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टेक्नालजी (220)

सारदा मामले में ईडी ने नलिनी चिदंबरम को फिर तलब किया

नई दिल्ली , 18 जून (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सारदा पोंजी घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग के मामलों की जांच के सिलसिले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम को फिर समन भेजा है।
अधिकारियों ने बताया कि नलिनी को ईडी के कोलकाता कार्यालय में 20 जून को तलब किया गया है। इससे पहले उन्हें सात मई को हाजिर होने के लिए समन भेजा गया था लेकिन उन्होंने इसे मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
नलिनी पेशे से वकील है। इससे पहले उन्हों ने ईडी के समन को लेकर अपनी अपील में न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस एम सुब्रमण्यम के 24 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्होंने ईडी के समन के खिलाफ नलिनी की याचिका को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने उनकी इस दलील को नहीं माना कि किसी महिला को जांच के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 160 के तहत उसके घर से दूर नहीं बुलाया जा सकता। अदालत ने कहा कि इस तरह की छूट कोई अनिवार्य नहीं है और यह संबंधित मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
न्यायाधीश ने ईडी को नलिनी के नाम नया समन जारी जारी करने को कहा था। इसके बाद एजेंसी ने 30 अप्रैल को समन जारी कर उन्हें सात मई को उपस्थित होने को कहा।
एजेंसी ने कहा कि वह इस मामले से उनके संबंध पर धन शोधन रोधक कानून (पीएमएलए) के तहत बयान दर्ज करना चाहती है।
ईडी ने सबसे पहले नलिनी को सात सितंबर , 2016 को समन कर सारदा चिट फंड घोटाले में गवाह के रूप में कोलकाता कार्यालय में पेश होने को कहा था।
नलिनी को कथित रूप से अदालत और कंपनी विधि बोर्ड में टीवी चैनल खरीद सौदे में सारदा समूह की ओर से उपस्थिति होने के लिए 1.26 करोड़ रुपए की फीस दी गई थी।
ईडी और सीबीआई उनसे इस मामले में पहले भी पूछताछ कर चुकी हैं। एजेंसी सूत्रों ने दावा किया कि कुछ नए प्रमाण मिलने के बाद उन्हें नए सिरे से समन किया गया है।
मद्रास उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान नलिनी ने कहा था कि यह समन राजनीति से प्रेरित है जो उनकी छवि को खराब करने के लिए जारी किया गया है। उन्होंने कहा था कि किसी आरोपी का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिवक्ता द्वारा फीस ले जाती है और यह कोई अपराध नहीं है।
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में कोलकाता की विशेष पीएमएलए अदालत में 2016 में आरोपपत्र दायर किया था।

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सारदा मामले में ईडी ने नलिनी चिदंबरम को फिर तलब किया

नई दिल्ली , 18 जून (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सारदा पोंजी घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग के मामलों की जांच के सिलसिले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम को फिर समन भेजा है।
अधिकारियों ने बताया कि नलिनी को ईडी के कोलकाता कार्यालय में 20 जून को तलब किया गया है। इससे पहले उन्हें सात मई को हाजिर होने के लिए समन भेजा गया था लेकिन उन्होंने इसे मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
नलिनी पेशे से वकील है। इससे पहले उन्हों ने ईडी के समन को लेकर अपनी अपील में न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस एम सुब्रमण्यम के 24 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्होंने ईडी के समन के खिलाफ नलिनी की याचिका को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने उनकी इस दलील को नहीं माना कि किसी महिला को जांच के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 160 के तहत उसके घर से दूर नहीं बुलाया जा सकता। अदालत ने कहा कि इस तरह की छूट कोई अनिवार्य नहीं है और यह संबंधित मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
न्यायाधीश ने ईडी को नलिनी के नाम नया समन जारी जारी करने को कहा था। इसके बाद एजेंसी ने 30 अप्रैल को समन जारी कर उन्हें सात मई को उपस्थित होने को कहा।
एजेंसी ने कहा कि वह इस मामले से उनके संबंध पर धन शोधन रोधक कानून (पीएमएलए) के तहत बयान दर्ज करना चाहती है।
ईडी ने सबसे पहले नलिनी को सात सितंबर , 2016 को समन कर सारदा चिट फंड घोटाले में गवाह के रूप में कोलकाता कार्यालय में पेश होने को कहा था।
नलिनी को कथित रूप से अदालत और कंपनी विधि बोर्ड में टीवी चैनल खरीद सौदे में सारदा समूह की ओर से उपस्थिति होने के लिए 1.26 करोड़ रुपए की फीस दी गई थी।
ईडी और सीबीआई उनसे इस मामले में पहले भी पूछताछ कर चुकी हैं। एजेंसी सूत्रों ने दावा किया कि कुछ नए प्रमाण मिलने के बाद उन्हें नए सिरे से समन किया गया है।
मद्रास उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान नलिनी ने कहा था कि यह समन राजनीति से प्रेरित है जो उनकी छवि को खराब करने के लिए जारी किया गया है। उन्होंने कहा था कि किसी आरोपी का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिवक्ता द्वारा फीस ले जाती है और यह कोई अपराध नहीं है।
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में कोलकाता की विशेष पीएमएलए अदालत में 2016 में आरोपपत्र दायर किया था।

