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शिक्षा (75)

निदेशालय में अंगद की तरह जमते हैं अधिकारी

जिला शिक्षा अधिकारियों की पदस्थापन 
सूची में निदेशालय के अधिकारी रहे 'यथावत
बीकानेर। शिक्षा विभाग में परम्परा रही है कि पदोन्नति के साथ कर्मचारी हो या फिर अधिकारी उनका पदस्थापन स्थल बदल ही जाता है, लेकिन मामला प्रदेश के सबसे बड़े शिक्षा मुख्यालय यानि स्वयं शिक्षा निदेशालय का हो तो ऐसी परम्पराएं कचरे के ढेर में डाल दी जाती है। पिछले दिनों जिला शिक्षा अधिकारियों के पदस्थापन और तबादलों में कुछ ऐसा ही हुआ है। राज्य सरकार की ओर से जारी सूची में शिक्षा निदेशालय के जिन अधिकारियों को पदोन्नति मिली है, उनमें अधिकांश को यथावत रख दिया गया जबकि एकमात्र अधिकारी को बीकानेर से बाहर भेजा गया।
दरअसल, शिक्षा निदेशालय स्तर पर ही शिक्षकों व अधिकारियों के पदस्थापन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। ऐसे में अधिकारी अपनी सीट सुरक्षित करते हुए ही आगे की प्रक्रिया पूरी करते हैं। बुधवार को जारी सूची में जिन शिक्षा अधिकारियों को पदोन्नति के बाद निदेशालय में ही पुन : पदस्थापित कर दिया गया है, उनमें देवदत्त, मांगीलाल बुडानिया, प्रकाश जाटोलिया, मूलचंद मीणा, इजहार अहमद खान, किशनलाल देवलताल, चंद्रपाल सिंह और घनश्याम दत्त जाट निदेशालय में ही रहे हैं और इन्हें निदेशालय में ही पदस्थापित कर दिया गया है। महज एक अधिकारी तरुण कुमार गौड़ को शिक्षा निदेशालय से हटाकर झुंझुनूं में जिला शिक्षा अधिकारी बना दिया गया है। आश्चर्य की बात है कि अकेले गौड ही बीकानेर के मूल निवासी है जबकि जिन्हें निदेशालय में रखा गया है, वो सभी अन्य जिलों के हैं। झुंझुनूं के पानाराम मेवता को वहां से बीकानेर स्थित प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय में पदस्थापित किया गया है।
 
मेहर ने ग्र्रहण किया पदभार
राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी असलम मेहर ने गुरूवार को अतिरिक्त  निदेशक प्राथमिक शिक्षा का पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर अधिकारियों व कर्मचारियों ने मेहर का स्वागत किया। विभिन्न जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे चुके मेहर राजस्व अपील अधिकारी जोधपुर के पद से स्थानान्तरित होकर आए हैं। 
 
 
बाहरी अधिकारियों की यह है दिक्कत
 
आमतौर पर अन्य जिलों के अधिकारी निदेशालय से सप्ताह में तीन से चार दिन गायब रहते हैं। यह अधिकारी अपने गृह जिले में सरकारी यात्रा का बहाना ढूंढते हैं। यह यात्राएं आमतौर पर गुरुवार और शुक्रवार को होती है। एक दिन की यात्रा शुक्रवार को होती है ताकि साथ में शनिवार और रविवार का भी लुत्फ उठाते हुए तीन दिन गायब रह सकें। 
 
कुछ को चार्जशीट भी मिल चुकी है
 
जिन जिला शिक्षा अधिकारियों को निदेशालय में पदस्थापित किया गया है, उनमें कुछ को पूर्व में चार्जशीट भी मिल चुकी है। हालांकि अब यह मामले खत्म हो गए लेकिन आरोपित अधिकारियों को पूरे प्रदेश का जिम्मा सौंपने के निर्णय की आलोचना हो रही है।
 
