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खेल (1070)

भारतीय टीम करो या मरो के मुकाबले में जीत हासिल करने को बेताब

नाटिंघम, 17 अगस्त (भाषा) पहले दो टेस्ट में हार झेaलने के बाद भारतीय टीम कल से यहां इंग्लैंड के खिलाफ शुरू होने वाले करो या मरो के तीसरे टेस्ट में फतह हासिल कर वापसी करने के लिए बेताब होगी जिसके लिए वह टीम में कुछ बदलाव भी करना चाहेगी।
भारतीय टीम के लिए ट्रेंट ब्रिज में होने वाला यह टेस्ट उनके लिए सीरीज बचाने का अंतिम मौका होगा। टीम को पहले दो टेस्ट मैचों में एजेस्टन में 31 रन तथा लार्ड्स में पारी व 159 रन से हार का मुंह देखना पड़ा था।
प्रतिस्पर्धी क्रिकेट के साढ़े पांच दिन में 0-2 से पिछडऩे के बाद कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री सही टीम संयोजन बनाना चाहेंगे। इस तरह भारतीय टीम कप्तान कोहली की अगुवाई में 38 मैचों में इतनी ही बार के संयोजन में खेलेगी।
सबसे बड़ा बदलाव बीस वर्षीय रिषभ पंत के टेस्ट पदार्पण का होगा जो खराब फार्म में चल रहे दिनेश कार्तिक की जगह लेंगे जिन्होंने शायद लंबे प्रारूप में अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच खेल लिया है।
चार पारियों में शून्य, 20, एक और शून्य के स्कोर के अलावा विकेटकीपिंग में भी खराब प्रदर्शन के बाद कार्तिक पंत को कैचिंग अभ्यास कराते दिखे। पंत ने नेट में काफी समय बल्लेबाजी करने में बिताया। पंत ने इंग्लैंड लायंस के खिलाफ दो प्रथम श्रेणी मैचों में तीन अर्धशतक बनाए हैं जिसके बाद उन्होंने टीम में जगह बनाई।
रूड़की में जन्में इस युवा को जेम्स एंडरसन, स्टुअर्ट ब्राड, क्रिस वोक्स और सैम करेन जैसे गेंदबाजों का सामना करना होगा जो उनके लिए परेशानियां खड़ी करने के लिए तैयार होंगे जैसा कि वे उनके सीनियरों के लिए कर चुके हैं।
पंत के पदार्पण को लेकर जहां इतनी दिलचस्पी बनी हुई है, वहीं प्रशंसक यह भी उम्मीद कर रहे होंगे कि कप्तान कोहली बल्लेबाजी करने के लिए फिट होंगे।
पिछले मैच में स्विंग के मुफीद हालात में मिली हार के बाद भारतीय शिविर में मुख्य खिलाडय़िों की फिटनेस को लेकर आकलन जारी रहा। अच्छी खबर यह है कि जसप्रीत बुमरा फिट हो गए हैं तथा रविचंद्रन अश्विन और हार्दिक पंड्या लार्ड्स में बल्लेबाजी करते हुए लगी अपनी हाथ की चोट से पूरी तरह उबर गए हैं तथा कप्तान कोहली भी अपनी पीठ की समस्या से लगभग उबर गए हैं। कोहली की स्थिति में काफी सुधार हुआ है और उन्होंने कहा भी है कि वह जो रूट के साथ टास करने मैदान पर आएंगे।
भारत ने लार्ड्स में दो स्पिनरों को उतारने की गलती स्वीकार की थी लेकिन कोहली और कोच शास्त्री अब उचित टीम संयोजन उतारना चाहेंगे। अंतिम एकादश में कुछ बदलाव जरूरी है क्योंकि कुछ अहम खिलाडय़िों में आत्मविश्वास में कमी दिख रही है।

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एशियाई खेल डायरी: यातायात समस्या, शाहरूख और सेल्फी की दीवानगी

