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सांसद और विधायकों को नहीं है जनता के लिए फुर्सत

अजय सिंह पंवार. बीकानेर, देश की सबसे बड़ी पंचायत 'संसदÓ और प्रदेश की विधानसभा में बैठकर देश व प्रदेश के विकास के साथ-साथ दिशा व दशा निर्धारण करने और जनहित के बारे में सोचने वाले सांसद और विधायक अपने क्षेत्र के प्रति कितने गंभीर व संजीदा है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि पंचायत समितियों की साधारण सभाओं की बैठकों में नदारद रहना। क्षेत्र की राजनीति इस कदर हावी है कि सांसद व विधायक पंचायत समितियों की होने वाली साधारण सभाओं की बैठकों में उपस्थिति होना ही मुनासिब नहीं समझते। 

संसद व विधानसभा में पंचायती राज के सशक्तिकरण करने के लम्बे-चौड़े दावे करने वाले सांसद व विधायकों का आलम यह है कि वे खुद बैठकों में उपस्थिति नहीं होते है और न ही उन्होंने अपने क्षेत्र की किसी ज्वलंत समस्या का समाधान करवाया हो। जिसको उपलब्धि के नाम से पहचाना जा सकें। जिले की एकमात्र श्रीडूंगरगढ़ पंचायत समिति को छोड़ दें तो एक भी पंचायत समिति को बिरला नहीं कहा जा सकता। जिसमें अब तक आयोजित हुई साधारण सभाओं की बैठकों में संबंधित सांसद व विधायक पहुंचे हो। जिसमें से सांसद तो जिले की सातों पंचायत समितियों की किसी भी बैठक में नहीं पहुंचे।
जबकि उसी क्षेत्र की जनता ने उनको सांसद व विधायक चुना है। यही नहीं पंचायत समितियों की होने वाली साधारण सभा की बैठकों के लिए सांसद व विधायक को भी सूचना भेजी जाती है।
बैठकों पर राजनीति भारी
ब्लॉक क्षेत्र के विकास को लेकर पंचायत समिति की दो-तीन माह में होने वाली साधारण सभा की बैठकों की अपनी ही अहमियत है। किंतु राजनीतिक दृष्टि से पक्ष व विपक्ष दो धड़ों में बंटे होने की वजह से पंचायत समिति की साधारण सभा की बैठकें भी राजनीति की भेंट चढ़ गई है। यह कहें तो भी कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि इन बैठकों पर राजनीति भारी है। जिस क्षेत्र के विधायक कांग्रेस पार्टी है। वहां प्रधान भाजपा का है और जहां प्रधान कांग्रेस का है। वहां विधायक भाजपा का है। इसी वजह से विधायक पंचायत समितियों की होने वाली बैठकों में भाग नहीं ले रहे है।
श्रीडूंगरगढ़ एकमात्र अपवाद
जिले में एकमात्र श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र ही ऐसा है। जहां प्रधान व विधायक दोनों ही एक ही पार्टी भाजपा से है। विधायक किशनाराम नाई की पंचायत समिति की अब तक हुई साधारण सभा की बैठकों में शत-प्रतिशत उपस्थिति रही है।
एक भी बैठक में नहीं पहुंचे सांसद
जिले की सातों श्रीडूंगरगढ़, नोखा, पांचू, लूणकरनसर, श्रीकोलायत, खाजूवाला व बीकानेर पंचायत समितियों की अब तक सम्पन्न हो चुकी एक भी साधारण सभा की बैठक में क्षेत्रीय सांसद अर्जुनराम मेघवाल की उपस्थिति नहीं रही है।
घर में अनुपस्थित, बाहर उपस्थित
संसदीय सचिव डॉ. विश्वनाथ मेघवाल पर अपने घर में नहीं, बाहर पंचायती...वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। वे खुद अपने विधानसभा क्षेत्र खाजूवाला पंचायत समिति की साधारण सभा की बैठकों में तो एक बार भी नहीं पहुंचे। अलबत्ता बीकानेर और भाजपा प्रधान वाली अन्य पंचायत समितियों की बैठकों में पहुंचकर पंचायती की है।
खुद बैठकों में नहीं आते
