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टेक्नालजी (471)

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश वृद्धि 2017-18 में पांच साल के निचले स्तर पर

नई दिल्ली , एक जुलाई (भाषा) देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की वृद्धि दर पांच साल के निचले स्तर पर आ गई है। वर्ष 2017-18 में एफडीआई प्रवाह तीन प्रतिशत की दर से बढ़कर 44.85 अरब डॉलर रहा है। औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 2017-18 में एफडीआई प्रवाह मात्र तीन प्रतिशत बढ़कर 44.85 अरब डॉलर रहा है। जबकि 2016-17 में यह वृद्धि दर 8.67ञ्, 2015-16 में 29ञ्, 2014-15 में 27ञ् और 2013-14 में 8ञ् रही थी। हालांकि, 2012-13 में एफडीआई प्रवाह में 38ञ् की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू निवेश को पुनर्जीवित करना और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए देश में कारोबार सुगमता को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण है। डेलाइट इंडिया में भागीदार अनिल तलरेजा ने कहा कि उपभोक्ता और खुदरा क्षेत्र में एफडीआई निवेश की वृद्धि दर कमजोर रहने की मुख्य वजह एफडीआई नीति की जटिलता और अनिश्चिता है। व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र संघ के सम्मेलन की रपट से भी यह बात जाहिर होती है कि 2017 में भारत में एफडीआई घटकर 40 अरब डॉलर रहा है जो 2016 में 44 अरब डॉलर था। जबकि विदेशी निवेश की निकासी दोगुने से ज्यादा बढ़कर 11 अरब डॉलर रहा है।

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मारुति की जून में बिक्री 36.3% बढ़कर 1,44,981 वाहन

नई दिल्ली , एक जुलाई (भाषा) देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया की जून में बिक्री 36.3ञ् बढ़कर।,44,981 कार रही जो जून 2017 में।,06,394 इकाई थी। कंपनी ने एक बयान में बताया कि उसकी घरेलू बिक्री 45.5ञ् बढ़कर।,35,662 वाहन रही जो पिछले साल जून में 93,263 वाहन थी। छोटी कारों की श्रेणी में ऑल्टो और वैगन आर समेत कंपनी की कुल बिक्री 15.1ञ् बढ़कर 29,381 कार रही जो पिछले साल जून में 25,524 वाहन थी। स्विफ्ट , एस्टिलो , डिजायर और बलेनो की बिक्री 76.7ञ् बढ़कर 71,570 वाहन रही जो पिछले साल जून में 40,496 वाहन थी। कंपनी की सेडान श्रेणी में सियाज की बिक्री 60ञ् घटकर।,579 वाहन रही जो पिछले साल इसी अवधि में 3,950 वाहन थी। यूटिलिटी वाहन श्रेणी में अर्टिगा , एस - क्रॉस , विटारा ब्रेजा की बिक्री 39.2ञ् बढ़कर 19,321 वाहन रही है जो पिछले साल समान अवधि में 13,879 वाहन थी। कंपनी की वैन ओमनी और इको की बिक्री 32.3ञ् बढ़कर 12,185 वाहन रही तो पिछले साल इसी दौरान 9,208 वाहन थी। कंपनी का निर्यात समीक्षावधि में 29ञ् बढ़कर 9,319 वाहन रहा जो पिछले साल इसी दौरान 13,131 वाहन था।

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डिजिटल इंडिया की गति तेज करने में मददगार साबित होगा नया उपग्रह

