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आईपीएल के जोश के साथ बढ़ता आईपीएल

नोखा, श्रीडूंगरगढ़, नापासर में भी सटोरियों ने मजबूती के साथ कदम जमा रखे हैं

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बीकानेर। इंडियन प्रीमियम लीग का नशा जैसे जैसे चढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे बीकानेर में सट्टेबाज बीकानेर में चांदी कूट रहे हैं। गरीब और अनपढ़ लोग जहां अपना सब कुछ दावं पर लगा रहे हैं, वहीं धनाढ्य सट्टेबाज जमकर रुपए बटोर रहे हैं। पुलिस ने कार्रवाई तो शुरू की है लेकिन सट्टेबाज उनसे दो कदम आगे हैं।
एक अनुमान के मुताबिक अकेले बीकानेर में करोड़ों रुपए का सट्टा खेला जा रहा है। जिसका बड़ा हिस्सा बीकानेर शहरी क्षेत्र का है। इसके अलावा नोखा, श्रीडूंगरगढ़, नापासर में भी सटोरियों ने मजबूती के साथ कदम जमा रखे हैं। पिछले दिनों सदर थानाधिकारी का जिम्मा बदलने के साथ ही एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया था लेकिन इसके बाद से स्थिति जस की तस है।
हाइटेक है सटोरिये
बीकानेर सहित देशभर में सटोरिये हाइटेक हो चुके हैं। इनके पास अत्याधुनिक संसाधन है, इधर से उधर होने के लिए पूरे इंतजाम है। पुलिस को सूचना मिलने से पहले ही सटोरिए गायब हो जाते हैं।
बाहर जाकर करते हैं सट्टा
बीकानेर के सटोरियों ने शहर के बजाय आसपास के कस्बों को अपना निशाना बनाया है। यही कारण है कि नापासर में बुधवार को पुलिस ने बीकानेर के युवाओं को गिरफ्तार किया। इसमें रानी बाजार निवासी दीपक मैनी और सिटी कोतवाली के पीछे रहने वाले गजेंद्र भाटिया को गिरफ्तार किया। इनसे बारह मोबाइल जब्त किए गए। करीब दस हजार रुपए बरामद किए गए हैं।
आठ जुआरी भी धरे
उधर, सदर पुलिस ने रविवार को आठ जनों को जुआ खेलने के आरोप में गिरफ्तार किया है। तीन अलग अलग मामलों में गिरफ्तार इन लोगों में कैलाश, संजय, दिनेश, नरेंद्र, अब्दुल, दुलाराम, सलीम व अन्नू को गिरफ्तार किया है। पुलिस की रिपोर्ट में इनके नाम शार्ट में दिए गए हैं।

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नाटक में किया जिंदा सांप का इस्तेमाल, काटने से अभिनेत्री की मौत

बारासात ( पश्चिम बंगाल ), नौ मई! पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले में एक नाटक के दौरान जिंदा सांप का इस्तेमाल किया जा रहा था , जिसके काटने से 63 वर्षीय एक अभिनेत्री की मौत हो गई।
यह घटना कल रात हसनाबाद पुलिस स्टेशन के बारूनहाट गांव में हुई।
पुलिस ने बताया कि अभिनेत्री कालीदासी मंडल को सांप के काटने के बाद अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
वहीं अभिनेत्री की एक सह कलाकार ने आरोप लगाया कि इस घटना के बाद एक ओझा ने उन्हें ठीक करने की कोशिश की थी लेकिन वह नाकाम रहा।
सह अभिनेत्री ने बताया कि मंडल को एक स्थानीय प्राथमिक अस्पताल में ले जाया गया लेकिन तब तक उसकी मौत हो गई।
भारत में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां लोगों का विश्वास है कि ओझा मंत्र पढ़कर और औषधी का इस्तेमाल करके ऐसे लोगों का इलाज कर सकता है , जिन्हें जहरीले सांप ने काटा हो।
पुलिस ने बताया कि अभी तक किसी ने इस संबंध में शिकायत नहीं दर्ज कराई है लेकिन वह इस मामले की जांच कर रहे हैं।
नाटक मंसामंगल काव्य पर आधारित था। इसमें सांपो की देवी मंसा की कहानी है।

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फिल्म सिमरन से ज्यादा किरदार सिमरन की जीत है ये

