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घनश्याम तिवाड़ी के तेवरों की तपिश हुई 'तेज' रोहिताश्व शर्मा पर ठोका 10 करोड़ की मानहानि का केस

जयपुर। पूर्व मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने राज्य के पूर्व राज्य मंत्री एवं भाजपा नेता रोहिताश्व शर्मा के खिलाफ दस करोड़ रूपए की मानहानि का दावा किया है। तिवाड़ी ने अपने आवास पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि Þमेरा और मेरे परिवार को बदनाम करने के लिए बेबुनियाद, मिथ्या चरित्र हनन के आरोप लगाने के लिए रोहिताश्व शर्मा के खिलाफ जयपुर की एक अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। उन्होंने कहा कि मिथ्या आरोप लगाने वाले प्रदेश के तीन मंत्रियों द्वारा अपनी स्थिति स्पष्ट कर देने के कारण मैंने उनको छोड़ दिया है। गौरतलब है कि तिवाड़ी लम्बे समय से प्रदेश भाजपा नेतृत्व और मुख्यमंत्री पर आरोप लगा रहे हैं। इन आरोपों के चलते पार्टी आलाकमान ने तिवाड़ी को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस भी दिया है।

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15 दिन से चल रही न्यायिक कर्मचारियों की हड़ताल खत्म


डीएनआर ब्यूरो.जयपुर
15 दिन से चल रही न्यायिक कर्मचारियों की हड़ताल खत्म शेट्टी पे कमिशन की ओर से सृजित किए गए शेरिस्तेदार के पद की स्वीकृति को लेकर वित्त विभाग ने अपनी सहमति दे दी है।
जस्टिस जगन्नाथ शेट्टी पे-कमीशन की सिफारिशों को लागू करने की मांग पर पिछले 15 दिनों से नाराज चल रहे न्यायिक कर्मचारियों की हड़ताल गुरुवार को खत्म हो गई।
सरकार के अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत राजस्थान न्यायिक कर्मचारियों की हड़ताल खत्म होने की अधिकारिक घोषणा का अभी इंतजार है। हालांकि, न्यायिक कर्मचारी संघ के प्रांतीय सभा अध्यक्ष नवरत्न टांक ने सरकार से आश्वासन मिलने के बाद हड़ताल खत्म करने की घोषणा कर दी है। उन्होंने बताया कि सरकार के साथ उनकी वार्ता सकारात्मक रही है। यह वार्ता रजिस्ट्रार जनरल सतीश कुमार के साथ हुई। इस वार्ता में कई बिंदुओं पर सहमति बनी। पहले दौर की वार्ता में गतिरोध बरकरार रहा लेकिन अगले दौर में दोनों पक्षों में सहमति बनती दिखाई दी।
पिछले 15 दिनों से सामूहिक अवकाश पर चल रहे न्यायिक कर्मचारियों के साथ ही अधिवक्ताओं और न्यायिक सेवाओं से वंचित लोगों ने राहत की सांस ली है। हड़ताल खत्म की घोषणा के साथ ही अब न्यायिक कार्य फिर से सुचारू रूप से शुरू सकेंगे।
ेरिश्तेदार के पद को स्वीकृति
शेट्टी पे कमिशन की ओर से सृजित किए गए शेरिस्तेदार के पद की स्वीकृति को लेकर वित्त विभाग ने अपनी सहमति दे दी है। आंदोलनरत कर्मचारियों की मुख्य मांग में ये पद शामिल था।
इन मुद्दों पर वार्ता
शेरिस्तेदार के पद की स्वीकृति के बाद भी हड़ताल खत्म होने से पहले कई मुद्दों पर न्यायिक कर्मचारी अड़े हुए थे। इनमें हायर पे स्केल और एक वेतन वृद्धि विसंगति दूर करने की मांग भी थी। इन मांगों पर भी आश्वासन मिलने के बाद हड़ताल खत्म किए जाने की घोषणा कर दी गई।

