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टेक्नालजी (484)

शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 13 पैसे चढ़ा

मुंबई , दो जुलाई (भाषा) घरेलू शेयर बाजार में शुरुआती बढ़त के बीच बैंकों एवं निर्यातकों की अमेरिकी मुद्रा की बिकवाली से रुपया आज शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले 13 पैसे मजबूत होकर 68.33 रुपए प्रति डॉलर पर पहुंच गया।
मुद्रा डीलरों ने कहा कि घरेलू शेयर बाजार की शुरुआती बढ़त से रुपए को समर्थन मिला। हालांकि , अन्य प्रमुख विदेशी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में मजबूती ने तेजी को सीमित करने का प्रयास किया।

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सेबी अपनी निगरानी प्रणाली के रख-रखाव के लिए नियुक्त करेगा आईटी कंपनी

नई दिल्ली , एक जुलाई (भाषा) बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) अपनी एकीकृत बाजार निगरानी प्रणाली (आईएमएसएस) और आंकड़ा भंडारण आसूचना प्रणाली (डीडब्ल्यूबीआईएस) के रख - रखाव तथा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवाएं प्रदान करने के लिए एक प्रौद्योगिकी कंपनी को नियुक्त करने पर विचार कर रहा है। नियामक ने आईएमएसएस ा डीडब्ल्यूबीआईएस परियोजना के सालाना रख - रखाव अनुबंध तथा आईटी सेवाओं के लिए स्वतंत्र एजेंसियों से निविदाएं मंगाई हैं। नियामक ने एक अधिसूचना में कहा कि सफल बोलीकर्ता को तीन साल के लिए समग्र रख - रखाव सेवा तथा आईएमएसएस और डीडब्ल्यूबीआईएस प्रणालियों के प्रबंधन के लिए तीन साल तक इंजीनियर उपलब्ध कराने होंगे। सेबी ने कहा कि बोलीकर्ता के पास आईटी क्षेत्र में परिचालन का 10 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। इसके अलावा कंपनी की कुल आय पिछले लगातार तीन वित्त वर्षों में कम से कम 100 करोड़ रुपए तथा 2000 से अधिक कर्मचारी होने चाहिए। सेबी ने इच्छुक एजेंसियों को 25 जुलाई तक प्रस्ताव रखने को कहा है। सफल बोलीकर्ता का ऐलान 30 अगस्त को किया जाएगा।

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आर्थिक आंकड़ों के संकलन संबंधी नियमों में बदलाव के लिए समिति गठित

दिल्ली , एक जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय खाते तथा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना के लिए आधार वर्ष में बदलाव की योजना के मद्देनजर राज्यों व जिला स्तर पर आर्थिक आंकड़ों के संकलन संबंधी नियमों के उन्नयन के लिए सरकार ने 13 सदस्ईय समिति गठित की है। इस समिति की अध्यक्षता आईआईएम अहमदाबाद के सेवानिवृत्त प्रोफेसर रविंद्र एच . ढोलकिया करेंगे। समिति को राज्य घरेलू उत्पाद (एसडीपी) व जिला घरेलू उत्पाद (डीडीपी) तैयार करने के लिए जरूरी आंकड़े तथाा उनके स्रोत , आंकड़ों से संबंधित संधियां , वर्गीकरण , परिभाषाएं और सकंल्पनाओं की समीक्षा करने तथा संशोधित दिशानिर्देश बताने के लिए कहा गया है। समिति की नियम - शर्तों के मुताबिक समिति राष्ट्रीय खाता प्रणाली की जरूरतों विशेषकर आधार वर्ष में संशोधन को ध्यान में रखते हुए राज्य स्तरीय वार्षिक सर्वेक्षण का सुझाव देंगे। अधिसूचना में कहा गया कि समिति एक साल के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। समिति जरूरत पडऩे पर अंतरिम रिपोर्ट भी पेश कर सकती है।

