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तिरुपति बालाजी मंदिर में 100 करोड़ का घोटाला, पुजारी ने मुख्यमंत्री नायडू पर लगाए ये आरोप

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हैदराबाद। भारत के सबसे अमीर मंदिरों में से एक विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर में घोटाले के आरोप लगे हैं। मौजूदा मंदिर प्रशासन पर करोड़ों रुपए का घोटाला करने के आरोप लगे हैं। यह आरोप और किसी ने नहीं बल्कि मंदिर के मुख्य पुजारी रमन्ना दीक्षितुलु ने लगाए हैं। पुजारी रमन्ना दीक्षितुलु के अनुसार, आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू मंदिर के पैसों का दुरूपयोग करते हैं। हालांकि इस खुलासे के बाद पुजारी को हटा दिया गया। रमन्ना दीक्षितुलु ने आरोप लगाया था कि तिरुपति मंदिर प्रशासन मंदिर में चढ़ावे का दुरुपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा था कि आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री ही मंदिर के प्रशासकों को नियुक्त करते हैं इसलिए यहां वे मनमानी करते हैं।

पुजारी के अनुसार मन्दिर के रसोईघर जहां वर्षों से प्रसाद बन रहा था उसे तुड़वाकर करोड़ों के प्राचीन आभूषण और जेवर-जवाहरात गायब कर दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि नायडू ने मन्दिर की 100 करोड़ की राशि अपने राजनीतिक खर्चों के लिए इस्तेमाल कर दी। रमन्ना ने बताया कि भक्तों द्वारा भगवान को चढ़ाए गए कई पुराने आभूषणों का भी कुछ अता-पता नहीं है।

वहीं पुजारी के इस खुलासे के बाद वहां की राजनीति भी गरमा गई। आंध्र प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता जगमोहन रेड्डी ने कहा कि यह सब पैसे और ताकत के लिए सीएम की भूख को दर्शाता है।

आपको बता दें कि तिरुपति मंदिर दुनिया का दूसरा सबसे धनी मंदिर है। इस प्राचीन मंदिर में गरीबों के साथ बड़े-बड़े कारोबारी, फिल्मी सितारे और राजनेता दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उसकी संपत्ति 50,000 करोड़ है और सालाना आय करीब 650 करोड़ रुपए है। तिरुपति बोर्ड नई दिल्ली, ऋषिकेश, गुवाहाटी, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और कन्याकुमारी समेत कई शहरों और कस्बों में मंदिरों का संचालन करता है।

ऐसी मान्यता है कि तिरुपति बालाजी इस मंदिर में अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में रहते हैं। तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य दरवाजे के दाईं ओर एक छड़ी है। कहा जाता है कि इसी छड़ी से बालाजी की बाल रूप में पिटाई हुई थी, जिसके चलते उनकी ठोड़ी पर चोट आई थी। मान्यता है कि बालरूप में एक बार बालाजी को ठोड़ी से रक्त आया था। इसके बाद से ही बालाजी की प्रतिमा की ठोड़ी पर चंदन लगाने का चलन शुरू हुआ।

नहीं देखा होगा गुदगुदी वाला पेड़, सहलाने पर हंसने लगते हैं टहनियां और पत्ते

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गुदगुदी सिर्फ इंसानों को ही नहीं बल्कि पेड़ों को भी होती है। जी हां, आज आपको एक ऐसे अनोखे पेड़ के बारे में बताएंगे जिसे सहलाने पर इंसानों की तरह गुदगुदी होती है। अगर इसके तने को गुदगुदाया जाए तो पेड़ की टहनियां खिलखिला कर हंसने लगती हैं। ऐसा नहीं है कि आपको पेड़ के हंसने की आवाज आए। दरअसल, यह पेड़ छूते ही यह मचलने लगता है जैसे कि कोई इंसान... पेड़ की इस हरकत को आप अपनी आंखों से साफ देख सकते हैं। दरअसल, सोशल मीडिया पर गुदगुदी वाला पेड़ होने का दावा किया गया है। लेकिन जब इसकी हकीकत जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे। उत्तराखंड के कालाढूंगी के जंगल में ऐसे दरख्त का आप दीदार कर सकते हैं, जिसके तने में अंगुलियां रगड़ें तो उसकी शाखाएं कांपना शुरू कर देती हैं। यह जानकर भले ही आपको हैरानी हो, लेकिन यह सच है। कालाढूंगी के जंगल में दो और रामनगर के क्यारी जंगल में कांपने वाला वृक्ष मौजूद है। पिछले चार साल से कालाढूंगी के दो वृक्षों को कार्बेट ग्राम विकास समिति ने पर्यटन से जोड़ा है। पर्यटकों को घने जंगल में कंपन वाले यह पेड़ दिखाने के लिए बकायदा समिति के गाइड जाते हैं। इसका नाम च्रेंडिया डूमिटोरमज् है। रूबीएसी कुल का यह सदस्य करीब 300 से 1300 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। दिसंबर से जनवरी तक का समय पेड़ों में फल आने का रहता है। इसे मेनफल, मिंदा, राधा और मदनफल का भी नाम दिया गया है।