कंगना रानावत इन दिनों फेमिनिस्ट का नया और मजबूत प्रतीक हैं। वो कंगना जिसने अपनी बेबाकी से सभी को नचा रखा है। जिन हरकतों को फिल्म उधोग में अक्सर बचकाना कहा जाता है, उसी हरकतों से उसने कइयों की ढकी परते उघाड़ दी है। इंग्लिश नही आती तो इसका शोक न मनाकर शुद्ध हिंदी में बोल बोल कर उसका जश्न मना रही है। बड़े बैनर फिल्म नही देते, तो उसका जवाब भी बाकी सभी जवाबो की तरह उसके पास है। क्वीन के क्लाइमैक्स में जिस तरह वो थेँक्यू बोल कर आगे बढ़ी थी, वैसे जीवन में बढ़ नही पा रही। अटक गई है। जिन-जिन से उसके बुरे अनुभव है, उन सब को उसने कटघरे में खड़ा किया है। हालांकि ये सब एक पक्षीय बयानबाजी है, पर इसके लिए भी जो जरूरी साहस चाहिए था, वो कंगना ने दिखाया है। उसी क्वीन कंगना की फिल्म को देखने के लिए उस दिन के शो में मेरे अलावा कोई नही था। पूरा का पूरा हॉल खाली था। समझ में आया कि सोशल मीडिया और चैनल पर बना माहौल बहुत बार उससे बाहर नही आता। फिल्म रिलीज से ठीक पहले कंगना का सनसनी वाला इंटरव्यू फिल्म को चर्चा में न ला सका। वैसे ही जैसे दंगल को लेकर राष्ट्रवादियों के फतवे और बहिष्कार का फिल्म पर कोई फर्क नही दिखा। दंगल हिन्दी सिनेमा की सबसे सफल फिल्म बनकर सामने आई। इस देश के जनतंत्र का लोकतंत्र उतना सरल दिखता नही, जितना लोगो ने समझ लिया है। 
 
बहरहाल, फिल्म सिमरन अपनी शर्तों पर जीने वाली एक तलाकशुदा गुजराती लड़की प्रफुल्ल पटेल की कहानी है जो होटल में सफाई का काम करती है पर सबको बताती ये है कि वह ‘हाउसकीपिंग’ के जॉब में है। घर खरीदना है पर पैसे कम है। लोन नही मिलता और एक दिन जुए में अपने सारे पैसे भी हार जाती है। गलत आदमी से कर्जा लेती है और उसे फिर उसे चुकाने के लिए बैंक लूटने लग जाती है। कहानी संदीप कौर नामक एक एनआरआई महिला की कहानी पर आधारित है जो बैंल लूट के मामले में अमेरिका में जेल की सजा काट रही हैं उन्हें वहां बॉम्बशैल बेंडिट के नाम से भी जाना जाता था। इस स्टोरीलाइन से ही फिल्म कमजोर लग रही है पर एक बात साफ है कि इसकी मेकिंग आम फिल्मों जैसी नही है। कथ्य से ज्यादा ये अनुभवों की कहानी है। इस वजह से ही ये एक प्रॉपर शेप में नही है। बिखरी हुई है। इसलिए ही इसे ज्यादा पसंद नही किया जा रहा। दरअसल प्रॉपर शेप किसी कहानी का होता है, अनुभवों का नही। ये अनुभवों और ऑब्जर्वेशन की फिल्म है। ये हम सब से होने वाली गलतियों की फिल्म हैं। फिल्म ये नही बताती कि आप अच्छे बनो। फिल्म ये बताती है कि जमकर गलतियां करो। गलतियों से सीखो और अगर न भी सीख पाओ तो भी क्या बड़ी बात। फिर से गलती कर दो। जीवन स्वेत मारडेन या शिव खेड़ा की प्रेरणादायक किताब नही होती। जीवन हमारे छोटे छोटे खट्टे-मीठे अनुभवों की दैनिक डायरी होती है जिसमे हमारी कमजोरियों को जगह मिलती है। इसमें हमारी बुराइयां, हमारी असफलताएं, हताशाएँ दर्ज होती है। हम ताउम्र ग्रे शेड में ही जीवन निकालते है। सिनेमा और किताबो ने हमारे जीवन के ग्रे शेड को खा लिया है। फिल्में और किताबे हमें महामानव बनने की दौड़ में खड़ा करती है जबकि धरातल पर हम सब ऐसे नही है। हम थोड़े अच्छे, थोड़े बुरे लोग है। गलतियां करने वाले लोग है। ठोकरे खा खा कर संभलने वाले लोग है। प्रफुल्ल पटेल उर्फ सिमरन भी जीवन में बार बार गलतियां करती है। लगातार गलती करती है। मुसीबतों में पड़ती है पर अकेले ही इस जद्दोजहद में जूझती रहती है। ये कहानी यूएस की जमीन पर उगी है पर उसकी मुसीबतों में पड़ना और उससे बाहर आने की जद्दोजहद हमें कामकाजी भारतीय महिलाओं और लड़कियों की याद भी दिलाती है। फिल्म में सिमरन को अंत तक महान या आदर्श की तरह नही दिखाया गया है जैसा कि आम तौर पर दिखाया जाता है। वो अंत तक गलतियां करने वाली लड़की ही बनी रहती है। ये विचार और ये अंत फिल्म की जान है। सिमरन फिल्म से ज्यादा सिमरन किरदार की जीत है। निर्देशक हंसल मेहता और कँगना से भी ज्यादा की ये प्रफुल्ल पटेल नाम के किरदार की जीत है। निर्देशक हंसल मेहता का थोड़ा साथ और इसे मिलता तो ये और ज्यादा समय तक याद रखे जाने वाली फिल्म होती। फिल्म के बहुत से दृश्य सहेजने वाले है। पुलिस को चकमा देकर भागना और फिर आगे जाकर एक सूनसान सड़क पर खुद ही पुलिस को फोन करके बुलाना और इसका कारण पूछने पर बताना कि जहा से भागी, वहां मा-बाप का घर था। वहां पकड़ी जाती तो माँ-बाप की इज्जत खराब होती। फिल्म के क्लाइमैक्स में जब नाराज बाप आम फिल्मों की तरह अब अच्छा बाप बनकर बेटी से ये कह रहा होता है कि अब तुम मेरा बिजनेस संभालो और अब वही होगा जो तुम चाहती हो। ये आदर्श भारतीय क्लाइमेक्स की आदर्श टोन और शेड है। अब कंगना अपने स्वभाव वाला जवाब देती है कि वो ये बिजनेस बेच कर शेयर मार्केट में पैसा लगाएगी और बाप अच्छी टोन से वापिस बाहर आकर फिर से लड़ाई शुरू कर देता है। ये ही असली जीवन के किरदार है। हमारे अपने आस पास के किरदार। घूम-फिर कर अपने मूल स्वभाव की और लौटते किरदार। अच्छाई-बुराई के व्याकरण से दूर ग्रे शेड के किरदार। अच्छे होते होते बुरे बन जाते किरदार और बुराई से बहुत बार रोशनी की टार्च फेंक चौंकाने वाले किरदार। कंगना के अलावा फिल्म में कोई बड़ा नाम नही था और फिल्म थी भी कंगना के ऊपर ही। कंगना इस तरह की फिल्मो की खिलाड़ी हो गई है। फेमिनिस्ट सब्जेक्ट उसके पाले में आई हुई बॉल है जिसपर वो हमेशा आगे बढ़ कर छक्का लगाती है। कंगना ने फिल्म में खूबसूरत काम किया है। वो इन दिनों फेमिनिस्ट का नया और मजबूत प्रतीक हैं और इसका लाभ भी इस तरह की फिल्म को मिल जाता है।
कंगना को ध्यान में रख कर अब फेमिनिस्ट सब्जेक्ट की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है। थोड़े समय बाद फेमिनिस्ट की सबसे बड़े प्रतीक लक्ष्मी बाई के रूप में भी वो पर्दे पर आ ही रही है। कंगना के साथ सबसे गलत यही हो रहा है कि वो क्वीन के अपने किरदार रानी पर ठहर गई है। उससे बाहर नही आ पा रही। उसे क्वीन को अपना जरूरी पड़ाव मानना था पर वो उसके मोह में पड़ गई है। उसे इस फेमिनिस्ट के तमगे को थेँक्यू बोल कर आगे बढ़ने की जरूरत है।
 