लंदन , एक जुलाई (भाषा) हाल ही में अमेरिका के फ्लोरिडा से प्रक्षेपित एक उपग्रह डिजिटल इंडिया की गति को तेज करने और उड़ान के दौरान विमानों में मोबाइल तथा इंटरनेट सेवाएं मुहैया कराने में मददगार साबित होगा। एसईएस वीडियो में ग्लोबल सेल्स के कार्यकारी वाइस - प्रेसिडेंट दीपक माथुर ने कहा कि हाल ही में प्रक्षेपित एसईएस -12 उपग्रह भारत में तेजी से बढ़ रहे डायरेट - टू - होम (डीटीएच) बाजार को बढ़ाने में मदद करेगा। भारत में , विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में उपभोक्ता डीटीएच अपना रहे हैं। माथुर ने कहा कि यह उपग्रह डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने , भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और देश में संपर्क साधनों को बेहतर बनाने में भारत की मदद करने में सक्षम होगा। उनका कहना है कि दक्षिण एशिया और भारत के ऊपर एसईएस -12 की उच्च क्षमता संभवत : डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन के कदमों में और तेजी लाने में भारत की मदद कर सकेगा। दुनिया के प्रमुख उपग्रह ऑपरेटरों में शामिल एसईएस के वरिष्ठ कार्यकारी ने बताया कि भारतीय हवाई क्षेत्र में मोबाइल और इटरनेट सेवा मुहैया कराने के संबंध में ट्राई के हालिया फैसले के बाद उपग्रह अब विमान के भीतर संपर्क सेवा उपलब्ध करा सकता है। एसईएस -12 को जून के आरंभ में स्पेस एक्स फाल्कन 9 रॉकेट की मदद से अमेरिका के केप कनावरेल अंतरिक्ष केन्द्र से प्रक्षेपित किया गया था।

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मुम्बई के भवनों को धरोहर दर्जा मिलने से भारत में जीवंत धरोहरों के संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा:विशेषज्ञ

नई दिल्ली , एक जुलाई (भाषा) विशेषज्ञों का मानना है कि मुम्बई में विक्टोरियन गोथिक एवं आर्ट डिको भवनों को यूनेस्को की पहचान मिलने से एक अच्छी परिपाटी तय होगी तथा भारत के अन्य शहरों में भी आधुनिक वास्तुशिल्प धरोहरों को सहेजने को बढ़ावा मिलेगा।
उनकी यह भी राय है कि ऐसे पुराने ढांचों पर प्राचीन एवं मध्यकालीन धरोहरों की छाया रही है। बहरीन की राजधानी मनामा में चल रहे यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 42 वें सत्र में 19 वीं सदी के विक्टोरियन गोथिक और 20 वीं सदी के आर्ट डेको के 94 भवनों को कल विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। मुम्बई की संरक्षण वास्तुशिल्पी आभा नारायण लांबा ने कहा , सबसे अनोखी बात यह है कि शहर के जीवंत धरोहर यानी केवल एक भवन को नहीं बल्कि भवनों के एक समुच्च्य को यह सम्मान दिया गया है। उन्होंने पीटीआई भाषा से कहा , भारत में पारंपरिक रुप से धरोहर की संकल्पना प्राचीन पुरातात्विक स्थलों या मध्यकालीन गुंबदों या स्मारकों तक ही सीमित रही है। हमें इस बात का गर्व है कि बतौर एक देश हमें अपने जीवंत धरोहरों पर भी खुशी होनी चाहिए। यूनेस्को सम्मान से निश्चित ही आधुनिक काल की धरोहरें सुर्खियों में आएंगी। लांबा मनामा में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थीं और उन्होंने ही वृहद नामांकन डोजियर तैयार किया था।
विक्टोरियन बिल्डिंग में पुराना सचिवालय , मुम्बई विश्वविवद्यालय लाइब्रेरी , कन्वेंशन हॉल , बंबई उच्च न्यायालय , लोक निर्माण विभाग , वाटसन होटल , डेविड सेसून लाइब्रेरी , एलीफेंस्टन कॉलेज आदि आते हैं।
मुम्बई के संरक्षणविद कमालिका बोस ने कहा , हम ज्यादातर शहरों के औपनिवेशिक कालीन भवनों की दशा जानते हैं। उनकी उपेक्षा का एक कारण यह है कि सरकार या समाज उन्हें धरोहर या संरक्षण लायक नहीं मानता ...... हमें उन्हें भी किसी एक कालखंड के वास्तुशिल्प खजाने के तौर पर महत्व देना चाहिए।

