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दंगे के आरोपी को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर हमला, 3 घायल

टोंक। शहर में कुछ दिनों पहले हुए साम्प्रदायिक दंगे के आरोपी की गिरफतारी करने गए पुलिस दल पर परिवार के लोगों ने हमला किया और पथराव किया। जिसमें शहर कोतवाल सहित तीन महिला कांस्टेबल घायल हुईं है। वही आरोपी के परिजनों ने भी पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया है और ३ महिलाओं को इलाज के लिए सआदत अस्पताल में भर्ती कराया है। टोंक में साम्प्रदायिक दंगे के बाद आरोपियों से पूछताछ और उनकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। शहर कोतवाल के अनुसार गुरूवार सुबह तालकटोरा क्षेत्र में एक आरोपी की तलाश में गए थे पर परिवार वालों ने पुलिस के साथ मारपीट की और पथराव किया है। जिसपर पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। टोंक में शांतिबहाली के प्रयास जारी हैं। इसी बीच घटती कुछ घटनायें शहर के अमन चैन के लिए खतरा है। इसी बीच तालकटोरा क्षेत्र में हुई घटना के बाद मुस्लिम समुदाय की तीन महिलाओं को भी इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। महिलाओं ने पुलिस पर अभद्रता का आरोप लगाया और मारपीट करने का भी आरोप लगाया है।

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वसुंधरा के 'भाई' पर भाजपा का संशय, राजस्थान के जिला प्रवास अभियान में किरोड़ी मीणा नहीं

जयपुर। चुनावी साल में प्रदेश भाजपा के 29 प्रमुख नेताओं के गुरूवार से हर जिले में 3—3 दिन के दौरे और प्रवास शुरू हो गए हैं। जिलों में प्रवास करने वाले बीजेपी नेताओं की सूची में सरकार के मंत्री से लेकर सांसद और संगठन के पदाधिकारी तक के नाम शामिल है लेकिन हाल ही में भाजपा परिवार में घर वापसी करने वाले मीणा समाज के दिग्गज नेता और नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा को इस प्रवास कार्यक्रम से दूर रखा गया।

बीजेपी नेताओं को रास नहीं आ रही किरोड़ी की घर वापसी !

यह स्थिति तो तब है जब खुद किरोड़ी लाल मीणा बीजेपी सदस्यता ग्रहण करने के दौरान ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी के समक्ष प्रदेश में दौरे करके बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने की अपनी इच्छा जता चुके हैं। डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का पूर्वी राजस्थान के क्षेत्रों में प्रभाव है और यदि उनका जिलों में प्रवास का कार्यक्रम बनता तो इसका फायदा प्रदेश भाजपा को भी मिलता।

प्रवास कार्यक्रम में जिन नेताओं के नाम शामिल है उनमें नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद मदनलाल सैनी सहित प्रदेश के 10 सांसदों के भी नाम शामिल हैं। सैनी का राज्यसभा के लिए निर्वाचन डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के साथ ही हुआ था लेकिन मदनलाल सैनी को तो चूरू जिले में प्रवास तय हो गया लेकिन मीणा का नाम नेताओं के प्रवास कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाया।

प्रवास पर जिन नेताओं को भेजा गया है उनके नाम भी संगठन और सरकार के स्तर पर मिलकर तय किया गया है लेकिन इसमें किरोड़ी मीणा का नाम शामिल नहीं होना अपने आप में कई सवाल खड़े कर रहा है। प्रवास कार्यक्रम में किरोड़ी लाल मीणा का नाम नहीं होने से इस बात के भी कयास लगाए जा रहे है कि किरोड़ी मीणा की घर वापसी के बाद अब तक बीजेपी के कई नेताओं को उनकी बीजेपी में घर वापसी रास नहीं आई।

वसुंधरा ने कहा था मेरा सक्षम भाई मिल गया

किरोड़ी के सदस्यता लेने के दौरान सीएम वसुंधरा राजे ने कहा था कि उनका सक्षम भाई मिल गया है। किरोड़ी लाल के आने से पार्टी और मजबूत हो गई है। सीएम राजे के इतना सबकुछ कहने के बाद भी किरोड़ी का लिस्ट में नाम न होना इस बात की भी संभावना जता रही है कि अभी भी पार्टी के सभी सांसदों, मंत्रियों की ओर से किरोड़ी लाल को पूरी तरह से नहीं स्वीकारा गया है।