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इस साल 13 लाख करोड़ रुपए के पार जा सकता है जीएसटी संग्रहण: गोयल

नई दिल्ली , एक जुलाई (भाषा) वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने आज विश्वास व्यक्त किया कि चालू वित्त वर्ष में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह 13 लाख करोड़ रुपए को पार कर जाएगा और राजस्व प्राप्ति बढऩे के साथ ही कर दरों को ज्यादा तर्कसंगत बनाने की गुंजाइश बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि कर दायरे में अधिक लोगों के जुडऩे और ई-वे बिल के सफल क्रियान्वयन से कर की दरों को तार्किक बनाने का अवसर मिलेगा। देश में एक जुलाई 2017 से शुरू की गई जीएसटी व्यवस्था के तहत चार मुख्य दरें रखीं गईं हैं। इसमें पांच प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत की दर से विभिन्न वस्तुओं पर कर लगाया जाता है। सबसे ऊंची 28 प्रतिशत की दर के ऊपर विलासिता के सामान और सिगरेट, तंबाकू जैसी अहितकर वस्तुओं पर उपकर भी लगाया जाता है।
गोयल ने यहां जीएसटी - दिवस समारोह में कहा , मेरा विश्वास है कि मासिक जीएसटी संग्रह 1.10 लाख करोड़ रुपए को पार कर जाएगा और मुझे लगता है कि इस वित्त वर्ष (2018- 19) में जीएसटी से 13 लाख करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त होगा।
जीएसटी व्यवस्था लागू होने के पहले साल 2017- 18 में सरकार को कुल 7.41 लाख करोड़ रुपए की राजस्व प्राप्ति हुई। इस लिहाज से जुलाई से लेकर मार्च तक के नौ माह में औसत जीएसटी प्राप्ति 89,885 करोड़ रुपए रही। इस वित्त वर्ष में अप्रैल में जीएसटी संग्रह 1.03 लाख करोड़ रुपए के रिकार्डस्तर पर पहुंच गया, इसके बाद मई में यह 94,106 करोड रुपए और जून में 95,610 करोड़ रुपए रहा।
गोयल ने कहा कि अप्रैल से जून तक के तीन महीनों में कर संग्रह ऐतिहासिक रूप से कम रहता आया है। पहले की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में इन तीन महीनों के दौरान कुल कर संग्रह का 7.1 प्रतिशत ही कर संग्रह हुआ करता था। अत : मई-जून में 94-95 हजार करोड़ रुपए का कर संग्रह सुनने में अच्छा लग रहा है।
गोयल ने कहा , ईमानदार एवं पारदर्शी कर व्यवस्था में अधिक लोगों के जुड़ते जाने और ई - वे बिल प्रणाली की सफलता से हम कर की दरों को तार्किक बनाने की बेहतर स्थिति में होंगे। देश के सामाजिक ढांचे को ध्यान में रखते हुए कर की विभिन्न दरें रखीं गई। क्या यह उचित होगा कि लग्जरी कारों और गरीब लोगों के आम इस्तेमाल की चीजों पर बराबर कर लगे ?
मंत्री ने वित्त सचिव हसमुख अधिया को इस बात का विकल्प तलाशने को कहा कि क्या कंपोजिशन स्कीम के तहत आने वाले कारोबारी सालाना रिटर्न दायर कर सकते हैं। अभी इन्हें तिमाही आधार पर रिटर्न दायर करनी होती है।
छोटे और मध्यम दर्जे के उद्यमी जीएसटी के तहत एकमुश्त कर भुगतान की कंपोजीशन स्कीम को अपना सकते हैं। इसमें व्यापारियों और विनिर्माताओं के लिए एक प्रतिशत कर की दर है जबकि रेस्त्रां आदि के लिए पांच प्रतिशत की एकमुश्त दर रखी गई है। जीएसटी परिषद ने पिछले साल ही कंपोजीशन स्कीम के तहत आने वाले व्यवासायियों के लिए कारोबार सीमा को 1.5 करोड़ रुपए कर दिया था। इसके साथ ही कानून में संशोधन कर सांविधिक सीमा को दो करोड़ रुपए करने का भी फैसला किय।
उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय जल्दी ही एक ऐसी प्रणाली बनाएगा जहां कारोबारी हर महीने जीएसटी से संबंधित समस्याओं पर राजस्व अधिकारी से बातें कर सकेंगे।
वित्त राज्य मंत्री शिवप्रताप शुक्ला ने इस अवसर पर कहा कि अब छोटे व्यापारी भी कर प्रणाली से जुड़ रहे हैं और कर का भुगतान कर रहे हैं। शुरू में जीएसटी को लेकर काफी संशय था लेकिन अब इसकी सराहना हो रही है। जीएसटी दर के बारे में उन्होंने कहा कि जीएसटी की 28 प्रतिशत की सबसे ऊंची दर में अब केवल 49 वस्तुएं ही रह गई हैं जबकि करीब 141 वस्तुओं पर कोई कर नहीं लग रहा है।

