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पीएम मोदी की इस पहली यात्रा से बढ़ी ड्रैगन की टेंशन, ताकतवर होगा भारत Featured

नई दिल्ली। भारत की समुद्री सीमाओं पर चीन लंबे समय से नजर गड़ाए हुए है। समुद्री क्षेत्रों में चीन का बढ़ता दखल भारत के लिए गंभीर विषय बनता जा रहा है। चीन हर तरफ से भारत को घेरने की फिराक में है। भारतीय सीमाओं से सटे देश म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका, पाकिस्तान और मालदीव में चीन लगातार निवेश कर अपनी ताकत बढ़ा रहा है। भारत के इन पड़ोसी देशों में चीन बंदरगाह निर्माण पर पूरा जोर लगाए हुए है।
आने वाले समय में चीन अपने इस कदम के जरिए भारत पर लगातार निगहबानी रखने में सक्षम हो जाएगा। दक्षिण एशिया में भारत की बढ़ती ताकत को ध्यान में रखकर चीन रणनीतिक चाल चल रहा है। इन क्षेत्रों में चीन की बढ़ती चाल को भारत के इस कदम से जरूर झटका लगेगा। हम बात कर रहे हैं हाल ही में हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओमान दौरे की। ओमान के दौरे पर पीएम मोदी ने कुछ ऐसे द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं जो चीन की परेशानी बढ़ा सकते हैं।
दोनों देशों के बीच हुए समझौतों में भारतीय नौसेना को ओमान के दुक्म पोर्ट तक पहुंच बढ़ाने में सफलता हासिल हुई है। इसके जरिए भारत चीन को गल्फ ऑफ ओमान के मुहाने पर रोकने में सक्षम हो जाएगा। भारत से पहले अमेरिका, ब्रिटेन, चीन दुक्म पोर्ट पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं। यहां भारत के प्रवेश से किसी देश को फर्क पड़े या न पड़े लेकिन चीन जरूर चिंतित है। चीन ने 2016 में इस पोर्ट पर 2,246 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है।
बताते चलें कि ओमान पर्सियन गल्फ और हिंद महासागर मार्ग पर स्थित है। इसके चलते खाड़ी देशों में ओमान की अलग ही ताकत है। ओमान की ताकत अंदाजा ऐसे भी लगा सकते हैं कि अमेरिका की ईरान से न्यूक्लियर डील तभी संभव हो पाई थी जब ओमान ने मदद की। ऐसे में भारत का ओमान से बढ़ता संबंध अलग ही महत्व रखता है।

DNR Reporter

DNR desk

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