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टेक्नालजी (418)

मांग बढऩे से बीते सप्ताह चावल बासमती, गेहूं की कीमतों में तेजी

नई दिल्ली , आठ जुलाई (भाषा) उत्पादक क्षेत्रों से आपूर्ति घटने के कारण सीमित स्टॉक के मुकाबले उठाव बढऩे से दिल्ली के थोक अनाज बाजार में बीते सप्ताह भी चावल बासमती और गेहूं की कीमतों में तेजी जारी रही।
हालांकि , पर्याप्त स्टॉक की तुलना में उपभोक्ता उद्योगों की कमजोर मांग के कारण मक्का और बाजरा कीमतों में गिरावट आई।
बाजार सूत्रों ने कहा कि बाजार में पर्याप्त स्टॉक के मुकाबले उपभोक्ता उद्योगों की कमजोर मांग के कारण चावल बासमती की कीमत में तेजी बनी रही।
उन्होंने कहा कि आटा मिलों का उठाव बढऩे के कारण मुख्यत : गेहूं की कीमतों में तेजी बनी रही।
राष्ट्रीय राजधानी में चावल खंड में चावल बासमती कॉमन और पूसा -1121 किस्मों की कीमतें तेजी के साथ क्रमश : 7,600 - 7,700 रुपए और 6,900 - 7,000 रुपए प्रति क्विंटल पर बंद हुईं , जो पिछले सप्ताहांत क्रमश : 7,400 - 7,500 रुपए और 6,750 - 6,850 रुपए प्रति क्विंटल के स्तर पर बंद हुईं थीं।
गेहूं दड़ा (मिल के लिए) की कीमत भी तेजी के साथ।,805 -।,810 रुपए प्रति क्विन्टल हो गई जिसका पिछले सप्ताहांत का बंद स्तर।,770 -।,775 रुपए प्रति क्विन्टल था। आटा चक्की डिलीवरी की कीमत भी तेजी के साथ सप्ताहांत में।,815 -।,820 रुपए प्रति 90 किलोग्राम पर बंद हुई, जो पिछले सप्ताहांत।,780 -।,785 रुपए प्रति 90 किलोग्राम पर बंद हुई थी।
गेहूं में आई तेजी के अनुरूप आटा फ्लोर मिल , मैदा और सूजी की कीमतें तेजी के साथ क्रमश : 980 - 990 रुपए ,।,000 -।,010 रुपए और।,070 -।,080 रुपए प्रति 50 किग्रा पर बंद हुईं, जो पिछले सप्ताहांत क्रमश : 960 - 970 रुपए , 980 - 990 रुपए और।,050 -।,060 रुपए प्रति 50 किग्रा पर बंद हुई थीं।
वहीं दूसरी और अन्य मोटे अनाजों में बाजरा और मक्का की कीमतें गिरावट के साथ क्रमश :।,200 -।,205 रुपए और।,210 -।,215 रुपए प्रति क्विंटल पर बंद हुईं। ए कीमतें पिछले सप्ताहांत क्रमश :।,230 -।,235 रुपए और।,210 -।,225 रुपए प्रति क्विंटल थीं।

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मुकेश अंबानी का कार्यकाल पांच साल और बढ़ा, 4.17 करोड़ रुपए होगा सालाना वेतन

