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राजस्थान के आदिवासी बहुल जिलों को संविधान के पांचवीं अनुसूची में किया गया शामिल

नई दिल्ली। राजस्थान के आदिवासी बहुल जिलों को संविधान की पांचवीं अनुसूची में शामिल करने की अनुमति कैबिनेट ने दी है। इन इलाकों में रहने वाले आदिवासियों को जरूरी सहूलियतें मिलेंगी। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ जिलों के साथ नौ तहसीलों, एक ब्लाक, 46 ग्राम पंचायतों (उदयपुर, राजसमंद, चित्तौडग़ढ़, पाली व सिरोही के 227 गांवों) को इसमें शामिल किया गया है।

कैबिनेट ने 12 फरवरी 1981 के संवैधानिक आदेश को पुर्नजिवित करते हुए यह आदेश जारी किया। लाभार्थियों में बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ उदयपुर, राजसमंद, चित्तौडग़ढ़, पाली व सिरोही में रहने वाले पिछड़े वर्ग के लोगों को भी शामिल किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि इस फैसले के बाद इन इलाकों के लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत नहीं होगी। ट्राइबल सब प्लान स्कीम के तहत यहां पर विकास कार्य सिरे चढ़ाए जाएंगे। एक अधिकारी का कहना है कि उद्देश्य यह है कि इल इलाकों में रहने वाले लोगों को समुचित विकास हो सके।

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कैबिनेट ने 5वीं अनुसूची के तहत राजस्थान में अनुसूचित क्षेत्रों की घोषणा को मंजूरी दी

नई दिल्ली, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संविधान की 5वीं अनुसूची के अंतर्गत राजस्थान के संबंध में अनुसूचित क्षेत्रों की घोषणा को आज मंजूरी प्रदान कर दी।
राजस्थान के बांसवाड़ा, डुंगरपुर, प्रतापगढ़ तथा उदयपुर के आंशिक क्षेत्रों, राजसमंद, चितौडगढ़, पाली तथा सिरोही जिलों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति के लोग भारत के संविधान की 5वीं अनुसूची के अंतर्गत उपलब्ध सुरक्षात्मक उपायों का लाभ प्राप्त करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
इसमें 12 फरवरी 1981 संविधान आदेश (सीओ) 114 को रद्द करके और नया संविधान आदेश लागू करके भारत के संविधान की 5वीं अनुसूची के अंतर्गत राजस्थान के संबंध में अनुसूचित क्षेत्रों की घोषणा की गई है।
नया आदेश लागू होने से राजस्थान के अनुसूचित जनजाति के लोगों को भारत के संविधान की 5वीं अनुसूची के अंतर्गत उपलब्ध सुरक्षात्मक उपायों का लाभ मिलना सुनिश्चित होगा।
राजस्थान सरकार ने प्रदेश में अनुसूचित क्षेत्रों के विस्तार के लिए अनुरोध किया था।
राजस्थान में अनुसूचित क्षेत्रों में सम्पूर्ण रूप से बांसवाड़ा, डुंगरपुर और प्रतापगढ़ जिले तथा उदयपुर, राजसमंद, चितौडगढ़, पाली और सिरोही जिलों के 727 गांवों को कवर करने वाली 46 ग्राम पंचायतें शामिल की जाएंगी।
अनुसूचित क्षेत्रों की घोषणा के मद में अतिरिक्त धन खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह तेज विकास के लिए अनुसूचित क्षेत्रों में अधिक ध्यान देने के लिए केन्द्र और राज्य सरकार की वर्तमान योजनाओं के अंतर्गत जनजातीय उप-योजना का हिस्सी होगी।

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लम्बी लुका-छिपी के बाद इंदौर के आश्रम से पकड़ा गया था आसाराम

