Menu

आधे घंटे तक 22 फीट ऊंचे पोल पर अटकी रही जान, नीचे खड़े लोग वीडियो बनाते रहे...!!!

करंट का झटका लगने से श्रमिका चीखा तो लोगों ने एमपीईबी में फोन कर बिजली सप्लाई बंद करवायी

जबलपुर। मोबाइल फोन पर वीडियो बनाने की लोगों की दीवानगी में मंगलवार को एक आदमी की जान-जाते-जाते बची। सिविक सेंटर में बिजली का कार्य कर रहे एक श्रमिक को पोल पर चढऩे के बाद करंट लग गया। वह करीब 22 फीट ऊँचे पोल पर आधे घंटे तक लटका रहा। करंट लगने से उसकी चीख निकल गई। वह अपनी जान बचाने के लिए आवाज देता रहा। लेकिन तमाशबीनों की भीड़ उसे पोल से उतारने के उपाय करने की बजाय मौत से जूझ रहे लाइनमैनका वीडियो बनाती रही। खैरियत ये रही कि भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने सजगता दिखाई और उनके द्वारा बिजली कंपनी को सूचना देने पर बिजली सप्लाई रोक दी गई। इन सबमें जो सबसे हैरानी वाली बात है वो ये है कि करोड़ों रुपए का ठेका लेने वाली स्टेट-अप कंपनी श्रमिकों को सुरक्षात्मक उपकरण तक उपलब्ध नहीं करा रही है। इससे नंगे पैर और हाथों से काम कर रहे बिजली श्रमिकों की जिंदगी में हर पल मौत का खतरा मंडरा रहा है।

आम्र्ड केबल खींचते समय घटना 
जानकारी के अनुसार मंडला मानेगांव निवासी नरेश स्टेपअप कम्पनी में ठेका श्रमिक है। पश्चिम सम्भाग अंतर्गत आरएपीडीआरपी का काम चल रहा है। नरेश दूसरे श्रमिकों के साथ मंगलवार को सिविक सेंटर स्थित जेडीए से चौपाटी मार्ग पर पोल पर चढ़कर केबल बिछा रहा था। शाम 5.30 बजे के लगभग दो श्रमिक जेडीए कार्यालय के सामने मढ़ाताल पोस्ट ऑफिस के कार्नर पर चढ़े हुए थे। आम्र्ड केबल खींचते समय चौपाटी वाले मार्ग के पोल की सप्लाई लाइन चालू हो गयी। करंट का झटका लगते ही नरेश जोर से चीख पड़ा। पोल के आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई।

ऐसे बची जान 
बिजली के पोल पर खड़े श्रमिक के चिल्लाने की जैसे ही आवाज गूंजी लोग खंबे की ओर दौड़े। कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। इस दौरान पोल पर चढ़े नरेश ने फुर्ती दिखाते हुए अपना पैर पोल की बजाय आम्र्ड केबल पर रख दिया। और दूसरी केबल के सहारे खड़ा हो गया। वह इस मुद्रा में लगभग आधे घंटे तक पोल पर ही लटका रहा। इस दौरान नीचे जमा लोगों की भीड़ में अधिकर लोग मदद के लिए हाथ बढ़ाने के बजाय उसका वीडियो बनाने में व्यस्त रहे।

फोन लगाकर बंद करायी सप्लाई
घटनास्थल पर मौजूद कुछ लोगों ने सिटी सर्किल के अधीक्षण अभियंता आईके त्रिपाठी को फोन लगाकर घटना की सूचना दी और सप्लाई बंद कराने को कहा। इसके बाद पश्चिम सम्भाग वाले आधे क्षेत्र की बिजली कट की गई। तब जाकर नरेश नीचे उतर पाया। घटना की सूचना पाकर ओमती थाने की पुलिस भी पहुंची थी। बाद में पुलिस कर्मी नरेश को विक्टोरिया अस्पताल ले गए। जहां, हादसे से घबराया श्रमिक काफी देर तक बदहवास स्थिति में कुछ बोल तक नहीं पा रहा था।

113 करोड़ रुपए का ठेका 
बताया जा रहा है कि स्टेट अप कंपनी ने करीब 113 करोड़ रुपए का ठेका हासिल किया है। लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि करोड़ों रुपए का ठेका लेने वाली कंपनी के कर्मचारियों के पास पोल पर चढऩे-उतरने की सीढ़ी तक है। कंपनी ने श्रमिकों को किसी तरह का सुरक्षा उपकरण मुहैया नहीं कराया है। हादसे के वक्त भी श्रमिक के पास कोई सुरक्षात्मक उपकरण नहीं थे। स्टेट-अप कंपनी की मनमानी के चलते श्रमिक बिना जूता, दस्ताना, झूला और बिना सीढ़ी के 22 फीट ऊंचे पोल पर चढ़कर काम करने को मजबूर हैं। हादसे के बाद देर तक श्रमिक नरेश बदहवास सी हालत में रहा।

Read more...