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एफपीआई निकासी 10 साल के उच्च स्तर पर

दिल्ली , एक जुलाई (भाषा) विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय पूंजी बाजारों से धन की निकासी का क्रम जारी है। इस साल की पहली छमाही में पूंजी बाजारों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की निकासी करीब 48,000 करोड़ रुपए पर पहुंच गई है। यह पिछले 10 साल का उच्च स्तर है। डिपॉजिटरीज के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार जनवरी से जून की अवधि के बीच एफपीआई ने ऋण बाजार से 41,433 करोड़ रुपए और शेयर बाजार से 6,430 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की है। इस प्रकार कुल निकासी 47,836 करोड़ रुपए रही।
यह जनवरी - जून 2008 के बाद अब तक की सबसे बड़ी निकासी है। उस दौरान ऋण और शेयर बाजार से कुल 24,758 करोड़ रुपए की निकासी की गई थी। हालांकि वर्तमान निकासी पूरे 2008 में हुई 41,216 करोड़ रुपए की निकासी से बहुत अधिक है। गौरतलब है कि 2008 में दुनिया में आर्थिक संकट छाया था।

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सात शीर्ष कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 47,527 करोड़ रुपए बढ़ा

दिल्ली , एक जुलाई (भाषा) बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की दस शीर्ष कंपनियों में से सात का बाजार पूंजीकरण पिछले सप्ताह कुल मिलाकर 47,527.32 करोड़ रुपए बढ़ा। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियां टीसीएस और इंफोसिस फायदे में रहने वाली कंपनियों में अग्रणी रहीं। आलोच्य सप्ताह के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड , मारुति सुजुकी इंडिया और भारतीय स्टेट बैंक को बाजार पूंजीकरण में नुकसान उठाना पड़ा। टीसीएस का बाजार पूंजीकरण सर्वाधिक 13,553.16 करोड़ रुपए बढ़कर 7,07,214.41 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इंफोसिस का बाजार पूंजीकरण 13,170.20 करोड़ रुपए बढ़कर 2,85,410.81 करोड़ रुपए हो गया। हिंदुस्तान यूनिलिवर लिमिटेड का बाजार पूंजीकरण भी 7,424.69 करोड़ रुपए बढ़कर 3,55,400.40 करोड़ रुपए , एचडीएफसी बैंक का बाजार पूंजीकरण भी 7,014.58 करोड़ रुपए बढ़कर 5,48,969.50 करोड़ रुपए , कोटक महिंद्रा बैंक का बाजार पूंजीकरण भी 4,107.53 करोड़ रुपए बढ़कर 2,55,753.14 करोड़ रुपए , एचडीएफसी का बाजार पूंजीकरण भी।,158.68 करोड़ रुपए बढ़कर 3,20,813.23 करोड़ रुपए और आईटीसी का बाजार पूंजीकरण भी।,098.39 करोड़ रुपए बढ़कर 3,55,400.40 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इसके विपरीत रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण 24,881.06 करोड़ रुपए कम होकर 6,16,499.94 करोड़ रुपए रहा। भारतीय स्टेट बैंक का बाजार पूंजीकरण 12,449.80 करोड़ रुपए कम होकर 2,31,414.55 करोड़ रुपए और मारुति सुजुकी का बाजार पूंजीकरण 2,069.25 करोड़ रुपए कम होकर 2,66,470.86 करोड़ रुपए पर आ गया।
शीर्ष 10 कंपनियों में टीसीएस पहले स्थान पर बनी रही। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज , एचडीएफसी बैंक , हिंदुस्तान यूनिलीवर , आईटीसी , एचडीएफसी , इंफोसिस , मारुति सुजुकी , कोटक महिंद्रा बैंक और भारतीय स्टेट बैंक का स्थान रहा।
आलोच्य सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 266.12 अंक यानी 0.75 प्रतिशत घटकर 35,423.48 अंक पर बंद रहा।