हालांकि प्रदेश सरकार में मंत्री और हाल ही में सत्ता और संगठन के स्तर पर बनाए गए मंत्री समूह में शामिल मंत्री राजेन्द्र राठौड़ प्रवास सूची में किसे रखना और किसे नहीं रखने का फैसला बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष का बता रहे हैं तो वहीं मंत्री अरूण चतुर्वेदी इस प्रवास कार्यक्रम में हर कार्यकर्ता को कुछ न कुछ दायित्व दिए जाने की बात कह रहे हैं लेकिन किरोड़ी मीणा का इसमें शामिल क्यों नहीं किया गया इस बारे में खुलकर बोलने से बच रहे हैं।

29 विधानसभा सीटों पर मीणा समाज का है दबदबा

प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों की 45 विधानसभा सीटों पर एसटी कैटेगरी के लोगों का दबदबा है। इनमें करीब 29 विधानसभा क्षेत्रों में ज्यादा जनसंख्या में मीणा समाज का है। बाकी 12 सीटों पर भील समाज का कब्जा है। और विधानसभा क्षेत्रों में गरासिया, सहरिया आदि एसटी कैटेगरी के लोग जनसंख्या में नंबर वन होने की वजह से निर्णायक भूमिका में है। इसके अलावा कई जगहों पर एसटी निर्णायक भूमिका में है। इनमें उदयपुर, दौसा, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, चित्तौडगढ, अलवर और करौली प्रमुख है। इसके अलावा जयपुर की कुछ सीटों पर भी इनका प्रभाव है। इसके बावजूद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का नाम लिस्ट में नहीं होना कई सवाल खड़ कर रहा है।

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राजस्थान के पोकरण में हुआ सफल ब्रह्मोस मिसाइल परीक्षण, पाकिस्‍तान के उड़े होश...

चीन और पाकिस्‍तान के पास भी नहीं है ऐसी मिसाइल
पोखरण। भारत ने गुरुवार की सुबह राजस्‍थान के पोखरण में दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का फिर से एक सफल परीक्षण किया है। पोखरण फायरिंग रेज में हुए इस परीक्षण में सेना और डीआरडीओ के कई सीनियर ऑफिसर्स मौजूद थे। सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इस मिसाइल ने सफलतापूर्वक सही निशाने पर वार किया। ब्रह्मोस की स्‍पीड 2.8 मैक (ध्वनि की रफ्तार के बराबर) है। इस मिसाइल की रेंज 290 किलोमीटर है और ये 300 किलोग्राम भारी युद्धक सामग्री ले जा सकती है। कुछ दिनों पहले खबरें आई थीं कि ब्रह्मोस जैसी क्षमता वाली मिसाइल अभी तक चीन और पाकिस्‍तान ने विकसित नहीं की है। इससे पहले पोखरण में इस माह की शुरुआत में डीआरडीओ एंटी-टैंक गाइडेड नाग मिसाइल का सफल परीक्षण कर चुकी है। नाग तीसरी पीढ़ी की एक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) है और डीआरडीओ ने इसका परीक्षण भारतीय सेनाओं को और ताकत देने के मकसद से किया है। इस मिसाइल को रेगिस्‍तान की परिस्थितयों में अलग-अलग रेंज और टाइम पर दो टैंक टारगेट को भेदने में सफलता हासिल की।

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चप्पा-चप्पा 'राजे विकास यात्रा'

मुख्यमंत्री चुनावी मोड पर, 200 विस क्षेत्रों में जाएगी

डीएनआर ब्यूरो.जयपुर

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अब पूरी तरह से विधानसभा चुनावी की तैयारी में जुट गई है। भाजपा ने अपने घटते जनाधार को भांपते हुए इस बार उम्मीद से पहले चुनावी तैयारी को तेज कर दिया है। एक दिन पहले मंत्रियों और पदाधिकारियों को हर जिले में तीन-तीन दिन रहने के लिए पाबंद किया गया तो बुधवार को 200 विधानसभा क्षेत्रों में विकास यात्रा शुरू करने की घोषणा कर दी गई। विकास यात्रा पंद्रह अप्रेल से शुरू होगी और जुलाई तक लगातार चलेगी। मंगलवार को जयपुर में मंत्रिमंडल की बैठक में विधायकों और जिला प्रभारी मंत्रियों को मुख्यमंत्री की विधानसभा क्षेत्रों में शुरू की जाने वाली इस यात्रा के बारे में बताया गया। साथ ही उन्हें तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।