पालेमबांग, 17 अगस्त (भाषा) एशियाई खेलों के दौरान यातायात को लेकर इंडोनेशिया का डर सच होता दिख रहा है लेकिन वहां के लोग कल से जकार्ता और पालेमबांग में शुरु हो रहे इन खेलों के लिए पहुंचे प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत कर रहे हैं।
इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता को यातायात समस्या के लिए जाना जाता है (पिछले साल अक्तूबर में राष्ट्रपति जोको विडोडो को दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ा था)। इस मामले में दक्षिण सुमात्रा प्रांत की राजधानी पालेमबांग भी ज्यादा पीछे नहीं है।
शहर के मुख्य हिस्से से आठ किलोमीटर दूर जाकाबारिंग स्पोर्ट्स सिटी तक पहुंचने में लगभग एक घंटे का समय लगा।
यहां के सुलतान मोहम्मद बदरूद्दीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खड़े एक वालंटियर ने कहा, कई बार स्थिति इससे भी खराब हो जाती है। आप पालेमबांग की यातायात के बारे में कुछ नहीं कह सकते। यह जकार्ता की तरह खराब नहीं लेकिन स्थिति बुरी है।
शहर के होटल से जाकाबारिंग हवाईअड्डे की रेकी करने में एक घंटे से अधिक का समय लग गया। यहां की व्यस्त सड़क पर कार से ज्यादा बाइक भारतीय यातायात समस्या की तरह है।
पालेमबांग को खेलों का सह-मेजबान इसलिए चुना गया था क्योंकि यहां आधारभूत संरचना पहले से मौजूद था और मूसी नदी के किनारे बसे इस शहर ने 2011 में दक्षिण एशियाई खेलों की मेजबानी की थी।
मुख्य प्रेस सेंटर में मौजूद एक अधिकारी ने कहा, ज्यादातर लोगों को लग रहा कि हम फिर से दक्षिण एशियाई खेलों की मेजबानी कर रहे लेकिन काफी बड़े स्तर पर। वे काफी उत्सुक हैं।
आधारभूत संरचना की कमी को यहां के लोगों की मुस्कान देखकर आसानी से भूल सकते है।
यहां बोली जाने वाली भाषा हालांकि एक समस्या है लेकिन लोग बालीवुड सितारे शाहरुख खान और अमिताभ बच्चन की दीवानगी के बारे में बताने से नहीं चूकते। इस मामले में शाहरूख अपने सीनियर अभिनेता से ज्यादा लोकप्रिय है।
एक वालंटियर ने कहा, हमें भाषा समझ में नहीं आती लेकिन हम शाहरूख को पंसद करते हैं।
एक अधिकारी ने कहा, भारत बहुत बड़ा देश है और आपके यहां आने से हम काफी खुश है। हमारे लिए यह काफी बड़ा क्षण है।

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वाडेकर का निधन अपूर्णीय, निजी क्षति: तेंदुलकर

मुंबई, 17 अगस्त (भाषा) दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने आज अजित वाडेकर को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भारत के पूर्व कप्तान का निधन उनके लिए अपूर्णीय और निजी क्षति है।
भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और मैनेजर रहे वाडेकर का निधन 15 अगस्त को दक्षिण मुंबई के अस्पताल में हुआ था। वह 77 साल के थे।
तेंदुलकर ने दिवंगत आत्मा को अंतिम श्रद्घांजलि देते हुए कहा, यह अपूर्णीय क्षति है। मैं कहूंगा कि यह निजी क्षति है। लोग वाडेकर सर को महान क्रिकेटर के तौर पर जानते हैं, लेकिन मैं भाग्यशाली था कि उन्हें एक महान क्रिकेटर और एक शानदार इंसान के तौर पर करीब से देख सका। मेरे लिए वह काफी महत्वपूर्ण थे। बीते वर्षों में हमारे संबंध और मजबूत हुए थे।
तिरंगे में लिपटे वाडेकर के पार्थिव शरीर को वर्ली स्थित उनके घर पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। उनका अंतिम संस्कार आज शिवाजी पार्क में किया जाएगा।
तेंदुलकर ने इस मौके पर उनके करियर को संवारने में वाडेकर की भूमिका को याद किया।
उन्होंने कहा, मेरे जीवन में वाडेकर सर की भूमिका काफी अहम रही है, खासकर उम्र के महत्वपूर्ण पड़ाव पर। मैं 20 साल का युवा था और आसानी से भटक सकता था।
मास्टर ब्लास्टर ने कहा, कई बार मुझे अनुभवी इंसान के मार्गदर्शन की जरूरत होती थी, जो खुद इस स्तर खेला हो। उन्हें पता था खिलाडय़िों से उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कैसे लेना है। टीम के साथ उनकी मौजूदगी से मुझे निजी तौर पर काफी फायदा हुआ था।
भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर और बीसीसीआई के महाप्रबंधन (क्रिकेट संचालन) साबा करीम ने भी वाडेकर को श्रद्धांजलि दी।
करीम ने कहा, मेरी उम्र के सभी खिलाड़ी उनका अनुसरण करते थे। वह बाएं हाथ के शानदार बल्लेबाज थे। पूरी क्रिकेट समुदाय के लिए यह बड़ी क्षति है।
भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर समीर दीघे, विनोद कांबली, हाकी के पूर्व कप्तान एमएम सौमेया के अलावा एमसीए के पूर्व और मौजूदा अधिकारियों ने वाडेकर को श्रद्घांजलि दी।