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भारतीय अर्थव्यवस्था 2025 तक 5,000 अरब डॉलर को छू लेगी : कोविंद

नई दिल्ली , एक जुलाई (भाषा) राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेज वृद्धि के लिए तैयार है और देश का का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2025 तक दोगुना होकर 5,000 अरब डॉलर के आंकड़े को छू लेने की संभावना है।
वह यहां भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) के प्लेटिनम जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे।
कोविंद ने कहा , अगले दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था नई उड़ान भरने को तैयार है और 2025 तक देश की जीडीपी का आकार दोगुना होकर पांच अरब डॉलर होने की उम्मीद है।
कोविंद ने चार्टड अकाउंटेंटों को जनहित का प्रहरी बताया। उन्होंने कहा कि देश की कर प्रणाली और कर दाताओं को सूविधा देने में चार्टड अकाउंटेंटों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने निष्पक्ष कर प्रणाली के अनुपालन पर जोर देते हुए कहा कि इसका आशय सरकार को राजस्व देने से कहीं अधिक है।
कारपोरेट मामलों के राज्य मंत्री पी . पी . चौधरी भी इस माकै पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि सरकार की काले धन के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी और इस क्रम में अब तक 2.25 लाख संदिग्ध मुखौटा कंपनियों की पहचान की गई है।
दूरसंचार राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने भी इस अवसर पर अपनी बात रखी।

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धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 200 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ा सकती है सरकार

नई दिल्ली , एक जुलाई (भाषा) सरकार 2019 के आम चुनाव से पहले किसानों को लुभाने के लिए खरीफ फसल में लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 200 रुपए बढ़ाकर।,750 रुपए प्रति क्विंटल कर सकती है। सूत्रों ने यह जानकारी दी है।
उन्होंने कहा कि 13 अन्य खरीफ फसलों के एमएसपी में भी अच्छी वृद्धि किए जाने का अनुमान है।
इस संबंध में इस सप्ताह में निर्णय लिए जाने का अनुमान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि मंत्रिमंडल आगामी बैठक में खरीफ फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य उसके उत्पादन खर्च का कम - से - कम डेढ़ गुना तक बढ़ाने को मंजूरी देगी।
सूत्रों के अनुसार , सरकार ने खरीफ फसलों के एमएसपी की घोषणा में देरी की है क्योंकि वह इस तरह के बड़े राजनीतिक फैसलों का बजट पर पडऩे वाले बोझ को लेकर आकलन कर रही थी।
कृषि मंत्रालय ने खरीफ फसलों के लिए ऊंचे एमएसपी का प्रस्ताव किया है। मंत्रालय ने सरकार की सलाहकार संस्था सीएसीपी की सिफारिश के मुकाबले ऊंची दर का प्रस्ताव किया है। बंपर कृषि उत्पादन के बाद ज्यादातर कृषि उपज के दम घटने से किसानों के असंतोष को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने यह प्रस्ताव किया।
सरकार ने इस साल बजट में कहा था कि वह फसलों का एमएसपी लागत का कम - से - कम डेढ़ गुना करेगी। 2014 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का प्रमुख चुनावी वायदा भी था।
सामान्यत : एमएसपी की घोषणा फसलों की बुवाई से ठीक पहले की जाती है।