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एआईबीईए ने सरकार से आईडीबीआई बैंक में कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने को कहा

वडोदरा , 29 जून (भाषा) आल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन (एआईबीईए) ने सरकार द्वारा आईडीबीआई बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को बेचने की योजना का विरोध किया है। एसोसिएशन ने कहा है कि डूबे कर्ज के बोझ से दबे बैंक के मामले में सरकार अपनी कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने की प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हट सकती। वित्त मंत्री पीयूष गोयल को लिखे पत्र में एआईबीईए के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने कहा है कि सरकार को बैंक में पर्याप्त पूंजी डालने के लिए भी आगे आना चाहिए। मीडिया की खबरों में कहा गया है कि जीवन बीमा निगम की योजना आईडीबीआई बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी लेने की है। इससे बैंक में सरकार की हिस्सेदारी घटकर 51 प्रतिशत से नीचे आ जाएगी। एलआईसी के पास फिलहाल बैंक की 10.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वेंकटचलम ने पत्र में कहा हैकि 2003 में जब अटल बिहारी वाजपेई सरकार ने आईडीबीआई को आईडीबीआई बैंक में बदला था तो उस समय सरकार को संसद में भरोसा दिलाया था कि आईडीबीआई बैंक में सरकार की हिस्सेदारी को कम से कम 51 प्रतिशत पर कायम रखा जाएगा। इसी आश्वासन के बाद संसद ने विधेयक को मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा कि डूबे कर्ज का बोझ बढऩे की वजह से बैंक में अतिरिक्त पूंजी डालने की जरूरत है।
वेंकटचलम ने कहा कि यदि बैंक कार्यकारियों के गलत मंशा से किए गए फैसलों की वजह से डूबा कर्ज बढ़ा है तो उन पर कार्वाई होनी चाहिए जबकि आर्थिक परिदृश्य में बदलाव की वजह से यदि बुनियादी ढांचा क्षेत्र का कर्ज डूब कर्ज बनता है तो सरकार को बैंक में अतिरिक्त पूंजी डालनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में इसका इस्तेमाल अपनी हिस्सेदारी घटाकर 51 प्रतिशत से कम पर लाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि यह संसद और राष्ट्र से जताई गई प्रतिबद्धता से हटना होगा।

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जुलाई के डेरिवेटिव अनुबंधों की मजबूती से शुरुआत से सेंसेक्स ने लगाई 386 अंक की छलांग

मुंबई , 29 जून (भाषा) जुलाई के डेरिवेटिव अनुबंधों की बेहतर शुरुआत तथा रुपए की स्थिति सुधरने से बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स आज 386 अंक चढ़ गया। इससे पिछले दो सत्रों में सेंसेक्स ट्रटा था। इस साल 31 मई के बाद यह एक दिन में सेंसेक्स की सबसे बड़ी बढ़त है। उस दिन सेंसेक्स ने 416.27 अंक की छलांग लगाई थी। वैश्विक बाजारों में भी आज तेजी रही। हालांकि , व्यापार को लेकर आशंका कायम है। गुरुवार को रुपया अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचा था। आज इसमें सुधार हुआ जिससे निवेशकों की धारणा बेहतर हुई। बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 35,128.16 अंक पर मजबूती के साथ खुला और लगातार सकारात्मक दायरे में बना रहा। कारोबार के दौरान इसने दिन का उच्चस्तर 35,459.05 अंक भी छुआ। अंत में सेंसेक्स 385.84 अंक या 1.10 प्रतिशत के लाभ से 35,423.48 अंक पर बंद हुआ। इससे पिछले दो सत्रों में सेंसेक्स 452.40 अंक टूटा था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 125.20 अंक या 1.18 प्रतिशत के लाभ से 10,714.30 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 10,723.05 से 10,612.35 अंक के दायरे में रहा। हालांकि , सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में साप्ताहिक आधार पर नुकसान रहा। इससे पिछले पांच सप्ताहों में ए लाभ में रहे थे। साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 266.12 अंक या 0.75 प्रतिशत तथा निफ्टी 107.55 अंक या 0.99 प्रतिशत नीचे आया। इस बीच , शेयर बाजारों के अस्थाई आंकड़ों के अनुसार घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कल शुद्ध रूप से 442.64 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे। वहीं विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 951.51 करोड़ रुपए की बिकवाली की।

