीन्यू व मापदंड के अनुरूप तैयार होना जरूरी है। गत दिनों मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से मिड-डे-मील का औचक निरीक्षण किया गया था, जिसमें कई स्कूलों में खामियां मिली थी, जिन्हें दुरूस्त करने के निर्देश दिए गए थे। अब निरीक्षण में पुन: खामियां पाई गई, तो संबंधित कार्मिकों पर गाज गिरने पक्की है।
जिला कलक्टर ने सौंपी जिम्मेदारी
जिले में प्रारंभिक शिक्षा के अधीन १५६३ विद्यालय संचालित है, वहीं माध्यमिक शिक्षा के अधीन ३५३ विद्यालयों में मिड-डे मील बनाया जाता है। जिला कलक्टर की ओर से इनमें से बीस प्रतिशत स्कूलों में एमडीएम के सघन निरीक्षण के लिए कार्मिकों की ड्यूटी लगाई है, जो स्वयं पोषाहार को चखकर गुणवत्ता की जांच करेंगे और वास्तविक स्थिति प्रपत्र में भरेंगे।
अनेक स्कूलों में पढ़ाई की छुट्टी
दो दिवसीय एमडीएम निरीक्षण अभियान के दौरान जिले के कई ऐसे स्कूल हैं, जहां पढ़ाई की छुट्टी हो जाएगी। इन स्कूलों में
एकल शिक्षक ही कार्यरत है। ऐसे में निर्धारित समय पर पोषाहार पकाने तथा जांच करवाने की प्रक्रिया पूरी करने में अधिकांश समय बीत जाएगा। ऐसे में दो दिनों तक इन स्कूलों में पढ़ाई की अघोषित छुट्टी मानी जा रही है। हालांकि बुधवार को संस्था प्रधानों ने विद्यार्थियों को आगामी दो दिन तक शत-प्रतिशत उपस्थिति के निर्देश दिए हैं।

Read more...