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जीएसटी एक साल: आभूषण निर्माताओं को बाकी मुद्दों के भी जल्द समाधान की उम्मीद

मुंबई , एक जुलाई (भाषा) रत्न एवं आभूषण उद्योग को माल एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू होने की पहली वर्षगांठ के बाद अब बाकी बचे मुद्दों के समाधान की भी उम्मीद है जिसमें निर्यात के लिए आयात किए जाने वाले सोने पर तीन प्रतिशत जीएसटी का मुद्दा भी शामिल है।
रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्द्धन परिषद के उपाध्यक्ष कॉलिन शाह ने पीटीआई - भाषा से कहा , कुल मिलाकर रत्न एवं आभूषण निर्यात उद्योग के लिए जीएसटी बढय़िा रहा है। हालांकि शुरुआती समय में इसमें कुछ दिक्कतें आई हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ समय बाद यह दिक्कतें सुलझ गईं। पहले हमें सीमाशुल्क , वैट और चुंगी कर देना होता था लेकिन अब केवल एक जीएसटी देना होता है। यह आसान है और इसमें कागजी कार्वाई भी कम करनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि अब 0.25ञ् जीएसटी दर के साथ यह हीरा क्षेत्र के लिए भी अच्छा है। अब केवल एक ही मुद्दा बचा है और वह है निर्यात के लिए सोने का आयात।
शाह ने कहा कि यह प्रक्रिया थोड़ी जटिल है जहां बैंक तीन प्रतिशत जीएसटी लेते हैं। इसके लिए हमें बाद में इनपुट क्रेडिट की वापसी होती है। लेकिन इसे आसान बनाने के लिए हम चाहते हैं कि इस प्रक्रिया को जीएसटी से मुक्त कर दिया जाए। अब तक सरकार ने इस कारोबार को काफी समर्थन दिया है और हमारे सभी मुद्दों को सुलझाया है, हमें आश्वस्त किया गया है कि यह मुद्दा भी सुलझा लिया जाएगा।
विश्व स्वर्ण परिषद, भारत के प्रबंध निदेशक सोमासुंदरम पीआर ने कहा कि भारत में 1990 में आर्थिक उदारीकरण शुरू होने के बाद से जीएसटी सबसे प्रमुख वित्तीय सुधार है जिसे लागू किया गया।

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सहारा को विश्वास अगले वित्त वर्ष तक वित्तीय संकट से बाहर निकल आएगा समूह