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बारिश के कारण जोकोविच का मैच रूका, फेडरर भी नहीं उतर सके कोर्ट पर

सिनसिनाटी, 17 अगस्त (एएफपी) दुनिया के पूर्व नंबर एक खिलाड़ी नोवाक जोकोविच और गत चैम्पियन ग्रिगोर दिमित्रोव के बीच एटीपी-डब्ल्यूटीए सिनसिनाटी ओपन के तीसरे दौर के मैच को बारिश के कारण रोकना पड़ा।
बारिश के कारण स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर का मैच शुरू ही नहीं हो सका। तीसरे दौर में उन्हें लियोनार्डाे माएर के खिलाफ खेलना है।
सिनसिनाटी ओपन में पहली बार जीत दर्ज करने के इरादे से उतरे विम्बलडन चैम्पियन जोकोविच ने दिमित्रोव के खिलाफ पहला सेट 2-6 से गवां दिया था लेकिन उन्होंने दूसरे सेट में वापसी की और 6-3 से जीतने में सफल रहे। दूसरे सेट के बाद बारिश के कारण मैच रोकना पड़ा।
बारिश रूकने के बाद जब मैच दोबारा शुरू हुआ तो फिर से इसे रोकना पड़ा। मैच रोके जाने समय जोकोविच तीसरे सेट में 2-। से आगे थे।
जोकोविच नौ मास्टर्स 1000 टूर्नामेंट में से सिर्फ सिनसिनाटी ओपन में ही खिताब नहीं जीत सके हैं।
इससे पहले सिमोना हालेप और जुआन मार्टिन डेल पोत्रो ने खराब मौसम के कारण देर से हुए दूसरे दौर के मैच में जीत दर्ज की।
विश्व की नंबर एक महिला खिलाड़ी हालेप ने अजला तोम्लजानोविच को 4-6, 6-3, 6-3 से शिकस्त दी।
अर्जेंटीना के विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर काबिज डेल पोत्रो ने दक्षिण कोरिया के चुंग ह्योन को आसानी से 6-2, 6-3 से मात दी।
मिलोस राओनिच ने डेनिस शापोवालोव को 7-6 , 6-4 हराकर क्वार्टरफाइनल में जगह पक्की की। पाब्लो र्कोनो बुस्ता भी क्वार्टरफाइनल में पहुंचने में सफल रहे, उन्होंने नीदरलैंड के रोबिन हास को 6-4, 6-2 से हराया।
अमेरिकी ओपन की विजेता स्लोआने स्टीफेंस को महिलाओं के तीसरे दौर में हार का सामना करना पड़ा। स्लोआना को बेल्जियम की एलिसे माार्टेंस ने 7-6, 6-2 से हराया।
मैडिसन किज ने चौथी वरियता प्राप्त विम्बलडन चैम्पियन एंजेलिक कर्बर को 2-6, 7-6 , 6-4 से शिकस्त दी।

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अच्छी शुरुआत का फायदा नहीं उठा पाए मेना, पर डकार में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद

कोपियापो, 17 अगस्त (भाषा) दुनिया के सबसे दुर्गम और अपनी तरह के अनोखे अटाकामा मरूस्थल की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अच्छी शुरुआत के बावजूद अक्सर आखिरी क्षणों में पिछडऩे वाले हीरो मोटोस्पोर्टस टीम रैली के ओरियोल मेना को विश्वास है कि वह डकार रैली में अपने पहले प्रयास में ही छाप छोडऩे में सफल रहेंगे। 