राजस्थान में एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल के कारण चिकित्सा सेवाएं प्रभावित

जयपुर, वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर राजस्थान के एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल के तीसरे दिन करीब 1500 एंबुलेंस वाहनों के पहिए थम जाने से चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुई है।
राजधानी जयपुर में एंबुलेंस सेवा के कर्मचारी अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार से हड़ताल पर हैं। जयपुर के एंबुलेंस कर्मचारियों द्वारा शुरू की गई इस हड़ताल में प्रदेशभर के एंबुलेंस कर्मचारी शामिल हो गए है।
राजस्थान आपातकालीन एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि सरकार के साथ कल हुई वार्ता विफल रही। कर्मचारियों ने सरकार की ओर से तीन प्रतिशत के वेतन वृद्वि के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और सरकार ने कर्मचारियों की अन्य मांगें भी नहीं मानी।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों और सामुदायिक चिकित्सा केन्द्रों पर 108 एंबुलेंस सेवा के लिए 730 एंबुलेंस, 104 एंबुलेंस सेवाओं के लिए 588 एंबुलेंस, और बेस एंबुलेंस सेवाओं के लिए 200 एंबुलेंस कार्यरत है।
उन्होंने कहा, हमें सभी कर्मचारियों का समर्थन प्राप्त है और हमारा विरोध जारी रहेगा।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने गत 16 मार्च को एक अधिसूचना के जरिए 108 आपातकालीन सेवाओं, 104 जननी एक्सप्रेस और बेस एंबुलेंस सेवाओं को रेस्मा के तहत आवश्यक सेवाएं घोषित कर दिया था।
राज्य की लगभग छह हजार एंबुलेंस सेवाओं के कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं।
सिंह ने कहा, समझौते के अनुसार 10 प्रतिशत वेतन वृद्वि का प्रावधान है और हम इस मामले को लंबे समय से उठा रहे है लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

sagarmal

Read more...

राजस्थान भर में एम्बुलैंस 108 के चक्का जाम पर सरकार मौन क्यों? प्रदेश भर के मरीज परेशान।

21 मार्च को लगातार तीसरा दिन रहा जब 108 नम्बर की एम्बुलैंस का राजस्थान भर में चक्का जाम रहा। एम्बुलैंस पर काम करने वाले संविदा कर्मियों और कंपनी के बीच वेतन को लेकर जो विवाद शुरू हुआ वह थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह माना कि विवाद संविदा कर्मियों और कंपनी के बीच का कहना है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्थ में सरकार मूक दर्शक बनी नहीं रह सकती। लगातार तीन दिनों की हड़ताल से प्रदेश भर के मरीज परेशान हो रहे हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानी हो रही है। हालत इतने खराब हैं कि घर से सरकारी अस्पताल तक पहुंचने में गर्भवती महिलाओं को दुपहिया अथवा किराये की जीप आदि में सफर करना पड़ रहा है। संविधा कर्मियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इस संबंध में प्रदेश के चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ का बयान बड़ा अजीबो गरीब है। सराफ का कहना है कि इस हड़ताल से सरकार का कोई सरोकार नहीं है। सवाल उठता है कि प्रदेश में 108 एम्बुलैंस की सेवाओं के बदले में सरकार ही तो भुगतान करती है। क्या सरकार के भुगतान किए बगैर 108 एम्बुलैंस चल सकती है? सरकार को चाहिए कि इस मामले में तत्काल दखल दे और संबंधित कंपनी और कर्मचारियों के बीच समझौता करवा कर मरीजों को राहत प्रदान करवावे। गंभीर बात तो यह है कि 108 एम्बुलैंस की हड़ताल के बाद सरकार ने प्रदेश भर में कोई वैल्पिक इंतजाम नहीं किए है। लोगों में सरकार के प्रति पहले से ही नाराजगी है और अब एम्बुलैंस का चक्का जाम होने से नाराजगी और बढ़ रही है।

Read more...