इंदौर। नाबालिग लड़की के यौन शोषण के दोषी करार दिए गए आसाराम को लम्बे नाटकीय घटनाक्रम के दौरान उसके स्थानीय आश्रम से 31 अगस्त 2013 की देर रात गिरफ्तार किया गया था।
चश्मदीदों के मुताबिक 30 अगस्त 2013 की रात तक रहस्य बरकरार था कि आसाराम अपने खंडवा रोड स्थित आश्रम में है या नहीं। लेकिन इसके अगले ही दिन जब आश्रम में प्रवचनकर्ता के समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा और वहां भारी पुलिस बल तैनात करते हुए इस परिसर के भीतर मीडिया को प्रवेश से रोक दिया गया, तो माजरा समझ आने लगा।
मीडिया के भारी जमावड़े के बीच 31 अगस्त 2013 को सुबह से लेकर शाम तक पल-पल बदलते घटनाक्रम से आसाराम के अपने आश्रम में ही मौजूद होने के संकेत मिलने लगे। रात साढ़े आठ बजे के आस-पास जब जोधपुर पुलिस का दल आश्रम के भीतर दाखिल हुआ, तो इसमें कोई संदेह नहीं रह गया कि प्रवचनकर्ता इस परिसर के भीतर ही है।
बहरहाल, स्थानीय अधिकारी बताते हैं कि जोधपुर पुलिस के दल को आश्रम के भीतर दाखिल होने के बाद आसाराम को गिरफ्तार करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। पुलिस दल करीब चार घंटे तक आश्रम में रहा। इस दौरान आश्रम के भीतर प्रवचनकर्ता के सैकड़ों अनुयायियों का हंगामा और नारेबाजी जारी रही.
लम्बे सब्र के बाद जोधपुर पुलिस ने आखिरकार सख्त रवैया अपनाया था। स्थानीय पुलिस की मदद से पुख्ता तैयारियों के बाद आसाराम को 31 अगस्त 2013 की देर रात उसके आश्रम से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में उसे सफेद जीप में बैठाकर सीधे देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डे ले जाया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि आसाराम को रात भर हवाई अड्डे में ही रखा गया था। इसके अगले दिन यानी एक सितंबर 2013 को उसे हवाई मार्ग से जोधपुर ले जाया गया था।

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आसाराम पर फैसला: नेताओं ने स्वागत किया

नई दिल्ली। नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में स्वयंभू बाबा आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के फैसले का स्वागत किया और पीड़िता एवं उसके पिता के धैर्य की तारीफ भी की।
कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत ने कहा , अब समय आ गया है जब लोगों को असली संतों और ढोंगियों के बीच अंतर करना चाहिए। ऐसे मामलों से अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत की छवि धूमिल होती है।
माकपा ने जोधपुर के फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है।
माकपा पोलित ब्यूरो की ओर से आज जारी बयान के अनुसार यह मामला स्वयंभू बाबा आसाराम के अपने अनुयायियों की आस्था और विश्वास के नाम पर नाबालिगों के यौन शोषण से जुड़ा़ है इसलिए इसमें दोषियों को दी गई कठोर सजा का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है। पार्टी ने कहा कि इस मामले में पीड़िता और उसके परिवार की आवाज दबाने के लिए हिंसा का भी सहारा लिया गया। नौ गवाहों पर हमले किए गए , इनमें से तीन की मौत भी हो गई।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ( एनसीपीसीआर ) की अध्यक्ष स्तुति कक्कड़ ने कहा कि हम इस फैसले का स्वागत करते हैं। इस मामले का दोषी बहुत शक्तिशाली व्यक्ति है। लोग परेशानी में होने पर इन बाबाओं के पास जाते हैं। बाबाओं को इस तरह की हरकत की बजाय इनकी रक्षा करनी चाहिए।
उन्होंने साथ ही एक सवाल के जवाब में कहा कि 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार के मामलों में दोषियों को कड़ी सजा के प्रावधान वाला हालिया अध्यादेश पूर्व समय से प्रभावी नहीं होगा।

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आसाराम के अर्श से फर्श पर गिरने की कहानी