साल के आखिर में होने वाली डकार रैली की तैयारियों में लगी भारतीय टीम हीरो मोटोस्पोर्टस टीम रैली के लिए अटाकामा रैली का तीसरा चरण मिश्रित सफलता वाला रहा। मेना जहां अच्छी शुरुआत का फायदा उठाने में नाकाम रहे वहीं जोकिम रोड्रिग्स तकनीकी कारणों से बीच से हट गए।
तीसरे चरण की रेस का विशेषता रेत के टीलों से गुजरना था जो कि मेना जैसे नए और कम अनुभवी ड्राइवर के लिए चुनौतीपूर्ण था। कुल 260 किमी की रेस में लगभग आधा हिस्सा रेत के टीलों से गुजरना था जिसमें आपकी गति और क्षमता की कड़ी परीक्षा होती है। मेना की अनुभवहीनता आखिर में परिणाम में भी नजर आई।
मेना रेस के शुरू में एक समय शीर्ष आठ में शामिल थे लेकिन बाद में उन्हें 13वें स्थान से संतोष करना पड़ा। वह ओवरऑल तालिका में भी इसी स्थान पर बने हुए हैं लेकिन इस स्पेनिश ड्राइवर को उम्मीद है कि यहां की गलतियों से सबक लेकर वह डकार में प्रभाव छोडऩे में सफल रहेंगे।
मेना ने भाषा से कहा, आज का चरण वास्तव में काफी तेज था और रेत के टीलों में मुझे ज्यादा तकनीकी परेशानी नहीं हुई इसलिए मैं सहज था। मैंने अच्छी शुरुआत की थी और एक समय कुछ ही राइडर मुझसे आगे थे। इससे आपको आगे के ट्रैक को समझने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा, यह मेरे लिए अच्छा अनुभव है जिसका मुझे डकार रैली में फायदा मिलेगा जो पेरू में होनी है। इससे पहले हम पेरू में ही अभ्यास रैली में हिस्सा लेंगे इसलिए मुझे वहां अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। मेरा लक्ष्य एक दिन डकार रैली में जीत दर्ज करना है।
रोड्रिग्स के लिए तीसरा चरण निराशाजनक रहा। उनकी बाइक में कुछ खराबी आ गई जिससे उन्होंने किसी तरह का जोखिम उठाना उचित नहीं समझा।
उन्होंने बाद में कहा, मैंने अच्छी शुरुआत की थी लेकिन बाइक के साथ कुछ तकनीकी मसलों के कारण मुझे बीच से हटना पड़ा। उम्मीद है कि कल ऐसा नहीं होगा और मैं बेहतर परिणाम हासिल करने में सफल रहूंगा।
पीठ की चोट के कारण लगभग छह महीने तक बाहर रहने वाले रोड्रिग्स ने हालांकि स्वीकार किया कि वह अभी पूरी तरह से फिट नहीं हैं। उन्होंने कहा, मैं अब भी पूरी तरह से फिट नहीं हूं। अभी पूरी फिटनेस हासिल करने के लिए लंबा रास्ता तय करना है।
चौथे चरण की रेस में भी बाइकर्स को 250 किमी की दूरी तय करनी है। तीसरे चरण में हसक्वरना रेसिंग के पाब्लो क्विेनटेनिला पहले स्थान पर रहे। इससे उन्होंने ओवरआल सूची में होंडा रेसिंग के केविन बेनाविडेस को भी मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया है।
भाषा पंत

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ओलंपिक खेलगांव 1984 में अचार के साथ चावल का दलिया खाने को मजबूर थी : उषा