नई दिल्ली , सात जुलाई (भाषा) मुकेश अंबानी पांच साल और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक बने रहेंगे। कंपनी के शेयरधारकों ने मुकेश अंबानी का कार्यकाल पांच साल बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।  अंबानी (61 वर्ष) 1977 से कंपनी के निदेशक मंडल में शामिल हैं। जुलाई 2002 में रिलायंस समूह के संस्थापक और उनके पिता धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद उन्हें कंपनी के चेयरमैन बनाया गया।  कंपनी की मुंबई में हुई 41वीं वार्षिक आम बैठक में उनके मौजूदा कार्यकाल को और पांच साल बढ़ाने को मंजूरी दे दी गई। मुकेश अंबानी का मौजूद कार्यकाल अप्रैल 2019 में समाप्त हो रहा है।  कंपनी की शेयर बाजार को भेजी गई जानकारी के मुताबिक मुकेश अंबानी का कार्यकाल पांच साल बढ़ाने के प्रस्ताव पर कुल पड़े वोटों में से 98.5 प्रतिशत मत प्रस्ताव के समर्थन में पड़े।  प्रस्ताव के अनुसार , अंबानी को सालाना 4.17 करोड़ रुपए का वेतन तथा 59 लाख रुपए के भत्ते दिए जाएंगे। इसमें सेवानिवृत्ति लाभ शामिल नहीं है।  कंपनी ने कहा कि उन्हें शुद्ध मुनाफे पर आधारित बोनस भी मिलेगा। इसके साथ ही उनकी कारोबारी यात्रा के दौरान परिवार एवं सहायकों समेत अंबानी की यात्रा व रहने - ठहरने का खर्च कंपनी उठाएगी। कंपनी उनके लिए कार, घर पर फोन एवं इंटरनेट का खर्च भी वहन करेंगी।  अंबानी एवं उनके परिजनों का सुरक्षा खर्च भी भत्ते में शामिल नहीं होगा और इनका वहन कंपनी करेगी।  वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों ने 2018-19 में गैर - परिवर्तनीय डिबेंचरों के जरिए 20 हजार करोड़ रुपए की पूंजी जुटाने की भी मंजूरी दी। हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया कि इस राशि का कहां इस्तेमाल किया जाएगा।

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भारत निर्यात पर सब्सिडी देता है ऐसा मानना गलतफहमी: सोच

कोलकाता , सात जुलाई (भाषा) केंद्रीय वाणिज्य एवं नागर विमानन मंत्री सुरेश प्रभु ने आज कहा कि भारत द्वारा अपने निर्यात पर सब्सिडी दिए जाने की अवधारणा एक गलतफहमी है।  प्रभु ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि भारत सरकार केवल अपने निर्यातकों की परेशानियों को कम करने का प्रयास कर रही है जिसे निर्यात के लिए सब्सिडी दिया जाना नहीं कहा जा सकता। प्रभु ने कहा , यह एक गलतफहमी है कि हम अपने निर्यात को सब्सिडी देते हैं। हम पूरी तरह से डब्ल्यूटीओ का अनुपालन करते हैं और उसके नियमों का किसी भी तरह उल्लंघन नहीं करते। उन्होंने कहा कि ओईसीडी देश अपने किसानों को विशेष रूप से कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए अधिक सब्सिडी दे रहे हैं।  कृषि क्षेत्र के बारे में प्रभु ने कहा कि किसानों को बाजार पहुंच उपलब्ध करवाना महत्वपूर्ण है जिसके लिए सुरक्षा के उच्च मानकों की जरूरत होगी ताकि गैर- तटकर बाधाओं (एनटीबी) से पार पाया जा सके।  उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुना करने के लिए कृषि नीति पर पहले ही काम कर रही है।

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बैंक कर्जों को मंजूरी देने के लिए होनी चाहिए एक केन्द्रीय एजेंसी: लागत लेखाकार संस्थान