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राजस्थान में फिर पकड़ी गईं विदेशी कॉलगर्ल

जयपुर। राजस्थान में इन दिनों विदेशी कॉलगर्ल्स के मामले सामने आ रहे हैं। कुछ दिन पहले कोटा में छह विदेशी युवतियां पकड़ी गई थीं। अब भीलवाडा में फिर तीन विदेशी युवतियां देह व्यापार में लिप्त पाई गई हैं। दोनों शहरों में पकड़ी गई युवतियां थाईलैंड की हैं और स्पा की आड़ में देह व्यापार से जुड़ी थीं। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के कोतवाली थाना इलाके में एक स्पा करीब सवा साल से चल रहा था। पुलिस को यहां अनैतिक गतिविधियां होने की शिकायतें मिल रही थीं। पुलिस ने यहां बोगस ग्राहक भेजकर तस्दीक कराई और छापा मारा। इस दौरान यहां थाईलैंड की तीन और मिजोरम की एक युवती मिली। इनके साथ ही यहां पर एक अन्य स्थानीय युवती और स्पा सेंटर के मैनेजर को भी गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि भीलवाड़ा में विदेशी युवतियों से देह व्यापार करवाने का यह पहला मामला सामने आया है। यह कार्रवाई पुलिस की विशेष टीम ने की और इस मामले की जानकारी स्थानीय थाने को भी नहीं दी गई। पुलिस ने आरोपी विदेशी युवतियों के पासपोर्ट, वीजा आदि जब्त कर लिए हैं। स्पा का संचालक रतलाम का रहने वाला राजेश मोटयानी बताया जा रहा है। उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीम रवाना की गई है। पुलिस के अनुसार विदेशी युवतियों को यहां प्रतिमाह 25 हजार रुपए वेतन दिया जा रहा था। गौरतलब है कि इससे पहले कोटा में भी एक स्पा पर मारे गए छापे में थाईलैंड की छह युवतियां पकड़ में आई थीं। इनमें से एक युवती तो एचआईवी पॉजिटिव थी।

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राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों का घटेगा वेतन, देखें आदेश

जयपुर। राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर उन कर्मचारियों को झटका दे दिया है जो वेतन बढऩे की आस लगाए बैठे थे। राज्य सरकार ने एक आदेश जारी किया जिसमें राजस्थान सिविल सेवा नियम 2008 की अनुसूचि-5 में संशोधन के क्रम में ग्रेड पे- रू 1700/-, रु 1900/-, रू 2000, रु 2400, रु. 2800 और रु. 4800 में सीधी भर्ती से 1-7-2013 या इसके पश्चात प्रारम्भिक वेतन दिनांक 1-7-2013 से प्रभावी अनुसूचि -5 के अनुसार निर्धारित किया गया है। उन कर्मचारियों को दिनांक 1-7-2017 को देय वार्षिक वेतन वृद्धि को आगामी आदेश तक स्थगीत रखते हुए। सरकार जुलाई 2017 का वेतन भुगतान किया जाएगा। और सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि उक्त ग्रेड पे के कर्मचारियों को यदि 1-7-2017 की वेतन वृद्धि स्वीकृत की जा चुकी है तो उनकी स्वीकृत वार्षिक वेतन वृद्धि को स्थगित करते हुए वेतन बिल संशोधित कर जुलाई माह के वेतन का भूगतान किया जाएगा।

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जयपुर बैंक डकैती : दिनदहाड़े खुली कानून की पोल