नई दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) उडऩपरी पीटी उषा ने पुरानी यादों की परतें खोलते हुए बताया कि कैसे लास एंजीलिस ओलंपिक 1984 के दौरान उन्हें खेलगांव में खाने के लिए चावल के दलिए के साथ अचार पर निर्भर रहना पड़ा था। वह इसी ओलंपिक में एक सेकंड के सौवे हिस्से से पदक से चूक गई थी।
उषा ने कहा कि बिना पोषक आहार के खाने से उन्हें कांस्य पदक गंवाना पड़ा था।
उन्होंने कहा , इससे मेरे प्रदर्शन पर असर पड़ा और अपनी दौड़ के आखिरी 35 मीटर में मेरी ऊर्जा बनी नहीं रह सकी।
उषा 400 मीटर बाधादौड़ के फाइनल में रोमानिया की क्रिस्टियाना कोजोकारू के साथ ही तीसरे स्थान पर पहुंची थी लेकिन निर्णायक लैप में वह पीछे रह गई।
उषा ने इक्वाटोर लाइन मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा , हम दूसरे देशों के खिलाडय़िों को ईष्या के साथ देखते थे जिनके पास पूरी सुविधाएं थी। हम सोचते थे कि काश एक दिन हमें भी ऐसी ही सुविधाएं मिलेंगी।
उन्होंने कहा , मुझे याद है कि केरल में हम उस अचार को कादू मंगा अचार कहते हैं। मैं भुने हुए आलू या आधा उबला चिकन नहीं खा सकती थी। हमें किसी ने नहीं बताया था कि लास एंजीलिस में अमेरिकी खाना मिलेगा। मुझे चावल का दलिया खाना पड़ा और कोई पोषक आहार नहीं मिलता था। इससे मेरे प्रदर्शन पर असर पड़ा और आखिरी 35 मीटर में ऊर्जा का वह स्तर बरकरार नहीं रहा।
उषा ने अपने 18 साल के कैरियर में भारत के लिए कई पदक जीते और अब अपनी कोचिंग अकादमी चलाती हैं।
उन्होंने कहा कि उनका सपना किसी भारतीय धावक को ओलंपिक में पदक जीतते देखना है।
उन्होंने कहा , मेरा पूरा जीवन ही उसी लक्ष्य पर केंद्रित है। उषा स्कूल आफ एथलेटिक्स में हम उदीयमान एथलीटों को वे सुविधाएं देते हैं जो हमें नहीं मिल सकी। अभी 18 लड़कियां यहां अभ्यास कर रही है।

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शुक्र है कि ग्रैंडमास्टर खिताब मिल गया और अतीत की बात हो गया : सरीन

अबु धाबी, 16 अगस्त (भाषा) चौदह बरस की उम्र में ग्रैंडमास्टर बने भारत के निहाल सरीन ने कहा कि उन्हें खुशी से ज्यादा राहत है कि यह खिताब मिल गया और अब अतीत की बात हो गया।
अबु धाबी मास्टर्स में तीसरा और आखिरी नार्म हासिल करने के बाद भारत के 53वें ग्रैंडमास्टर बने सरीन ने कहा , कई बार नार्म के मसलों के कारण प्रयोग करने से डर लगता है। मैं राहत महसूस कर रहा हूं कि अब यह बीत गया है।
शतरंज के इतिहास में निहाल 12वें सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बन गए। इससे पहले अंडर 14 वर्ग में वह दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी बने थे।
निहाल ने अबु धाबी में चार जीत, तीन ड्रा और दो हार के बाद नौ में से 5 . 5 अंक हासिल किए।

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एशियाई खेलों में भारत की प्रबल पदक उम्मीदों पर एक नजर