नई दिल्ली , एक जुलाई (भाषा) कानूनी विवाद में फंसे सहारा समूह ने दावा किया है कि वह लंबे समय से चल रहे वित्तीय संकट से अगले वित्त वर्ष तक बाहर निकल आएगा। समूह ने कहा है कि वह कई नए क्षेत्रों में व्यावसाय शुरू कर एक बार फिर से प्रमुख भारतीय उद्योग समूह का दर्जा हासिल कर लेगा। सहारा समूह ने अपनी वित्तीय स्थिति पर समाचार पत्रों में जारी एक विस्तृत विज्ञापन के माध्यम से कहा है कि उसने पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि जमा करा दी है। समूह ने कहा कि इस राशि पर मिलने वाला ब्याज भी नियामक के पास बिना किसी इस्तेमाल के पड़ा हुआ है जबकि पिछले पांच वर्षों में इसमें से निवेशकों को महज 91 करोड़ रुपए ही दिए गए। इसकी वजह यह भी हो सकती है कि कंपनी पहले ही अपने ज्यादातर निवेशकों को भुगतान कर चुकी है। समूह ने कहा है , उसे भरोसा है कि निवेशकों के पुनर्भुगतान से संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद सेबी - सहारा खाते में पड़ा पैसा उसे वापस मिल जाएगा। सहारा ने कहा कि उसे अपने उज्ज्वल एवं समृद्ध भविष्य को लेकर पूरा भरोसा है। समूह का कहना है उसपर किसी भी तरीके से राशि जुटाने पर प्रतिबंध लगा है। उसकी संपत्तियों की बिक्री से मिलने वाला धन सीधे सेबी- सहारा खाते में चला जाता है। इसमें से एक भी रूपया समूह की जरूरतों के लिए इस्तेमाल में नहीं लाया जा सका। इस रोक की वजह से समूह ने कई हजारों करोड़ रुपए कमाने के कारोबारी अवसर गंवाए हैं।
समूह का कहना है कि उसके नकदी प्रवाह को 15 हजार करोड़ रुपए का नुकसान सहना पड़ा क्योंकि उसे 2012 में महज पांच - छह महीने के भीतर ही निवेशकों को करीब 22 हजार करोड़ रुपए वापस करने पड़े। हालांकि, मूल वित्तीय योजनाओं के मुताबिक इसका 16-17 साल में छोटी छोटी राशियों में भुगतान किया जाना था।
हालांकि, समूह ने इस बात को लेकर भरोसा जाहिर किया कि वह 2019-20 तक एक बार फिर भारत का प्रमुख उद्योग समूह बन जाएगा क्योंकि उसकी संपत्ति अभी भी उसकी कुल देनदारियों के मुकाबले तीन गुना है।
समूह द्वारा किए जा रहे दावे के बारे में पूछे जाने पर सहारा समूह प्रवक्ता ने पीटीआई - भाषा से कहा कि 31 दिसंबर 2014 को कंपनी की देनदारी 62,104 करोड़ रुपए और उसकी संपत्ति।,77,229 करोड़ रुपए थी। आज भी इन आंकड़ों के अनुपात ज्यादा कुछ नहीं बदला है।
यह पूछे जाने पर कि समूह 2019- 20 तक किस प्रकार से वित्तीय समस्याओं से बाहर निकल आएगा, प्रवक्ता ने कहा , सहारा को इस बात का भरोसा है कि सेबी को जल्दी ही सहारा के निवेशकों से संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन का निर्देश दिया जाएगा। ए दस्तावेज पहले ही सेबी के पास हैं।
सहारा समूह का कहना है कि उसने 2012 में ही वह सब दस्तावेज उपलब्ध करा दिए थे जिसमें कि उसके द्धारा किए गए भुगतान से जुड़े बिल, रसीद, बांड पत्र और परिपक्वता से जुड़ी दूसरी प्राप्ति रसीदें शामिल हैं।
समूह का कहना है कि, इससे लंबे समय से चला आ रहा यह मामला सुलझ जाएगा क्योंकि इस विवाद का मुख्य मुद्दा ही निवेशकों को पुर्नभुगतान से जुड़ा है।
समूह का कहना है कि दस्तावेजों के सत्यापन से ही यह बात साबित हो जाएगी कि समूह ने अपने 95 प्रतिशत निवेशकों को पैसा लौटा दिया है। ऐसा होने के बाद सहारा ने जो 20,000 करोड़ रुपए जमा कराए हैं उसमें से काफी धन ब्याज सहित वापस सहारा को मिल जाएगा।
सहारा ने कहा कि इस पैसे पर लगी रोक हटते ही कंपनी , उसके 14 लाख कर्मचारियों और करोड़ों उपभोक्ताओं की दिक्कतें दूर हो जाएंगी।

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