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राष्ट्रीय

सरकार ने न्यायमूर्ति जोसफ पर कॉलेजियम के प्रस्ताव को लौटाया, कहा :उनकी पदोन्नति उचित नहीं होगी

नई दिल्ली, सरकार ने उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम से उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ को शीर्ष अदालत में न्यायाधीश बनाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने को कहकर न्यायपालिका के साथ नए टकराव को आज जन्म दे दिया। सरकार ने कहा कि न्यायमूर्ति जोसफ को उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत करना उचित नहीं होगा।
सरकार को कॉलेजियम के मुखिया प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा से तुरंत समर्थन मिला। न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि कार्यपालिका को न्यायमूर्ति जोसफ का नाम पुनर्विचार के लिए वापस भेजने और दूसरे नाम को स्वीकार करने का पूरा हक है, भले ही दोनों नामों की सिफारिश एकसाथ कॉलेजियम ने की थी। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति जोसफ की उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति के लिए सिफारिश कॉलेजियम ने इस साल जनवरी में की थी।
न्यायमूर्ति मिश्रा को लिखे पत्र में केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि न्यायमूर्ति जोसफ का नाम सरकार की ओर से पुनर्विचार के लिए भेजने को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की मंजूरी हासिल है। साथ ही पत्र में यह भी कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय में लंबे समय से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का प्रतिनिधित्व नहीं है।
प्रसाद ने पत्र में कहा है, इस मौके पर जोसफ की उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति का प्रस्ताव उचित नहीं लगता है।
पत्र में कहा गया है, यह विभिन्न उच्च न्यायालयों के अन्य वरिष्ठ, उपयुक्त और योग्य मुख्य न्यायाधीशों और वरिष्ठ न्यायाधीशों के साथ भी उचित और न्यायसंगत नहीं होगा।
सैद्धांतिक तौर पर कॉलेजियम सरकार के प्रस्ताव को अब भी खारिज कर सकती है और विधि मंत्रालय को न्यायमूर्ति जोसफ का नाम दोबारा भेज सकती है। विधि मंत्रालय उसके बाद भावी कार्वाई पर फैसला कर सकता है।
न्यायमूर्ति जोसफ को पदोन्नत करने के प्रस्ताव का सरकार की ओर से विरोध किए जाने से कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच टकराव गहराने की आशंका है।
न्यायमूर्ति जोसफ ने 2016 में अपने फैसले के जरिए उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन को निरस्त कर दिया था और राज्य में हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को बहाल कर दिया था। इस फैसले को उस वक्त केंद्र में भाजपा नीत सरकार के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा गया था।
न्यायमूर्ति जोसफ को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नत किए जाने के प्रस्ताव पर सरकार की आपत्ति पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे निराशाजनक बताया जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में है और वह अब एक स्वर में बोलेगी कि बस बहुत हो चुका।
इस बीच, शीर्ष अदालत ने मल्होत्रा की नियुक्ति के वारंट पर रोक लगाने की वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह का अनुरोध अस्वीकार कर दिया।
मल्होत्रा की नियुक्ति की घोषणा करने वाली अधिसूचना आज सुबह विधि मंत्रालय में न्याय विभाग ने जारी की।
प्रसाद ने अपने पत्र में न्यायमूर्ति मिश्रा से कहा कि ---सरकार उच्चतम न्यायालय की सिफारिश को अलग करने पर मजबूर है--पहले भी उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में कई प्रस्तावों को अलग किया गया है।
जून 2014 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश आर एम लोढ़ा ने सरकार को पत्र लिखकर साफ किया था कि कार्यपालिका कॉलेजियम की पूर्व मंजूरी के बिना सिफारिशों को अलग-अलग नहीं कर सकती है। ऐसा तब हुआ था जब सरकार ने वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व सॉलीसीटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम की उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति के खिलाफ फैसला किया था जबकि कॉलेजियम की अन्य सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था। उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम में प्रधान न्यायाधीश और शीर्ष अदालत के चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।
इस बीच, सुब्रह्मण्यम ने न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति के लिए अपने नाम की सिफारिश के लिए दी गई अपनी सहमति वापस ले ली थी।
प्रधान न्यायाधीश को आज सुबह भेजे गए अपने छह पन्नों के पत्र में केंद्रीय मंत्री प्रसाद ने कहा कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की अखिल भारतीय वरिष्ठता सूची में न्यायमूर्ति जोसफ 42 वें नंबर पर आते हैं।
उन्होंने कहा, उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की अखिल भारतीय वरिष्ठता सूची में फिलहाल विभिन्न उच्च न्यायालयों के 11 मुख्य न्यायाधीश हैं, जो उनसे वरिष्ठ हैं।
देशभर के 24 उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के 1079 स्वीकृत पद हैं, लेकिन अभी सिर्फ 669 न्यायाधीशों से काम चल रहा है।
पत्र में कहा गया है कि न्यायमूर्ति जोसफ के मूल उच्च न्यायालय केरल उच्च न्यायालय का शीर्ष अदालत और अन्य उच्च न्यायालयों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व है। प्रसाद ने कहा कि कलकत्ता, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, झारखंड, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, सिक्किम, मणिपुर और मेघालय उच्च न्यायालय का उच्चतम न्यायालय में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
पत्र में कहा गया है, इस बात का यहां उल्लेख करना प्रासंगिक हो सकता है कि उच्चतम न्यायालय में लंबे समय से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
उच्चतम न्यायालय के दो फैसलों का उल्लेख करते हुए पत्र में यह भी कहा गया है कि उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीशों को उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत किए जाने की उम्मीद रखनी चाहिए और सीजेआई और कॉलेजियम को इसे ध्यान में रखना चाहिए।
उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नत करने के लिए न्यायमूर्ति जोसफ के नाम की सिफारिश करते हुए कॉलेजियम ने कहा था, वह अन्य मुख्य न्यायाधीशों और उच्च न्यायालयों के वरिष्ठ न्यायाधीशों की तुलना में उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किए जाने के लिए सभी मामले में अधिक हकदार और उपयुक्त हैं।
उच्चतम न्यायालय के पांच शीर्ष न्यायाधीशों के निकाय ने कहा था कि कॉलेजियम ने मुख्य न्यायाधीशों और उच्च न्यायालयों के वरिष्ठ न्यायाधीशों की अखिल भारतीय स्तर पर वरिष्ठता के साथ-साथ उनकी योग्यता और ईमानदारी पर गौर किया था।
हालांकि, सरकार के सूत्रों ने कहा कि न्यायमूर्ति जोसफ को उत्तराखंड मामले में दिए गए आदेश का शिकार होने के अभियान को परेशान करने वाला बताया। उन्होंने कहा, यह निराधार है---न्यायमूर्ति जे एस खेहर ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम को निरस्त किया था। उन्हें प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।