अहमदाबाद , एक समय स्वयंभू बाबा आसाराम लाखों लोगों द्वारा पूजा जाता था और लोगों की इन्हीं भावनाओं का दोहन कर उसने अपना करोड़ों रूपए का भक्ति साम्राज्य खड़ा किया था लेकिन एक नाबालिग से बलात्कार का मामला सामने आने के बाद उसकी प्रतिष्ठा धूल में मिल गई और उसकी सल्तनत ढहनी शुरू हो गई।
अदालत ने उसे बलात्कार के इसी मामले में आज दोषी करार दिया।
अगर आकंड़ों की बात करें तो 1970 के दशक में साबरमती नदी के किनारे एक झोंपड़ी से शुरुआत करने से लेकर देश और दुनियाभर में 400 से अधिक आश्रम बनाने वाले आसाराम ने चार दशक में 10,000 करोड़ रुपए का साम्राज्य खड़ा कर लिया।
वर्ष 2013 के बलात्कार मामले में आसाराम की गिरफ्तारी के बाद यहां मोतेरा इलाके में उसके आश्रम से पुलिस द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच से खुलासा हुआ कि 77 वर्षीय आसाराम ने करीब 10,000 करोड़ रुपए की संपत्ति बना ली थी और इसमें उस जमीन की बाजार कीमत शामिल नहीं हैं जो उसके पास है।
आसाराम के समर्थकों की अब भी अच्छी खासी तादाद हो सकती है लेकिन बलात्कार के आरोपों के बाद उस पर जमीन हड़पने और अपने आश्रमों में काला जादू करने जैसे अन्य अपराधों के आरोप भी लगे।
उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद डॉक्यूमेंट्री के अनुसार आसाराम का जन्म वर्ष 1941 में पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बेरानी गांव में हुआ था और उसका नाम असुमल सिरुमलानी था।
वर्ष 1947 के विभाजन के बाद आसुमल अपने माता - पिता के साथ अहमदाबाद आया और वह मणिनगर इलाके में एक स्कूल में केवल चौथी कक्षा तक पढ़ा। उसे दस साल की उम्र में अपने पिता की मौत के बाद पढ़ाई छोडऩी पड़ी।
डॉक्यूमेंट्री में दावा किया गया है कि युवावस्था में छिटपुट नौकरियां करने के बाद आसुमल आध्यात्मिक खोज पर हिमालय की ओर निकन पड़ा जहां वह अपने गुरू लीलाशाह बापू से मिला।
यही वह गुरू थे जिन्होंने 1964 में उसे आसाराम नाम दिया।
इसके बाद आसाराम अहमदाबाद आया और उसने मोतेरा इलाके के समीप साबरमती के किनारे तपस्या शुरू की।
आध्यात्मिक गुरू के रूप में उसका असल सफर 1972 में शुरू हुआ जब उसने नदी के किनारे मोक्ष कुटीर स्थापित की।
साल - दर - साल संत आसारामजी बापू के रूप में उसकी लोकप्रियता बढ़ती गई और उसकी छोटी सी झोंपड़ी आश्रम में तब्दील हो गई। महज चार दशकों में उसने देश और विदेश में करीब 400 आश्रम खोल लिए।
यहां तक कि आज मोतेरा आश्रम समर्थकों से भरा पड़ा है जो अब भी यही रट लगाए हुए हैं कि उनके गुरू को झूठे आरोपों पर जेल भेजा गया।
आसाराम ने लक्ष्मी देवी से शादी की और उसके दो बच्चे नारायण साई और बेटी भारती देवी है। नारायण साई भी जेल में बंद है।
आसाराम पहली बार मुसीबत में तब पड़ा जब उसके दो रिश्तेदार दिपेश और अभिषेक वाघेला वर्ष 2008 में रहस्यमई परिस्थितियों में मोतेरा आश्रम के समीप मृत पाए गए।
राज्य सीआईडी ने इस मामले में वर्ष 2009 में आसाराम के सात समर्थकों पर मामले दर्ज किए। दोनों रिश्तेदारों के माता - पिता ने आरोप लगाया कि उन्हें आसाराम के आश्रम में इसलिए मारा गया क्योंकि वे काला जादू करते थे।
हालांकि आसाराम की ख्याति असल में वर्ष 2013 में गिरनी शुरू हई जब उसे राजस्थान में नाबालिग से बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किया गया।
इसके बाद सूरत की दो बहनों ने भी आसाराम और उसके बेटे नारायण साईं पर यौन उत्पीडऩ का आरोप लगाया।
सूरत पुलिस ने छह अक्तूबर 2013 को दो बहनों की शिकायतों पर मामला दर्ज किया। गांधीनगर की अदालत में आसाराम के खिलाफ यह मामला चल रहा है।
उस पर सूरत और अहमदाबाद में अपने आश्रमों के लिए जमीन हड़पने का भी आरोप है।
उसके समर्थकों को बलात्कार के मामलों में गवाहों को धमकाने के लिए पकड़ा भी गया था।
आसाराम को नाबालिग से बलात्कार के मामले में अदालत ने आज दोषी ठहराया।

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ओहो...आसाराम के वकील यह क्या बोल गए फैसला सुनाने वाले जज के लिए

