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आओ जन्मदिन मनाते हैं?

जन्मदिन के बहाने ही सही, बीकानेर में राजनीति का पैंतरा हर कोई चलाने के लिए तैयार है। पिछले एक महीने में जन्मदिन पॉलिटिक्स इतनी दमदार रही है कि हर किसी ने अपने जन्म को और अपने नेता के जन्म को उत्सव का रूप दे दिया। प्रधानमंत्री का जन्मदिन तो सर्वमान्य तरीके से मनाया गया लेकिन इसके बाद जो जन्मदिन आए वो राजनीति से पूरी तरह प्रेरित थे। राजनीति भी अंदरुनी। एक विधायक का जन्मदिन आया तो सिर्फ उनके क्षेत्र में कुछ हॉर्डिंग्स लगा दिए गए। एक टिकट दावेदार का जन्म दिन आया तो उन्होंने ‘जीमण’ कर दिया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष का जन्मदिन आया तो शक्ति प्रदर्शन किया गया। एक नेताजी जन्मदिन मनाने मूक बधिर विद्यालय पहुंच गए। मजे की बात यह है कि एक नेता के जन्मदिन से दूसरा नेता प्रभावित हुआ तो उन्होंने भगवान का नाम लेकर ऐसे ही आयोजन कर दिया। राजनीति में अवसर ही सबसे बड़ी चीज है। ‘मौके पर चौके’ की जरूरत होती है। अब जब चुनावी सीजन शुरू होने वाला है, ऐसे में जन्मदिन ही सबसे बड़ा मौका है। पिछले दिनों जन्मदिन मनाने वालों में अधिकांश को विधानसभा में टिकट की जरूरत है तो कुछ अपनी ही पार्टी में पद की दरकार है। ‘बर्थ डे पोलिटिक्स’ गलत नहीं है, जरूरत सिर्फ इतनी सी है कि बधाई दें तो दिल से दें। आगे तारीफ और पीछे से छुरा चलाने वालों से सावधान रहने की जरूरत है। मेरा इशारा किसी की तरफ नहीं है, इसलिए ज्यादा दिमाग ना लगाएं, दिल से बधाई देने तक ही सीमित रहें।

इसका श्रेय कौन लेगा?
पिछले दिनों दिल्ली विमान सेवा शुरू हुई तो एयरपोर्ट पर श्रेय लेने वालों की होड मच गई। ‘जिंदाबाद-मुर्दाबाद’ के नारे लगे, केंद्रीय मंत्री को अपमानित होकर वापस लौटना पड़ा। इसके विपरीत अब सुनने में आ रहा है कि बीकानेर से जयपुर के बीच चल रही विमान सेवा दम तोडऩे के कगार पर है। अगर यह सेवा भी बंद हो जाए तो नेता जी श्रेय लेने के लिए तैयार रहें। अब इसमें ऐसा नहीं हो कि फ्लाइट जयपुर की है तो जयपुर वाले नेता का दोष और दिल्ली की है तो दिल्ली वाले नेताजी को श्रेय। देखते हैं इसका श्रेय लेने कौन आगे आएगा?
युवा भाजपा में भी आडवाणी?
भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चे की कार्यकारिणी पिछले दिनों घोषित हुई। एक भाई ने सोशल मीडिया पर लिखा कि युवा भाजपा में भी आडवाणी है। बात बहुत साधारण तरीके से कही गई लेकिन तीर बहुत निशाने पर जाकर लगा है। समझना होगा कि युवा नेतृत्व को साथ लेकर पार्टी नहीं चलेगी तो नींव हिल सकती है। फिर वो युवा जो अंग-अंग में पार्टी को रचा बसा चुका है, उसे ही हतोत्साहित किया तो नए लोग क्यों जुड़ेंगे?

अच्छा लगा नेताजी?
पिछले दिनों एक युवा नेता ने फिर से प्रभावित किया। पार्टी की नीति और रीति अपनी जगह है और मित्रवत रिश्ते और शिष्टता अपनी जगह। आज के दौर में जब नेता एक दूसरे के लिए अपशब्द बोल रहे हैं, सोशल मीडिया पर अशिष्ट भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, ऐसे में भाजपा नेता सुरेंद्र सिंह शेखावत ने पिछले दिनों अस्वस्थ चल रहे कांग्रेस नेता गुलाब गहलोत के घर पूरे लवाजमे के साथ पहुंचे। भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष अशोक सैनी भी उनके आवास पर गए। राजनीति का ऐसा स्तर तो प्रभावित करता है, अच्छा लगा नेताजी।
वो क्या कहते हैं....? हां.... किप इट अप।

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जग्गा जासूस के भुजिया और निर्देशक अनुराग बसु का बीकानेर कनेक्शन

-Naval Vyas
फिल्म जग्गा जासूस में एक जगह रनवीर कपूर डायलॉग बोलता है-बीकानेर की तो हर गली में भुजिया और नमकीन मिल ही जाता है और सुनते ही अचानक रोमांचित हो उठता हूँ। बीकानेर के सिनेमाहॉल में शायद इसी डायलॉग को सीटी, तालियों और हो-हुल्लड से भारी ध्वनिमत से पास किया गया होगा। हमारा उत्सवधर्मी शहर कोई मौका नही छोड़ता खुश हो लेने का। हमारे बीकानेर का भला राजनेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, व्यापारियों और हम आम लोगो ने भले ही ना किया हो पर इसके नाम से एक खास उबाल जरूर हम बीकानेरी महसूस कर ही लेते है। कमबख्त इससे प्यार तो सभी को है पर वफा किसी ने नही की। सालो-साल पीछे जाता जा रहा है। अजब गजब मामला है। 
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मै जानता हूं कि तू गैर है मगर यू ही.....

साहिर का लिखा कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है हिन्दी सिनेमा के सबसे अप्रतिम गीतों में से एक है। हम बूढे होते जा रहे है और समय की छाती पर गढा ये गीत आज भी कायम है। ये चिरकुट समय से निकल कर अब तक भाग रहा चिर युवा गीत है। हिन्दी सिनेमा के लिये ये गीत सच में बडी घटना थी। इसे हम सब ने गर्मी में छत पर लेटे उनींदी रातो में आसमान पर टकटकी लगायें रेडियो पर अमीन सियानी की कंमेट्री के बीच, दोस्तो की अंताक्षरी में, स्कूल-काॅलेज की पिकनिक बस में, बाइक चलाते हुए इयरफोन में, शादी में, ब्रेकअप के मातम में सब में सुना है। ये गीत अपने आप में भरा पूरा संसार है।

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नींव के पत्थर

भारतीय प्रबंध प्रणाली 'मैं शब्द में विश्वास नहीं करती। इन्डियन मैनेजमेंट के अनुसार 'मैंÓ की समाप्ति से ही जीवन की श्रेष्ठ यात्रा, प्रेम और सेवा के भाव का उद्भव होता है। भारतीय मैनेजमेंट हमें स्वयं के श्रेष्ठ कार्यों और उपलब्धियों की जगह 'श्रेय बांटनेÓ और मौन रहकर कार्य करने वाले नींव के पत्थरों का आभार जताने हेतु शिक्षित करता है। नवीन और बलराम मूर्तिकार बनने की चाहत में शहर आये।

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