डीएनआर ब्यूरो.जयपुर
राजधानी जयपुर में कानून व्यवस्था की पोल उस समय खुल गई जब भरे बाजार से दिन दहाड़े बैंक लूट लिया गया। घटना के बाद पुलिस हाथ पांव मारती रही लेकिन लुटेरों का सुराग तक हाथ नहीं लगा। यह बैंक जयपुर के व्यस्ततम आदर्श नगर में है।
जानकारी के अनुसार लूट करने वाले महज दो जने थे। बदमाश बैंक खुलते ही वहां पहुंच गए। इससे वहां दहशत फैल गई। बदमाशों ने पिस्तौल की नोक पर बैंक कर्मिचारियों को बंधक बना लिया। उन्होंने महिला बैंक मैनेजर के जेवर भी लूट लिए तथा उनके साथ अभद्रता की। बदमाश पौन घंटे तक बैंक में रहे। पुलिस ने बदमाशों की तलाश में नाकाबंदी कराई।
आदर्शनगर में एसी मार्केट स्थित यूको बैंक की शाखा सुबह खुली ही थी। कर्मचारी तब पहुंचे भी नहीं थे। एक सफाईकर्मी वहां काम कर रहा था। तभी दो बदमाश वहां आ धमके और सफाईकर्मी को बंधक बना लिया। इसके कुछ मिनटों बाद वहां बैंक मैनेजर रजनी भार्गव आई। उनको यह भान नहीं था कि अंदर दो हथियारबंद बदमाश हैं। उनमें एक बदमाश आया और बैंक मैनेजर को पिस्तौल दिखाकर अपने साथ भीतर ले गया।
जो भी आता गया उसे बंधक बनाते गए
इसके बाद वहां कर्मचारी आने लगे। कुछ ग्राहक भी आए और बदमाश उन्हें पिस्तौल दिखाकर भीतर ले जाते रहे।
सेफ से ले गए 15 लाख रुपए
बदमाशों ने बैंक मैनेजर से सेफ से रुपए निकालने को कहा। सेफ में दो चाबियां लगती थीं। एक चाबी रजनी के पास तो दूसरी एक अन्य कर्मचारी के पास थी। उस कर्मचारी के वहां आते ही बदमाशों ने उनसे सेफ खुलवाया और पैसे निकाल लिए।
महिला बैंक मैनेजर से की अभद्रता
बदमाशों ने महिला बैंक मैनेजर से भी अभद्रता की। उन्हें मारा तथा उनके जेवर उतरवा लिए तथा उनके पर्स में रखे पैसे निकाल लिए। इसके बाद बदमाश सफाईकर्मी की बाइक लेकर चले गए। कर्मचारियों ने तुरंत ही पुलिस को फोन कर सूचना दी। थोड़ ही देर में पुलिस वहां पहुंच गई और नाकाबंदी कराई। पुलिस ने ग्राहकों व बैंक के कर्मचारियों से पूछताछ की।
15 लाख से अधिक लूट ले गए
बैंक प्रबंधन के अनुसार बदमाश 15 लाख रुपए ले गए। बदमाश पौन घंटे तक बैंक में रुके। वे पूरी तैयारी से आए थे। पुलिस सीसीटीवी खंगाल रही है।

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निर्णय में इतनी देरी क्यों?