जोधपुर। नाबालिग से यौन शोषण मामले में आज जोधपुर की एससी-एसटी कोर्ट ने आसाराम को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मसले पर आसाराम के बचाव में उसके रसोईये शिवा के वकील ने जज के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। जेल के अंदर बने अस्थायी कोर्टरूम में दोषी करार दिए जाने केकरीब दो घंटे बाद आसाराम पर सजा के लिए बहस की गई। आसाराम का बचाव करने के लिए 14 वकील लगे हुए थे। लगातार कोर्ट के सामने दलील पेश की जा रही थी। लेकिन जज मधुसूदन शर्मा ने सबूतों और गवाहों के मद्देनजर आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा पर दिए फैसले को लेकर आसाराम के सह आरोपी शिवा के वकील बीरबल राम ने मीडिया के सामने यह कह दिया कि जब आरोप साबित हो जाते हैं, तो केवल इतनी ही रिक्वेस्ट की जा सकती है कि उम्र और कार्यों को ध्यान में रखकर ही सजा का ऐलान किया जाए। लेकिन मीडिया का इतना दबाव था कि जज ने ईमानदारी साबित करने के लिए बाबा को उम्रकैद की सजा सुना दी। इतना ही नहीं आसाराम के इस वकील ने बार संघ के एक अन्य वकील पर भी आरोप लगाए कि उन्होंने बाबा को धोखे में रखा और लाखों रूपए ऐंठ लिया। वकील बीरबल राम ने तो यह तक कह दिया कि इलाहाबाद कोर्ट से यदी कोई वकील केस लडऩे को राजी हो जाता तो अब तक बाबा की जमानत भी हो चुकी होती।

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राजस्थान सरकार ने माना प्रदेश में कर्जे की वजह से किसान कर रहे हैं आत्महत्या

जयपुर। किसान संगठन हो या फिर प्रदेश की प्रमुख पार्टी कांग्रेस लगातार दावे कर रही है कि प्रदेश में किसान कर्जे की वजह से आत्महत्या कर रहें हैं। प्रदेश की भाजपा सरकार कर्जे की वजह से आत्महत्या की बात स्वीकार नहीं कर रही थी लेकिन आज पहली बार मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने स्वीकार कर लिया है कि प्रदेश में किसानों ने कर्ज के चलते आत्महत्या की है। कांग्रेस का आरोप है कि कटारिया ये तो सही कर रहें है कि प्रदेश में कांग्रस राज में आत्महत्या नहीं हुई थी लेकिन ये गलत है कि अब तक भाजपा शासन में केवल 3 ही किसानों ने आत्महत्या की है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अब तक कुल 92 किसानों ने आत्महत्या की है।

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राजस्थान कांग्रेस का अगला पड़ाव 'मेवाड़' की धरती पर, गहलोत कर सकते हैं शिरकत

उदयपुर। राजस्थान कांग्रेस के संभाग स्तरीय 'मेरा बूथ-मेरा गौरव' का अगला पड़ाव उदयपुर के आरसीए ग्राउंड पर गुरूवार को होगा। इसके चलते तैयारियां अंतिम चरण में है। इस सम्मेलन में एआईसीसी के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी शिरकत कर सकते हैं। बूथ स्तर के इस कार्यक्रम में पीसीसी चीफ सचिन पायलट, आरसीए के अध्यक्ष और कांग्रेस के महासचिव डॉक्टर सीपी जोशी सहित कई प्रदेश स्तर के नेता इस में शिरकत करेंगे। बता दें कि इस अभियान की शुरूआत कोटा में की गई थी, जिसमें गहलोत नहीं पहुंचे थे। लेकिन इस बार उनके पहुंचने की संभावना है। इस दौरान संभाग स्तर के करीब 25000 कार्यकर्ता इस बूथ स्तर के सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुंचेंगे। मेरा बूथ मेरा गौरव नाम से आयोजित होने वाले इस कार्यकर्ता सम्मेलन को लेकर विशाल पंडाल आरसीए ग्राउंड पर बनाया गया है। साथ ही इसमें कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बैठने की भी व्यवस्था की गई है। इस सम्मेलन को लेकर कांग्रेस के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह का माहौल नजर आ रहा है। दरअसल राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में अब 6 माह से भी कम समय बचा है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी मेवाड़ में भाजपा को चुनौती देने के लिए इस अभियान को करने जा रही है। कांग्रेस का उद्देश्य आने वाले समय में पार्टी को बूथ स्तर पर मजबूत करना है।

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आसाराम: कभी चाय बेचता था, आज करोड़ों की सम्पत्ति

