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खेल (1088)

रोवर्स भगवान सिंह और रोहित कुमार लाइटवेट डबल स्क्ल्स फाइनल में

जकार्ता, 22 अगस्त (भाषा) भारतीय रोवर्स रोहित कुमार और भगवान सिंह एशियाई खेलों में आज यहां पुरूषों के लाइटवेट डबल स्कल्स के रेपेचेज राउंड में शीर्ष पर रहे।  इस भारतीय जोड़ी ने सात मिनट 12.23 सेकेंड का समय निकाला। उन्होंने मुख्य ए फाइनल के लिए क्वालीफाई किया और अब पदक के लिए अपना दावा पेश करेंगे। भगवान सिंह और रोहित कुमार हीट एक रेपेचेज में शीर्ष पर रहे थे।

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भारतीय तैराक फाइनल के लिए क्वालीफाई करने में नाकाम रहे

जकार्ता, 22 अगस्त (भाषा) भारतीय तैराक संदीप सेजवाल, सजन प्रकाश और अविनाश मणि अपनी अपनी हीट्स में शीर्ष पर रहे लेकिन इसके बावजूद वे आज यहां एशियाई खेलों की तैराकी के फाइनल्स के लिए क्वालीफाई करने में नाकाम रहे।
सेजवाल पुरूषों के 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में 62.07 सेकेंड का समय लेकर अपनी हीट में पहले स्थान पर रहे लेकिन जीबीके तैराकी केंद्र पर प्रभावशाली प्रदर्शन के बावजूद फाइनल में जगह नहीं बना सके।
इससे पहले सजन प्रकाश ने 100 मीटर बटरफ्लाई में 54.04 सेकेंड का समय निकाला जबकि अविनाश मणि ने दो तैराकों की हीट में सऊदी अरब के बु अरीश को पीछे छोड़ा। मणि ने 56.98 सेकेंड का समय लिया। लेकिन ए दोनों भारतीय तैराक फाइनल में जगह नहीं बना सके।
पुरूषों की चार गुणा 100 मीटर फ्रीस्टाइल रिले में सजन प्रकाश, वीरधवल खाड़े, अंशुल कोठारी और आरोन डिसूजा की भारतीय टीम तीन मिनट 25.17 सेकेंड के समय के साथ हीट एक में शीर्ष पर रही लेकिन इस समय के साथ फाइनल में पहुंचने की संभावना बहुत कम है क्योंकि यह गैरवरीय हीट थी।
अभी दो हीट होनी बाकी हैं जिसके बाद फाइनल में पहुंचने वाली टीमों की घोषणा होगी।

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हम भारत को कड़ी मेहनत कराना चाहते थे : बटलर