अनुराग हर्ष
सांवराद में करीब 19 दिन तक गैंगस्टर आनन्दपाल सिंह का शव सिर्फ इस कारण पड़ा रहा क्योंकि राज्य सरकार ने एनकाउंटर की सीबीआई जांच करवाने से इनकार कर दिया था। फिर एक दिन लाठी-भाटा, गोलीबारी, आगजनी और तोडफ़ोड़ हुई। अगले दिन कफ्र्यू और इसके बाद अंतिम संस्कार हुआ। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सरकार ने सीबीआई जांच करवाने का प्रस्ताव भेजने की मांग स्वीकार कर ली। सवाल यह उठता है कि जो बात बीस दिन पहले मानी जा सकती थी, उसे मानने में इतना विलंब क्यों किया गया। राज्य के गृहमंत्री ने पहले कहा कि मेरी पुलिस का मनोबल गिरता है? हमने सभी निर्देशों का पालन करते हुए एनकाउंटर किया है? अब स्वयं गृहमंत्री ने उस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिस पर लिखा है कि मामले की जांच सीबीआई से करवाने का प्रस्ताव भेजा जाएगा। क्या अब पुलिस के मनोबल को ठेस नहीं पहुंचेगी।
अगर सरकार मानती है कि उसकी पुलिस ने सही परिस्थितियों में सही समय पर और तमाम कानूनी कायदों का पालन करते हुए आनन्दपाल का एनकाउंटर किया है तो फिर सीबीआई जांच की मांग पहले ही दिन स्वीकार कर लेनी चाहिए थी। एक बड़े आंदोलन और इसी आंदोलन में एक और व्यक्ति की मौत के बाद ही यह मांग क्यों स्वीकार की जा रही है? सही मायने में यह सरकार की ओर से विलंब से लिया गया सही निर्णय है। अब सवाल यह खड़ा होता है कि विलंब करने के पीछे क्या राजनीति थी? एक समाज की भावनाओं से खेलते हुए आखिर कौन कौन अपनी रोटियां सेक रहा था और कौन कौन अपनी राजनीतिक गोटियां फिट कर रहा था? आखिर सरकार ने इतना विलंब करके क्या हासिल किया? अगर सरकार को २२ जुलाई को होने वाले प्रदर्शन का भय था तो उसे यह भी स्वीकार करना होगा कि ऐसे हालात पैदा करने में स्वयं उसकी भूमिका भी संदिग्ध रही है।
दरअसल, सरकारों का काम किसी वर्ग को खुश करना या फिर नाराज करना नहीं है। उसका दायित्व संविधान के मुताबिक कानून की पालना करवाना और नए कानूनों के माध्यम से राज्य की सुरक्षा को मजबूत करना है। जब सरकारें अपने हित और अहित देखते हुए कानून की समीक्षा करती है तो उसे ऐसे हालात से गुजरना पड़ता है। इस पूरे मामले में अगर निष्पक्ष होकर शुरू से कार्रवाई की जाती तो निश्चित तौर पर बड़े आंदोलन की जरूरत नहीं पड़ती। हजारों लोग अपना मानव श्रम नष्ट करके सांवराद या जयपुर की ओर कूच नहीं करते।
राजनेताओं को भी स्वीकार करना होगा कि आनन्दपाल के उदय से लेकर अंत तक उन्होंने उसका जमकर उपयोग और उपभोग किया गया है। यहां तक कि मौत के बाद भी आनन्दपाल की लाश पर राजनीति खत्म नहीं हुई थी।
मंगलवार को हुए समझौते के बाद भी अगर कोई पेच शेष रह जाता है तो मान लिया जाना चाहिए कि आनन्दपाल की लाश पर राजनीति के बाद भी कुछ और राजनीति करने की इच्छा शेष रह गई है, जिसे पूरा किया जा रहा है।
उन नेताओं को भी अपने गिरेबां में झांकना होगा जो कल तक शांत थे लेकिन अब अचानक से उचक उचक कर बयान दे रहे हैं। उन्हें नहीं पता कि यह जनता है, यह सब जानती है, समझती है और वक्त पर अपना निर्णय देना भी जानती है।

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इन 7 मांगों पर बनी सहमति राजपूत समाज से सहमति