नई दिल्ली। नाबालिग से रेप के मामले में जोधपुर की कोर्ट ने आसाराम को दोषी करार दिया है। बहुत कम लोगों को पता है कि आसाराम एक जमाने में चाय बेचा करता था। उसने अहमदाबाद में तांगा भी चलाया है। फिर एक दिन ऐसा कुछ हुआ कि यह आशूमल आसाराम बन गया। जानिए आसाराम की जिंदगी से जुड़ी दिलचस्प बातों पर -

- आसाराम का परिवार मूल रूप से पाकिस्तान का रहने वाला है। बंटवारे के बाद इसके पिता गुजरात के अहमदाबाद आकर बस गए थे। वे कोयले और लकड़ी का धंधा करते थे।

- पिता के निधन के बाद आसाराम ने पढ़ाई छोड़ दी और चाय बेचकर परिवार पालने में मदद की। उसने तीसरी कक्षा तक ही पढ़ाई की।

- १५ साल की उम्र में घर छोड़ना आसाराम के लिए बहुत बड़ा फैसला रहा। ऐसा नहीं होता तो शायद आज दुनिया आसाराम को नहीं जानती।

- तब आसाराम घर छोड़कर भरुच के आश्रम चला आया था। यहां दीक्षा ली और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। गुरु ने ही उसे आसाराम बापू नाम दिया था।

- इसके बाद आसाराम कथावाचन करने लगा और टीवी पर प्रसारण होने से इसके भक्तों की संख्या तेजी से बढ़ी। देश के कई प्रमुख शहरों में आश्रम बने गए।

- धीरे-धीरे आसाराम के रिश्ते प्रभावी लोगों से बन गए। सत्ता पक्ष के लोग उसके सत्संग में पहुंचते थे और सिर झुकाते थे।

- आज पूरे देश में आसाराम के ४०० से ज्यादा आश्रम हैं। इनकी कुल कीमत दो हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की है। आश्रम की जमीनों के अलावा इसका ट्रस्ट आश्रम में बनने वाली चीजें (किताबें, साबुन, अगरबत्ती, धूपबत्ती, आदि) बेचकर करोड़ों की कमाई करता है।

- आसाराम के ट्रस्ट की दो पत्रिकाएं- ऋषिप्रसाद और लोक कल्याण सेतु बहुत लोकप्रिय थीं। एक समय इनकी १४ लाख प्रतियां हर महीने बिकती थीं। इनसे सालाना १० करोड़ की कमाई होती थी। आयकर विभाग की जांच में २३०० करोड़ से भी ज्यादा की अघोषित संपत्ति सामने आई है।

- बताते हैं कि देशभर में आसाराम के चार करोड़ से ज्यादा अनुयायी हैं। नाबालिग से रेप केस समेत कई संगीन मामलों में उसका नाम उछला और अब तो उसे दोषी भी ठहरा दिया गया है, लेकिन कई लोग अब भी बापू के अंधभक्त बने हुए हैं। गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान में इसके लाखों भक्त हैं।

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आसाराम दोषी करार, दस साल की सजा संभव

