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पहली बार अपने भाई से मिला नन्हा शावक

जोधपुर। माचिया सफारी पार्क दो भाइयों के मिलन का साक्षी बना। ये भाई है शावक कैलाश और शावक रियाज। डेढ़ साल के कैलाश और आठ माह के रियाज को पहली बार एक-दूसरे के साथ खुला छोड़ा गया। शुरुआत में एहतियात के तौर पर इनके केयर टेकर डॉ। श्रवणसिंह राठौड़ इनके साथ थोड़ी देर पिंजरे में साथ रहे। दोनों के बीच अपनापन देख फिर वे वहां से हट गए।
जोधपुर के माचिया सफारी पार्क में जन्मे डेढ़ साल के कैलाश और आठ माह के रियाज की एक जैसी कहानी है। दोनों को जन्म देने के तुरंत बाद उनकी मां ने त्याग दिया। शेरनी ने एक बार भी दोनों को अपना दूध तक नहीं पिलाया। ऐसे में डॉ। राठौड़ ने रात-दिन एक कर दोनों को अमेरिका से आयातित दूध बोतल से पिला कर अलग-अलग रख बड़ा किया। दोनों के बड़ा होने के बाद कई दिन से डॉ। राठौड़ दोनों को एक साथ एक ही पिंजरे में रखने की योजना बना रहा था। इसके लिए कुछ दिन दोनों को अगल-बगल के दो पिंजरों में रखा गया। इस पिंजरे से दोनों एक-दूसरे को निहारते रहे।
एक सप्ताह तक निहारने के बाद दोनों में दोस्ती हो गई। इसके बाद डॉ। राठौड़ रियाज को लेकर कैलाश के पिंजरे में पहुंचे। थोड़ी देर तक दोनों एक-दूसरे को देखते रहे। फिर आमने-सामने बैठ खेलने लग गए। दोनों ने आपस में जमकर मस्ती की। दोनों को खेलता देख निश्चित होकर डॉ। राठौड़ पिंजरे से बाहर निकल आए। उगेखनीय है कि शावक कैलाश और रियाज डॉ। राठौड़ को ही अपनी मां मानते है। ऐसे में वे उनके साथ बहुत सहज रहते है। दोनों शावकों के पिंजरे को बुधवार से दर्शकों के लिए खोला गया। इन्हें देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे है।

DNR Reporter

DNR desk

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