जकार्ता, 16 अगस्त (भाषा) इस सप्ताह के आखिर में शुरू होने जा रहे एशियाई खेलों में भारत की पदक उम्मीदों पर दृष्टिपात :
कुश्ती :
बजरंग पूनिया : हरियाणा के इस 24 बरस के पहलवान ने इंचियोन में रजत पदक जीता था। शानदार फार्म में चल रहा यह पहलवान 65 किलो फ्रीस्टाइल में पदक का दावेदार है और इस साल तीन टूर्नामेंट जीत चुका है। गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण के अलावा उन्होंने जार्जिया और इस्तांबुल में दो टूर्नामेंट जीते।
सुशील कुमार : भारत के सबसे सफल ओलंपियन में से एक सुशील पर अतिरिक्त दबाव होगा जो जार्जिया में फ्लाप रहे थे। जार्जिया में नाकामी के बाद लोग सवाल उठाने लगे कि एशियाड ट्रायल से उन्हें छूट क्यो दी गई। दो बार के ओलंपिक पदक विजेता अपना चिर परिचित फार्म दिखाने को बेताब होंगे।
विनेश फोगाट :
रियो ओलंपिक में पैर की चोट की शिकार हुई विनेश वापसी कर रही है। उसने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण और मैड्रिड में स्पेन ग्रां प्री जीती। वह 50 किलो में पदक की प्रबल दावेदार होंगी।
बैडमिंटन :
पी वी सिंधू : विश्व चैम्पियनशिप रजत पदक विजेता पी वी सिंधू से काफी उम्मीदें है। उसे नांजिंग में कैरोलिना मारिन से मिली हार को भुलाकर खेलना होगा। चार बड़े फाइनल हार चुकी सिंधू पर इस कलंक को धोने का भी दबाव है।
साइना नेहवाल : भारत में बैडमिंटन की लोकप्रियता का ग्राफ उठाने वाली साइना लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। उन्हें विश्व चैम्पियनशिप में जिस तरह से मारिन ने हराया, वह अच्छा संकेत नहीं है। लेकिन उनके अनुभव और क्षमता को देखते हुए वह पदक की बड़ी उम्मीद है।
के श्रीकांत : राष्ट्रमंडल खेल रजत पदक विजेता श्रीकांत पुरूष एकल में भारत की अकेली उम्मीद हैं। अप्रैल में नंबर एक की रैंकिंग हासिल करने वाले श्रीकांत को चीन, इंडोनेशिया और जापान के खिलाडय़िों से कड़ी चुनौती मिलेगी।
निशानेबाजी :
मनु भाकर : हरियाणा की 16 बरस की इस स्कूली छात्रा ने पिछले साल जबर्दस्त प्रदर्शन करके सुर्खिया बंटोरी। आईएसएसएफ विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली मनु सबसे युवा भारतीय निशानेबाज बनी। उसने राष्ट्रमंडल खेलों में भी पीला तमगा जीता और 10 मीटर एयर पिस्टल में प्रबल दावेदार हैं।
एथलेटिक्स :
हिमा दास : असम के एक गांव की 20 बरस की इस लड़की ने गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में छठा स्थान हासिल किया था। वह आईएएएफ ट्रैक और फील्ड स्पर्धा में 400 मीटर में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय बनी।
नीरज चोपड़ा : इस युवा भालाफेंक खिलाड़ी के कद का अहसास इसी से हो जाता है कि यह भारतीय दल के ध्वजवाहक हैं। अंडर 20 विश्व चैम्पियनशिप 2016 में स्वर्ण जीतने वाले नीरज ने राष्ट्रमंडल खेलों में इस कामयाबी को दोहराया। उसने दोहा में आईएएएफ डायमंड लीग में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। पिछले चार टूर्नामेंटों में से तीन में वह स्वर्ण पदक जीत चुके हैं।
टेनिस :
रोहन बोपन्ना और दिविज शरण : कंधे की चोट से उबरे रोहन बोपन्ना अगर अपनी क्षमता के अनुरूप खेल सके तो दिविज के साथ युगल में पदक के दावेदार होंगे।
रामकुमार रामनाथन : युकी भांबरी की गैर मौजूदगी में भारत की उम्मीदों का दारोमदार रामनाथन पर होगा। न्यूपोर्ट एटीपी टूर्नामेंट में फाइनल तक पहुंचे रामनाथन ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।
मुक्केबाजी :
शिवा थापा : पुरूषों के 60 किलो वर्ग में थापा एशियाई खेलों में पहला पदक जीतने की कोशिश में होंगे। एशियाई चैम्पियनशिप में लगातार तीन पदक जीतकर उनका आत्मविश्वास बढा है।
सोनिया लाठेर : एम सी मेरीकाम की गैर मौजूदगी में विश्व चैम्पियनशिप रजत पदक विजेता सोनिया भारतीय महिला टीम की अगुवाई करेगी। वह 57 किलो वर्ग में प्रबल दावेदार हैं।
जिम्नास्टिक :
दीपा करमाकर : घुटने की चोट के कारण राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर रही दीपा ने तुर्की में विश्व चैलेंज कप में स्वर्ण जीतकर वापसी की। रियो ओलंपिक में चौथे स्थान पर रही दीपा पदक की प्रबल दावेदार हैं।
टेबल टेनिस :
मनिका बत्रा : गोल्ड कोस्ट में स्वर्ण पदक जीतने वाली मनिका राष्ट्रमंडल खेलों की स्टार रही। जकार्ता में प्रतिस्पर्धा अधिक कठिन होगी लेकिन वह भी पूरी तैयारी के साथ गई है।