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युवाओं के लिए भारतीय जनता युवा मोर्चा का पहला समर इंटर्नशिप

नई दिल्ली, युवाओं को जोडऩे के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुझाव पर अमल करते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा ने पहला समर इंटर्नशिप : गृष्मकालीन इंटर्नशिप : कार्यक्रम शुरू किया है।
भारतीय जनता युवा मोर्चा :भाजयुमो: के पहले समर इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत 100 सीटें उपलब्ध होंगी और यह एक मई से एक जुलाई तक चलेगा।
भाजयुमो अध्यक्ष पूनम महाजन ने भाषा से कहा कि अगर कोई युवा सोचता है कि वह चर्चा, परिचर्चा कर सकता है, राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है, तब शोध और लोक नीति विश्लेषण के क्षेत्र में ऐसे नौजवानों के लिए अवसर है।
दरअसल, भाजपा की नजर। जनवरी 2018 तक 18 साल पूरा करने वाले युवाओं पर है। भाजपा ने इस दिशा में मिलेनियम अभियान युवा उद्घोष शुरू किया है।
भाजयुमो के पहले समर इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत नीतिगत शोध, चुनावी अध्ययन, राजनीतिक प्रक्रियाओं का विश्लेषण, भारतीय राजनीति की बदलती प्रकृति का अध्ययन, जमीनी कार्य और यात्रा के माध्यम से आम लोगों के जुड़े विषयों को रेखांकित करने का कार्य शामिल है।
इस इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत चुने गए युवाओं को पार्टी कार्यालय में कार्याे का अनुभव प्रदान करने के साथ जमीनी स्तर पर राजनीति के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया जाएगा।
प्रधानमंत्री पहले ही भाजपा नेताओं एवं जन प्रतिनिधियों से युवाओं को जोडऩे की दिशा में पहल करने को कह चुके हैं।
प्रधानमंत्री कई अवसरों पर यह कह चुके हैं कि देश की 65 फ़ीसदी आबादी 35 साल तक के उम्र के लोगों की है, ऐसे में हमें युवा शक्ति के महत्व को समझना होगा।

