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राष्ट्रीय

शेखावाटी की धरती ने दिए हैं सशक्त नेता

डीएनआर ब्यूरो. जयपुर

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के लिए दिल्ली में मंथन चल रहा है। प्रदेशाध्यक्ष की दौड़ में शुरुआत से पहले नंबर पर चल रहे शेखावाटी के सपूत केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के नाम पर मुहर लगेगी या नहीं है तो बैठकों का दौर पूरा होने के बाद ही पता चल पाएगा। क्योंकि जातीय समीकरणों के फेर में उलझे इस पद के लिए शेखावत के विरोध की बयार के बाद पार्टी में और भी नामों पर विचार मंथन चल रहा है। लेकिन प्रदेश की राजनीति में अपना अहम स्थान रखने वाली शेखावाटी की धरा ने भाजपा और कांग्रेस दोनों की दलों को प्रदेश की राजनीति में कई बार बेहतर नेतृत्व प्रदान किया है।

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फेसबुक: डेटा लीक विवाद रहा बेअसर!

मुंबई। फेसबुक डाटा लीक मामले के बावजूद फेसबुक का मुनाफा 63 फीसदी रहा है। फेसबुक की ओर से इस साल की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए गए हैं और ये कंपनी और मार्क जकरबर्ग के लिए राहत की सांस लेने वाले नतीजे हैं। 2018 के पहले क्वाार्टर में फेसबुक को 63 फीसदी का प्रॉफिट हुआ है और इसके रेवेन्यू में 49 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि मोदी सरकार ने बुधवार को फेसबुक के खिलाफ दूसरा नोटिस भेजकर अतिरिक्त सवाल पूछे है। वहीं फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने ब्रिटेन व अमेरिकी अदालतों में पेश होकर कई बार माफीनामा भी मांगा है वहीं भारत में होने वाले कर्नाटक चुनावों में भी डेटा संबंधी मामलों में ज्यादा सतर्कता बरतने का प्रयास भी जताया था।

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स्वच्छ भारत अभियान स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें दूर करने में सक्षम: प्रभु

नई दिल्ली। सरकार के महात्वाकांक्षी स्वच्छ भारत अभियान में कई सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का समाधान करने और देश में पर्यटन को बढ़ावा देने की क्षमता है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने आज यह बात कही। प्रभु ने मृदा उर्वरता में सुधार पर जोर देते हुए कहा कि मृदा सुरक्षा खाद्य सुरक्षा के सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि स्वच्छ भारत अभियान द्वारा स्वास्थ्य संबंधी कई मुद्दों का समाधान होगा।


... स्वच्छ भारत अभियान में देश में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता है। ै
केंद्रीय मंत्री ने उद्योग संगठन फिक्की द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा , ै स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से हम सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का समाधान कर सकते हैं ... सबसे तेजी से बढ़ रहे पर्यटन क्षेत्र को भी इससे फायदा मिलेगा। ै
उन्होंने ने कहा कि भारतीय संस्कृति हमेशा पर्यावरण को साफ रखने में विश्वास रखती है लेकिन दुर्भाग्यवश हम उस रास्ते से भटक गए हैं।

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नजऱ लगना: हकीकत या फसाना

जब व्यक्ति के साथ कुछ भी बुरा होता है तो घर के बड़े-बुजुर्गों द्वारा कहा जाता है की नजर लग गई है। क्या सच में नजरों में कुछ ऐसा होता है, जिससे बुराई हावी होने लगती है। आईए जानें यह हकीकत है या फसाना। हमारे आस-पास तीन तरह की ऊर्जा हर वक्त रहती है- सकारात्मक, नकारात्मक और उदासीन। यह सोचने-समझने की शक्ति, चाल-चलन, शिष्टाचार और बोलचाल से बनती है। जब किसी दूसरे व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा हमारी सकारात्मकता पर हावी होती है, तो उसे नजर लगना कहा जाता है। माना जाता है कि नजर लगने पर व्यक्ति की साकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है। व्यक्ति बीमार महसूस करता है। नजर लगने पर व्यक्ति को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नजर लगने के कुछ सामान्य लक्षण देखे जा सकते हैं, जैसे अचानक उल्टी होना, पशुओं की अचानक मौत, छोटे बच्चों का बार-बार रोना, बनते काम बिगड़ जाना आदि। जब घर पर बुरी नजर का प्रभाव होता है तो घर खाने को दौड़ता है, बेवजह लड़ाई-झगड़े होने लगते हैं, कारोबार में नुकसान होता है, पारिवारिक सदस्यों की सेहत पर बुरा प्रभाव रहता है, पैसा बिमारी पर खर्च होने लगता है और रोग भी पकड़ में नहीं आता।