नई दिल्ली, सात जुलाई (भाषा) बैंकों के फंसे कर्ज की गहराती समस्या के बीच लागत लेखाकारों की शीर्ष संस्था इंस्टीट्यूट आफ कास्ट एकाउंटेंट्स आफ इंडिया (आईसीएआई) ने बैंकों से दिए जाने वाले बड़े कर्ज प्रस्तावों की जांच- परख के लिए एक केन्द्रीय एजेंसी बनाने का सुझाव दिया है।
इसका कहना है कि इस एजेंसी में लागत लेखाकारों के साथ साथ विभिन्न क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाना चाहिए ताकि कर्ज फंसने के मामलों में कमी लाई जा सके।
इंस्टीटयूट आफ कास्ट एकाउंटेंटस आफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय गुप्ता ने भाषा से खास बातचीत में कहा कि बैंकों से जो भी बड़े कर्ज दिए जाते हैं उन सभी की जांच परख करने के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा एक केन्द्रीय एजेंसी का गठन किया जाना चाहिए। ऐसे प्रस्तावों का लागत मूल्यांकन करने के साथ साथ परियोजना की दक्षता, वहनीयता को लेकर भी आडिट यानी उनकी लेखा परीक्षा होनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि इन दिनों सार्वजनिक क्षेत्र के अनेक बैंक फंसे कर्ज यानी एनपीए की समस्या का सामना कर रहे हैं। यह समस्या विशेषतौर से इस्पात, बिजली, दूरसंचार तथा कुछ अन्य क्षेत्रों में ज्यादा है। कड़ी प्रतिस्पर्धा से बाजार मूल्य घटने अथवा मांग कमजोर पडऩे से इन क्षेत्रों की कंपनियां वित्तीय संकट में फंस गई।
गुप्ता का कहना है कि आमतौर पर हजारों करोड़ रुपए के बड़े कर्ज बैंकों के समूह द्वारा दिए जाते हैं। बड़े बैंकों के पास शोध एवं विकास के बेहतर साधन होते हैं वह कर्ज प्रस्ताव का बेहतर आकलन कर सकते हैं लेकिन कई छोटे बैंक है जिनके पास कर्ज प्रस्तावों का मूल्यांकन और लेखा आडिट करने की अच्छी सुविधाएं नहीं हैं, ऐसे में कर्ज प्रस्तावों पर विचार करने वाली केन्द्रीय एजेंसी बेहतर भूमिका निभा सकती है।
गुप्ता ने कहा कि आमतौर पर कंपनियां और उनके प्रवर्तक अपने उत्पाद की लागत को लेकर गोपनीयता का हवाला देते हैं। उन्होंने कहा, किसी भी परियोजना में जब पूरा पैसा बैंकों का लगता है जो कि जनता का पैसा है तो फिर कंपनियों की तरफ से मूल्यांकन को लेकर गोपनीयता क्यों बरती जानी चाहिए। इसमें हर मामले में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना अथवा उद्वम की सफलता में बेहतर मूल्यांकन की बड़ी भूमिका होती है। भारतीय लागत लेखाकार संस्थान इन्ही मुद्दों पर जोर देता है और उसका गुणवत्ता और दक्षता पर ज्यादा ध्यान रहता है। दूसरी तरफ वित्तीय लेखाकार केवल वित्तीय आंकड़ों पर ही ज्यादा ध्यान देते हैं।
गुप्ता का कहना है कि कई बार कंपनियों का कारोबार उनकी गुणवत्ता अथवा मात्रात्मकता के मुताबिक नहीं बढ़ रहा होता है बल्कि बाजार में उत्पाद के दाम बढ़ जाने की वजह से उनका कारोबार बढ़ जाता है। इस मामले में उन्होंने पेट्रोलियम कंपनियों का उदाहरण दिया। विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम बढऩे से तेल एवं गैस उत्पादन करने वाली कंपनियों का कारोबार बढ़ जाता है, इसमें कंपनी की तरफ से अपना कोई प्रयास नहीं होता है। कई बार तो कंपनी को वास्तव में नुकसान हो रहा होता है। ऐसे में उसके उत्पाद की लागत लेखापरीक्षा होने पर स्थिति का पता चल जाता है।
देश में लागत लेखाकार पेशेवरों के कौशल विकास व नियमन के लिए संसद में पारित कानून से इस संस्था की स्थापना की गई। पहले इसका नाम इंस्टीट्यूट आफ कास्ट एंड वर्क्स एकाउंटेंट्स आफ इंडिया (आईसीडब्ल्यूएआई) था।

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फोर्टिस ने कहा: लेखापरीक्षा के बाद भी परिणाम में नहीं कोई बदलाव