राजस्थान भर में एम्बुलैंस 108 के चक्का जाम पर सरकार मौन क्यों? प्रदेश भर के मरीज परेशान।

21 मार्च को लगातार तीसरा दिन रहा जब 108 नम्बर की एम्बुलैंस का राजस्थान भर में चक्का जाम रहा। एम्बुलैंस पर काम करने वाले संविदा कर्मियों और कंपनी के बीच वेतन को लेकर जो विवाद शुरू हुआ वह थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह माना कि विवाद संविदा कर्मियों और कंपनी के बीच का कहना है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्थ में सरकार मूक दर्शक बनी नहीं रह सकती। लगातार तीन दिनों की हड़ताल से प्रदेश भर के मरीज परेशान हो रहे हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानी हो रही है। हालत इतने खराब हैं कि घर से सरकारी अस्पताल तक पहुंचने में गर्भवती महिलाओं को दुपहिया अथवा किराये की जीप आदि में सफर करना पड़ रहा है। संविधा कर्मियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इस संबंध में प्रदेश के चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ का बयान बड़ा अजीबो गरीब है। सराफ का कहना है कि इस हड़ताल से सरकार का कोई सरोकार नहीं है। सवाल उठता है कि प्रदेश में 108 एम्बुलैंस की सेवाओं के बदले में सरकार ही तो भुगतान करती है। क्या सरकार के भुगतान किए बगैर 108 एम्बुलैंस चल सकती है? सरकार को चाहिए कि इस मामले में तत्काल दखल दे और संबंधित कंपनी और कर्मचारियों के बीच समझौता करवा कर मरीजों को राहत प्रदान करवावे। गंभीर बात तो यह है कि 108 एम्बुलैंस की हड़ताल के बाद सरकार ने प्रदेश भर में कोई वैल्पिक इंतजाम नहीं किए है। लोगों में सरकार के प्रति पहले से ही नाराजगी है और अब एम्बुलैंस का चक्का जाम होने से नाराजगी और बढ़ रही है।

Read more...

राजस्थान प्रदेश में प्रशिक्षण शिविर और किसान सम्मेलन के जरिए कांग्रेस फूंकेगी चुनावी बिगुल

जयपुर।राजस्थान में एक और जहां भाजपा में सीएम,मंत्री,विधायक और सांसद जल्द ही राज्य के चुनावी दौरे पर निकलने की तैयारी पर है, तो वहीं कांग्रेस प्रशिक्षण शिविर औऱ किसान सम्मेलनों के जरिए जनता को अपने पक्ष में करने के लिए व्याकुल है। विपक्ष इस चुनाव को गंभीरता से ले रही है यह बात हम इसी घटना से समझ सकते हैं कि उसने शिविर और सम्मेलनों के कार्यक्रम को लगभग अंतिम रुप दे दिया है और संभवतया अप्रैल से कांग्रेस इन कार्यक्रमों को पूरी तरह से चुनाव मोड़ पर ले आएगी।

आप लोगों को ग्रुपस मे बता दें कि अप्रैल से लेकर जून तक कांग्रेस के ये कार्यक्रम चलेंगे, जो पहले विधानसभा वाइज फिर जिला लेवल,संभाग स्तर पर और लास्ट में प्रदेशस्तरीय शिविर-सम्मेलन के अनुरूप होंगे। एक दिन में करीब १५ विधानसभा क्षेत्रों में शिविर लगाने की याजना है। 
जिला लेवल पर लगने वाले ट्रेनिंग कैंप में पीसीसी चीफ सचिन पायलट, पार्टी प्रदेश प्रभारी, नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर लाल डूडी,पूर्व सीएम अशोक गहलोत और अन्य छोटे-मोटे पार्टी के नेता शामिल होंगे, जो पार्टी शिविर के जरिए सरकार की नाकामियां गिनाते हुए सत्ता विरोधी माहौल बनाने का प्रयास करेंगे।

Read more...