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कठुआ मामला: असल चिंता निष्पक्ष सुनवाई की है वरना मुकदमा बाहर भेजा जाएगा: न्यायालय

नई दिल्ली , उच्चतम न्यायालय ने आज सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि कठुआ बलात्कार और हत्या मामले की निष्पक्ष सुनवाई में रंचमात्र भी कमी होने पर इसे जम्मू कश्मीर की स्थानीय अदालत से बाहर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। न्यायालय ने कहा कि असल चिंता सही तरीके से मुकदमा चलाने को लेकर है।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा , न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्ईय खंडपीठ ने इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की वकीलों के संगठनों की मांग के बीच बार काउन्सिल आफ इंडिया की जांच रिपोर्ट पेश किए जाने के दौरान यह टिप्पणी की। रिपोर्ट में कहा गया है कि कठुआ में बार एसोसिएशनों ने पुलिस या पीड़ित परिवार का प्रतिनिधित्व कर रही वकील को किसी भी तरह से रोका नहीं था।
शीर्ष अदालत ने इस रिपोर्ट के अवलोकन के बाद कहा कि वह आरोपी ही नहीं बल्कि पीड़ित के परिवार के लिए निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के मुख्य मुद्दे से भटकेंगी नहीं।
इस मामले में न्याय के प्रशासन में वकीलों द्वारा कथित रूप से व्यवधान डालने के मुद्दे पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि वकील गलत हैं तो उनसे कानून के अनुरूप निबटा जाएगा।
पीठ ने कहा कि मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई और पीडि़त के परिवार और आरोपियों के लिए समुचित कानूनी सहायता सुनिश्चित करना और उनके तथा उनके वकीलों की सुरक्षा करना उसका सांविधानिक दायित्व है। इस मामले में अब 30 जुलाई को आगे सुनवाई होगी।
पीठ ने कहा , यदि हमें निष्पक्ष सुनवाई में जरा भी कमी मिली तो हम इसे कठुआ से बाहर स्थानांतरित कर देंगे। पीठ ने कहा , इस न्यायालय की असल चिंता यह देखना है कि निष्पक्ष सुनवाई हो और वह आरोपियों तथा पीड़ित परिवार के सदस्यों के प्रति भी निष्पक्ष हो।
इससे पहले , बार काउन्सिल ने कठुआ में इस मामले में वकीलों द्वारा कथित बाधा डालने के बारे में उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश तरूण अग्रवाल की अध्यक्षता वाली समिति की जांच रिपोर्ट पीठ को सौंपी।
बार काउन्सिल आफ इंडिया की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि कठुआ जिले के वकीलों के संगठन ने ना तो अपराधा शाखा की आरोप पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया और न ही पीड़ित परिवार का प्रतिनिधित्व कर रही वकील के काम में बाधा डाली।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय बार एसोसिशन , जम्मू और कठुआ जिला बार एसोसिएशन के सारे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग न्यायोचित लगती है।
इस बीच , राज्य सरकार के वकील शोएब आलम ने इस रिपोर्ट का विरोध किया और फिर कहा कि वकीलों की पुलिस दल के साथ कथित रूप से धक्का मुक्की हुई थी जिसकी वजह से वह अदालत में आरोप पत्र दाखिल नहीं कर सकी थी।
आलम ने कहा कि इस रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि कठुआ में आन्दोलित वकीलों द्वारा कथित रूप से बाधा डालने के शिकार हुए अपराध शाखा के किसी भी अधिकारी का पक्ष सुना नहीं गया।
उन्होंने उच्च न्यायालय की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कठुआ के जिला न्यायाधीश की अलग रिपोर्ट की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने दावा किया कि इस रिपोर्ट में अधिकारियों को रोके जाने और न्याय प्रशासन में बाधा डाले जाने के बारे में स्पष्ट निष्कर्ष निकाले गए हैं।
हालांकि पीठ ने कहा , हमें मुख्य मुद्दे से नहीं भटकना है। निष्पक्ष जांच , निष्पक्ष सुनवाई , उचित कानूनी मार्गदर्शन और आरोपियों तथा पीड़ित पक्षों की ओर से प्रतिनिधित्व जरूरी है। इसमें उलझने की बजाए कि बार काउन्सिल आफ इंडिया की रिपोर्ट क्या कहती है और वकील क्या कहते हैं , हमें मूल मुद्दे से नहीं भटकना चाहिए। असल मुद्दा यह है कि हम न्याय कैसे प्राप्त कर सकते हैं।
पीड़िता के पिता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दिरा जयसिंह ने पीठ से कहा कि शीर्ष अदालत को इस मामले और इसकी सुनवाई की निगरानी करनी चाहिए।
पीठ ने इस पर टिप्पणी की कि मुकदमे की सुनवाई तेज करने का तात्पर्य यह नहीं है कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप आरोपियों और पीड़ित परिवार को उचित अवसर नहीं दिया जाएगा।
इससे पहले , दिन में पीठ दो आरोपियों की उस याचिका पर विचार के लिए तैयार हो गई जिसमें मुकदमे की सुनवाई जम्मू में कराने और यह मामला केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने का अनुरोध किया गया है।
पीठ ने आरोपी सांजी राम और विशाल जंगोत्रा के इस अनुरोध पर विचार किया कि पीड़ित के पिता की याचिका में उन्हें भी पक्षकार बनाया जाए।