कांग्रेस ने कहा, अंतिम प्रयासों में कुछ नहीं होगा

उधर, कांग्रेस ने इसे नौटंकी करार देते हुए कहा है कि अंतिम चरण में भाजपा सरकार भागदौड़ कर रही है, लेकिन पिछले साढ़े चार साल के कुशासन से परेशान राजस्थान की जनता अब भाजपा राज की वापसी नहीं चाहता है। कांग्रेस ने कहा है कि भाजपा को जनता से जुड़े काम करने चाहिए न कि यात्रा निकालनी चाहिए।

कांग्रेस की अभी नजर नहीं आ रही तैयारी

एक तरफ जहां भाजपा ने किरोड़ीलाल मीणा को पार्टी में शामिल करके सत्ता पाने को उत्सुक कांग्रेस के गढ़ में चिंता की लहर दौड़ा दी है, वहीं विकास यात्रा की घोषणा करके भाजपा ने चुनावी दौड़ में एक कदम आगे चलने की इरादा भी जता दिया है। कांग्रेस की तरफ से अभी ऐसे किसी कार्यक्रम की घोषणा नहीं की गई है।

परिवर्तन, सुराज यात्रा के बाद अब विकास यात्रा

वर्ष 2003 में जब वसुंधरा राजे पहली बार प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं थी तब से मुख्यमंत्री की इस तरह की यह तीसरी यात्रा होगी। उल्लेखनीय है कि राजे इससे पूर्व परिवर्तन यात्रा और सुराज संकल्प यात्रा निकाल चुकी है। इस यात्रा को विकास यात्रा का नाम दिया गया है। वसुंधरा की यात्राएं आमतौर पर सफल रहती है और भारी भीड़ के बीच कार्यकर्ताओं को एकजुट होने का अवसर भी मिल जाता है। वसुंधरा राजे की इस यात्रा में नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने का प्रयास रहेगा, वहीं युवाओं कार्यकर्ताओं को एक बार फिर जोडऩे की कोशिश होगी।

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आधे घंटे तक 22 फीट ऊंचे पोल पर अटकी रही जान, नीचे खड़े लोग वीडियो बनाते रहे...!!!

करंट का झटका लगने से श्रमिका चीखा तो लोगों ने एमपीईबी में फोन कर बिजली सप्लाई बंद करवायी

जबलपुर। मोबाइल फोन पर वीडियो बनाने की लोगों की दीवानगी में मंगलवार को एक आदमी की जान-जाते-जाते बची। सिविक सेंटर में बिजली का कार्य कर रहे एक श्रमिक को पोल पर चढऩे के बाद करंट लग गया। वह करीब 22 फीट ऊँचे पोल पर आधे घंटे तक लटका रहा। करंट लगने से उसकी चीख निकल गई। वह अपनी जान बचाने के लिए आवाज देता रहा। लेकिन तमाशबीनों की भीड़ उसे पोल से उतारने के उपाय करने की बजाय मौत से जूझ रहे लाइनमैनका वीडियो बनाती रही। खैरियत ये रही कि भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने सजगता दिखाई और उनके द्वारा बिजली कंपनी को सूचना देने पर बिजली सप्लाई रोक दी गई। इन सबमें जो सबसे हैरानी वाली बात है वो ये है कि करोड़ों रुपए का ठेका लेने वाली स्टेट-अप कंपनी श्रमिकों को सुरक्षात्मक उपकरण तक उपलब्ध नहीं करा रही है। इससे नंगे पैर और हाथों से काम कर रहे बिजली श्रमिकों की जिंदगी में हर पल मौत का खतरा मंडरा रहा है।