अर्से से जमे हैं कई अधिकारी
 
न सिर्फ नए पदोन्नत शिक्षा अधिकारी बल्कि कई पुराने अधिकारी भी निदेशालय में आने के बाद कभी स्कूल की तरफ नहीं गए। ज्यादातर अधिकारियों ने यहीं पर पदोन्नति ली और यहीं पदस्थापित हो गए। बीकानेर के बजाय जयपुर में रहने वाले शिक्षा निदेशकों ने ऐसे अधिकारियों को प्रश्रय दिया।
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बिना पैसे कैसे होगा क्लिक

जिले में 197 में से महज बारह स्कूलों ने किया एमओयू, स्ववित्त पोषित योजना बन रही बाधा
बीकानेर। शिक्षा सत्र 2016-17 में माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों को कम्प्यूटर शिक्षा देने उपलब्ध कराने वाली 'क्लिकÓ योजना स्ववित्त की बाध्यता में अटक गई है। योजना के तहत जिले में जुलाई माह तक 197 स्कूलों में आईटी ज्ञान केन्द्र से अनुबंध कर क्लिक योजना की क्रियान्विति करनी थी लेकिन महज बारह स्कूलों ने ही इसमें दिलचस्पी दिखाई है। ऐसे में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (रमसा) के राज्य परियोजना निदेशक ने नाराजगी जताते हुए इसी माह में एमओयू कर अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।
सरकारी स्कूलों में 2008 से आईसीटी योजना के तहत कक्षा ९ से बारह तक के विद्यार्थियों को कम्प्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराई गई। इसके तहत प्रथम, द्वितीय व तृतीय चरण में 6500 स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराई गई। इसके लिए इन स्कूलों में लैब स्थापित है। प्रथम व द्वितीय चरण का अनुबंध पूरा होने के बाद कम्प्यूटर स्कूलों को हस्तांतरित हो गए। लेकिन उसके बाद से लैब के ताले लगे हुए हैं। हालांकि यही हाल तृतीय चरण में होता परन्तु तृतीय चरण में सैटेलाइट कनेक्टीविटी युक्त लैब होने के कारण वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान लैब का बहुतायत उपयोग हो रहा है। इन साढ़े छह हजार स्कूलों के साथ दर्जनों स्कूलों में भामाशाहों के सहयोग से कम्प्यूटर लैब स्थापित है। ऐसे में इन स्कूलों में कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों को कम्प्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए क्लिक योजना चालू की गई है।
स्ववित्त पोषित योजना का अड़ंगा
आईसीटी के प्रथम, द्वितीय व तृतीय चरण में राज्य सरकार की ओर से स्वयं के खर्चे पर कम्प्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराई गई लेकिन क्लिक योजना स्ववित्त पोषित होने के कारण प्रति विद्यार्थी 80 रुपए प्रति माह शुल्क लिया जाना है। यही कारण है कि संस्था प्रधान अनुबंध करने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में आठवीं तक शिक्षण शुल्क भी नहीं लिया जाता। ऐसे में विद्यार्थियों से कम्प्यूटर शिक्षा का शुल्क मांगने पर नामांकन पर असर पड़ेगा। उनका कहना है कि यदि एमओयू किया जाता है तो संबंधित आईटी ज्ञान केन्द्र को नामांकन के अनुसार भुगतान करना पड़ेगा, जो सरकारी विद्यालयों के लिए संभव नहीं है।
इच्छाशक्ति की दरकार
क्लिक योजना के तहत जिले में मात्र 12 स्कूलों की ओर से अनुबंध किया गया है। इसके पीछे संस्था प्रधानों की इच्छाशक्ति की कमी भी बड़ा कारण मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में विगत कई सालों से भामाशाहों के सहयोग से लाखों रुपए के विकास कार्य हुए हैं। ऐसे में कमजोर विद्यार्थियों को कम्प्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए भामाशाहों से सहयोग लिया जा सकता है।
सिथिलता का असर नहीं
क्लिक योजना के तहत पहले 200 नामांकन होने पर क्रियान्विति करने के निर्देश के कारण कई स्कूलों में संस्था प्रधानों की ओर से कक्षा 6 से 10 तक नामांकन वृद्धि के प्रयास कम किए गए। बाद में सरकार ने 100 विद्यार्थी होने पर भी क्लिक योजना शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए। ऐसे में अब स्ववित्त पोषित योजना का अड़ंगा लगाकर क्रियान्विति से दूर भाग रहे हैं।