बचें नजरों के प्रभाव से

कुछ बाल काट कर पवित्र नदी में प्रवाह कर दें।


नहाने के पानी में कुछ बूंदे केवड़ा डालें।


चन्दन की खुशबू का अधिक से अधिक प्रयोग करें, नकारात्मकता कभी भी हावी नहीं होने पाएगी।


घर से जब भी बाहर जाएं थोड़ा गुड़ खाकर निकलें।


घर से दूर करें नजर दोष
साफ-सफाई का ध्यान रखें, गंदगी पर नकारात्मकता जल्दी हावी होती है।

सुबह-शाम घर के मंदिर में गाय के घी का दीपक लगाएं।

मुख्यद्वार और हर कमरे के दरवाजे पर लाल रंग का स्वस्तिक बनाएं।

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यह तस्वीर लगाने के बाद लोगों के साथ होती थी ऐसी घटनाएं

वास्तु शास्त्रियों के अनुसार पक्षी शुभता के प्रतीक हैं। माना जाता है कि इनमें अनिष्ट करने वाले तत्वों को काबू करने की शक्तियां होती हैं, इसलिए इनकी दृष्टि को बहुत शुभ माना जाता है। घर व दुकान में पक्षियों के चित्र आदि लगाने से सफलता के मार्ग में आने वाली सभी परेशानियां खत्म होने लगती हैं। इससे निश्चित ही सकारात्मकता बढ़ती है और नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा मिलता है। इन्हें लगाने से पूर्व सही दिशा का चयन करना भी अति आवश्यक है। जैसे हमेशा पक्षियों की तस्वीरें या मूर्ति ऐसी जगह पर लगाएं जहां बार-बार आपकी नजऱ पड़े। किसी भी पक्षी की तस्वीर या मूर्ति लगाने के विभिन्न शुभ-अशुभ प्रभाव होते हैं। फिनिक्स पक्षी सफलता प्रदान करने वाली ऊर्जा, प्रसिद्धि और विकास का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी तस्वीर को घर के दक्षिणी भाग में रखने से सफलता के रास्ते में आ रही कठिनाईयों से बाहर निकलने में आसानी होती है। यह व्यक्ति को अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। जिससे उस व्यक्ति में अपने काम के प्रति एक नई उमंग उत्पन्न होने लगती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वास्तव में फिनिक्स नाम का कोई पक्षी नहीं है, बल्कि यह एक कल्पानाकृति है, जिसे सफलता का रूप माना जाता है। असली पक्षियों को पालना भी घर में शुभता लेकर आता है। सुबह शाम घर की छत पर पानी से भरा कटोरा रखें और सतनाजा डालें। जब पक्षी आपके घर की छत पर चहकेंगे तो घर के इिर्द-गिर्द फैली नकारत्मकता का नाश होगा और सकारात्मकता का संचार होगा। वास्तु के अनुसार जब पक्षी भोजन करके उड़ेगे तो घर की नकारात्मकता भी साथ ले जाएंगे। रूपए-पैसे से संबंधित समस्याएं भी खत्म होती हैं।

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बगावत की आग में जल रहा पाक, सेना के खिलाफ भड़का विद्रोह