म्हारी छोरिया कै, क्रिकेट में छोरां से कम है के

राजस्थान की छोरियां, कब खेलेगी क्रिकेट?
अनुराग हर्ष. बीकानेर। विश्वकप क्रिकेट में भारतीय टीम भले ही फाइनल मैच हार गई लेकिन बेटियों ने देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन कर दिया। देश ने भी इस टीम का हाथ फैलाकर स्वागत किया और पुरस्कारों से इनकी झोली भर दी। आने वाले दिनों भारतीय टीम और बेहतर खेलते हुए विश्वकप जीत भी जाएगी लेकिन अफसोस राजस्थान की बेटियों को इस खेल का हिस्सा बनने में अभी वक्त लगेगा। दरअसल, शिक्षा विभाग के खेल कैलेंडर में क्रिकेट से छात्राओं को दरकिनार ही रखा गया है।
हाल ही में घोषित खेल कैलेंडर में 14, 17 व 19 वर्ष के अलग अलग वर्ग में दर्जनभर खेल छात्र और छात्राओं के लिए हो रहे हैं लेकिन क्रिकेट में सिर्फ लड़कों को अवसर दिया गया है। छात्रा क्रिकेट के लिए प्रदेश के किसी भी सरकारी और गैर सरकारी विद्यालय में सुविधा उपलब्ध नहीं है। सुविधा नहीं होने का सबसे बड़ा कारण है कि स्कूल खेल कैलेंडर में इस खेल का नाम ही नहीं है। शिक्षा विभाग की ओर से हर साल करीब दो दर्जन खेल स्पद्र्धाएं होती है लेकिन छात्राओं के लिए क्रिकेट प्रतियोगिता रखने का निर्णय नहीं हुआ।
प्रदेशभर में नहीं बनती टीम
चूंकि स्कूल स्तर पर छात्राएं क्रिकेट नहीं खेलती, इसलिए ओपन क्रिकेट में भी युवतियों की टीम नहीं बन पाती। वर्तमान में राज्य स्तरीय ओपन क्रिकेट में भी महज आठ नौ जिलों से ही टीम बन पाती है, जिसमें जयपुर सबसे आगे हैं। उदयपुर, बीकानेर, जोधपुर, भीलवाड़ा, टोंक और अलवर की टीम बनती है तो लेकिन बड़ी मुश्किल से युवतियां इसमें शामिल होती है। बीकानेर सहित अनेक जिलों में तो उतनी ही युवतियां क्रिकेट खेलती है, जितनी एक टीम में जरूरत होती है। चिंता की बात है कि राज्य के पच्चीस जिलों से ही टीम बन पा रही है।
भारतीय टीम में एक भी नहीं
जिस भारतीय टीम ने विश्वकप फाइनल में दस्तक दी, उसमें राजस्थान से एक भी खिलाड़ी नहीं है। गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब सहित अन्य राज्यों से युवतियां क्रिकेट खेल रही है। खासकर दक्षिण भारत में महिला क्रिकेट को प्रोत्साहित किया जा रहा है। राजस्थान से खिलाड़ी नहीं होने कारण स्कूली स्तर पर इसका प्रोत्साहन नहीं होना है।
इन खेलों से भी वंचित है छात्राएं
यह शिक्षा विभाग का छात्राओं के साथ भेदभाव ही है कि क्रिकेट सहित कई खेल सिर्फ छात्रों के लिए स्वीकृत है। फुटबॉल और कुश्ती में छात्रों की टीम तो बनती है लेकिन छात्राओं को इनसे अलग रखा जाता है। साइक्लिंग में राजस्थान के युवकों ने दम दिखाया है लेकिन यह स्कूल कलैंडर में शामिल ही नहीं है। न छात्र स्कूल में साइक्लिंग करते हैं और न छात्राएं।
इनका कहना है
'स्कूलों में छात्रा क्रिकेट शुरू होना चाहिए। अभी बीकानेर सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों में क्रिकेट की महिला टीम नहीं बन पाती। छात्राओं की खेलने की उम्र तो 14 से 20 वर्ष ही है, इस समय वो बल्ले के हाथ नहीं लगाती तो फिर आगे कैसे आएगी। अब महिला क्रिकेट टीम ने विश्वकप फाइनल में स्थान बनाया है तो राजस्थान के शिक्षा विभाग को कदम आगे बढ़ाना चाहिए।Ó
-अशोक ओहरी, क्रिकेट विशेषज्ञ
...
'खेल कैलेंडर में छात्राओं के लिए क्रिकेट नहीं है। भविष्य में भी इसे शुरू करने की योजना नहीं है। ऐसे कई खेल है जो सिर्फ लड़कों के लिए है, लड़कियां यह नहीं खेल पा रही है।Ó
-जीवन शंकर शर्मा, उपनिदेशक (खेल), माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर
...
'हमारे पास ऐसे शारीरिक शिक्षक है जो छात्राओं को क्रिकेट खिला सकते हैं, विभाग को क्रिकेट के साथ फुटबॉल और कुश्ती भी छात्राओं के लिए शुरू करनी चाहिए। साइक्लिंग तो छात्र छात्रा दोनों के लिए नहीं है जबकि यह खेल भी होना चाहिए।Ó
-राम कुमार पुरोहित, शारीरिक शिक्षक बीकानेर

Read more...

निदेशालय में अंगद की तरह जमते हैं अधिकारी

जिला शिक्षा अधिकारियों की पदस्थापन 
सूची में निदेशालय के अधिकारी रहे 'यथावत
बीकानेर। शिक्षा विभाग में परम्परा रही है कि पदोन्नति के साथ कर्मचारी हो या फिर अधिकारी उनका पदस्थापन स्थल बदल ही जाता है, लेकिन मामला प्रदेश के सबसे बड़े शिक्षा मुख्यालय यानि स्वयं शिक्षा निदेशालय का हो तो ऐसी परम्पराएं कचरे के ढेर में डाल दी जाती है। पिछले दिनों जिला शिक्षा अधिकारियों के पदस्थापन और तबादलों में कुछ ऐसा ही हुआ है। राज्य सरकार की ओर से जारी सूची में शिक्षा निदेशालय के जिन अधिकारियों को पदोन्नति मिली है, उनमें अधिकांश को यथावत रख दिया गया जबकि एकमात्र अधिकारी को बीकानेर से बाहर भेजा गया।
दरअसल, शिक्षा निदेशालय स्तर पर ही शिक्षकों व अधिकारियों के पदस्थापन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। ऐसे में अधिकारी अपनी सीट सुरक्षित करते हुए ही आगे की प्रक्रिया पूरी करते हैं। बुधवार को जारी सूची में जिन शिक्षा अधिकारियों को पदोन्नति के बाद निदेशालय में ही पुन : पदस्थापित कर दिया गया है, उनमें देवदत्त, मांगीलाल बुडानिया, प्रकाश जाटोलिया, मूलचंद मीणा, इजहार अहमद खान, किशनलाल देवलताल, चंद्रपाल सिंह और घनश्याम दत्त जाट निदेशालय में ही रहे हैं और इन्हें निदेशालय में ही पदस्थापित कर दिया गया है। महज एक अधिकारी तरुण कुमार गौड़ को शिक्षा निदेशालय से हटाकर झुंझुनूं में जिला शिक्षा अधिकारी बना दिया गया है। आश्चर्य की बात है कि अकेले गौड ही बीकानेर के मूल निवासी है जबकि जिन्हें निदेशालय में रखा गया है, वो सभी अन्य जिलों के हैं। झुंझुनूं के पानाराम मेवता को वहां से बीकानेर स्थित प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय में पदस्थापित किया गया है।
 