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रेलवे मार्च 2020 तक बिना फाटक वाले क्रासिंग को खत्म करेगा: लोहानी

नई दिल्ली , रेलवे ने आज कहा कि 31 मार्च , 2020 तक बिना कर्मचारी वाले सभी रेलवे क्रासिंग को समाप्त कर दिया जाएगा। 

रेलवे ने यह बयान तब दिया है जब उत्तर प्रदेश में आज एक मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर एक स्कूल वैन के ट्रेन से टकरा जाने से 13 बच्चों की मौत हो गई।
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्विनी लोहानी ने यह भी कहा कि रेलवे कोई भी कदम उठा ले , लेकिन लोगों की लापरवाही को नहीं रोका जा सकता। उन्होंने लोगों से क्रॉसिंग पार करते समय सतर्क रहने का आग्रह किया।
अधिकारियों ने कहा , हम सभी यूएमएलसी ( मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग ) को 31 मार्च 2020 तक हटाने का प्रयास कर रहे हैं।
लोहानी ने कहा कि जब तक यूएमएलसी को हटा नहीं दिया जाता तब तक लोगों को क्रॉसिंग पार करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। रेलवे ऐसा कोई भी कदम नहीं उठा सकती जिससे लोगों की लापरवाही को रोका जा सके।
अधिकारी ने बताया कि रेलवे ने 2017-18 में।,565 ऐसे क्रॉसिंग को हटाया है और 2018-19 में इस तरह के।,600 क्रॉसिंग को हटाने का लक्ष्य है।
उन्होंने बताया कि इस तरह के क्रॉसिंग को हटाए जाने के बाद पिछले कुछ वर्षों में मानव रहित क्रॉसिंग पर होने वाले हादसों में कमी आई है। 2014-2015 में मानवरहित फाटकों पर इस तरह के 50 हादसे , 2015-2016 में 29 हादसे , 2016-2017 में 20 हादसे , 2017-2018 में 10 हादसे और इस वर्ष एक हादसा हुआ है।
अधिकारी ने बताया कि रेलवे ने इस वर्ष 31 मार्च तक व्यस्त स्टेशन पर इस तरह के क्रासिंग को सफलतापूर्वक हटाया है। पूरे रेलवे नेटवर्क पर आज की तिथि तक इस तरह के 5,792 क्रॉसिंग है।

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न्यायपालिका के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणियों के खिलाफ याचिका पर न्यायालय करेगा सुनवाई

