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हमदर्दी रखना आंशिक तौर पर हमारे वंशाणुओं पर है निर्भर : अध्ययन Featured

भाषा. लंदन

इंसानों में हमदर्दी की भावना केवल उसके पालन- पोषण और अनुभव पर ही निर्भर नहीं करती बल्कि उनके वंशाणु भी इसके पीछे जिम्मेदार होते हैं। भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक समेत कुछ अन्य अनुसंधानकर्ताओं ने यह दावा किया है।
समानुभूति के दो हिस्से होते हैं, पहला दूसरे व्यक्ति के विचार और भावनाओं को पहचानने की क्षमता और दूसरा किसी के विचारों और भावनाओं पर उचित भावना के साथ प्रतिक्रिया देने की क्षमता। पहले हिस्से को ज्ञानात्मक समानुभूति कहा जाता है और दूसरा हिस्सा प्रभावी समानुभूति कहलाता है। आज से 15 साल पहले यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के वैज्ञानिकों ने समानुभूति गुणक (ईक्यू) विकसित किया था जो समानुभूति मापने का एक संक्षिप्त तरीका है।

ईक्यू के जरिए समानुभूति के दोनो हिस्सों को मापा जाता है। पूर्व में हुए अनुसंधान दिखाते हैं कि हम में से कुछ लोग दूसरों के मुकाबले ज्यादा हमदर्दी रखने वाले होते हैं और औसतन महिलाएं पुरूषों से ज्यादा हमदर्दी महसूस करती हैं। कैंब्रिज और अनुवांशिक विज्ञान कंपनी 23 एंडमी ने समानुभूति पर सबसे बड़ा अनुवांशिक अध्ययन किया जिसमें46,000 से ज्यादा प्रतिभागियों से सूचनाएं जुटाई गईं। ट्रांसलेशनल साइकाइट्री पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में पाया गया कि हम कितनी हमदर्दी रखते हैं यह कुछ हद तक अनुवांशिकी पर निर्भर करता है।

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