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सरकार ने निर्यातकों से कहा, अंतरराष्ट्रीय बाजार का लाभ लेने के लिए वैश्विक मानदंड अपनाएं


नई दिल्ली , 18 जून (भाषा) सरकार ने कहा है कि निर्यातकों को कड़ाई से गुणवत्ता और मानदंड के वैश्विक नियमों का कड़ाई से अनुपालन करना चाहिए , जिससे वे वैश्विक बाजारों का लाभ ले सके। सरकार का कहना है कि विशेषकर खाद्य और कृषि क्षेत्र के निर्यातकों के लिए ऐसा करना जरूरी है। यदि निर्यातक ऐसा नहीं करेंगे तो निर्यात बाजार में वे अन्य देशों के मुकाबले अपनी बाजार हिस्सेदारी गंवा देंगे।
वाणिज्य सचिव रीता तेवतिया ने वस्तुओं और सेवाओं के लिए बेहतर मानदंड अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि विनिर्माण और निर्यात को प्रोत्साहन देने की जरूरत है। साथ ही वैश्विक मूल्य श्रृंखला में घरेलू उद्योग की भागीदारी बढ़ाऩे की भी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि खाद्य और कृषि क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों को अनुपालन मुद्दों की वजह से निरंतर व्यापार बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा यहां आयोजित राष्ट्रीय मानक सम्मेलन को संबोधित करते हुए तेवतिया ने कहा , अमेरिका , यूरोपीय संघ और जापान जैसे बाजारों में ऐसी स्थिति है। अगर भारतीय उत्पादक पेड़ पौधों और पशुओं से संबंधित साफ सफाई के अनिवार्य मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं तो निर्यात बाजार में अन्य देशों के मुकाबले वे अपनी बाजार हिस्सेदारी गंवा देंगे।
उन्होंने कहा कि साफ सफाई तथा पौधों के स्वास्थ्य से संबंधित उपायों को लागू करना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत को इन देशों से कई अलर्ट मिल चुके हैं।
वाणिज्य सचिव ने कहा , कृषि मंत्रालय , स्वास्थ्य मंत्रालय और एफएसएसएआई , निर्यात निरीक्षण परिषद , एपीडा और एमपीडा जैसी एजेंसियों इन अलर्ट पर समुचित प्रतिक्रिया के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय मानकीकरण रणनीति (आईएनएसएस) कल जारी की जाएगी। तेवतिया ने उद्योग से कहा कि वह इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव दे।

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भारत 2025 तक 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में कर रहा काम: कोविंद