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63 साल से बैन है ये गाना, आखिर क्यों इसे सुनते ही लोग कर लेते हैं सुसाइड?

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बंगलूरू। कुछ गाने ऐसे होते हैं जो हमारे फेवरेट बन जाते हैं जिन्हें हम कितनी बार भी सुने हमारा मन नहीं भरता लेकिन क्या आपने कभी ऐसे गाने के बारे में सुना है जिसे सुनकर लोग आत्महत्या कर लेते हैं? शायद आपका जवाब होगा नहीं पर ये बात सच है। एक ऐसा गाना भी है जिस पर 63 सालों तक बैन लगा रहा क्योंकि इसे सुनकर लोग आश्चर्यजनक तरीके से आत्महत्याएं कर रहे थे। 'रेज्सो सेरेज' जो हंगरी के रहने वाले थे, ने साल 1933 में 'सैड संडे' नामक एक गीत बनाया था। इस गीत में इतना दर्द था कि जो इस गीत को एक बार सुनता उसे अपने दर्द का एहसास होने लगता आलम कुछ ऐसा हुआ कि इस गाने को सुनने के बाद कई लोगों ने आत्महत्या कर ली। ये गाना रिलीज के साथ ही लोगों का पसंदीदा गाना बन गया था और इसे काफी पब्लिसिटी मिली थी। ये एक दर्द भरा गाना है जो लोगों के दिल को छू जाता है। यही कारण था की इस गाने को 'सबसे उदास गाने' की उपाधि मिली। इस गाने को सुनकर आत्महत्या करने का सबसे पहला मामला बर्लिन में सामने आया जब एक लड़के ने इस गाने को सुनने के बाद खुद को गोली मार दी। इसके अलावा न्यूयार्क में भी एक बुजुर्ग ने 7वीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। वहीं हंगरी में एक 17 साल की लड़की ने इस गाने को सुनकर पानी में डूबकर खुद को खत्म कर लिया। इस गाने के लिरिक्स इतने दर्दनाक हैं कि कोई भी इसे सुनकर इमोशनल हो जाएगा। खैर.. आप इस गाने को सुनने के बाद ऐसा कुछ मत कीजिएगा।

12वीं विज्ञान व वाणिज्य का परिणाम कल

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जयपुर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान (आरबीएसई) बुधवार को 12वीं विज्ञान और वाणिज्य वर्ग का परिणाम जारी कर सकता है। बोर्ड द्वारा 23 मई को शाम सवा 6 बजे दोनों 12वीं साइंस और कॉमर्स का परिणाम जारी किए जाने की तैयारी है। शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी बुधवार शाम को रिजल्ट घोषित करेंगे। साइंस और कॉमर्स के परिणाम जारी किए जाने के बाद आर्ट्स के रिजल्ट घोषित किए जाएंगे।
साइंस और कॉमर्स के परिणाम जारी किए जाने के बाद आर्ट्स के रिजल्ट घोषित किए जाएंगे। 12वीं की परीक्षा में शामिल होने वाले सभी स्टूडेंट्स बोर्ड की वेबसाइट www.examresults.net/rajasthan पर देख सकते हैं। दैनिक नेशनल राजस्थान की वेबसाइट www.nationalrajasthan.com पर भी रिजल्ट्स के बारे में नियमित अपडेट मिलते रहेंगे।

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