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ड्रेस कोड की पालना नहीं करने की एवज में छात्रों के साथ स्कूल संचालकों ने किया ऐसा कि खानी पड़ रही जेल की हवा

मुंबई। मुंबई में एक स्कूल के एक शिक्षक और निदेशक समेत तीन स्टॉफ कर्मियों को निर्धारित ड्रेस कोड का पालन ना करने पर सजा देने के लिए 25 छात्रों के बाल जबरन काटने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि यह घटना विक्रोली उपनगर में सुबह की प्रार्थना के बाद हुई जिसके बाद कुछ छात्रों के अभिभावकों की शिकायत पर आरोपियों को देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने बताया कि कक्षा पांचवीं से आठवीं तक के लिए 25 लड़कों को स्कूल के आदेश के अनुसार बाल छोटे ना रखने के लिए सजा दी गई। पुलिस ने बताया कि स्कूल ने कथित तौर पर कुछ दिन पहले छात्रों को छोटे-छोटे बाल रखने के लिए कहा था लेकिन इनमें से कुछ छात्रों ने ऐसा नहीं किया जिसके बाद स्कूल निदेशक गणेश बाटा, शारीरिक प्रशिक्षण शिक्षक मिलिंद जानके और कार्यालय सहायक तुषार गोरे ने उन्हें सबक सिखाने का फैसला लिया। उन्होंने बताया कि तीनों ने कथित तौर पर बड़ी संख्या में छात्रों के बाल काटे। कैंची से दो लड़के घायल भी हो गए थे।
विक्रोली पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्रीधर हनचटे ने कहा कि हमने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 324 जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया और इसके बाद गिरफ्तारियां की गई। उन्होंने बताया कि मामले की जांच चल रही है।

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भामाशाह सम्मान समारोह में बोली राजे, शिक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ रहा राजस्थान

जयपुर।  मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा है कि राजस्थान शिक्षा के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। सरकारी स्कूलों में प्रतिस्पर्धा बढऩा शुभ संकेत है। राजे ने आज यहां 23 वें भामाशाह सम्मान समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि राजस्थान हर क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है।शिक्षा के क्षेत्र में भी हमारे बच्चे प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इसमें और बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय सरकारी स्कूलों में भी परिणाम और अध्ययन को लेकर प्रतिस्पर्धा बढऩा अच्छी बात है। इससे निजी क्षेत्र के स्कूलों को सीखना होगा। पहले केवल निजी स्कूलों की बात होती थी, लेकिन अब सरकारी स्कूलों की चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में योगदान देने वाले भामाशाहों का आभार जताते हुए कहा कि भामाशाहों की वजह से शिक्षा क्षेत्र को सम्बल मिला है। हम प्रदेश में बेहतर शिक्षा लाने में जुटे हुए हैं। मुख्यमंत्री, शिक्षा राज्य मंत्री ,उच्च शिक्षा मंत्री ने भामाशाहों को सम्मानित किया। इस मौके पर शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने भी सम्बोधित किया।

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एक जुलाई से सरकारी शिक्षकों के लिए जरूरी निर्देश

CCE /SIQE सत्र प्रारम्भ के दोरान किए जाने वाले कार्य

पदस्थापन/ बेसलाईन
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01 - 07 - 2017. से 07 - 07 - 2017

कक्षा 1 में नवप्रवेशित बालको का पदस्थापन नही करना है ।इनका कक्षास्तर नामांकित कक्षा ही है। अत: इनका उपसमूह नहीं बनाना है ।

आपके विद्यालय में अध्ययनरत कक्षा 2,3,4,5 के बालको का कक्षास्तर आपने सत्र 2016-17 के परिणाम घोषित करते समय निर्धारित किया था ,वही रखना है।