मेहर ने ग्र्रहण किया पदभार
राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी असलम मेहर ने गुरूवार को अतिरिक्त  निदेशक प्राथमिक शिक्षा का पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर अधिकारियों व कर्मचारियों ने मेहर का स्वागत किया। विभिन्न जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे चुके मेहर राजस्व अपील अधिकारी जोधपुर के पद से स्थानान्तरित होकर आए हैं। 
 
 
बाहरी अधिकारियों की यह है दिक्कत
 
आमतौर पर अन्य जिलों के अधिकारी निदेशालय से सप्ताह में तीन से चार दिन गायब रहते हैं। यह अधिकारी अपने गृह जिले में सरकारी यात्रा का बहाना ढूंढते हैं। यह यात्राएं आमतौर पर गुरुवार और शुक्रवार को होती है। एक दिन की यात्रा शुक्रवार को होती है ताकि साथ में शनिवार और रविवार का भी लुत्फ उठाते हुए तीन दिन गायब रह सकें। 
 
कुछ को चार्जशीट भी मिल चुकी है
 
जिन जिला शिक्षा अधिकारियों को निदेशालय में पदस्थापित किया गया है, उनमें कुछ को पूर्व में चार्जशीट भी मिल चुकी है। हालांकि अब यह मामले खत्म हो गए लेकिन आरोपित अधिकारियों को पूरे प्रदेश का जिम्मा सौंपने के निर्णय की आलोचना हो रही है।
 
अर्से से जमे हैं कई अधिकारी
 
न सिर्फ नए पदोन्नत शिक्षा अधिकारी बल्कि कई पुराने अधिकारी भी निदेशालय में आने के बाद कभी स्कूल की तरफ नहीं गए। ज्यादातर अधिकारियों ने यहीं पर पदोन्नति ली और यहीं पदस्थापित हो गए। बीकानेर के बजाय जयपुर में रहने वाले शिक्षा निदेशकों ने ऐसे अधिकारियों को प्रश्रय दिया।
Read more...