एथेंस , 18 जून (भाषा) राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि भारत और यूनान के बीच बुनियादी ढांचे , आपूर्ति श्रृंखला , ऊर्जा और सेवा जैसे क्षेत्र में मिलकर काम करने की बहुत संभावनाएं हैं।
साथ ही उन्होंने देश में निवेश के अवसर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत 2025 तक 5000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार बनाने की कोशिश कर रहा है।
कोविंद 11 वर्षों में यूनान की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। वह तीन देशों की अपनी यात्री के पहले पड़ाव में शनिवार को यहां पहुंचे।
प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा से भारत और यूनान के बीच संबंध मजूबत होंगे।
कोविंद ने द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए विदेशों में रह रहे भारतीयों की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।
राष्ट्रपति ने कहा , ै यूनान और भारत ने प्राचीन दुनिया में सभ्यता और संस्कृति के आदर्श प्रस्तुत किए हैं। दोनों देशों के संबंध बहुत ही पुराने और गहरे हैं। यूनान इतिहासकार मेगस्थनीज ने अपनी किताब इंडिका के माध्यम से भारत को दुनिया के सामने पेश किया। यूनानी योद्धा सेल्युकस की बेटी ने राजा चंद्रगुप्त से विवाह किया। हम भारत और यूनान के संबंधों के बारे में इतिहास की किताबों से जान सकते हैं। ै
उन्होंने कहा कि भारत को 2025 तक 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यस्था और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। विश्वबैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार , हमारी आर्थिक वृद्धि दर तेज हो रही है।
वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था 2500 अरब डॉलर की होने का अनुमान है।
कोविंद ने कहा कि लोकतंत्र , युवा आबादी और मांग के लिहाज से भारत दुनियाभर में मजबूत स्थिति में है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचे , आपूर्ति श्रृंखला , हस्तशिल्प , ऊर्जा और सेवा जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने की बहुत संभावनाएं हैं क्योंकि भारत इन क्षेत्रों में सुधार और विस्तार की कोशिश कर रहा है।

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एयू बैंक तेमासेक से 1,000 करोड़ रुपए जुटाएगा

नई दिल्ली , 18 जून (भाषा) एयू स्माल फाइनेंस बैंक को सिंगापुर की निवेश कंपनी तेमासेक से।,000 करोड़ रुपए जुटाने की शेयरधारकों से मंजूरी मिल गई है।
बैंक ने कारोबार को गति देने के इरादे से पूंजी जुटाने का फैसला किया है।
एयू स्माल फाइनेंस बैंक ने एक बयान में कहा कि बैंक में यह अब तक का सबसे बड़ा निजी पूंजी निवेश होगा। साथ ही वर्ष 2011-12 के बाद पहली बार बैंक पूंजी जुटा रहा है।
एयू बैंक के शेयरधारकों में आईएफसी , वारबर्ग पिनकुस , क्राइस कैपिटल तथा केदारा कैपिटल है।

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चुनावी साल होने के बावजूद राजकोषीय घाटे का 3.3 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा: गोयल

नई दिल्ली , 18 जून (भाषा) वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि चुनावी वर्ष होने के बावजूद सरकार चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को 3.3 प्रतिशत तक सीमित रखने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। गोयल ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। 