यदि कक्षा 2,3,4,5 में कोई बालक आपके विद्यालय में गैर सीसीई/निजी विद्यालय या शपथ पत्र से सीधा प्रवेश लेता है तो कक्षा स्तर निर्धारण करने हेतु बेसलाईन टेस्ट लेना है।

बेसलाईन हेतु हिन्दी,अंग्रेजी,गणित का ही टेस्ट लेना है।पर्यावरण में बालक का स्तर नामांकित कक्षा ही है।

बेसलाईन निर्धारण हेतु टेस्ट/ परख का प्रकार मौखिक,लिखित और गतिविधि आधारित हो सकता है।

SIQE/CCE सबंधित प्रधानाध्यापक /प्रधानाचार्य के कर्तव्य

1.मासिक स्टाफ बैठक लेकरCCE गतिविधियों की समीक्षा करना।
2.शिक्षक योजना डाईरी नियमित रूप से संधारित की जा रही है या नही।
3.विषय अध्यापको द्वारा पाक्षिक योजना बनाई जा रही है या नही।
4.साप्ताहिक समीक्षा की जा रही हे या नहीं।
5.प्रत्येक माह check list भरी जा रही या नहीं।
6.समय पर टर्म के अनुसार पाठ्यक्रम पूरा किया जा रहा है नही।
7.कक्षा स्तर से निचे वाले बालको के लिए अलग से पाक्षिक योजना बनाई जा रही है या नहीं।
8.पोर्ट फोलियो अप डेट की जा रही है या नही।
9 .अभिभावक बैठक लेवें।
10.बच्चों के कक्षा स्तर में सुधार हो रहा है या नहीं।

पोर्ट फोलियो में लगाये जाने वाले दस्तावेज
1 baseline copy
2स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट।
3बालक के नैतिकता सामाजिक सहयोग सम्बन्धी गुण
4समय की पाबन्दी सम्बंधित गुण
5प्रोजेक्ट कार्य (प्रति सप्ताह एक बार)
6प्रत्येक विषय के सप्ताह में दो बार पेन पैपर क्लास टेस्ट लेकर कोपिया ।
7 अभिभावक सूचना पृष्ठ।
जिसमे अभिभवक को बालक की सभी प्रकार की गतिविधियों की सुचना देकर उसके हस्ताक्षर लेवे और विषय अध्यापक भी date लगाकर हस्ताक्षर करे।

SIQE/CCE सम्भन्धित महत्व पूर्ण जानकारी

1 .कक्षा 1 की baseline नहीं लेनी है।
2.पर्यावरण की baseline नहीं लेनी है।
3.SIQE/CCE में बच्चों को नम्बर नहीं देना है।केवल कॉपी के अंत में शिक्षक टिप्पणी लिखकर हस्ताक्षर करके date लगानी है।
4.टिप्पणी का तरीका...बालक अनिल कक्षा 4 में नामांकित हे और यह गणित विषय मे कक्षा 4 या 3 या 2 का स्टर रखता है ।यह शिक्षक की सहायता से कार्य कर सकता हे अतः यह B grade के अंतर्गत आता है।
5.प्रत्येक बालक की एक personal फाइल(पोर्ट फोलियो) बनानी है।
6.पोर्ट फोलियो में निम्न दस्तावेज लगावे....
A.बालक का विवरण(biodata) ।
बालक के स्वास्थ्य, नैतिकता, सामाजिक सहयोग, कला, संगीत, समय की पाबन्दी, अनुशाशन, अन्य मानवीय गुणों और उसकी अच्छी आदतो के बारे में टिप्पणी समय समय पर लिखे।
C.सप्ताह में दो बार पेन पेपर टेस्ट लेकर (एक या दो प्रश्न) उसे जांच कर टिप्पणी लिखे और पोर्ट फोलियो में लगाये ।
D.ऐसा प्रत्येक विषय में करे।
E. 15 दिन में एक बार बालक के अभिभावक से सम्पर्क कर उसे बच्चे के स्टर की जानकारी देवे और पोर्ट फोलियो में अभिभावक के हस्ताक्षर लेवे।

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