पेशावर: पाकिस्तान को अपने ही घर में बगावत का सामना करना पड़ रहा है। पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में सेना के खिलाफ पश्तूनों का विद्रोह दिन-ब-दिन भड़कता जा रहा है। गुरुवार को पीओके में जेकेएलएफ के लोगों ने नईम बट्ट को इंसाफ दिलाने को लेकर लेकर जमकर प्रदर्शन किया। उन्होंने जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के कार्यकर्ता नईम बट्ट की हत्या में संलिप्त आरोपियों को दंडित करने की मांग को लेकर रावलकोट के डिप्टी कमिश्रर के तत्काल निलंबन की मांग की।

जेकेएलएफ और परिवहन संघ के कार्यकर्ता रावलकोट स्थित डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारी कार्यकर्ता लगातार पाकिस्तानी पुलिस और सेना के जुल्मों के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। बता दें कि पाकिस्तान के लिए इन दिनों पश्तून आंदोलन सिरदर्द बना हुआ है। पाक सेना के सामने मंज़ूर पश्तीन नाम का एक पश्तून नेता चैलेंज बनकर खड़ा है। बीते कुछ महीनों में मंज़ूर पश्तून की पाकिस्तान में काफी लोकप्रियता बढ़ी है। पश्तीन देखते ही देखते पाकिस्तान की राजनीति में छा गए हैं।

पाकिस्तान में रहने वाले पश्तून मंज़ूर पश्तीन के साथ हैं और पाक सेना पर उनका गुस्सा रैलियों के रूप में निकल रहा है।पाकिस्तान में रह रहे पश्तूनों का आरोप है कि वहां की सेना की कार्रवाई के दौरान पिछले कुछ वर्षों में कई पश्तून लापता हो चुके हैं तो कई पश्तूनों को मारा जा चुका है। पाक सेना वहां रह रहे पश्तूनों का दमन कर रही है और उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रही है। इनका आरोप है कि पाकिस्तान उनके साथ गुलामों जैसा सलूक कर रही है। ऐसे में युवा पश्तून नेता मंज़ूर पश्तीन उनके लिए एक मसीहा बनकर सामने आए हैं।

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पाताल लोक का रहस्यमयी शिवलिंग !

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 120 किलोमीटर प्रसिद्ध खरौद नगर में स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर अपने आप में अनूठा है। खरौद प्राचीन छत्तीसगढ़ के पांच ललित कला केंद्रों में से एक है और मोक्षदायी नगर माना जाने के कारण इसे छत्तीसगढ़ की काशी भी कहा जाता है। माना जाता है कि यहां रामायणकालीन शबरी उद्धार और लंका विजय के निमित्त भ्राता लक्ष्मण की विनती पर भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण के साथ खर और दूषण की मुक्ति के पश्चात 'लक्ष्मणेश्वर महादेवÓ की स्थापना की थी।


मान्यता है कि मंदिर के गर्भगृह में श्रीराम के अनुज लक्ष्मण के द्वारा स्थापित लक्ष्यलिंग स्थित है। इसे लखेश्वर महादेव भी कहा जाता है क्योंकि इसमें एक लाख लिंग है। इनमें से एक छिद्र पातालपुरी का पथ है।


इतिहासकारों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण छठी शताब्दी में हुआ था। यह नगर के प्रमुख देव के रूप में पश्चिम दिशा में पूर्वाभिमुख स्थित है। मंदिर में चारों ओर पत्थर की मजबूत दीवार के अंदर 110 फुट लम्बा और 87 फुट चौड़ा चबूतरा है जिसके ऊपर 87 फुट ऊंचा और 30 फुट गोलाई लिए मंदिर स्थित है।


मंदिर के मुख्य द्वार में प्रवेश करते ही सभा मंडप मिलता है। इसके दक्षिण तथा वाम भाग में एक-एक शिलालेख दीवार में लगा है। इसमें आठवीं शताब्दी के इंद्रबल तथा ईशानदेव नामक शासकों का उल्लेख है। मंदिर के वाम भाग का शिलालेख संस्कृत भाषा में है। इसमें 44 श्लोक हैं।