चालू वित्त वर्ष (2018-19) के बजट में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.3 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए खर्च में कटौती नहीं की जाएगी क्योंकि योजनागत व्यय के लिए सरकार के पास पर्याप्त वैकल्पिक संसाधन है।
वर्ष 2017-18 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.53 प्रतिशत था , जो कि सरकार के संशोधित अनुमान के अनुरूप ही रहा।
वित्त मंत्री ने कहा , ै इस वर्ष राजकोषीय घाटा गिरकर 3.3 प्रतिशत पर आ जाएगा और मैं यह भरोसा दिलाता हूं कि चुनावी वर्ष होने के बावजूद हम राजकोषीय घाटे को 3.3 प्रतिशत तक सीमित रखने के लक्ष्य को हासिल करेंगे। हम इस पर नजर रख रहे हैं और काम कर रहे हैं। ै
गोयल ने लोगों से 2013-14 हो चाहे 2007-08 या 2008-09 हो, उस के इतिहास को देखने का आग्रह किया। जब राजनीतिक मजबूरियों के चलते राजकोषीय घाटे , वृहद आर्थिक स्थिरता , सुशासन को नजरअंदाज किया गया।
सरकार ने इस साल फरवरी में पेश बजट में 2017-18 के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को संशोधित कर 3.5 प्रतिशत कर दिया था जो कि बजट अनुमान में 3.2 प्रतिशत रखा गया था। वर्ष के दौरान राजस्व घाटा जीडीपी के 2.65 प्रतिशत के बराबर रहा। वास्तविक आंकड़ों में राजकोषीय घाटा 5.91 लाख करोड़ रुपए रहा। यह राशि बजट अनुमान का 99.5 प्रतिशत रही।
गोयल ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीसीआई) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था की मजबूती बनाए रखेगी और हम सरकार द्वारा तय सभी आर्थिक मानकों को पूरा करेंगे।
यह पूछे जाने पर कि क्या कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का राजकोषीय घाटे पर असर पड़ेगा। इस वित्त मंत्री ने कहा कि यह सरकार अर्थव्यवस्था और कीमतों के प्रबंधन में बहुत जिम्मेदार है। हमने इस पर काम किया है और तेल की बढ़ी कीमतों का क्या प्रभाव पड़ेगा इसका अनुमान लगाया है। कुछ अनुमान बजट से पहले लगाया गया था और कुछ अब लगाया गया है।
पेट्रोलियम उत्पादों की जीएसटी के दायरे में लाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वास्तव में यह निर्णय जीएसटी परिषद को लेना है क्योंकि इस मामले में फैसला लेने का अधिकार अकेले केन्द्र सरकार का नहीं है।

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चार में से एक भारतीय होता है आनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार : रिपोर्ट

मुंबई , 18 जून (भाषा) भारतीय अब डिजिटल रूप से अधिक सक्रिय होते जो रहे हैं और इसके साथ ही उनके साथ वित्तीय धोखाधड़ी का जोखिम भी बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चार में से एक भारतीय ग्राहक आनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार बनता है।
वैश्विक वित्तीय सूचना कंपनी एक्सपेरियन की रिपोर्ट में कहा गया है कि 24 प्रतिशत भारतीय आनलाइन लेनदेन में सीधे धोखाधड़ी का शिकार बने हैं। दूरसंचार क्षेत्र को सबसे अधिक 57 प्रतिशत आनलाइन धोखाधड़ी का सामना करना पड़ता है। इसके बाद बैंक (54 प्रतिशत) और रिटेलर्स (46 प्रतिशत) का नंबर आता है।
इसके अलावा भारतीय बैंकों के साथ डेटा साझा करने में अधिक संतोषजनक स्थिति महसूस करते हैं। 50 भारतीय बैंकों के साथ डेटा साझा करते हैं। वहीं ब्रांडेड रिटेलर्स के साथ 30 प्रतिशत ही डेटा साझा करते हैं।
औसतन डिजिटल लेनदेन करने वाले 65 प्रतिशत लोगों ने मोबाइल के जरिए भुगतान का विकल्प चुना है क्योंकि उन्हें यह सुविधाजनक लगता है।
भारत में सिर्फ छह प्रतिशत ग्राहक अपने साझा किए गए डेटा को लेकर सुरक्षा या सतर्कता बरतते हैं। जापान में यह आंकड़ा सबसे ऊंचा आठ प्रतिशत का है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 51 प्रतिशत भारतीय विभिन्न सेवाओं के लिए अपने निजी डेटा को साझा करने में हिचकते नहीं हैं। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि इलेक्ट्रानिक्स और यात्रा मार्केटिंग कंपनियां उपभोक्ताओं के डेटा बनाती हैं और उनके जरिए लेनदेन बढ़ता है। लेकिन इन क्षेत्रों में आनलाइन धोखाधड़ी का जोखिम सबसे अधिक होता है।
एशिया प्रशांत में भारत में डिजिटल उपभोग सबसे अधिक है। अध्ययन में शामिल 90 प्रतिशत लोग डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।
दिलचस्प तथ्य यह है कि जनांकिक आधार पर गड़बड़ी वाले डेटा साझा करने के मामले में 70 प्रतिशत के साथ भारत चौथे स्थान पर है। यह रिपोर्ट सलाहकार कंपनी आईडीसी के साथ मिलकर तैयार की गई है। यह आनलाइन सर्वे 10 एपीएसी बाजारों .... आस्ट्रेलिया , चीन , हांगकांग , भारत , इंडोनेशिया , जापान , न्यूजीलैंड , सिंगापुर , थाइलैंड और वियतनाम के उपभोक्ताओं की राय पर आधारित है।