नई दिल्ली , उच्चतम न्यायालय कुछ वकीलों और नेताओं द्वारा सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर कथित रूप से शीर्ष अदालत के प्रति अपमानजनक टिप्पणियां किए जाने के मामले में एक वकील की याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करने पर आज सहमत हो गया।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा , न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की खंडपीठ ने अधिवक्ता और भाजपा के प्रवक्ता गौरव भाटिया के इस कथन पर विचार किया कि वरिष्ठ अधिवक्ता और राजनीतिक व्यक्ति तक न्यायपालिका के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां कर रहे हैं और न्यायालय को इसका संज्ञान लेना चाहिए।
पीठ ने कहा , हम इस पर मंगलवार या बुधवार को सुनवाई करेंगे।
भाटिया ने न्यायाधीशों के खिलाफ राजनीतिक दलों से संबद्ध कुछ व्यक्तियों और एक्टिविस्ट के कुछ ट्विट का जिक्र किया और कहा कि इनमें से कुछ ट्विट वह न्यायालय में पढ़ भी नहीं सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि ए सब समाचार चैनलों और सोशल मीडिया पर किए गए हैं।
उन्होंने वकीलों और नेताओं के खिलाफ अवमानना कार्यवाही करने का अनुरोध किया और कहा कि वह इस संबंध में शीघ्र ही याचिका दायर करेंगे।

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स्कूल वैन हादसा: कई अधिकारी निलंबित, स्कूल प्रबंधन वैन ड्राइवर के खिलाफ प्राथमिकी

लखनऊ:   उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर में आज सुबह हुई रेल-स्कूल वैन दुर्घटना के मामले में शिथिल पर्यवेक्षण के लिए कुशीनगर के बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमन्त राव तथा दुदही के खण्ड शिक्षा अधिकारी शेष बहादुर को को तत्काल प्रभाव से निलम्बित किए जाने का निर्देश दिया है। 

सरकारी प्रवक्ता ने आज शाम बताया कि मुख्यमंत्री ने प्रवर्तन कार्य में शिथिलता बरतने वाले कुशीनगर के एआरटीओ इन्फोर्समेण्ट राजकिशोर त्रिवेदी को भी निलम्बित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा उन्होंने परिवहन विभाग के यात्री कर अधिकारी रणवीर सिंह चैहान को दुर्घटना के लिए निलम्बित करने का निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री ने बिना अनुमतिापंजीकरण के विद्यालय का संचालन करने के लिए डिवाइन पब्लिक स्कूल के प्रबन्धक एवं प्रधानाचार्य करीम जहान खान के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराते हुए विधिक धाराओं में कार्वाई करने के निर्देश भी दिए हैं।
उन्होंने सेठ बंशीधर विद्यालय की जांच कराने के भी निर्देश दिए हैं, जहां से डिवाइन पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों के लिए टीसी की व्यवस्था की जाती थी।
इस बीच पुलिस उप महानिरीक्षक :कानून व्यवस्था: प्रवीण कुमार ने पत्रकारो से कहा कि इस मामले में स्कूल वैन के ड्राइवर और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
यह मामला एक मृत बच्चे के पिता जहीर की शिकायत पर दर्ज किए गए है।

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उच्चतम न्यायालय की कोलेजियम न्यायमूर्ति जोसेफ के नाम की सिफारिश पर फिर करे विचार : सरकार

नई दिल्ली , सरकार ने आज उच्चतम न्यायालय की कोलेजियम ( न्यायाधीशों की समिति ) से कहा कि न्यायमूर्ति के एम जोसेफ को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने की अपनी सिफारिश पर पुन : विचार करे।
सूत्रों ने आज यह जानकारी दी। यह घटनाक्रम वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दु मल्होत्रा को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त करने की कोलेजियम की सिफारिश स्वीकार करने और उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ के मामले में निर्णय स्थगित रखने की कार्यवाही के बाद का है।
न्यायमूर्ति जोसेफ के नाम को मंजूरी नहीं देने के सरकार के निर्णय पर तीव्र प्रतिक्रिया हुई है और उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने इसे परेशानी वाला बताया है।
उच्चतम न्यायालय की कोलेजियम ने 10 जनवरी को न्यायमूर्ति जोसेफ और सुश्री इन्दु मल्होत्रा को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी।