बिना पैसे कैसे होगा क्लिक

जिले में 197 में से महज बारह स्कूलों ने किया एमओयू, स्ववित्त पोषित योजना बन रही बाधा
बीकानेर। शिक्षा सत्र 2016-17 में माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों को कम्प्यूटर शिक्षा देने उपलब्ध कराने वाली 'क्लिकÓ योजना स्ववित्त की बाध्यता में अटक गई है। योजना के तहत जिले में जुलाई माह तक 197 स्कूलों में आईटी ज्ञान केन्द्र से अनुबंध कर क्लिक योजना की क्रियान्विति करनी थी लेकिन महज बारह स्कूलों ने ही इसमें दिलचस्पी दिखाई है। ऐसे में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (रमसा) के राज्य परियोजना निदेशक ने नाराजगी जताते हुए इसी माह में एमओयू कर अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।
सरकारी स्कूलों में 2008 से आईसीटी योजना के तहत कक्षा ९ से बारह तक के विद्यार्थियों को कम्प्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराई गई। इसके तहत प्रथम, द्वितीय व तृतीय चरण में 6500 स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराई गई। इसके लिए इन स्कूलों में लैब स्थापित है। प्रथम व द्वितीय चरण का अनुबंध पूरा होने के बाद कम्प्यूटर स्कूलों को हस्तांतरित हो गए। लेकिन उसके बाद से लैब के ताले लगे हुए हैं। हालांकि यही हाल तृतीय चरण में होता परन्तु तृतीय चरण में सैटेलाइट कनेक्टीविटी युक्त लैब होने के कारण वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान लैब का बहुतायत उपयोग हो रहा है। इन साढ़े छह हजार स्कूलों के साथ दर्जनों स्कूलों में भामाशाहों के सहयोग से कम्प्यूटर लैब स्थापित है। ऐसे में इन स्कूलों में कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों को कम्प्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए क्लिक योजना चालू की गई है।
स्ववित्त पोषित योजना का अड़ंगा
आईसीटी के प्रथम, द्वितीय व तृतीय चरण में राज्य सरकार की ओर से स्वयं के खर्चे पर कम्प्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराई गई लेकिन क्लिक योजना स्ववित्त पोषित होने के कारण प्रति विद्यार्थी 80 रुपए प्रति माह शुल्क लिया जाना है। यही कारण है कि संस्था प्रधान अनुबंध करने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में आठवीं तक शिक्षण शुल्क भी नहीं लिया जाता। ऐसे में विद्यार्थियों से कम्प्यूटर शिक्षा का शुल्क मांगने पर नामांकन पर असर पड़ेगा। उनका कहना है कि यदि एमओयू किया जाता है तो संबंधित आईटी ज्ञान केन्द्र को नामांकन के अनुसार भुगतान करना पड़ेगा, जो सरकारी विद्यालयों के लिए संभव नहीं है।
इच्छाशक्ति की दरकार
क्लिक योजना के तहत जिले में मात्र 12 स्कूलों की ओर से अनुबंध किया गया है। इसके पीछे संस्था प्रधानों की इच्छाशक्ति की कमी भी बड़ा कारण मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में विगत कई सालों से भामाशाहों के सहयोग से लाखों रुपए के विकास कार्य हुए हैं। ऐसे में कमजोर विद्यार्थियों को कम्प्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए भामाशाहों से सहयोग लिया जा सकता है।
सिथिलता का असर नहीं
क्लिक योजना के तहत पहले 200 नामांकन होने पर क्रियान्विति करने के निर्देश के कारण कई स्कूलों में संस्था प्रधानों की ओर से कक्षा 6 से 10 तक नामांकन वृद्धि के प्रयास कम किए गए। बाद में सरकार ने 100 विद्यार्थी होने पर भी क्लिक योजना शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए। ऐसे में अब स्ववित्त पोषित योजना का अड़ंगा लगाकर क्रियान्विति से दूर भाग रहे हैं।

Read more...

ड्रेस कोड की पालना नहीं करने की एवज में छात्रों के साथ स्कूल संचालकों ने किया ऐसा कि खानी पड़ रही जेल की हवा

मुंबई। मुंबई में एक स्कूल के एक शिक्षक और निदेशक समेत तीन स्टॉफ कर्मियों को निर्धारित ड्रेस कोड का पालन ना करने पर सजा देने के लिए 25 छात्रों के बाल जबरन काटने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि यह घटना विक्रोली उपनगर में सुबह की प्रार्थना के बाद हुई जिसके बाद कुछ छात्रों के अभिभावकों की शिकायत पर आरोपियों को देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने बताया कि कक्षा पांचवीं से आठवीं तक के लिए 25 लड़कों को स्कूल के आदेश के अनुसार बाल छोटे ना रखने के लिए सजा दी गई। पुलिस ने बताया कि स्कूल ने कथित तौर पर कुछ दिन पहले छात्रों को छोटे-छोटे बाल रखने के लिए कहा था लेकिन इनमें से कुछ छात्रों ने ऐसा नहीं किया जिसके बाद स्कूल निदेशक गणेश बाटा, शारीरिक प्रशिक्षण शिक्षक मिलिंद जानके और कार्यालय सहायक तुषार गोरे ने उन्हें सबक सिखाने का फैसला लिया। उन्होंने बताया कि तीनों ने कथित तौर पर बड़ी संख्या में छात्रों के बाल काटे। कैंची से दो लड़के घायल भी हो गए थे।
विक्रोली पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्रीधर हनचटे ने कहा कि हमने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 324 जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया और इसके बाद गिरफ्तारियां की गई। उन्होंने बताया कि मामले की जांच चल रही है।

Read more...
Subscribe to this RSS feed

Bikaner Trusted News Portal

  • Bikaner Local News
  • National News
  • Sports News
  • Bikaner Events
  • Rajasthan News