नई दिल्ली , सात जुलाई (भाषा) फोर्टिस हेल्थकेयर ने आज कहा कि उसके बिना लेखा परीक्षा के घोषित वित्तीय परिणामों और लेखापरीक्षा के बाद के उसके वित्तीय परिणाम में कोई अंतर नहीं है। कंपनी ने कहा कि वह बोलियों का मूल्यांकन कर रही है। कंपनी ने 27 जून को बिना लेखा-परीक्षा वाले अपने परिणाम की घोषणा की थी। कंपनी ने कहा था कि वित्त वर्ष 2017-18 की मार्च तिमाही में उसका नुकसान बढ़कर 914.32 करोड़ रुपए हो गया। इससे पहले वित्त वर्ष 2016-17 की इसी तिमाही में कंपनी को 37.52 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। फोर्टिस ने बंबई शेयर बाजार को भेजी जानकारी में कहा , निदेशक मंडल के अनुरोध के बाद चुनिंदा आंतरिक प्रक्रियाओं की अतिरिक्त समीक्षा पूरी होने पर कंपनी के आडिट किए वित्तीय परिणाम जारी कर दिए गए। उसने कहा कि उम्मीद के मुताबिक आंकड़ों में कोई अंतर नहीं पाया गया। कंपनी के चेयरमैन रवि राजगोपाल ने कहा कि भविष्य में हमारा ध्यान संचालन एवं पारदर्शिता मजबूत करना और कंपनी को स्वस्थ बनाना है। नकदी की समस्या का सामना कर रही फोर्टिस को उसमें बहुलांश हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिए तीन जुलाई को दो ताजा बोलियां प्राप्त हुई हैं। उसे मलेशिया की आईएचएच हेल्थकेयर और मणिपाल-टीपीजी की संयुक्त बोलियां प्राप्त हुईहैं। दो अन्य कंपनियां केकेआर समर्थित रेडियंट लाइफ केयर और मुंजाल-बर्मन गठबंधन ने इस दौड़ से अपने हाथ खींच लिए हैं। उन्होंने कहा, हम तीन जुलाई को प्राप्त निविदाओं की समीक्षा की भी प्रक्रिया में हैं और आने वाले दिनों में शेयरधारकों के सामने अपना सुझाव प्रस्तुत करेंगे। फोर्टिस ने कहा था उसकीय कारोबार से एकीकृत आय आलोच्य अवधि में।,086.38 करोड़ रुपए रही। एक साल पहले इसी अविध में यह।,123.43 करोड़ रुपए रही थी। वित्त वर्ष 2017- 18 के लिए कंपनी का शुद्ध घाटा 934.42 करोड़ रुपए रहा। इससे पिछले वर्ष कंपनी ने 479.29 करोड़ रुपए का मुनाफा दर्ज किया था। पूरे साल की कुल आय 4,560.81 करोड़ रुपए रही जो कि इससे पिछले वर्ष 4,573.71 करोड़ रुपए रही थी।

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ग्रेटर नोएडा में आवासीय परियोजना में 500 करोड़ रुपए निवेश करेगी मिगसन

नई दिल्ली , सात जुलाई (भाषा) रीयल्टी क्षेत्र की कंपनी मिगसन उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में सस्ती आवासीय परियोजना विकसित करने में 500 करोड़ रुपए निवेश करेगी। कंपनी पांच एकड़ की इस भूमि में 1250 आवासीय फ्लैट विकसित करेगी। इसमें बनने वाले फ्लैट की कीमत 16 से 26 लाख रुपए होगी।
मिगसन के प्रबंध निदेशक यश मिगलानी ने कहा , हमने हाल ही में बहुत ही प्रतिस्पर्धी दाम पर ग्रेटर नोएडा में मिगसन विलासा परियोजना शुरू की है। इस परियोजना में हमने पहले ही 900 फ्लैट बेच दिए हैं। परियोजना में निवेश के बारे में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जमीन की कीमत सहित इसमें कुल मिलाकर 500 करोड़ रुपए का निवेश होगा। उन्होंने कहा कि निवेश के लिए राशि कंपनी के आंतरिक स्रोतों से और फ्लैट के ग्राहकों से अग्रिम राशि लेकर पूरी की जाएगी। परियोजन को अगले दो से तीन साल में पूरा कर लिया जाएगा। सरकार सस्ते मकान लेने वालों को अपनी तरफ से ब्याज सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। इसके अलावा इस श्रेणी की परियोजनाओं को ढांचागत सुविधा क्षेत्र का दर्जा भी मिला हुआ है। निम्न एवं मध्यम श्रेणी की इन वहनीय आवासीय परियोजनाओं के लिए माल एवं सेवाकर (जीएसटी) की दर को भी कम किया गया है। यही वजह है कि इस श्रेणी के मकानों में मांग एवं आपूर्ति में वृद्धि हुई है। मिगसन ने इस साल अप्रैल में गाजियाबाद में भी।,000 करोड़ रुपए की लागत से सस्ती अवासीय परियोजना शुरू की थी।
कंपनी ने केन्द्र सरकार की सस्ते मकान उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 3,000 आवासीय इकाइयां उपलब्ध कराने की योजना बनाई है।