नाटिंघम, 22 अगस्त (भाषा) इंग्लैंड के बल्लेबाज जोस बटलर ने कहा कि वे नहीं चाहते थे कि भारत के लिए कुछ भी आसान हो तथा तीसरे टेस्ट मैच को पांचवें दिन तक खींचकर उन्होंने मेहमान टीम को जीत के लिए कड़ी मेहनत करवा दी।
बटलर ने 103 रन बनाए और बेन स्टोक्स के साथ पांचवें विकेट के लिए 169 रन की साझेदारी की लेकिन जसप्रीत बुमराह के 85 रन पर पांच विकेट की मदद से इंग्लैंड 521 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए नौ विकेट पर 311 रन बनाकर हार के कगार पर पहुंच गया है।
बटलर ने कहा, हमारे लिए आज अच्छा प्रदर्शन करना, कभी हार नहीं मानने के जज्बे को दिखाना औन भारत को आसानी से जीतने नहीं देना जरूरी था। उन्हें इसके लिए जितना जरूरी हो उतनी कड़ी मेहनत करवाना हमारा उद्देश्य था। हमने पूरे दिन वास्तव में ऐसा अच्छी तरह से किया। यहां तक कि दो खिलाडय़िों ने आखिर में यह सुनिश्चित किया कि मैच पांचवें दिन तक चले।
उन्होंने कहा, इससे पता चलता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों हम हार नहीं मानते।
बटलर और स्टोक्स ने बीच में भारतीयों को परेशान किया। अपना पहला टेस्ट शतक जडऩे वाले बटलर ने कहा कि उन्हें लग रहा था कि वे पूरे दिन भर बल्लेबाजी कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, लंबे समय तक बल्लेबाजी करके अच्छा लग रहा है। हम जानते थे कि (दूसरी) नई गेंद खेल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे पहले बल्लेबाजी के लिए परिस्थितियां वास्तव में अच्छी थी। यह निराशाजनक है कि मैं थोड़ा और समय क्रीज पर नहीं बिता पाया।
अपने शतक के बारे में बटलर ने कहा, लंबे समय से इसका इंतजार था तथा कुछ महीने पहले तक यह लाखों मील दूर था। यह मेरे लिए महत्वपूर्ण क्षण है। मुझे नहीं लगता कि मैं इस अहसास को कम करके आंक सकता हूं। व्यक्तिगत तौर पर मैं खुश हूं।
उन्होंने कहा, मुझे कभी पक्के तौर पर यकीन नहीं था कि मैं फिर से टेस्ट क्रिकेट खेलूंगा। आप जब टीम से बाहर होते हो या वापसी के करीब होते हो तो ऐसे विचार आपके दिमाग में तैरते रहते हैं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा होगा इसलिए मैंने प्रयास किया और इसे सुनिश्चित किया।
बुमराह के बारे में बटलर ने कहा, वह बेहद प्रतिभाशाली गेंदबाज है। सीमित ओवरों की क्रिकेट और आईपीएल में वह लाजवाब है और अब वह टेस्ट मैचों में भी ऐसा प्रदर्शन कर रहा है। उसका एक्शन खास है और इससे अच्छी तेजी हासिल करता है। वह ऐसा गेंदबाज है जो आपके सामने अलग तरह की चुनौती पेश करता है।

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कैमरे से इतर की गई कड़ी मेहनत का फायदा मिला : बुमराह

नाटिंघम, 22 अगस्त (भाषा) भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने चोट के बाद अपनी शानदार वापसी और टेस्ट क्रिकेट में दूसरी बार पांच विकेट लेने के कारनामे का श्रेय कैमरे से इतर की गई कड़ी मेहनत और फिटनेस को दिया।
बुमराह ने 85 रन देकर पांच विकेट लिए हैं जिससे इंग्लैंड की टीम तीसरे टेस्ट क्रिकेट मैच में 521 रन के मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते हुए चौथे दिन नौ विकेट पर 311 रन बनाकर हार के कगार पर पहुंच गई है।
उन्होंने कहा, जब मैंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया तो मेरा पहला स्पेल दस ओवर का था। मैं रणजी ट्राफी में हमेशा अधिक से अधिक ओवर करता रहा और जिससे मुझे मदद मिली। इसका मुझे आज भी फायदा मिला।
बुमराह ने कहा, जब मैं चोटिल था तो मैंने अपनी फिटनेस और अभ्यास पर ध्यान दिया। मैं हमेशा अपने ट्रेनर के संपर्क में रहा ताकि वापसी करने पर मैं अच्छी स्थिति में रहूं। इन सभी से मुझे आज मदद मिली।
इस तेज गेंदबाज ने दूसरी बार टेस्ट क्रिकेट में पारी में पांच विकेट लिए। इससे भारत का श्रृंखला में 0-2 की हार से उबरकर वापसी का रास्ता साफ हो गया।
बुमराह ने कहा, आपको कुछ भी आसानी से नहीं मिलता। आपको इसके लिए काम करना होता है। हमने कड़ी मेहनत की। इस कड़ी मेहनत से आपको ऐसे दिनों में सफलता मिलती है। कैमरे से इतर हम जो कड़ी मेहनत करते हैं, ऐसे दिनों में उसका नतीजा देखने को मिलता है।
इंग्लैंड का स्कोर एक समय चार विकेट पर 62 रन था। इसके बाद जोस बटलर और बेन स्टोक्स ने 169 रन की साझेदारी की।
बुमराह ने कहा, सीमित ओवरों में चीजें भिन्न होती है। वहां आप चतुराई से बल्लेबाज को छकाते हैं और यहां टेस्ट क्रिकेट में संयम और निरंतरता ही सब कुछ है। आज मेरा ध्यान इसी पर था।
उन्होंने कहा, मैं हमेशा अच्छी लेंथ से गेंदबाजी करने पर ध्यान देता हूं तथा अच्छी लेंथ से बल्लेबाज को चुनौती देता हूं। आखिर में यह दिन अच्छा रहा। मैं उसके (जो रूट) बल्ले का किनारा लेने में सफल रहा।
बुमराह ने कहा कि उन्होंने जो रूट और बटलर दोनों के साथ मुकाबले का पूरा लुत्फ उठाया और कहा कि ऐसी परिस्थितियों में गेंदबाजी करने के लिए निरंतरता जरूरी है।
उन्होंने कहा, हम आईपीएल में मुंबई इंडियन्स की तरफ से खेलते रहे हैं, इसलिए मैंने उनके (बटलर) लिए नेट्स पर थोड़ी गेंदबाजी की थी लेकिन बहुत अधिक नहीं। यह हमेशा रोमांचक मुकाबला होता है क्योंकि वह आक्रामक बल्लेबाज है। वह अपनी टीम का महत्वपूर्ण सदस्य भी है। अगर वह अच्छी शुरुआत करता है तो फिर रुकता नहीं है और मुश्किलें पैदा कर सकता है।