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रुपए की नरमी: गोयल ने कहा, झटके में प्रतिक्रिया की आवश्यकता नहीं

नई दिल्ली , 29 जून (भाषा) डालर के मुकाबले रुपए की विनिमय दर में भारी गिरावट के बीच वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि इस मामले में ै झटके में प्रतिक्रिया ै करने की जरूरत नहीं है। गौरतलब है कि वैश्विक व्यापार में प्रशुल्क - युद्ध छिडऩे , कच्चे तेल के दाम में उछाल और अमेरिका में ब्याज दर में बढ़ोतरी से विदेशी पूंजी की निकासी के बीच कल पहली बार डॉलर के मुकाबले रुपया 69.10 तक हल्का हो गया था। हालांकि बाद में यह कुछ सुधर कर 18 पैसे की गिरावट के साथ 68.79 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह डालर के मुकाबले रुपए की अब तक की न्यूनतम बंद दर है। गोयल ने संवाददाताओं से कहा कि घरेलू मुद्रा की विनिमय दर को लेकर झटके में किसी कार्वाई को आवश्यकता नहीं है। वित्त मंत्री ने रुपए की गिरावट से जुड़े सवाल के जवाब में कहा कि वैश्विक कारकों को ध्यान में रखते हुए सभी हितधारकों से सलाह - मशवरा करने के बाद उचित कदम उठाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश के पास पर्याप्त मात्रा में विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है।

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आईएमएफ ने भारत को उच्च आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखने के लिए तीन उपाय सुझाए

वॉशिंगटन , 29 जून (भाषा) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत को उच्च आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने के लिए तीन सुधारों पर ध्यान देने का सुझाव दिया है। आईएमएफ ने कहा कि भारत को अपनी वृद्धि में जारी तेजी को बनाए रखने के लिए बैंकिंग क्षेत्र में सुधार , राजकोषीय मजबूती , जीएसटी को सरल बनाने और प्रमुख बाजारों के सुधारों में नए सिरे से तेजी लाने जैसे मोर्चे पर काम करना चाहिए। देश की आर्थिक वृद्धि दर 2017-18 की चौथी तिमाही में बढ़कर 7.7 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इससे पिछले तिमाही में यह 7 प्रतिशत थी। आईएमएफ के संवाद निदेशक और प्रवक्ता गैरी राइस ने कल संवाददाताओं से कहा , ै भारत की आर्थिक वृद्धि दर में 2018-19 में सुधार जारी रहने की उम्मीद है। चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत और अगले चलकर 2019-20 में 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। राइस ने आर्थिक वृद्धि दर में तेजी को बनाए रखने के लिए भारत को कुछ उपायों को पर काम करने का सुझाव दिया है।
उन्होंने कहा , ै पहले चरण में , भारत को बैंकों और कंपनियों की बैलेंस शीट को साफ - सुथरा करने में काम में तेजी लानी चाहिए ताकि बैंकों की ऋण देने की क्षमता को फिर से पूर्वस्तर पर लाया जा सके और ऋण प्रावधानों को अधिक दक्ष बनाया जा सके।
दूसरे चरण में , राजकोषीय मजबूती में सुधार को जारी रखने और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की संरचना को और सरल तथा व्यवस्थित करने का सुझाव दिया है।
वहीं , तीसरे चरण में मध्यम अवधि के दौरान श्रम और रीयल्टी जैसे प्रमुख बाजारों के सुधारों में नए सिरे से तेजी लाने का सुझाव दिया है। यह कारोबारी माहौल और प्रतिस्पर्धा में सुधार करने के लिए बहुत जरूरी है। यह भारत की वृद्धि दर को ऊंचा बनाए रखने में मदद करेगा।