डीएनआर रिपोर्टर.जोधपुर
नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में 2013 से जोधपुर जेल में बंद आसाराम को जज मधुसूदन शर्मा ने दोषी करार दिया है। इस केस में आसाराम के अलावा दो अन्य शिल्पी और शरतचंद्र को भी दोषी करार दिया गया है वहीं दो अन्य को बरी कर दिया गया है। हालांकि, अभी तक सजा का ऐलान नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि उनकी उम्र के आधार पर सजा पर बहस होगी। आसाराम पर पॉक्सो और अजा-जजा एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं। केस में दोषी ठहराए जाने के बाद आसाराम को 10 साल से उम्र कैद तक की सजा हो सकती है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि आसाराम को किन धाराओं में दोषी करार दिया गया है। खबरों के अनुसार बुधवार सुबह 8 बजे जोधपुर कोर्ट के जज मधुसूदन शर्मा, वकील व अन्य अधिकारी सेंट्रल जेल पहुंचें और सजा पर सुनवाई हुई। यह सुनवाई जेल में बैरक नंबर दो के पास बने बैरक में हुई।
डेरा चीफ राम रहीम पर फैसले के दौरान हुई हिंसा से सबक लेते हुए केंद्र और राज्यों ने पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं साथ ही जोधपुर में एहतियातन धारा 144 लागू कर दी है। फैसले के मद्देनजर केंद्र सरकार ने दिल्ली, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा को सुरक्षा कड़ी करने के निर्देश दिए हैं।
पहुंचे समर्थक, 4 बजे उठा आसाराम
आसाराम पर आने वाले फैसले पर पूरे देश में मौजूद उसके समर्थकों की नजर है। कई समर्थक तो जोधपुर पहुंचे हैं और जेल के बाहर तक आ गए। ऐसे ही एक समर्थक को माला के साथ पुलिस ने पकड़ा है। वहीं आसाराम सुबह 4 बजे से उठ गया। उसकी तबीयत को देखते हुए जेल के बाहर एक एंबुलेंस भी खड़ी की गई है।
इंदौर में हुई थी गिरफ्तारी
आसाराम ने धमकाया था, इसलिए पी?िता ने दिल्ली जाकर 20 अगस्त, 2013 को कमला नगर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। वहां से केस जोधपुर रेफर किया गया था। जोधपुर पुलिस ने 31 अगस्त, 2013 को मध्य प्रदेश के इंदौर से आसाराम को गिरफ्तार किया था। तब से वह जेल में है।
मप्र, उप्र, राजस्थान से जुड़ाा, 15 अगस्त, 2013 का केस
नाबालिग से दुष्कर्म का यह मामला मप्र, उप्र व राजस्थान से ज़ुड़ा है। पीडि़ता उप्र के शाहजहांपुर की मूल निवासी है। वह मप्र के छिंदवाड़ा के आश्रम में रह कर पढ़ाई कर रही थी। आसाराम पर आरोप है कि उसने पीडि़ता को जोधपुर के पास मनाई स्थित अपने आश्रम में बुलाया और 15 अगस्त, 2013 की रात उससे दुष्कर्म किया।
हो सकती है 10 साल की सजा
आसाराम पर पॉक्सो और अजा-जजा एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं। आसाराम को जोधपुर पुलिस ने 31 अगस्त, 2013 को गिरफ्तार किया था और तब से वह जोधपुर जेल में बंद है। आसाराम को दोषी ठहराए जाने पर दस साल तक की सजा हो सकती है। लेकिन, बरी होने पर भी रिहाई नहीं होगी, क्योंकि उसके खिलाफ गुजरात में भी दुष्कर्म का केस दर्ज है।
होइ है वही जो राम रचि राखा
उधर, जेल में आसाराम ने फैसले की पूर्व संध्या पर कहा- ‘अब भगवान से ही उम्मीद है, होई है वही जो राम रचि राखा।’ मंगलवार को जोधपुर कलेक्टर रविकुमार सुरपुर व पुलिस उपायुक्त अमनदीप सिंह जेल में व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे। इस दौरान कलेक्टर ने आसाराम से पूछा- ‘फैसले को लेकर क्या सोच रहे हो?’ इस पर आसाराम ने कहा कि कोर्ट का जो भी फैसला होगा, वह मंजूर होगा। वह और उनके समर्थक गांधीवादी विचारधारा के हैं और अहिंसा में यकीन रखते हैं।
जोधपुर में धारा 144
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जोधपुर छावनी में तब्दील हो गया है। पुलिस की छह कंपनियां भेजी गई हैं। शहर में धारा 144 लगा दी गई है। पुलिस होटलों और धर्मशालाओं की सघन चेकिंग कर रही है। राजस्थान में बने आसाराम के आश्रमों को खाली करा लिया गया है।
गुरमीत राम रहीम मामले से केंद्र ने लिया सबक
्रपिछले साल हरियाणा के डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ दुष्कर्म मामले में फैसला आने के बाद पंचकूला में उसके समर्थकों ने हरियाणा व पंजाब में बड़े पैमाने पर हिंसा की थी। इससे सबक लेकर गृह मंत्रालय ने आसाराम के मामले में कोई चूक नहीं करने की ऐहतियाती कार्रवाई शुरू कर दी है। आसाराम के प्रभाव वाले राज्यों को सतर्क कर दिया गया है। इसी कड़ी में राजस्थान, गुजरात व हरियाणा में कड़ी सुरक्षा के निर्देश दिए गए हैं। गृह मंत्रालय तीनों राज्यों के संपर्क में है। केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा ने इस मुद्दे पर वरिष्ठ प्रशासनिक अफसरों और पुलिस अधिकारियों से बातचीत की है।

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