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हमारी असल चिंता कठुआ मामले की निष्पक्ष सुनवाई को लेकर है: न्यायालय

नई दिल्ली , उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि उसकी असल चिंता कठुआ मामले के मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई को लेकर है। न्यायालय ने साथ ही संकेत दिया कि यदि उसे जरा भी ऐसी संभावना लगी कि निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है तो इस मामले को कठुआ से बाहर स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा , न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्ईय खंडपीठ ने कठुआ सामूहिक बलात्कार और हत्या के इस मामले में कहा कि मुकदमे की सुनवाई आरोपियों के लिए ही नहीं बल्कि पीड़ित परिवार के लिए भी निष्प्क्ष होनी चाहिए और उनके वकीलों की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। न्यायालय इस मामले में अब 30 जुलाई को आगे सुनवाई करेगा।
इससे पहले , बार काउन्सिल आफ इंडिया ने पीठ को सूचित किया कि कठुआ जिले के वकीलों के संगठन ने ना तो अपराधा शाखा की आरोप पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया और न ही पीड़ित परिवार का प्रतिनिधित्व कर रही वकील के काम में बाधा डाली।
पीठ ने इस मामले में न्याय प्रशासन के काम में वकीलों द्वारा बाधा डालने के मुद्दे पर भी विचार किया और कहा , यदि वकील गलत थे तो उनके साथ कानून के अनुरूप पेश आया जाएगा।
शीर्ष अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि असल मुद्दा इस मामले में मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई कराना है।
इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही बार काउन्सिल आफ इंडिया ने सीलबंद लिफाफे में कठुआ में इस मामले में वकीलों द्वारा कथित बाधा डालने से संबंधित अपनी जांच रिपोर्ट पीठ को सौंपी।
बार काउन्सिल आफ इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि वकीलों के संगठन ने ना तो संबंधित अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने के जम्मू कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा के काम में बाधा डाली और न ही पीड़ित परिवार की वकील दीपिका सिंह राजावत को उच्च न्यायालय में पेश होने से रोका।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय बार एसोसिशन , जम्मू और कठुआ जिला बार एसोसिएशन के सारे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग न्यायोचित लगती है।
इस बीच , राज्य सरकार के वकील शोएब आलम ने इस रिपोर्ट का विरोध किया और फिर कहा कि वकीलों की पुलिस दल के साथ कथित रूप से धक्का मुक्की हुई थी जिसकी वजह से वह अदालत में आरोप पत्र दाखिल नहीं कर सकी थी।
आलम ने कहा कि इस रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि कठुआ में आन्दोलित वकीलों द्वारा कथित रूप से बाधा डालने के शिकार हुए अपराधा शाखा के किसी भी अधिकारी का पक्ष सुना नहीं गया।
उन्होंने उच्च न्यायालय की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कठुआ के जिला न्यायाधीश की अलग रिपोर्ट की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने दावा किया कि इस रिपोर्ट में अधिकारियों को रोके जाने और न्याय प्रशासन में बाधा डाले जाने के बारे में स्पष्ट निष्कर्ष निकाले गए हैं।
हालांकि पीठ ने कहा , हमें मुख्य मुद्दे से नहीं भटकना है। निष्पक्ष जांच , निष्पक्ष सुनवाई , उचित कानूनी मार्गदर्शन और आरोपियों तथा पीड़ित पक्षों की ओर से प्रतिनिधित्व जरूरी है। इसमें उलझने की बजाए कि बार काउन्सिल आफ इंडिया की रिपोर्ट क्या कहती है और वकील क्या कहते हैं , हमे मूल मुद्दे से नहीं भटकना चाहिए। असल मुद्दा यह है कि हम न्याय कैसे प्राप्त कर सकते हैं।
पीड़िता के पिता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दिरा जयसिंह ने पीठ से कहा कि शीर्ष अदालत को इस मामले और इसकी सुनवाई की निगरानी करनी चाहिए।
पीठ ने इस पर टिप्पणी की कि मुकदमे की सुनवाई तेज करने का तात्पर्य यह नहीं है कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप आरोपियों ओर पीड़ित परिवार को उचित अवसर नहीं दिया जाएगा।