-24 जून को आनंदपाल सिंह एनकाउंटर, 12 जुलाई को सांवराद में हुए घटनाक्रम व सुरेन्द्र सिंह की मृत्यु से संबंधित प्रकरणों की जांच सीबीआई से कराए जाने के लिए राज्य सरकार की ओर से अनुशंषा प्रेषित करने पर सहमति बनी। -राज्य सरकार द्वारा अन्य प्रकरणों में दर्ज मुकदमों में कोई द्वेषतापूर्ण कार्यवाही नहीं की जाएगी। -आनंदपाल की बेटी को भारत आने में राज्य सरकार की ओर से किसी प्रकार की बाधा नहीं डाली जाएगी। -श्रवण सिंह व उसके परिवार पर कोई भी नजरबंदी नहीं रहेगी। श्रवण सिंह या उसके परिवार को कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति मकान को संभाल सकता है। -कमांडों सोहन सिंह के परिवार को मेंदाता अस्पताल में चिकित्सा कारणों से मिलने में कठिनाई आना व्यक्त किया गया तो चिकित्सा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए चिकित्सकों से संपर्क कर उसके परिजनों को मिलाने में अपेक्षित सहयोग किया जाएगा। -आनंदपाल के परिजनों द्वारा आवेदन करने के साथ ही प्रथम पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध करा दी जाएगी। -आंदोलन के दौरान हिंसा में घायल, मृतकों के परिजनों को देय मुआवजे के संबंध में राज्य सरकार द्वारा पूर्व प्रसारित दिशा निर्देशों के अनुसार सहायता दी जाएगी।
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राजपूत समाज के समक्ष सरकार झुकी

जयपुर। आनंदपाल सिंह एनकाउंटर मामले में आज सरकार और राजपूत नेताओं के बीच हुई वार्ता से बड़ा फैसला सामने आया है, जिसमें सरकार आनंदपाल एनकाउंटर और सांवराद में हुई हिंसा की जांच सीबीआई से कराने के लिए अनुशंसा दे दी गई है। गौरतलब है राजपूत समाज ने 22 जुलाई को बड़ी रैली करने की चेतावनी सरकार को दी थी। ऐसे में अब सहमति बनने के बाद राजपूत समाज ने 22 जुलाई के आंदोलन को वापिस लेने की घोषणा की है।

सचिवालय में हुई वार्ता में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया मंत्री राजेंद्र राठौड़ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी के साथ राजपूत नेता गिरिराज सिंह लोटवाडा लोकेंद्र सिंह कालवी सहित एक दर्जन राजपूत नेता मौजूद रहे। वार्ता में राजपूत समाज की 7 बिंदुओं की मांग को लेकर सरकार ने सहमति जताई, लेकिन सबसे बड़ी मांग सीबीआई जांच की मांग थी, जिसको लेकर राजपूत समाज 24 जून यानि जिस दिन आनंदपाल का एनकाउंटर हुआ था, उस दिन के बाद से ही लगातार करता आ रहा था।

इसके बाद सांवराद में सीबीआई जांच की मांग को लेकर श्रद्धांजलि सभा के दौरान भी हिंसा हुई, जिसमे 2 लोगों की मौत हो गई। बाकी अन्य मांग में आनंदपाल की बेटी चीनू को गिरफ्तार नहीं करने, मृतकों के परिवारजनों को मुआवजा देना, कमांडों सोहनसिंह के परिजनों को मिलने, कोई भी गिरफ्तारी नहीं करने, मुकदमें वापिस लेने में सहमति बनी है।

वहीं दूसरी ओर, राजपूत समाज की सातों मांगें मान लिए जाने के साथ ही आंदोलन भी समाप्त हो गया है। आज राजपूत सभा के अध्यक्ष गिर्राज सिंह लोटवाड़ा ने अधिकृत रूप से 22 तारीख को जयपुर कूच का आंदोलन समाप्त कर दिया है। आज राजपूत सभा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने ये बात कही। उन्होंने कहा की हमारी सरकार के साथ बड़े ही सौहार्दपूर्व वातावरण में बात हुई है। राष्ट्रीय राजपूत करनी सेना के प्रवक्ता करण सिंह राठौड़ ने कहा की आनदपाल एनकाउंटर केस में दजऱ् हुए मुकदमों की लिस्टिंग की जाएगी और उसके बाद इन मुकदमों का कानून सम्मत निस्तारण किया जायेगा।

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सांवराद में कफ्र्यू का दूसरा दिन, पत्नी व मां की बिगड़ी तबीयत।