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यस बैंक को प्रतिभूति कस्टोडियन कारोबार के लिए मंजूरी मिली

नई दिल्ली , 18 जून (भाषा) निजी क्षेत्र के यस बैंक ने आज कहा कि भारतीय प्रतिभूति व विनिमय बोर्ड (सेबी) से उसे प्रतिभूतियों के कस्टोडियन के रूप में काम करने की मंजूरी मिल गई है।
सेबी विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) तथा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) सहित वित्त बाजार के अन्य भागीदारों को कस्टोडियल सेवाओं की पेशकश के लिए पात्र इकाइयों को कस्टोडियल आफ सिक्युरिटीज लाइसेंस जारी करता है।
यस बैंक के बयान में कहा गया है कि इससे उसकी मौजूदा पूंजी बाजार पेशकश पूरक होंगी तथा वह घरेलू व विदेशी निवेश को भारतीय वित्तीय बाजारों में लाने में मदद कर सकेगा।
इसके अनुसार बैंक अपनी पूंजी बाजार टीम के जरिए 25 से अधिक एफपीआई को पहले ही बैंकिंग सेवाएं दे रहा है। बैंक लंदन व सिंगापुर में प्रतिनिधि कार्यालय भी खोल रहा है।

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कमजोर वैश्विक रुख के बीच शेयर बाजारों में नरमी


मुंबई , 18 जून (भाषा) अमेरिका व चीन के बीच व्यापार शुल्क दरों को लेकर बढ़ते तनाव के बीच बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स आज लगभग 74 अंक टूटकर 35,548.26 अंक पर बंद हुआ।
तीस शेयर आधारित सेंसेक्स सुबह 35,698.43 अंक पर सुधरकर खुला। कारोबार के दौरान यह 35,721.55 अंक तक चढ़ा हालांकि बाद में बिकवाली दबाव से 35,518.73 अंक तक गिर गया था।
सेंसेक्स अंतत : 73.88 अंक की गिरावट दिखाता हुआ 35,548.26 अंक पर बंद हुआ।
शुक्रवार को सेंसेक्स 22.32 अंक चढ़कर बंद हुआ था।
इसी तरह एनएसई का निफ्टी 17.85 अंक टूटकर 10,800 अंक से नीचे आ गया और 10,799.85 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 10,830.20 और 10,787.35 अंक के दायरे में रहा।

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एलएंडटी ने तटरक्षक बल को 40वीं नौका की आपूर्ति की

चेन्नई , 18 जून (भाषा) इंजीनियरिंग एवं निर्माण क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने भारतीय तटरक्षक बल को 40 वीं निगरानी नौका की आपूर्ति की है , जिसे हाल ही में यहां बेड़े में शामिल किया गया।
कंपनी ने बयान में कहा कि यह एलएंडटी द्वारा निर्मित की जाने वाली कुल 54 निगरानी नौकाओं की श्रृंख्ला की 40 वीं नौका है। तटरक्षक क्षेत्र , कमांडर (पूर्व) राजन बरगोत्रा ने हाल में एक कार्यक्रम के दौरान इसे औपचारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल किया।
निगरानी नौका का उपयोग तट सुरक्षा को मजबूत करने , घुसपैठ को रोकने के लिए गश्त बढ़ाने , तस्करी तथा गैर - कानूनी रूप से मछली पकडऩे को रोकने में किया जाएगा।

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