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भारतीय टीम करो या मरो के मुकाबले में जीत हासिल करने को बेताब

नाटिंघम, 17 अगस्त (भाषा) पहले दो टेस्ट में हार झेaलने के बाद भारतीय टीम कल से यहां इंग्लैंड के खिलाफ शुरू होने वाले करो या मरो के तीसरे टेस्ट में फतह हासिल कर वापसी करने के लिए बेताब होगी जिसके लिए वह टीम में कुछ बदलाव भी करना चाहेगी।
भारतीय टीम के लिए ट्रेंट ब्रिज में होने वाला यह टेस्ट उनके लिए सीरीज बचाने का अंतिम मौका होगा। टीम को पहले दो टेस्ट मैचों में एजेस्टन में 31 रन तथा लार्ड्स में पारी व 159 रन से हार का मुंह देखना पड़ा था।
प्रतिस्पर्धी क्रिकेट के साढ़े पांच दिन में 0-2 से पिछडऩे के बाद कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री सही टीम संयोजन बनाना चाहेंगे। इस तरह भारतीय टीम कप्तान कोहली की अगुवाई में 38 मैचों में इतनी ही बार के संयोजन में खेलेगी।
सबसे बड़ा बदलाव बीस वर्षीय रिषभ पंत के टेस्ट पदार्पण का होगा जो खराब फार्म में चल रहे दिनेश कार्तिक की जगह लेंगे जिन्होंने शायद लंबे प्रारूप में अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच खेल लिया है।
चार पारियों में शून्य, 20, एक और शून्य के स्कोर के अलावा विकेटकीपिंग में भी खराब प्रदर्शन के बाद कार्तिक पंत को कैचिंग अभ्यास कराते दिखे। पंत ने नेट में काफी समय बल्लेबाजी करने में बिताया। पंत ने इंग्लैंड लायंस के खिलाफ दो प्रथम श्रेणी मैचों में तीन अर्धशतक बनाए हैं जिसके बाद उन्होंने टीम में जगह बनाई।
रूड़की में जन्में इस युवा को जेम्स एंडरसन, स्टुअर्ट ब्राड, क्रिस वोक्स और सैम करेन जैसे गेंदबाजों का सामना करना होगा जो उनके लिए परेशानियां खड़ी करने के लिए तैयार होंगे जैसा कि वे उनके सीनियरों के लिए कर चुके हैं।
पंत के पदार्पण को लेकर जहां इतनी दिलचस्पी बनी हुई है, वहीं प्रशंसक यह भी उम्मीद कर रहे होंगे कि कप्तान कोहली बल्लेबाजी करने के लिए फिट होंगे।
पिछले मैच में स्विंग के मुफीद हालात में मिली हार के बाद भारतीय शिविर में मुख्य खिलाडय़िों की फिटनेस को लेकर आकलन जारी रहा। अच्छी खबर यह है कि जसप्रीत बुमरा फिट हो गए हैं तथा रविचंद्रन अश्विन और हार्दिक पंड्या लार्ड्स में बल्लेबाजी करते हुए लगी अपनी हाथ की चोट से पूरी तरह उबर गए हैं तथा कप्तान कोहली भी अपनी पीठ की समस्या से लगभग उबर गए हैं। कोहली की स्थिति में काफी सुधार हुआ है और उन्होंने कहा भी है कि वह जो रूट के साथ टास करने मैदान पर आएंगे।
भारत ने लार्ड्स में दो स्पिनरों को उतारने की गलती स्वीकार की थी लेकिन कोहली और कोच शास्त्री अब उचित टीम संयोजन उतारना चाहेंगे। अंतिम एकादश में कुछ बदलाव जरूरी है क्योंकि कुछ अहम खिलाडय़िों में आत्मविश्वास में कमी दिख रही है।