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अब कढ़ाई के तेल से चलेगी गाड़ी

अब इस्तेमाल किए हुए खाने के तेल से भी आप अपनी कार चला सकेंगे। इससे बायोडीजल बनाने के लिए बड़ी पहल की जा रही है। फूड रेगुलेटर एफएसएसएआई ने इसके लिए बड़ी कंपनियों से बात कर रही है। अगर ये पहल कामयाब होती है तो ना सिर्फ देश का पैसा बचेगा बल्कि हमारी और आपकी सेहत भी सुधरेगी। शहरों में ट्रैफिक की किचकिच और प्रदूषण सबसे बढ़ी समस्या है। ना तो पेट्रोल डीजल के दाम काबू में आते हैं और ना प्रदूषण। ऐसे में समाधान का जो रास्ता मिल जाए उसे ही आजमाया जा रहा है। ये समाधान निकल सकता खाने के तेल से। आपको आश्चर्य होगा लेकिन सरकार अब इस तेल से गाड़ियां चलाने की योजना पर काम कर रही है।
दरअसल खाना बनाने या चीजें तलने में इस्तेमाल हुए तेल को बायोडीजल में बदलने की तैयारी हो रही है। इसके लिए फूड रेगुलेटर एफएसएसएआई ने मैक्डोनल्स, बिकानेरलावा और बागरी जैसी बड़ी कंपनियों से बात भी शुरू कर दी है। मैक्डोनल्स तो पहले से ही मुंबई में अपने इस्तमाल किए जा चुके तेल तो बायोडीजल में बदल रहा है। अब बायोडीजल एसोसिएशन ऑफ इंडिया रेस्टोरेंट्स और फूड कंपनियों से इस्तेमाल किया हुआ तेल इकट्ठा कर बायोडीजल में बदलने का काम करेंगी।
देश में हर दिन लगभग २.३ करोड़ टन खाने का तेल इस्तेमाल होता है जिसमें ३० लाख टन को इस्तेमाल के बाद बायोडीजल के लिए लिया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो साल भर में क्रूड ऑयल के इंपोर्ट पर खर्च होने वाला १८००० करोड रुपया बच सकता है। अगर एफएसएसएआई की ये कोशिश सफल होती है तो इसमें हमारी सेहत का फायदा होगा। क्योंकि तलने के लिए बार-बार गर्म करने से तेल में ट्रांसफैट पैदा होता जो दिल की बीमारियों का घर है।

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Breaking - बिटकॉइन से पैसे बनाने वालों को झटका, भारत में हुआ बैन

बिजनेस डेस्क: बिटकॉइन के जरिए अब कमाई का रास्ता बंद हो गया है क्योंकि अब यह आपके बैंक खाते में एक पैसे का इजाफा नहीं कर सकेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आर.बी.आई.) की ओर से भारतीय बैंकों को दुनिया के किसी भी क्रिप्टोकरंसी एजेंसी के साथ संबंध खत्म करने की दी गई मियाद 5 जुलाई को खत्म हो गई। ऐसे में क्रिप्टोकरंसी ट्रेडिंग के जरिए पैसा कमाने की जुगाड़ में लगे लोगों के लिए यह बड़ा झटका है। भारतीय बैंकों के इस संबंध को खत्म करने से अब क्या होगा, यह जानना बेहद जरूरी हो गया है।

क्रिप्टोकरंसी को लीगल करंसी बनाने के रास्ते बंद
अबतक कोई भी एक्सचेंज पर बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी को खरीद सकता था। इस प्रक्रिया में एक्सचेंज से लिंक्ड बैंक अकाउंट से पैसा ट्रांसफर करना पड़ता था और उसके मुताबिक बिटकॉइंस की खरीदारी होती थी। गुरुवार के बाद से अब यह संभव नहीं होगा। अब कुछ एक्सजेंच पीयर टू पीयर (क्क2क्क) बन जाएंगे, जहां आपको किसी साथी खरीदार से लिंक किया जाएगा, जिसके साथ आप बिटकॉइंन खरीद या बेच सकते हैं। क्क2क्क ट्रेडिंग में अभी के हिसाब से आप केवल बिटकॉइन को किसी दूसरे क्रिप्टो के एवज में ही खरीद-बेच सकेंगे।