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सोमदेव को एशियाड में टेनिस दल से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद

विजयनगर (कर्नाटक), 16 अगस्त (भाषा) भारत के लिए एशियाई खेलों की
एकल टेनिस स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतने वाले एकमात्र खिलाडी सोमदेव देववर्मन को
लगता है कि 18 अगस्त से जकार्ता में शुरू होने वाले खेलों में युवा और
अनुभवी खिलाडियों का दल अच्छा प्रदर्शन करेगा।
सोमदेव को हालांकि लगता है कि अमेरिकी ओपन की तारीखों से टकराव की
वजह से एशियाई खेलों की चमक थोडी फीकी हुई है लेकिन उनका मानना है कि
भारतीय खिलाडियों को इस मौके का फायदा उठाना चाहिए।
भारतीय डेविस कप टीम के स्टार रह चुके सोमदेव ने भाषा से बातचीत
करते हुए कहा, ैपुरूष वर्ग में हम निश्चित रूप से पदक के दावेदार हैं।
पुरूष एकल वर्ग में निश्चित रूप से, रामनाथन और प्रज्नेश
गुणेश्वरन अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, अमेरिकी ओपन के साथ तारीखों के टकराव की वजह से
एशियाई खेलों की टेनिस स्पर्धा की चमक थोडी फीकी हो गई है क्योंकि
काफी खिलाडी इस ग्रैंडस्लैम में खेल रहे हैं। यह भारतीय खिलाडियों के
लिए अच्छा मौका है।
हालांकि उन्होंने इस पर कहा, एथलीट के तौर पर आपके सामने कोई भी
हो आप अपना अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो भारतीय खिलाडियों के पास अच्छा
मौका है और इस टूर्नामेंट में उनका रिकार्ड भी शानदार है।
उन्होंने कहा, इसलिए मुझे पुरूष एकल और युगल में पदक की उम्मीद
है। मुझे लगता है कि पुरूष युगल में हम मजबूत दावेदार हैं और रोहन अगर
स्वस्थ रहते हैं और दिविज भी स्वस्थ रहते हैं तो मुझे लगता है कि वे
अच्छे मैच जीतेंगे।
रोहन बोपन्ना पिछले कुछ समय से चोटों से जूझ रहे हैं।
सोमदेव ने 2010 इंचियोन एशियाई खेलों में एकल स्पर्धा देश के लिए
पहला स्वर्ण पदक जीता था। इन्हीं खेलों में उन्होंने सनम सिंह के साथ
मिलकर युगल स्पर्धा का भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया था।
उन्होंने महिला वर्ग के बारे में बात करते हुए कहा, महिला वर्ग में
करमन कौर थांडी शीर्ष 200 में पहुंची हैं और वह 20 साल की है। इतनी छोटी
उम्र में वह यहां तक पहुंची, यह शानदार है। उसका सर्वश्रेष्ठ निश्चित रूप
से आएगा। तो उसके लिए भी एशियन खेलों में अच्छा मौका है।
सोमदेव ने कहा, अंकिता रैना का प्रदर्शन उतार चढाव वाला रहा है,
लेकिन जब वह अच्छा खेलती है तो निश्चित रूप से उसके पास भी मौका है।
महिला युगल में प्रार्थना थोंबरे सानिया की अनुपस्थिति में अच्छा कर रही
हैं तो उनके पास भी खुद को साबित करने का मौका है।
अंकिता रैना रैंकिंग में 187 स्थान और करमन कौर थांडी :197: भी
शीर्ष 200 में जगह बनाने में सफल रहीं।
सोमदेव ने कहा, मिश्रित युगल में भी हमारे पास मौका है, अगर रोहन
स्वस्थ रहता है तो इसमें भी हम पदक जीत सकते हैं।
अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में उन्होंने कहा कि वह निश्चित रूप
से कोचिंग देना पसंद करेंगे लेकिन समय के बारे में कुछ भी कहने से इनकार
कर दिया।
उन्होंने कहा, मेरा पूरा ध्यान खेल के विकास पर लगा है। कुछ समय
बाद शायद मैं कोचिंग भी कर सकता हूं लेकिन नहीं पता कब। निकट भविष्य में
नहीं, यह तो तय है। इसके लिए समय नहीं बता सकता।