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एशियाई खेल डायरी: यातायात समस्या, शाहरूख और सेल्फी की दीवानगी

पालेमबांग, 17 अगस्त (भाषा) एशियाई खेलों के दौरान यातायात को लेकर इंडोनेशिया का डर सच होता दिख रहा है लेकिन वहां के लोग कल से जकार्ता और पालेमबांग में शुरु हो रहे इन खेलों के लिए पहुंचे प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत कर रहे हैं।
इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता को यातायात समस्या के लिए जाना जाता है (पिछले साल अक्तूबर में राष्ट्रपति जोको विडोडो को दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ा था)। इस मामले में दक्षिण सुमात्रा प्रांत की राजधानी पालेमबांग भी ज्यादा पीछे नहीं है।
शहर के मुख्य हिस्से से आठ किलोमीटर दूर जाकाबारिंग स्पोर्ट्स सिटी तक पहुंचने में लगभग एक घंटे का समय लगा।
यहां के सुलतान मोहम्मद बदरूद्दीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खड़े एक वालंटियर ने कहा, कई बार स्थिति इससे भी खराब हो जाती है। आप पालेमबांग की यातायात के बारे में कुछ नहीं कह सकते। यह जकार्ता की तरह खराब नहीं लेकिन स्थिति बुरी है।
शहर के होटल से जाकाबारिंग हवाईअड्डे की रेकी करने में एक घंटे से अधिक का समय लग गया। यहां की व्यस्त सड़क पर कार से ज्यादा बाइक भारतीय यातायात समस्या की तरह है।
पालेमबांग को खेलों का सह-मेजबान इसलिए चुना गया था क्योंकि यहां आधारभूत संरचना पहले से मौजूद था और मूसी नदी के किनारे बसे इस शहर ने 2011 में दक्षिण एशियाई खेलों की मेजबानी की थी।
मुख्य प्रेस सेंटर में मौजूद एक अधिकारी ने कहा, ज्यादातर लोगों को लग रहा कि हम फिर से दक्षिण एशियाई खेलों की मेजबानी कर रहे लेकिन काफी बड़े स्तर पर। वे काफी उत्सुक हैं।
आधारभूत संरचना की कमी को यहां के लोगों की मुस्कान देखकर आसानी से भूल सकते है।
यहां बोली जाने वाली भाषा हालांकि एक समस्या है लेकिन लोग बालीवुड सितारे शाहरुख खान और अमिताभ बच्चन की दीवानगी के बारे में बताने से नहीं चूकते। इस मामले में शाहरूख अपने सीनियर अभिनेता से ज्यादा लोकप्रिय है।
एक वालंटियर ने कहा, हमें भाषा समझ में नहीं आती लेकिन हम शाहरूख को पंसद करते हैं।
एक अधिकारी ने कहा, भारत बहुत बड़ा देश है और आपके यहां आने से हम काफी खुश है। हमारे लिए यह काफी बड़ा क्षण है।

