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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उच्च शिक्षा वित्त एजेंसी के कार्य क्षेत्र में विस्तार के प्रस्ताव को मंजूरी दी

नई दिल्ली, 4 जुलाई :भाषा: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2022 तक उच्च शिक्षा में अवसंरचना और प्रणालियों (आरआईएसई) को मजबूत बनाने एवं शैक्षणिक अवसंरचना की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए उच्च शिक्षा वित्त एजेंसी के कार्य विस्तार को आज मंजूरी प्रदान कर दी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इसके तहत देश में शैक्षणिक अवसंरचना की बढ़ती वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उच्च शिक्षा वित्त एजेंसी (एचईएफए) के कार्य क्षेत्र को विस्तार दिया गया।
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, इसके तहत वित्त एजेंसी के पूंजी आधार को बढ़ाकर 10,000 करोड़ रुपए कर दिया गया है और इसे 2022 तक शिक्षा में अवसंरचना और प्रणालियों को मज़बूत करने के लिए।,00,000 करोड़ रुपए की निधि निर्माण करने का निर्देश दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि इस सुविधा का सभी संस्थानों तक विस्तार करने के लिए आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने एचईएफए के अंतर्गत निम्न पांच योग्यताओं तथा मूलधन के मुख्य अंश के पुनर्भुगतान की प्रक्रियाओं को मंजूरी दी है। इन सभी मामलों में सरकारी अनुदान के माध्यम से ब्याज का लगातार भुगतान किया जाएगा।
यह सुविधा 2014 के बाद स्थापित संस्थान, ऐसे केन्द्रीय विश्वविद्यालय जिनके पास बहुत कम आंतरिक संसाधन हैं और स्कूली शिक्षाास्वास्थ्य शिक्षा अवसंरचना जैसे एम्स, केन्द्रीय विद्यालय आदि के संदर्भ में है।
इसके तहत 10 साल से अधिक पुराने तकनीकी संस्थान के संदर्भ में संपूर्ण मूलधन का पुनर्भुगतान आंतरिक रूप से संग्रह किए गए बजट संसाधनों के द्वारा होगा।
2008 और 2014 के बीच शुरू किए गए तकनीकी संस्थान के संदर्भ में मूलधन की 25 प्रतिशत राशि का पुनर्भुगतान आंतरिक संसाधनों द्वारा तथा मूलधन की शेष राशि के लिए अनुदान प्राप्त करके होने की बात कही गई है।
2014 के पहले शुरू किए गए केन्द्रीय विश्ववि़द्यालय के संदर्भ में मूलधन की 10 प्रतिशत राशि का पुनर्भुगतान आंतरिक संसाधनों द्वारा तथा मूलधन की शेष राशि के लिए अनुदान प्राप्त करके पूरा करने की बात कही गई है।
इसके साथ ही नए स्थापित संस्थान (2014 के बाद प्रारंभ) के संदर्भ में स्थाई परिसर के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता मूलधन और ब्याज के भुगतान के लिए अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने सरकारी बांड के जरिए धनराशि संग्रह करने की प्रक्रियाओं को भी मंजूरी दी है।

DNR Reporter

DNR desk

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