चंद्रवंशी हैहयवंश में रत्नपुर के राजाओं का जन्म हुआ था। इनके द्वारा अनेक मंदिर, मठ और तालाब आदि निर्मित कराने का उल्लेख इस शिलालेख में है। तदनुसार रत्नदेव तृतीय की राल्हा और पद्य नाम की दो रानियां थीं। राल्हा से सम्प्रद और जीजाक नामक पुत्र हुए। पद्या से सिंहतुल्य पराक्रमी पुत्र खड्गदेव हुए जो रत्नपुर के राजा भी हुए। उन्होंने लक्ष्मणेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।


मंदिर के बाहर परिक्रमा में राजा खड्गदेव और उनकी रानी हाथ जोड़े स्थित हैं। मूल मंदिर के प्रवेश द्वार के उभय पाश्र्व में कलाकृति से सुसज्जित दो पाषाण स्तंभ हैं। इनमें से एक स्तंभ में रावण द्वारा कैलासोत्तालन तथा अद्र्धनारीश्वर के दृश्य खुदे हैं। इसी प्रकार दूसरे स्तंभ में राम चरित से संबंधित दृश्य जैसे राम-सुग्रीव मित्रता, बाली का वध, शिव तांडव और सामान्य जीवन से संबंधित एक बालक के साथ स्त्री-पुरुष और दंडधारी पुरुष खुदे हैं। प्रवेश द्वार पर गंगा-यमुना की मूर्ति है। मूर्तियों में मकर और कच्छप वाहन स्पष्ट दिखाई देते हैं। उनके पाश्र्व में दो नारी प्रतिमाएं हैं। इसके नीचे प्रत्येक पाश्र्व में द्वारपाल जय और विजय की मूर्ति है।


मंदिर के शिवलिंग में एक लाख छिद्र हैं इसलिए इसे 'लक्षलिंगÓ कहा जाता है। इन लाख छिद्रों में से एक छिद्र ऐसा है जो पातालगामी है क्योंकि उसमें कितना भी जल डालो वह उसमें समा जाता है, वहीं लिग में एक अन्य छिद्र के बारे में मान्यता है कि वह अक्षय छिद्र है। उसमें हमेशा जल भरा रहता है। जो कभी सूखता ही नहीं है। लक्षलिंग पर चढ़ाया जल मंदिर के पीछे स्थित कुंड में चले जाने की भी मान्यता है। लक्षलिंग जमीन से लगभग 30 फुट ऊपर है और इसे स्वयंभू लिंग भी माना जाता है। लक्षलिंग के पीछे रामायण की एक रोचक कहानी है। रावण ब्राह्मण था। अत: उसका वध करने के बाद भगवान राम को ब्रह्म हत्या का पाप लगा। इससे मुक्ति पाने के लिए राम-लक्ष्मण ने शिव के जलाभिषेक का प्रण लिया। लक्ष्मण सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों से जल एकत्रित करने निकले।


इस दौरान गुप्त तीर्थ शिवरीनारायण से जल लेकर अयोध्या के लिए निकलते समय वह रोगग्रस्त हो गए। रोग से छुटकारा पाने के लिए लक्ष्मण ने शिव आराधना की। प्रसन्न होकर शिव ने लक्ष्मण को दर्शन दिए और लक्षलिंग रूप में विराजमान हो गए। लक्ष्मण ने लक्षलिंग की पूजा की और रोग मुक्त हो गए इसीलिए यह मंदिर लक्ष्मणेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ। तब से इसे लोग लक्ष्मणेश्वर महादेव के नाम से ही जानते हैं। करीबी स्थित अन्य प्रमुख मंदिरों में अंदलदेयो तथा शबरी मंदिर भी शामिल हैं।

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चार ग्रहों ने यूं रचा बेरहम मौत का खेल