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आईएमएफ ने भारत को उच्च आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखने के लिए तीन उपाय सुझाए

वॉशिंगटन , 29 जून (भाषा) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत को उच्च आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने के लिए तीन सुधारों पर ध्यान देने का सुझाव दिया है। आईएमएफ ने कहा कि भारत को अपनी वृद्धि में जारी तेजी को बनाए रखने के लिए बैंकिंग क्षेत्र में सुधार , राजकोषीय मजबूती , जीएसटी को सरल बनाने और प्रमुख बाजारों के सुधारों में नए सिरे से तेजी लाने जैसे मोर्चे पर काम करना चाहिए। देश की आर्थिक वृद्धि दर 2017-18 की चौथी तिमाही में बढ़कर 7.7 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इससे पिछले तिमाही में यह 7 प्रतिशत थी। आईएमएफ के संवाद निदेशक और प्रवक्ता गैरी राइस ने कल संवाददाताओं से कहा , ै भारत की आर्थिक वृद्धि दर में 2018-19 में सुधार जारी रहने की उम्मीद है। चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत और अगले चलकर 2019-20 में 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। राइस ने आर्थिक वृद्धि दर में तेजी को बनाए रखने के लिए भारत को कुछ उपायों को पर काम करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा , ै पहले चरण में , भारत को बैंकों और कंपनियों की बैलेंस शीट को साफ - सुथरा करने में काम में तेजी लानी चाहिए ताकि बैंकों की ऋण देने की क्षमता को फिर से पूर्वस्तर पर लाया जा सके और ऋण प्रावधानों को अधिक दक्ष बनाया जा सके। दूसरे चरण में , राजकोषीय मजबूती में सुधार को जारी रखने और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की संरचना को और सरल तथा व्यवस्थित करने का सुझाव दिया है। वहीं , तीसरे चरण में मध्यम अवधि के दौरान श्रम और रीयल्टी जैसे प्रमुख बाजारों के सुधारों में नए सिरे से तेजी लाने का सुझाव दिया है। यह कारोबारी माहौल और प्रतिस्पर्धा में सुधार करने के लिए बहुत जरूरी है। यह भारत की वृद्धि दर को ऊंचा बनाए रखने में मदद करेगा।

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आईसीआईसीआई बैंक ने पूर्व आईएएस अधिकारी को बनाया गैर-कार्यकारी चेयरमैन

नई दिल्ली , 29 जून (भाषा) आईसीआईसीआई बैंक ने पूर्व पेट्रोलियम सचिव गिरीश चंद्र चतुर्वेदी को गैर - कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त किया है। आईसीआईसीआई बैंक ने आज यह जानकारी दी। आईसीआईसीआई बैंक ने एक बयान में कहा कि एम के शर्मा का कार्यकाल 30 जून 2018 को समाप्त हो रहा है। चतुर्वेदी की नियुक्ति एक जुलाई 2018 से तीन वर्ष के लिए प्रभावी होगी। बैंक ने कहा, निदेशक मंडल ने एक जुलाई से गिरीश चंद्र चतुर्वेदी की अंशकालिक गैर - कार्यकारी चेयरमैन के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इसमें आगे कहा गया है कि यह नियुक्ति निदेशक मंडल के विचार - विमर्श में परिपक्वता और दूरदर्शिता लाएगी। उल्लेखनीय है कि आईसीआईसीआई बैंक वीडियोकॉन समूह समेत कुछ अन्य कंपनियों को कर्ज देने में अपनी सीईओ चंदा कोचर और उनके परिवार के सदस्यों के हितों के टकराव के आरोपों में विभिन्न नियामकीय एजेंसियों की जांच के दायरे में है। बैंक ने इस महीने की शुरुआत में घोषणा की थी कि मामले में आंतरिक जांच पूरी होने तक चंदा कोचर ने अवकाश पर रहने का फैसला किया है।

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