संसद व विधानसभा में पंचायती राज के सशक्तिकरण करने के लम्बे-चौड़े दावे करने वाले सांसद व विधायकों का आलम यह है कि वे खुद बैठकों में उपस्थिति नहीं होते है और न ही उन्होंने अपने क्षेत्र की किसी ज्वलंत समस्या का समाधान करवाया हो। जिसको उपलब्धि के नाम से पहचाना जा सकें।
बैठकों पर राजनीति भारी
ब्लॉक क्षेत्र के विकास को लेकर पंचायत समिति की दो-तीन माह में होने वाली साधारण सभा की बैठकों की अपनी ही अहमियत है। किंतु राजनीतिक दृष्टि से पक्ष व विपक्ष दो धड़ों में बंटे होने की वजह से पंचायत समिति की साधारण सभा की बैठकें भी राजनीति की भेंट चढ़ गई है। यह कहें तो भी कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि इन बैठकों पर राजनीति भारी है। जिस क्षेत्र के विधायक कांग्रेस पार्टी से है। वहां प्रधान भाजपा का है और जहां प्रधान कांग्रेस का है। वहां विधायक भाजपा का है। इसी वजह से विधायक पंचायत समितियों की होने वाली बैठकों में भाग नहीं ले रहे है।
ये है अपवाद
जिले की एकमात्र श्रीडूंगरगढ़ पंचायत समिति को छोड़ दें तो एक भी पंचायत समिति को बिरला नहीं कहा जा सकता। जिसमें अब तक आयोजित हुई साधारण सभाओं की बैठकों में संबंधित सांसद व विधायक पहुंचे हो। जिसमें से सांसद तो जिले की सातों पंचायत समितियों की किसी भी बैठक में नहीं पहुंचे।
घर में अनुपस्थित, बाहर उपस्थित
संसदीय सचिव डॉ. विश्वनाथ मेघवाल पर अपने घर में नहीं, बाहर पंचायती...वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। वे खुद अपने विधानसभा क्षेत्र खाजूवाला पंचायत समिति की साधारण सभा की बैठकों में तो एक बार भी नहीं पहुंचे। अलबत्ता बीकानेर और भाजपा प्रधान वाली अन्य पंचायत समितियों की बैठकों में पहुंचकर पंचायती की है। गौरतलब है कि खाजूवाला में पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान डॉ. विश्वनाथ मेघवाल के सामने प्रधान के पिता गोविन्दराम मेघवाल थे।
मुंह ताकना पड़ता है
साधारण सभा की एक भी बैठक में सांसद व विधायक एक बार भी उपस्थिति नहीं हुए। और तो और विद्युत निगम के अधिकारी तक नहीं पहुंचते है। जिसके कारण इन बैठकों का कोई औचित्य नहीं रह जाता और छोटी से छोटी बात व समस्या समाधान के लिए जिला परिषद का मुंह ताकना पड़ता है।
- कन्हैयालाल सियाग, प्रधान नोखा
फोन भी करते हैं
साधारण सभा की बैठक में बुलाने के लिए सांसद को लिखित में सूचना देने के बाद भी फोन कर भी उनसे बैठक में उपस्थिति होने का आग्रह करते है। इसके बावजूद वे श्रीडूंगरगढ़ की साधारण सभा की एक भी बैठक में नहीं पहुंचे। जिसका मलाल है।
- रामलाल मेघवाल, प्रधान श्रीडूंगरगढ़
श्रीडूंगरगढ़ एकमात्र अपवाद
जिले में एकमात्र श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र ही ऐसा है। जहां प्रधान व विधायक दोनों ही एक ही पार्टी भाजपा से है। विधायक किशनाराम नाई की पंचायत समिति की अब तक हुई साधारण सभा की बैठकों में शत-प्रतिशत उपस्थिति रही है।
एक भी बैठक में नहीं पहुंचे सांसद
जिले की सातों श्रीडूंगरगढ़, नोखा, पांचू, लूणकरनसर, श्रीकोलायत, खाजूवाला व बीकानेर पंचायत समितियों की अब तक सम्पन्न हो चुकी एक भी साधारण सभा की बैठक में क्षेत्रीय सांसद अर्जुनराम मेघवाल की उपस्थिति नहीं रही है।

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