राजस्थान प्रदेश में प्रशिक्षण शिविर और किसान सम्मेलन के जरिए कांग्रेस फूंकेगी चुनावी बिगुल

जयपुर। राजस्थान में एक और जहां भाजपा में सीएम,मंत्री,विधायक और सांसद जल्द ही राज्य के चुनावी दौरे पर निकलने की तैयारी पर है, तो वहीं कांग्रेस प्रशिक्षण शिविर औऱ किसान सम्मेलनों के जरिए जनता को अपने पक्ष में करने के लिए व्याकुल है। विपक्ष इस चुनाव को गंभीरता से ले रही है यह बात हम इसी घटना से समझ सकते हैं कि उसने शिविर और सम्मेलनों के कार्यक्रम को लगभग अंतिम रुप दे दिया है और संभवतया अप्रैल से कांग्रेस इन कार्यक्रमों को पूरी तरह से चुनाव मोड़ पर ले आएगी।
आप लोगों को ग्रुपस मे बता दें कि अप्रैल से लेकर जून तक कांग्रेस के ये कार्यक्रम चलेंगे, जो पहले विधानसभा वाइज फिर जिला लेवल,संभाग स्तर पर और लास्ट में प्रदेशस्तरीय शिविर-सम्मेलन के अनुरूप होंगे। एक दिन में करीब १५ विधानसभा क्षेत्रों में शिविर लगाने की याजना है। 
जिला लेवल पर लगने वाले ट्रेनिंग कैंप में पीसीसी चीफ सचिन पायलट, पार्टी प्रदेश प्रभारी, नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर लाल डूडी,पूर्व सीएम अशोक गहलोत और अन्य छोटे-मोटे पार्टी के नेता शामिल होंगे, जो पार्टी शिविर के जरिए सरकार की नाकामियां गिनाते हुए सत्ता विरोधी माहौल बनाने का प्रयास करेंगे। 

 

Read more...

राजस्थान भाजपा प्रदेश परिषद की बैठक 4 अप्रैल को

जयपुर । अब राजस्थान में भाजपा पूरी तरह से चुनावी मोड पर आ गई है। इसी को लेकर आगामी 4 अप्रैल को बिड़ला ऑडिटोरियम में राजस्थान भाजपा प्रदेश परिषद की बहुत बड़ी बैठक होने जा रही है।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने आज बताया कि बुधवार को इस बैठक की तैयारियों को लेकर प्रदेश कार्यसमिति और मोर्चो-प्रकोष्ठों के अध्यक्षों के साथ बैठक की गई। परनामी ने बताया कि इस भाजपा प्रदेश परिषद की बैठक की तैयारियों को लेकर पार्टी ने कमर कस ली है। उन्होंने बताया कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह महत्वपूर्ण बैठक होगी।
वहीं प्रदेश भाजपा की तरफ से मंत्रियों, सांसदों और नेताओं के लिए विशेष जिला प्रवास योजना का कार्यक्रम तय हुआ है। इसके तहत कल 22 मार्च से 30 मार्च तक सांसदों, मंत्रियों और भाजपा पदाधिकारियों के लिए जिलों में प्रवास तय किए गए है।

Read more...

अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए 108 एम्बूलेंस सेवाओं के कर्मचारी

जयपुर, वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर 108 एम्बूलेंस सेवाओं के कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं जिससे प्रदेश में मरीजों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जयपुर में एम्बूलेंस सेवाओं के कर्मचारी अपनी 15 सूत्री मांगों को लेकर कल हड़ताल पर चले गए थे। सरकार से मांगें मनवाने के लिए प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी एम्बूलेंस कर्मचारी हड़ताल में शामिल हो गए हैं।
सरकार ने गत 16 मार्च को एक अधिसूचना के जरिए 108 आपातकालीन सेवाओं, 104 जननी एक्सप्रेस और बेस एम्बूलेंस सेवाओं को रेस्मा के तहत आवश्यक सेवाएं घोषित कर दी थी।
राजस्थान आपातकालीन एम्बूलेंस कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि प्रदेशभर से एम्बूलेंस सेवाओं के लगभग छह हजार कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को पिछले पांच वर्षों से वेतन वृद्वि नहीं मिली है, जबकि समझौते के अनुसार 10 प्रतिशत वेतन वृद्वि का प्रावधान है।
सिंह ने कहा कि हम पिछले कई साल से अपनी मांगें रख रहे हैं लेकिन उन्हें अनसुना कर दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल जब तक जारी रहेगी जबतक कि वेतन वृद्वि सहित अन्य मांगे नहीं मान ली जातीं।
इधर राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण र्साफ ने गतिरोध को समाप्त करने और वैकल्पिक सेवा व्यवस्था बनाए रखने के लिए चिकित्सा विभाग के अधिकारियों, आपातकालीन सेवा प्रदाता कम्पनी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक बुलाई है।

Read more...