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वाडेकर का निधन अपूर्णीय, निजी क्षति: तेंदुलकर

मुंबई, 17 अगस्त (भाषा) दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने आज अजित वाडेकर को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भारत के पूर्व कप्तान का निधन उनके लिए अपूर्णीय और निजी क्षति है।
भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और मैनेजर रहे वाडेकर का निधन 15 अगस्त को दक्षिण मुंबई के अस्पताल में हुआ था। वह 77 साल के थे।
तेंदुलकर ने दिवंगत आत्मा को अंतिम श्रद्घांजलि देते हुए कहा, यह अपूर्णीय क्षति है। मैं कहूंगा कि यह निजी क्षति है। लोग वाडेकर सर को महान क्रिकेटर के तौर पर जानते हैं, लेकिन मैं भाग्यशाली था कि उन्हें एक महान क्रिकेटर और एक शानदार इंसान के तौर पर करीब से देख सका। मेरे लिए वह काफी महत्वपूर्ण थे। बीते वर्षों में हमारे संबंध और मजबूत हुए थे।
तिरंगे में लिपटे वाडेकर के पार्थिव शरीर को वर्ली स्थित उनके घर पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। उनका अंतिम संस्कार आज शिवाजी पार्क में किया जाएगा।
तेंदुलकर ने इस मौके पर उनके करियर को संवारने में वाडेकर की भूमिका को याद किया।
उन्होंने कहा, मेरे जीवन में वाडेकर सर की भूमिका काफी अहम रही है, खासकर उम्र के महत्वपूर्ण पड़ाव पर। मैं 20 साल का युवा था और आसानी से भटक सकता था।
मास्टर ब्लास्टर ने कहा, कई बार मुझे अनुभवी इंसान के मार्गदर्शन की जरूरत होती थी, जो खुद इस स्तर खेला हो। उन्हें पता था खिलाडय़िों से उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कैसे लेना है। टीम के साथ उनकी मौजूदगी से मुझे निजी तौर पर काफी फायदा हुआ था।
भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर और बीसीसीआई के महाप्रबंधन (क्रिकेट संचालन) साबा करीम ने भी वाडेकर को श्रद्धांजलि दी।
करीम ने कहा, मेरी उम्र के सभी खिलाड़ी उनका अनुसरण करते थे। वह बाएं हाथ के शानदार बल्लेबाज थे। पूरी क्रिकेट समुदाय के लिए यह बड़ी क्षति है।
भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर समीर दीघे, विनोद कांबली, हाकी के पूर्व कप्तान एमएम सौमेया के अलावा एमसीए के पूर्व और मौजूदा अधिकारियों ने वाडेकर को श्रद्घांजलि दी।

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बारिश के कारण जोकोविच का मैच रूका, फेडरर भी नहीं उतर सके कोर्ट पर