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मैदान पर करिश्माई कप्तान और मैदान के बाहर परफेक्ट जेंटलमैन थे वाडेकर

नई दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) अजित वाडेकर भले ही मंसूर अली खान पटौदी की तरह नवाबी शख्सियत के मालिक नहीं रहे हो लेकिन मध्यमवर्गीय दृढता और व्यावहारिक सोच से उन्होंने भारतीय क्रिकेट के इतिहास के सबसे सुनहरे अध्यायों में से एक लिखा।
वाडेकर ने बंबई के बल्लेबाजों के तेवर को अपने उन्मुक्त खेल से जोड़ा जिसमें दमदार पूल और दर्शनीय हुक शाट शामिल थे।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में 1971 में श्रृंखलाएं जीतना रही लेकिन उनका योगदान इससे कहीं अधिक रहा।
कल मुंबई में आखिरी सांस लेने वाले वाडेकर ने 37 टेस्ट खेले और एक ही शतक जमाया लेकिन आंकड़े उनके हुनर की बानगी नहीं देते।
दिवंगत विजय मर्चेंट ने जब उन्हें कप्तानी सौंपी तो किसी ने नहीं सोचा होगा कि वह इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में श्रृंखलाएं जीतकर इतिहास रच देंगे। उनके दौर में ही भारत में बिशन सिंह बेदी, भागवत चंद्रशेखर, ईरापल्ली प्रसन्ना और श्रीनिवासन वेंकटराघव की स्पिन चौकड़ी चरम पर थी।
वेस्टइंडीज दौरे पर सुनील गावस्कर हीरो रहे तो इंग्लैंड में चंद्रशेखर चमके।
वाडेकर उस दौर के थे जब शिक्षा को सबसे ज्यादा तरजीह दी जाती थी और यूनिवर्सिटी क्रिकेट से ही धाकड़ खिलाड़ी निकलते थे। वह इंजीनियर बनना चाहते थे लेकिन क्रिकेट के शौक ने उनकी राह बदल दी।
मुंबई के पुराने खिलाडय़िों का कहना है कि एलफिंस्टन कालेज में वह बहुत अच्छे छात्र थे और कालेज मैच में 12वां खिलाड़ी रहने पर उन्हें तीन रूपए टिफिन भत्ता मिलता था।
कालेज के प्रिंसिपल ने उन्हें क्रिकेट खेलने से मना किया क्योंकि वह विज्ञान के छात्र थे लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था।
सौरव गांगुली से पहले वह भारत के सबसे शानदार खब्बू बल्लेबाज थे।
सत्तर के दशक में रणजी ट्राफी के एक मैच के दौरान शतक जमाने के बाद उनका बल्ला टूट गया था और स्थानापन्न फील्डर गावस्कर दूसरे बल्लों के साथ मैदान पर आए। वाडेकर ने चार चौके जड़े और आउट हो गए। ड्रेसिंग रूम में आने के बाद उन्होंने पूछा कि वह बल्ला किसका था तो गावस्कर ने कहा कि उनका।
गावस्कर ने कहा , वह आपके लिए मनहूस रहा। लेकिन वाडेकर ने जवाब में कहा , लेकिन वे चार चौके पारी के सर्वश्रेष्ठ शाट थे।
वाडेकर ने 1974 के इंग्लैंड दौरे पर नाकामी के बाद कप्तानी गंवा दी। चयनकर्ताओं ने उन्हें पश्चिम क्षेत्र और मुंबई की टीमों से भी हटा दिया। वाडेकर ने क्रिकेट से संन्यास लेकर अपने बैंकिंग कैरियर पर फोकस किया।
उन्हें 90 के दशक में भारतीय टीम का मैनेजर बनाया गया और मोहम्मद अजहरूद्दीन की कप्तानी में टीम ने अगले चार साल बेहतरीन प्रदर्शन किया। सचिन तेंदुलकर से पारी की शुरूआत कराने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है।

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