राजस्थान पुलिस में कानिस्टेबल पदों की भर्ती की नई प्रक्रिया यथाशीघ्र

जयपुर, राजस्थान पुलिस में 5 हजार 390 कानिस्टेबल पदों की भर्ती के लिए प्रक्रिया जारी है। विभाग की सजगता से परीक्षा के दौरान हाईटेक तरीके से नकल एवं छद्म-रूपण के कई प्रकरण सामने आने के पश्चात पूरी व्यवस्थाओं की पुलिस मुख्यालय में मंगलवार 20 मार्च, 2018 को पुलिस संस्थापन बोर्ड की बैठक के दौरान समीक्षा की गई। गहन विचार विमर्श के पश्चात पाया गया कि परीक्षा प्रक्रिया दूषित हो चुकी है तथा इस परीक्षा की विश्वसनीयता भंग हो चुकी है। अत: वर्तमान प्रक्रिया को आगे जारी रखना उचित नहीं होगा।
पुलिस महानिदेशक, राजस्थान पुलिस द्वारा बोर्ड की इस अनुशंसा को स्वीकार करते हुए प्रक्रियाधीन कानिस्टेबल भर्ती को रद्द किए जाने का निर्णय लिया गया है। कानिस्टेबल की नई भर्ती प्रक्रिया यथाशीघ्र प्रारम्भ की जाएगी तथा विभाग का प्रयास रहेगा कि जिन अभ्यर्थियों ने पूर्व में आवेदन किया है उन्हें पुन: आवेदन करने की आवश्यकता ना हो।
राज्य सरकार द्वारा बजट में की गई घोषणानुसार कानिस्टेबलों की अतिरिक्त रिक्तियों का समावेश भी नई विज्ञप्ति में किया जाना प्रस्तावित है।

 

Read more...

सोमवार से राजस्थान की सड़कों पर नहीं चल पाएंगे नए ई-रिक्शे, जानिए क्यों?

जयपुर। परिवहन विभाग ने नियमों की अनदेखी करने पर अब ई-रिक्शा डीलरों पर सख्सी बरतनी शुरू कर दी है। इसकी वजह से सोमवार से अब सड़कों पर नए ई-रिक्शे नहीं चल पाएंगे।

दरअसल ई-रिक्शा डीलर्स को ड्राइवर को 10 दिन का प्रशिक्षण देना होता है लेकिन डीलर्स की ओर से ऐसा नहीं किया जा रहा था। विभाग ने कई बार डीलर्स को इसके लिए चेतावनी भी दी थी लेकिन उनकी ओर प्रशिक्षण देना नहीं शुरु किया गया।

जिसके बाद आरटीओ-डीटीओ ऑफिस ने ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी। इसके साथ ही ई-रिक्शा डीलर्स के ट्रेड सर्टिफिकेट को भी निलंबित कर दिया। जिससे अब सोमवार से सड़कों पर नए ई-रिक्शे नहीं दिखेंगे। इसके साथ ही डीलरों को प्रशिक्षण देने का एक शपथ पत्र भी देना होगा।

बिना लाइसेंस वाली सुरक्षा एजेंसियों पर भी सख्ती

ई-रिक्शा के साथ अब बिना लाइसेंस वाली सुरक्षा एजेंसियों पर भी प्रशासन ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। अगर अब बिना लाइसेंस के कोई सुरक्षा एजेंसी मिली तो उसके मालिक को एक साल तक की सजा सुनाई जा सकती है।

आपको बता दें कि नियमों के मुताबिक 2 या 2 से ज्यादा गार्ड रखने वाली सुरक्षा एजेंसियों को लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है, लेकिन प्रदेश में इन दिनों तमाम ऐसी एजेंसियां है जो बिना लाइसेंस के धड़ल्ले से सुरक्षा गार्ड उपलब्ध करवा रही हैं।

Read more...
Subscribe to this RSS feed

Bikaner Trusted News Portal

  • Bikaner Local News
  • National News
  • Sports News
  • Bikaner Events
  • Rajasthan News