आम्र्ड केबल खींचते समय घटना 
जानकारी के अनुसार मंडला मानेगांव निवासी नरेश स्टेपअप कम्पनी में ठेका श्रमिक है। पश्चिम सम्भाग अंतर्गत आरएपीडीआरपी का काम चल रहा है। नरेश दूसरे श्रमिकों के साथ मंगलवार को सिविक सेंटर स्थित जेडीए से चौपाटी मार्ग पर पोल पर चढ़कर केबल बिछा रहा था। शाम 5.30 बजे के लगभग दो श्रमिक जेडीए कार्यालय के सामने मढ़ाताल पोस्ट ऑफिस के कार्नर पर चढ़े हुए थे। आम्र्ड केबल खींचते समय चौपाटी वाले मार्ग के पोल की सप्लाई लाइन चालू हो गयी। करंट का झटका लगते ही नरेश जोर से चीख पड़ा। पोल के आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई।

ऐसे बची जान 
बिजली के पोल पर खड़े श्रमिक के चिल्लाने की जैसे ही आवाज गूंजी लोग खंबे की ओर दौड़े। कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। इस दौरान पोल पर चढ़े नरेश ने फुर्ती दिखाते हुए अपना पैर पोल की बजाय आम्र्ड केबल पर रख दिया। और दूसरी केबल के सहारे खड़ा हो गया। वह इस मुद्रा में लगभग आधे घंटे तक पोल पर ही लटका रहा। इस दौरान नीचे जमा लोगों की भीड़ में अधिकर लोग मदद के लिए हाथ बढ़ाने के बजाय उसका वीडियो बनाने में व्यस्त रहे।

फोन लगाकर बंद करायी सप्लाई
घटनास्थल पर मौजूद कुछ लोगों ने सिटी सर्किल के अधीक्षण अभियंता आईके त्रिपाठी को फोन लगाकर घटना की सूचना दी और सप्लाई बंद कराने को कहा। इसके बाद पश्चिम सम्भाग वाले आधे क्षेत्र की बिजली कट की गई। तब जाकर नरेश नीचे उतर पाया। घटना की सूचना पाकर ओमती थाने की पुलिस भी पहुंची थी। बाद में पुलिस कर्मी नरेश को विक्टोरिया अस्पताल ले गए। जहां, हादसे से घबराया श्रमिक काफी देर तक बदहवास स्थिति में कुछ बोल तक नहीं पा रहा था।

113 करोड़ रुपए का ठेका 
बताया जा रहा है कि स्टेट अप कंपनी ने करीब 113 करोड़ रुपए का ठेका हासिल किया है। लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि करोड़ों रुपए का ठेका लेने वाली कंपनी के कर्मचारियों के पास पोल पर चढऩे-उतरने की सीढ़ी तक है। कंपनी ने श्रमिकों को किसी तरह का सुरक्षा उपकरण मुहैया नहीं कराया है। हादसे के वक्त भी श्रमिक के पास कोई सुरक्षात्मक उपकरण नहीं थे। स्टेट-अप कंपनी की मनमानी के चलते श्रमिक बिना जूता, दस्ताना, झूला और बिना सीढ़ी के 22 फीट ऊंचे पोल पर चढ़कर काम करने को मजबूर हैं। हादसे के बाद देर तक श्रमिक नरेश बदहवास सी हालत में रहा।

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राजस्थान में एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल के कारण चिकित्सा सेवाएं प्रभावित

जयपुर, वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर राजस्थान के एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल के तीसरे दिन करीब 1500 एंबुलेंस वाहनों के पहिए थम जाने से चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुई है।
राजधानी जयपुर में एंबुलेंस सेवा के कर्मचारी अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार से हड़ताल पर हैं। जयपुर के एंबुलेंस कर्मचारियों द्वारा शुरू की गई इस हड़ताल में प्रदेशभर के एंबुलेंस कर्मचारी शामिल हो गए है।
राजस्थान आपातकालीन एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि सरकार के साथ कल हुई वार्ता विफल रही। कर्मचारियों ने सरकार की ओर से तीन प्रतिशत के वेतन वृद्वि के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और सरकार ने कर्मचारियों की अन्य मांगें भी नहीं मानी।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों और सामुदायिक चिकित्सा केन्द्रों पर 108 एंबुलेंस सेवा के लिए 730 एंबुलेंस, 104 एंबुलेंस सेवाओं के लिए 588 एंबुलेंस, और बेस एंबुलेंस सेवाओं के लिए 200 एंबुलेंस कार्यरत है।
उन्होंने कहा, हमें सभी कर्मचारियों का समर्थन प्राप्त है और हमारा विरोध जारी रहेगा।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने गत 16 मार्च को एक अधिसूचना के जरिए 108 आपातकालीन सेवाओं, 104 जननी एक्सप्रेस और बेस एंबुलेंस सेवाओं को रेस्मा के तहत आवश्यक सेवाएं घोषित कर दिया था।
राज्य की लगभग छह हजार एंबुलेंस सेवाओं के कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं।
सिंह ने कहा, समझौते के अनुसार 10 प्रतिशत वेतन वृद्वि का प्रावधान है और हम इस मामले को लंबे समय से उठा रहे है लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