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ट्रेन की चपेट में आई स्कूल वैन, 16 बच्चों की मौत, मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश

गोरखपुरा /लखनऊा/दिल्ली, उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के दुदुई रेलवे स्टेशन के नजदीक मानव रहित क्रासिंग पर आज सुबह एक मानव रहित क्रासिंग पर एक बच्चों से भरी स्कूल वैन के एक पैसेंजर ट्रेन से टकराने टकरा जाने के कारण कम से कम 1६ बच्चों की मौत हो गई और सात बच्चे घायल हो गए। हादसे में वैन के ड्राइवर की भी दुर्घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
सूत्रों के मुताबिक इस स्कूल वैन में 10 साल की उम्र तक के करीब 25 बच्चे सवार थे और अपने स्कूल जा रहे थे। उत्तर पूर्व रेलवे एनईआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी संजय यादव ने फोन पर भाषा को बताया कि कुशीनगर जिले के विशनुपुरा पुलिस स्टेशन अन्तर्गत दुदुई रेलवे स्टेशन के पास एक मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर आज सुबह सात बज कर दस मिनट पर बच्चों से भरी एक टाटा मैजिक स्कूल वैन सिवान-गोरखपुर पैसेंजर ट्रेन (55075) से टकरा गई। टक्कर इतनी जर्बदस्त थी कि इस दुर्घटना में 13 बच्चों की मौत हो गई। यह ट्रेन सिवान से गोरखपुर आ रही थी। उन्होंने बताया कि मानवरहित रेलवे क्रासिंग पर एक मानव रहित क्रासिंग मित्र तैनात था जिसने वैन ड्राइवर को रोकने की कोशिश की लेकिन उसने बात अनसुनी कर दी। चालक ने क्रासिंग पार करने की कोशिश की लेकिन शायद वैन बीच पटरी पर अचानक पहुंच कर बंद हो गई और यह हादसा हो गया। इस बीच पुलिस कमश्निर अनिल कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुशीनगर, जिलाधिकारी कुशीनगर घटनास्थल पर पहुंच गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 11 बजे तक घटनास्थल पर पहुंचने की संभावना है। यह स्कूल वैन दुदुही बाजार के डिवाइन पब्लिक स्कूल की थी। इस बीच लखनऊ में प्रमुख सचिव सूचना अवनीश अवस्थी ने बताया कि दुर्घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख व्यक्त किया है और मृत बच्चों के परिजनों को दो-दो लाख रूपए की सहायता देने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी स्वंय घटनास्थल की ओर रवाना हो रहे हैं। उन्होंने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी घटना पर गहरा दुख जताया है। इस बीच पीआरओ यादव ने बताया कि रेलवे के आला अधिकारी घटना स्थल पर पहुंच गए हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है। दूसरी तरफ रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी सभी मृतकों के परिजन को दो-दो लाख रूपया मुआवजा देने की घोषणा की है। उन्होंने ट्वीट किया, स्कूली बच्चों के मौत की दुखद खबर मिली है। मैंने वरिष्ठ अधिकारियों को घटना का जांच करने का आदेश दिया है। रेलवे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित सहायता राशि से अलग सभी मृतकों के परिजन को दो-दो लाख रूपया मुआवजा देगी।

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कमलनाथ मप्र कांग्रेस अध्यक्ष, सिंधिया प्रचार समिति के प्रमुख नियुक्त

नई दिल्ली, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ को आज पार्टी की मध्य प्रदेश इकाई का अध्यक्ष और ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव प्रचार समिति का प्रमुख नियुक्त किया गया। राज्य में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं।
पार्टी महासचिव अशोक गहलोत की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तत्काल प्रभाव से कमलनाथ को मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष और सिंधिया को चुनाव का प्रचार समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के चार कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त किए गए हैं। बाला बच्चन, रामनिवास रावत, जीतू पटवारी और सुरेंद्र चौधरी कार्यकारी अध्यक्ष होंगे।
पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ छिंदवाड़ा से सांसद हैं। उनसे पहले अरूण यादव प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की भूमिका में थे।
गहलोत ने कहा, पार्टी अरूण यादव की कड़ी मेहनत और योगदान की सराहना करती है।

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