वर्तमान परिस्थितियों में संसार और भारत ने कुछ अप्रिय घटनाएं देखी हैं। कुछ ऐसी घटनाएं जिसने मन को पसीज कर रख दिया है । पिछला लगभग एक महिना गवाह है सैंकड़ों बच्चों के दर्दनाक मौत के मंजऱ का । इसे मात्र पीड़ा नहीं है परंतु इसे दैवीय या ग्रहीय कोप भी कहा जा सकता है। सबसे पहले सोमवार दिनांक 09.04.18 को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित नूरपुर - चंबा राजमार्ग पर गुरचल गांव के निकट एक स्कूल बस गहरी खाई में गिर गयी, जिसमें 27 बच्चों सहित 30 लोगों की मौत हो गयी । इसके बाद भारत से सात समुंदर पार कनाडा के टोरंटो में मंगलवार दिनांक 24.04.18 को तकरीबन 01:30 बजे एक ट्रक ने राहगीरों को कुचल दिया था, जिसमें 10 लोगों की मौत हुई। सिलसिला अभी थमा ही नहीं था कि आज सुबह फिर से 2 दर्दनाक हादसे हो गए, पहला हादसा उत्तर प्रदेश का है, उत्तर प्रदेश कुशीनगर जिले में एक स्कूल वैन ट्रेन से टकराई जिसमें 13 बच्चों सहित 14 की मौत हो गई। दूसरी घटना दिल्ली की है जहां कन्हैया नगर मैट्रो स्टेशन के पास एक स्कूल बस की टक्कर हुई जिसमें 1 मौत व 18 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए । ज्योतिष की दृष्टि से इन सभी पीड़ादायक घटनाओं के पीछे तीन बहुत घातक ग्रह स्थितियां बन रही हैं। पहली शनि-मंगल का द्वंद योग, दूसरा शनि व गुरु की वक्र अवस्था और तीसरा मंगल और राहू का षडाष्टक योग।


ज्योतिष शास्त्र में शनि और मंगल दोनों को पाप ग्रह माना गया है। शनि व मंगल परस्पर शत्रुता रखते हैं। इसीलिए ये दोनों ग्रह अगर साथ-साथ हों, तो जीवन को कष्टकारी बनाते ही हैं। इन दोनों ग्रहों का आपस में विपरीत होना विश्व में अशांति, अमंगल, भय आदि की परिस्थितियां बनाता है। ज्योतिष शास्त्रों में शनि-मंगल की युति को द्वंद्व योग की संज्ञा दी गई है अर्थात खून-खराबा, प्राकृतिक आपदाओं व अमंगल घटनाएं घटित होने के संकेत हैं। शास्त्रों में मंगल को शक्ति, हठ, भूमि, सेना, खून, विस्फोट, आग आदि का कारक माना गया है जबकि दूसरी ओर शनि को आलस्य, न्याय, तोड़-फोड़ व शत्रु आदि व्यक्ति का कारक माना गया है। वर्तमान स्थिति में शनि-मंगल के द्वंद योग के साथ-साथ दो प्रमुख ग्रह शनि और गुरु वक्र अवस्था में आ गए हैं। देवगुरु बृहस्पति शुक्रवार दिनांक 09.03.18 को सुबह 10:09 से लेकर मंगलवार दिनांक 10.07.18 को रात 22:46 तक वक्र अवस्था में रहेंगे। शनिदेव बुधवार दिनांक 18.04.18 सुबह 07:10 से लेकर गुरुवार दिनांक 06.09.18 को शाम 17:02 तक वक्र अवस्था में रहेंगे। चूंकि मंगल और शनि दोनों ही पापी ग्रह हैं इसलिए ये प्रत्येक जातक को प्रभावित करते है। कालपुरुष सिद्धान्त के अनुसार शनि-मंगल की युति नवम या धर्म स्थान में है।