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राजस्थान भर में एम्बुलैंस 108 के चक्का जाम पर सरकार मौन क्यों? प्रदेश भर के मरीज परेशान।

21 मार्च को लगातार तीसरा दिन रहा जब 108 नम्बर की एम्बुलैंस का राजस्थान भर में चक्का जाम रहा। एम्बुलैंस पर काम करने वाले संविदा कर्मियों और कंपनी के बीच वेतन को लेकर जो विवाद शुरू हुआ वह थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह माना कि विवाद संविदा कर्मियों और कंपनी के बीच का कहना है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्थ में सरकार मूक दर्शक बनी नहीं रह सकती। लगातार तीन दिनों की हड़ताल से प्रदेश भर के मरीज परेशान हो रहे हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानी हो रही है। हालत इतने खराब हैं कि घर से सरकारी अस्पताल तक पहुंचने में गर्भवती महिलाओं को दुपहिया अथवा किराये की जीप आदि में सफर करना पड़ रहा है। संविधा कर्मियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इस संबंध में प्रदेश के चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ का बयान बड़ा अजीबो गरीब है। सराफ का कहना है कि इस हड़ताल से सरकार का कोई सरोकार नहीं है। सवाल उठता है कि प्रदेश में 108 एम्बुलैंस की सेवाओं के बदले में सरकार ही तो भुगतान करती है। क्या सरकार के भुगतान किए बगैर 108 एम्बुलैंस चल सकती है? सरकार को चाहिए कि इस मामले में तत्काल दखल दे और संबंधित कंपनी और कर्मचारियों के बीच समझौता करवा कर मरीजों को राहत प्रदान करवावे। गंभीर बात तो यह है कि 108 एम्बुलैंस की हड़ताल के बाद सरकार ने प्रदेश भर में कोई वैल्पिक इंतजाम नहीं किए है। लोगों में सरकार के प्रति पहले से ही नाराजगी है और अब एम्बुलैंस का चक्का जाम होने से नाराजगी और बढ़ रही है।

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राजस्थान भर में एम्बुलैंस 108 के चक्का जाम पर सरकार मौन क्यों? प्रदेश भर के मरीज परेशान।

21 मार्च को लगातार तीसरा दिन रहा जब 108 नम्बर की एम्बुलैंस का राजस्थान भर में चक्का जाम रहा। एम्बुलैंस पर काम करने वाले संविदा कर्मियों और कंपनी के बीच वेतन को लेकर जो विवाद शुरू हुआ वह थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह माना कि विवाद संविदा कर्मियों और कंपनी के बीच का कहना है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्थ में सरकार मूक दर्शक बनी नहीं रह सकती। लगातार तीन दिनों की हड़ताल से प्रदेश भर के मरीज परेशान हो रहे हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानी हो रही है। हालत इतने खराब हैं कि घर से सरकारी अस्पताल तक पहुंचने में गर्भवती महिलाओं को दुपहिया अथवा किराये की जीप आदि में सफर करना पड़ रहा है। संविधा कर्मियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इस संबंध में प्रदेश के चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ का बयान बड़ा अजीबो गरीब है। सराफ का कहना है कि इस हड़ताल से सरकार का कोई सरोकार नहीं है। सवाल उठता है कि प्रदेश में 108 एम्बुलैंस की सेवाओं के बदले में सरकार ही तो भुगतान करती है। क्या सरकार के भुगतान किए बगैर 108 एम्बुलैंस चल सकती है? सरकार को चाहिए कि इस मामले में तत्काल दखल दे और संबंधित कंपनी और कर्मचारियों के बीच समझौता करवा कर मरीजों को राहत प्रदान करवावे। गंभीर बात तो यह है कि 108 एम्बुलैंस की हड़ताल के बाद सरकार ने प्रदेश भर में कोई वैल्पिक इंतजाम नहीं किए है। लोगों में सरकार के प्रति पहले से ही नाराजगी है और अब एम्बुलैंस का चक्का जाम होने से नाराजगी और बढ़ रही है।