सिनसिनाटी, 17 अगस्त (एएफपी) दुनिया के पूर्व नंबर एक खिलाड़ी नोवाक जोकोविच और गत चैम्पियन ग्रिगोर दिमित्रोव के बीच एटीपी-डब्ल्यूटीए सिनसिनाटी ओपन के तीसरे दौर के मैच को बारिश के कारण रोकना पड़ा।
बारिश के कारण स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर का मैच शुरू ही नहीं हो सका। तीसरे दौर में उन्हें लियोनार्डाे माएर के खिलाफ खेलना है।
सिनसिनाटी ओपन में पहली बार जीत दर्ज करने के इरादे से उतरे विम्बलडन चैम्पियन जोकोविच ने दिमित्रोव के खिलाफ पहला सेट 2-6 से गवां दिया था लेकिन उन्होंने दूसरे सेट में वापसी की और 6-3 से जीतने में सफल रहे। दूसरे सेट के बाद बारिश के कारण मैच रोकना पड़ा।
बारिश रूकने के बाद जब मैच दोबारा शुरू हुआ तो फिर से इसे रोकना पड़ा। मैच रोके जाने समय जोकोविच तीसरे सेट में 2-। से आगे थे।
जोकोविच नौ मास्टर्स 1000 टूर्नामेंट में से सिर्फ सिनसिनाटी ओपन में ही खिताब नहीं जीत सके हैं।
इससे पहले सिमोना हालेप और जुआन मार्टिन डेल पोत्रो ने खराब मौसम के कारण देर से हुए दूसरे दौर के मैच में जीत दर्ज की।
विश्व की नंबर एक महिला खिलाड़ी हालेप ने अजला तोम्लजानोविच को 4-6, 6-3, 6-3 से शिकस्त दी।
अर्जेंटीना के विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर काबिज डेल पोत्रो ने दक्षिण कोरिया के चुंग ह्योन को आसानी से 6-2, 6-3 से मात दी।
मिलोस राओनिच ने डेनिस शापोवालोव को 7-6 , 6-4 हराकर क्वार्टरफाइनल में जगह पक्की की। पाब्लो र्कोनो बुस्ता भी क्वार्टरफाइनल में पहुंचने में सफल रहे, उन्होंने नीदरलैंड के रोबिन हास को 6-4, 6-2 से हराया।
अमेरिकी ओपन की विजेता स्लोआने स्टीफेंस को महिलाओं के तीसरे दौर में हार का सामना करना पड़ा। स्लोआना को बेल्जियम की एलिसे माार्टेंस ने 7-6, 6-2 से हराया।
मैडिसन किज ने चौथी वरियता प्राप्त विम्बलडन चैम्पियन एंजेलिक कर्बर को 2-6, 7-6 , 6-4 से शिकस्त दी।

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अच्छी शुरुआत का फायदा नहीं उठा पाए मेना, पर डकार में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद

कोपियापो, 17 अगस्त (भाषा) दुनिया के सबसे दुर्गम और अपनी तरह के अनोखे अटाकामा मरूस्थल की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अच्छी शुरुआत के बावजूद अक्सर आखिरी क्षणों में पिछडऩे वाले हीरो मोटोस्पोर्टस टीम रैली के ओरियोल मेना को विश्वास है कि वह डकार रैली में अपने पहले प्रयास में ही छाप छोडऩे में सफल रहेंगे। 

साल के आखिर में होने वाली डकार रैली की तैयारियों में लगी भारतीय टीम हीरो मोटोस्पोर्टस टीम रैली के लिए अटाकामा रैली का तीसरा चरण मिश्रित सफलता वाला रहा। मेना जहां अच्छी शुरुआत का फायदा उठाने में नाकाम रहे वहीं जोकिम रोड्रिग्स तकनीकी कारणों से बीच से हट गए।
तीसरे चरण की रेस का विशेषता रेत के टीलों से गुजरना था जो कि मेना जैसे नए और कम अनुभवी ड्राइवर के लिए चुनौतीपूर्ण था। कुल 260 किमी की रेस में लगभग आधा हिस्सा रेत के टीलों से गुजरना था जिसमें आपकी गति और क्षमता की कड़ी परीक्षा होती है। मेना की अनुभवहीनता आखिर में परिणाम में भी नजर आई।
मेना रेस के शुरू में एक समय शीर्ष आठ में शामिल थे लेकिन बाद में उन्हें 13वें स्थान से संतोष करना पड़ा। वह ओवरऑल तालिका में भी इसी स्थान पर बने हुए हैं लेकिन इस स्पेनिश ड्राइवर को उम्मीद है कि यहां की गलतियों से सबक लेकर वह डकार में प्रभाव छोडऩे में सफल रहेंगे।
मेना ने भाषा से कहा, आज का चरण वास्तव में काफी तेज था और रेत के टीलों में मुझे ज्यादा तकनीकी परेशानी नहीं हुई इसलिए मैं सहज था। मैंने अच्छी शुरुआत की थी और एक समय कुछ ही राइडर मुझसे आगे थे। इससे आपको आगे के ट्रैक को समझने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा, यह मेरे लिए अच्छा अनुभव है जिसका मुझे डकार रैली में फायदा मिलेगा जो पेरू में होनी है। इससे पहले हम पेरू में ही अभ्यास रैली में हिस्सा लेंगे इसलिए मुझे वहां अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। मेरा लक्ष्य एक दिन डकार रैली में जीत दर्ज करना है।
रोड्रिग्स के लिए तीसरा चरण निराशाजनक रहा। उनकी बाइक में कुछ खराबी आ गई जिससे उन्होंने किसी तरह का जोखिम उठाना उचित नहीं समझा।
उन्होंने बाद में कहा, मैंने अच्छी शुरुआत की थी लेकिन बाइक के साथ कुछ तकनीकी मसलों के कारण मुझे बीच से हटना पड़ा। उम्मीद है कि कल ऐसा नहीं होगा और मैं बेहतर परिणाम हासिल करने में सफल रहूंगा।
पीठ की चोट के कारण लगभग छह महीने तक बाहर रहने वाले रोड्रिग्स ने हालांकि स्वीकार किया कि वह अभी पूरी तरह से फिट नहीं हैं। उन्होंने कहा, मैं अब भी पूरी तरह से फिट नहीं हूं। अभी पूरी फिटनेस हासिल करने के लिए लंबा रास्ता तय करना है।
चौथे चरण की रेस में भी बाइकर्स को 250 किमी की दूरी तय करनी है। तीसरे चरण में हसक्वरना रेसिंग के पाब्लो क्विेनटेनिला पहले स्थान पर रहे। इससे उन्होंने ओवरआल सूची में होंडा रेसिंग के केविन बेनाविडेस को भी मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया है।
भाषा पंत