साल 2018 में शनि और मंगल की युति 7 मार्च से 2 मई 2018 तक है। इसलिए ये 57 दिन न केवल प्रत्येक राशि के जातकों के लिए परेशानी भरे हैं, बल्कि देश-दुनिया के लिए भी शनि-मंगल की युति भयानक हालात भी पैदा कर सकती है। शनि पहले से ही धनु राशि में चल रहे हैं। मंगल 7 मार्च 2018 को सायं 6.30 बजे के धनु राशि में प्रवेश कर गए थे। जिससे शनि-मंगल की युति हो गयी थी। मंगल इस राशि में 2 मई को सायं 4.18 बजे तक रहेंगे। मंगल 7 मार्च, 2018 को भारतीय समयानुसार शाम 18:27 बजे मूल नक्षत्र के प्रथम चरण में होते हुए धनु राशि में प्रवेश कर गए थे और 2 मई 2018 बाद दोपहर 14:19 तक इसी राशि में रहेंगे। इसी कारण कर्क राशि के अश्लेषा नक्षत्र में बैठे राहु से इसका छठा-आठवां संबंध बन गया है। ज्योतिष में इसे षडाष्टक योग कहा जाता है। षडाष्टक योग दुर्घटनाओं के साथ-साथ अकाल मृत्यु का कारण भी है। शनि पहले से ही धनु राशि में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में गोचर कर रहा है। शनि-मंगल की युति, संबंध और स्वभाव के साथ ही दोनों नक्षत्र भी अग्नि तत्व हिंसक होने से कुछ विपरीत परिस्थितियां को दर्शाती है। इसी कारण शनि-मंगल की युति कुछ अप्रिय घटनाओं की स्थितियां उत्पन्न होने के संकेत देती है। इस युति का असर सभी लोगों के स्वास्थ्य व स्वभाव पर पड़ेगा।

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कुशीनगर हादसा: खून से भीगी यूनीफार्म में बेजान पड़े थे मासूम, जिसने देखा रो पड़ा

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कुशीनगर: साफ सुथरी धुली यूनीफार्म पहनकर, पीठ पर बस्ता और हाथ में पानी की बोतल लेकर अपने घरों से स्कूल के लिए निकले नौनिहाल कुछ ही देर में खून से लथपथ बेजान पड़े थे। बच्चों के मां बाप पर तो दुख का पहाड़ टूटा ही, मौके पर पहुंचे हर शख्स की आंख नम थी। छोटी सी रागिनी स्कूल यूनीफार्म में थी, जो उसी के खून से भीगी थी।
उसका ठंडा पड चुका शरीर 12 अन्य बच्चों के साथ बेजान पड़ा था और बड़ा दर्दनाक ²श्य उत्पन्न कर रहा था। यह 13 बच्चे स्कूल की बजाय मौत के दरवाजे पर पहुंच गए जब एक पैसेंजर ट्रेन ने बेहपुरवा में बिना फाटक वाली क्रासिंग पर इन बच्चों की स्कूल वैन को टक्कर मारी और मासूमों की जिन्दगी समाप्त ।
मिशन स्कूल में पढऩे वाले इन बच्चों के स्कूल बैग, कापी किताबें, पानी की बोतलें ​और टिफिन उनके मृत शरीर के इर्द गिर्द छितराये पडे थे । उनकी सफेद यूनीफार्म उन्हीं के खून से लाल हो चुकी थी । सुबह करीब सवा सात बजे का वक्त था । कई लोग तो उठे ही नहीं होंगे, जब यह दिल दहलाने वाली खबर आयी ।
पिता सगे संबंधी पडोसी दोस्त इस उम्मीद में दुर्घटना वाली जगह की ओर दौडे कि शायद उनका अपना किसी तरह बच गया हो लेकिन उन्हें मायूसी मिली । बच्चों को रोजाना स्कूल ले जाने वाली पीली वैन टूटी फूटी दूर पडी थी। वैन के शीशे चकनाचूर थे और लोहे की बाडी टूटे फूटे कबाड सी । ये ²श्य इतना समझने के​ लिए काफी था कि टक्कर कितनी जबर्दस्त रही होगी।