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राजस्थान प्रदेश में प्रशिक्षण शिविर और किसान सम्मेलन के जरिए कांग्रेस फूंकेगी चुनावी बिगुल

जयपुर।राजस्थान में एक और जहां भाजपा में सीएम,मंत्री,विधायक और सांसद जल्द ही राज्य के चुनावी दौरे पर निकलने की तैयारी पर है, तो वहीं कांग्रेस प्रशिक्षण शिविर औऱ किसान सम्मेलनों के जरिए जनता को अपने पक्ष में करने के लिए व्याकुल है। विपक्ष इस चुनाव को गंभीरता से ले रही है यह बात हम इसी घटना से समझ सकते हैं कि उसने शिविर और सम्मेलनों के कार्यक्रम को लगभग अंतिम रुप दे दिया है और संभवतया अप्रैल से कांग्रेस इन कार्यक्रमों को पूरी तरह से चुनाव मोड़ पर ले आएगी।

आप लोगों को ग्रुपस मे बता दें कि अप्रैल से लेकर जून तक कांग्रेस के ये कार्यक्रम चलेंगे, जो पहले विधानसभा वाइज फिर जिला लेवल,संभाग स्तर पर और लास्ट में प्रदेशस्तरीय शिविर-सम्मेलन के अनुरूप होंगे। एक दिन में करीब १५ विधानसभा क्षेत्रों में शिविर लगाने की याजना है। 
जिला लेवल पर लगने वाले ट्रेनिंग कैंप में पीसीसी चीफ सचिन पायलट, पार्टी प्रदेश प्रभारी, नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर लाल डूडी,पूर्व सीएम अशोक गहलोत और अन्य छोटे-मोटे पार्टी के नेता शामिल होंगे, जो पार्टी शिविर के जरिए सरकार की नाकामियां गिनाते हुए सत्ता विरोधी माहौल बनाने का प्रयास करेंगे।

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राजस्थान प्रदेश में प्रशिक्षण शिविर और किसान सम्मेलन के जरिए कांग्रेस फूंकेगी चुनावी बिगुल

जयपुर। राजस्थान में एक और जहां भाजपा में सीएम,मंत्री,विधायक और सांसद जल्द ही राज्य के चुनावी दौरे पर निकलने की तैयारी पर है, तो वहीं कांग्रेस प्रशिक्षण शिविर औऱ किसान सम्मेलनों के जरिए जनता को अपने पक्ष में करने के लिए व्याकुल है। विपक्ष इस चुनाव को गंभीरता से ले रही है यह बात हम इसी घटना से समझ सकते हैं कि उसने शिविर और सम्मेलनों के कार्यक्रम को लगभग अंतिम रुप दे दिया है और संभवतया अप्रैल से कांग्रेस इन कार्यक्रमों को पूरी तरह से चुनाव मोड़ पर ले आएगी।
आप लोगों को ग्रुपस मे बता दें कि अप्रैल से लेकर जून तक कांग्रेस के ये कार्यक्रम चलेंगे, जो पहले विधानसभा वाइज फिर जिला लेवल,संभाग स्तर पर और लास्ट में प्रदेशस्तरीय शिविर-सम्मेलन के अनुरूप होंगे। एक दिन में करीब १५ विधानसभा क्षेत्रों में शिविर लगाने की याजना है। 
जिला लेवल पर लगने वाले ट्रेनिंग कैंप में पीसीसी चीफ सचिन पायलट, पार्टी प्रदेश प्रभारी, नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर लाल डूडी,पूर्व सीएम अशोक गहलोत और अन्य छोटे-मोटे पार्टी के नेता शामिल होंगे, जो पार्टी शिविर के जरिए सरकार की नाकामियां गिनाते हुए सत्ता विरोधी माहौल बनाने का प्रयास करेंगे। 

 

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