लोन नहीं मिलेगा
बिटकॉइन रखने वालों को अब एक्सचेंज पर ही खरीदारों की तलाश करनी होगी यानी कि आगे से इसके लिए कालाबाजारी करनी होगी और ब्लैक मार्केट में अपने ग्राहक तलाशने होंगे। भले ही बिटकॉइन की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ज्यादा हो लेकिन भारत में इसके आधार पर कोई कर्ज नहीं मिलेगा। यहां तक की कॉरपोरेट अकाउंट भी नहीं खोला जा सकेगा।

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निरंतर लिवाली से सोने में दूसरी दिन तेजी, चांदी 690 रुपए उछली

नई दिल्ली , पांच जुलाई (भाषा) मजबूत वैश्विक रुख के बीच स्थानीय आभूषण कारोबारियों की निरंतर लिवाली से सोने के भाव में दूसरे दिन भी तेजी बनी रही। दिल्ली र्साफा बाजार में सोना 10 रुपए बढ़कर 31,580 रुपए प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। 
वहीं , औद्योगिक इकाइयों एवं सिक्का निर्माताओं का उठाव बढऩे से चांदी 690 रुपए उछलकर 40,600 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई। 
कारोबारियों ने कहा कि हाजिर बाजार में स्थानीय आभूषण निर्माताओं की निरंतर लिवाली और वैश्विक स्तर पर बेहतर रुख से सोने में तेजी आई। 
वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क में , सोना 0.34 प्रतिशत बढ़कर।,256.50 डॉलर प्रति औंस पर रहा जबकि चांदी 0.37 प्रतिशत चढ़कर 16.06 डॉलर प्रति औंस पर रही। 
राष्ट्रीय राजधानी में , 99.9 प्रतिशत और 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 10-10 रुपए बढ़कर क्रमश : 31,580 रुपए और 31,430 रुपए प्रति दस ग्राम हो गया। कल सोना 210 रुपए चढ़ा था। हालांकि , सीमित सौदे के बीच आठ ग्राम वाली गिन्नी 24,800 रुपए प्रति इकाई पर ही टिकी रही। 
वहीं , चांदी भी सोने की राह पर नजर आई। चांदी हाजिर 690 रुपए चढ़कर 40,600 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई जबकि साप्ताहिक डिलीवरी 60 रुपए गिरकर 39,200 रुपए प्रति किलोग्राम पर रही। 
चांदी सिक्का लिवाल और बिकवाल क्रमश : 75000 रुपए और 76,000 रुपए प्रति सैकड़ा के पूर्व स्तर पर रहे।

 

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टाटा प्रोजेक्ट्स को छत्तीसगढ़ में भारत नेट का 3,000 करोड़ रुपए का ठेका

हैदराबाद , पांच जुलाई (भाषा) टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड की स्मार्ट सिटीज कारोबार इकाई को छत्तीसगढ़ में भारत नेट परियोजना का 3057 करोड़ रुपए का ठेका मिला है। कंपनी ने आज जारी बयान में यह जानकारी दी। टाटा प्रोजेक्ट्स ने विज्ञप्ति में कहा कि इस परियोजना में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाना शामिल है।
केंद्र की डिजीटल इंडिया पहल के तहत यह परियोजना राज्यभर के 27 जिलों की 5,987 ग्राम पंचायतों और 85 ब्लॉकों को ब्रांडबैंड और मोबाइल कनेक्टिविटी से जोड़ेगी। कंपनी के प्रबंध निदेशक विनायक देशपांडे ने कहा , ै हम केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी डिजीटल इंडिया पहल के तहत मिली इस परियोजना को लेकर खुश हैं। मुझे भरोसा है कि इस परियोजना के पूरे होने से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत मिलेगी और स्थानीय लोगों के जीवन को सुलभ बनाने में मदद मिलेगी। इससे राज्य के करीब 2.6 करोड़ लोगों की सीधे फायदा मिलेगा। इस परियोजना के माध्यम से मुफ्त एबुलेंस सेवा (102) और आपातकाल सेवा (108) , सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं का पंचायत स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन होगा।

 

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