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वैन के चालक से वहां मौजूद लोगों ने कहा था कि रूक जाए, ट्रेन आ रही है लेकिन उसने अनसुनी कर दी। चालक खुद गंभीर रूप से घायल है और गोरखपुर मेडिकल कालेज में उसका इलाज हो रहा है । राम मनोहर मजदूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि चालक ने मानवरहित क्रासिंग झटके में पार करने की कोशिश की लेकिन वैन ना जाने कैसे पटरी पर रूक गयी या शायद बंद हो गई। उसी समय पटरी पर पैसेंजर ट्रेन आ गयी जो सीवान से गोरखपुर की ओर जा रही थी । ट्रेन वैन को चकनाचूर करते हुए आगे बढ गई। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी हबीब अंसार ने बताया कि कुछ महिलाओं और राहगीरों ने वैन चालक को रोकने का प्रयास किया लेकिन उसने सुना नहीं। ​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​ अंसार ने कहा, मैंने टक्कर नजदीक से देखी है। बच्चों ने मौके पर ही दम तोड दिया। उन्होंने कहा कि वैन चालक की लापरवाही से बच्चों की मौत हुई। प्रत्यक्षर्दिशयों ने बताया कि चालक ने क्रासिंग पार करने से पहले जरा सी सावधानी बरती होती तो शायद इतना बडा हादसा ना होता ।

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बताया जा रहा है कि वैन चालक ने ईयर फोन लगा रखा था इसीलिए लोगों की चिल्लाहट वह सुन नहीं पाया और खामियाजा 13 बच्चों की मौत के रूप में सामने आया । ये सभी बच्चे सात से 10 साल के बीच के थे । अमरजीत मिश्रौली के रहने वाले हैं । रागिनी उनकी बेटी है ।
रागिनी के अलावा उसके दो भाई संतोष एवं रवि भी इस हादसे में मौत के मुंह में चले गये । बतरौली के हसन की दो बेटियां साजिदा और तमन्ना नहीं रहीं। मैहीहरवा के मोइनुददीन का बेटा मिराज और बेटी मुस्कान इस दुनिया में नहीं रहे। स्थानीय लोग धमाके जैसी आवाज सुनने के बाद दौडे और घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया।

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बाद में चार घायल बच्चों और वैन चालक को गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज इलाज के लिए ले जाया गया। अपुष्ट खबरों के मुताबिक स्कूल मान्यता प्राप्त नहीं है । पुलिस के अनुसार स्कूल के प्रधानाध्यापक के जे खान को हिरासत में ले लिया गया है। ​​​​​मृतकों की पहचान हरि ओम (8), रागिनी (7), अतीउल्लाह (8), अरशद (9), अनस नरोद (8), गोलू (8), कमरूल (10), साजिदा (11), तमन्ना (10), मिराज (8), मुस्कान (7) तथा संतोष और रवि के रूप में की गर्ई है ।​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​

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राजस्थान के आदिवासी बहुल जिलों को संविधान के पांचवीं अनुसूची में किया गया शामिल

नई दिल्ली। राजस्थान के आदिवासी बहुल जिलों को संविधान की पांचवीं अनुसूची में शामिल करने की अनुमति कैबिनेट ने दी है। इन इलाकों में रहने वाले आदिवासियों को जरूरी सहूलियतें मिलेंगी। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ जिलों के साथ नौ तहसीलों, एक ब्लाक, 46 ग्राम पंचायतों (उदयपुर, राजसमंद, चित्तौडग़ढ़, पाली व सिरोही के 227 गांवों) को इसमें शामिल किया गया है।

कैबिनेट ने 12 फरवरी 1981 के संवैधानिक आदेश को पुर्नजिवित करते हुए यह आदेश जारी किया। लाभार्थियों में बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ उदयपुर, राजसमंद, चित्तौडग़ढ़, पाली व सिरोही में रहने वाले पिछड़े वर्ग के लोगों को भी शामिल किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि इस फैसले के बाद इन इलाकों के लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत नहीं होगी। ट्राइबल सब प्लान स्कीम के तहत यहां पर विकास कार्य सिरे चढ़ाए जाएंगे। एक अधिकारी का कहना है कि उद्देश्य यह है कि इल इलाकों में रहने वाले लोगों को समुचित विकास हो सके।

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