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एशियाई खेलों में कड़ी चुनौती मिलेगी, लेकिन पदक ऐसे ही नहीं मिलता : मनु भाकर

नई दिल्ली, नौ मई (भाषा) महज 16 साल की उम्र में देश के लिए राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व कप का स्वर्ण पदक जीतने वाली निशानेबाज मनु भाकर का इस साल का कार्यक्रम काफी व्यस्त है लेकिन इससे वह जरा भी परेशान नहीं है और अनुभव हासिल करने के लिए जूनियर और सीनियर स्तर के अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेना जारी रखेंगी।
मेक्सिको में हुए सत्र के पहले आईएसएसएफ विश्व कप में पदार्पण करते हुए मनु ने महिला 10 मीटर एयर पिस्टल में दो बार की चैम्पियन एलेजांद्रा जवाला को पछाड़कर स्वर्ण पदक जीता, जिससे वह विश्व कप में सोने का तमगा हासिल करने वाली युवा भारतीय निशानेबाज बन गई। इसमें उन्होंने ओम प्रकाश मिथरवाल के साथ मिलकर 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित स्पर्धा का भी स्वर्ण अपनी झोली में डाला।
हाल में उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में नया रिकार्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक अपनी झोली में डाला। अपने दो साल के निशानेबाजी करियर में मनु ने इतना शानदार प्रदर्शन कर सभी को हैरान किया है।
मनु को आज यहां डेली हाइजीन ब्रांड पीसेफ ने अपना पहला ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया, इस दौरान उन्होंने इस साल के व्यस्त कार्यक्रम के बारे में प्रेस कांफ्रेंस में कहा, अभी मैं जर्मनी में सीनियर और जूनियर विश्व कप में भाग लूंगी, इसके बाद एशियाई खेल होंगे, फिर युवा ओलंपिक खेल और फिर विश्व चैम्पियनशिप भी है।
वह साल के अंत तक केवल 18 या 20 दिन तक ही भारत में रहेंगी।
यह पूछने पर कि सीनियर स्तर पर मिली इस अपार सफलता के बाद उन्हें जूनियर के बजाय सीनियर प्रतियोगिताओं पर ही ध्यान नहीं लगाना चाहिए तो इस युवा निशानेबाज ने कहा, बिलकुल नहीं, मैं अनुभव हासिल करना चाहती हूं। देखिए जूनियर स्तर की प्रतियोगिताओं और सीनियर स्तर की प्रतियोगिताओं का स्तर काफी अलग होता है, दोनों की चुनौतियां अलग अलग होती हैं। इससे आपको अनुभव मिलता है। इससे आप टूर्नामेंट से पहले दबाव से निपटना सीखते हैं।
हालांकि वह विश्व कप में विश्व चैम्पयन निशानेबाज को हरा चुकी हैं, लेकिन 18 अगस्त से दो सितंबर तक होने वाले एशियाई खेलों की चुनौती राष्ट्रमंडल खेलों में मिली प्रतिस्पर्धा से काफी अलग होगी।
एशियाई खेलों में चुनौती को देखते हुए पूछने पर कि वह किस तरह से तैयारी कर रही हैं तो मनु ने बड़ी बेबाकी से जवाब देते हुए कहा, पदक ऐसे नहीं मिलता, आपको किसी भी प्रतिस्पर्धा में पदक लेना पड़ता है। मुझे पता है कि एशियाई खेलों में बहुत सारे मजबूत दावेदार होते हैं लेकिन मैं हर टूर्नामेंट में अपना सर्वश्रेष्ठ करती हूं। वैसे मैं मानती हूं कि जो गिर के उठते हैं, वो ही चैम्पियन होते हैं।
उन्होंने कहा, मैं अपनी ट्रेनिंग जारी रखे हूं, उम्मीद करते हैं कि मैं देश को गौरवान्वित करना जारी रखते हुए देश को पदक दिलाना जारी रखूंगी।
मनु का पूरा परिवार इस मौके पर मौजूद था। पिता रामकिशन भाकर से पूछने कि टूर्नामेंट से पहले मनु को किसी तरह का मानसिक दबाव होता है तो उन्होंने भाषा से कहा, वह किसी लक्ष्य को दिमाग में बिठाकर भाग नहीं लेती कि उसे स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक जीतना है। वह सिर्फ अपने निशाने पर ध्यान लगाती है जिससे उस पर कोई दबाव नहीं होता। वह सिर्फ अपना सर्वश्रेष्ठ करती है। वह इस बात से वाकिफ है कि जीतना और हारना तो खेल का हिस्सा है।
अपनी बेटी का कौन सा पदक उन्हें सबसे ज्यादा प्रिय है तो उन्होंने कहा, सीनियर विश्व कप में पदार्पण के दौरान मनु के स्वर्ण पदक उन्हें सबसे ज्यादा खुशी प्रदान की।

DNR Reporter

DNR desk

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