आनंदपाल दाह संस्कार मामला
लाडनूं।गैंगस्टर आनंदपाल के दाह संस्कार के दूसरे दिन शुक्रवार को भी सांवराद गांव में कफ्र्यू जारी रहा गांव में चारों तरफ सन्नाटा पसरा रहा। वहीं हाईवे से गांव की और जाने वाले मार्ग, मुख्य गुवाड़, गलियों के चप्पे-चप्पे पर पुलिस व टास्क फोर्स के जवान तैनात रहे। दाह संस्कार के दूसरे दिन शुक्रवार शाम साढ़े पांच से साढ़े सात तक दो घण्टे की ग्रामीणों को कफ्र्यू में राहत दी गई इसके बाद ग्रामीण ने अपनी आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में लगे रहे जिससे एक बारगी सांवराद के हालात सामान्य होने लगे हैं ।
पत्नी व मां की तबियत बिगड़ी
इधर आनंदपाल के दाह संस्कार के बाद दूसरे दिन पत्नी राजकंवर व मां निर्मल कंवर की तबीयत अचानक से बिगड़ जाने से उन्हें चक्कर आने लगे और उल्टियां होने लगी जिससे वह एकबारगी अचेत हो गई। इस पर पुलिस ने लाडनूं से चिकित्सकों की टीम को बुलाया और पुलिस निगरानी में मां व पत्नी के स्वास्थ्य की जांच करवाकर उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध करवाया गया।
रुट की बसों में दहशत
आनंदपाल की शोक सभा में भड़की हिंसा के बाद हालात तनावपूर्ण हो जाने व उग्र भीड़ द्वारा कुचामन में रोडवेज बसों को जलाने की घटना के बाद लाडनूं से कुचामन रुट के बस चालकों में दहशत का माहौल बना हुआ है जिसके चलते पिछले तीन दिनों से लाडनूं से आगे डीडवाना कुचामन के लिए बसें नहीं जा रही। इससे जहां एक और रोड़वेज आय प्रभावित हो रही है। वहीं यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इंटरनेट बैन व कफ्र्यू की अवधि बढ़ाई
माहौल सामान्य बनाने के उद्देश्य से नागौर जिला कलेक्टर कुमारपाल गौतम ने सांवराद गांव में 20 जुलाई की रात्रि 12 बजे तक कफ्र्यू की अवधि बढ़ाई है। वहीं लाडनूं क्षेत्र में इंटरनेट पर बैन की अवधि 24 घंटे बढ़ाकर 15 जुलाई रात्रि 12 बजे तक कर दी गई है।

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जोधपुर में बारिश का तांडव, बाइक समेत पानी में बहा डॉक्टर

जोधपुर। राजस्थान में मानसून ने जोरदार अंदाज में दस्तक दे दी है। राज्य में भारी बारिश का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई इलाकों में पानी भर गया है जिससे दुपहिया वाहन तक बह रहे हैं।
राजस्थान के जोधपुर में भारी बारिश के कारण आई बाढ़ में दुपहिया वाहन तक बह रहे हैं। ऐसे में यहां एक वाहन पानी के बहाव के साथ बह गई। इस वाहन को बचाने के लिए पानी में तीन लोग कूद गए लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि वे वाहन को तो बहने से नहीं रोक पाए लेकिन उनमें से एक खुद पानी की लहरों के साथ काफी दूर तक बहता रहा। बताया जा रहा है कि पानी में बहने वाला युवक एक डॉक्टर है। कुछ दूर आगे निकलने तक वह वहां खड़े एक युवक के सहारे खुद और गाड़ी को बहने से रोकने में सफल हो पाया। बता दें कि जोरदार बारिश ने लोगों को गर्मी से तो राहत दिलाई है लेकिन परेशानियां भी बढ़ा दी हैं। इसकी वजह से जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मूसलाधार बारिश के कारण आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

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