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ओलंपिक खेलगांव 1984 में अचार के साथ चावल का दलिया खाने को मजबूर थी : उषा

नई दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) उडऩपरी पीटी उषा ने पुरानी यादों की परतें खोलते हुए बताया कि कैसे लास एंजीलिस ओलंपिक 1984 के दौरान उन्हें खेलगांव में खाने के लिए चावल के दलिए के साथ अचार पर निर्भर रहना पड़ा था। वह इसी ओलंपिक में एक सेकंड के सौवे हिस्से से पदक से चूक गई थी।
उषा ने कहा कि बिना पोषक आहार के खाने से उन्हें कांस्य पदक गंवाना पड़ा था।
उन्होंने कहा , इससे मेरे प्रदर्शन पर असर पड़ा और अपनी दौड़ के आखिरी 35 मीटर में मेरी ऊर्जा बनी नहीं रह सकी।
उषा 400 मीटर बाधादौड़ के फाइनल में रोमानिया की क्रिस्टियाना कोजोकारू के साथ ही तीसरे स्थान पर पहुंची थी लेकिन निर्णायक लैप में वह पीछे रह गई।
उषा ने इक्वाटोर लाइन मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा , हम दूसरे देशों के खिलाडय़िों को ईष्या के साथ देखते थे जिनके पास पूरी सुविधाएं थी। हम सोचते थे कि काश एक दिन हमें भी ऐसी ही सुविधाएं मिलेंगी।
उन्होंने कहा , मुझे याद है कि केरल में हम उस अचार को कादू मंगा अचार कहते हैं। मैं भुने हुए आलू या आधा उबला चिकन नहीं खा सकती थी। हमें किसी ने नहीं बताया था कि लास एंजीलिस में अमेरिकी खाना मिलेगा। मुझे चावल का दलिया खाना पड़ा और कोई पोषक आहार नहीं मिलता था। इससे मेरे प्रदर्शन पर असर पड़ा और आखिरी 35 मीटर में ऊर्जा का वह स्तर बरकरार नहीं रहा।
उषा ने अपने 18 साल के कैरियर में भारत के लिए कई पदक जीते और अब अपनी कोचिंग अकादमी चलाती हैं।
उन्होंने कहा कि उनका सपना किसी भारतीय धावक को ओलंपिक में पदक जीतते देखना है।
उन्होंने कहा , मेरा पूरा जीवन ही उसी लक्ष्य पर केंद्रित है। उषा स्कूल आफ एथलेटिक्स में हम उदीयमान एथलीटों को वे सुविधाएं देते हैं जो हमें नहीं मिल सकी। अभी 18 लड़कियां यहां अभ्यास कर रही है।

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