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जीएसटी का विनिर्माण पर प्रतिकूल असर, निवेश पटरी पर आने में हो सकती है देरी: आरबीआई

नई दिल्ली,  भारतीय रिजर्व बैंक ने आज कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के कार्यान्वयन से विनिर्माण पर प्रतिकूल असर पड़ा है और इससे निवेश को पटरी पर आने में देरी हो सकती है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने उम्मीद जताई है कि इस नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली का सरलीकरण होगा ताकि कारोबारी प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके।
रिजर्व बैंक ने 2017-18 के लिए अपनी चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा आज जारी की। इसमें इसने मौजूदा वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है जो पहले 7.3 प्रतिशत था।
बैंक ने कहा है कि जीएसटी से जुड़ी शुरुआती दिक्कतों व दायरे संबंधी बाधाओं को अपेक्षाकृत जल्दी सुलझा लिया जाएगा जिससे दूसरी छमाही में वृद्धि को बल देने में मदद होगी।
केंद्रीय बैंक ने कहा है,जीएसटी के कार्यान्वयन का अब तक तो प्रतिकूल असर ही नजर आ रहा है जिससे विनिर्माण क्षेत्र का परिदृश्य फौरी तौर पर अनिश्चित हुआ है। इससे निवेश गतिविधियों के पटरी पर आने में और देरी हो सकती है जो कि पहले ही बैंकों व कारपोरेट कंपनियों की बैलेंस शीट को प्रभावित कर चुकी है।
उल्लेखनीय है कि विनिर्माण क्षेत्र विशेषकर पूंजीगत सामान खंड के खराब प्रदर्शन के चलते औद्योगिक उत्पादन जुलाई महीने में सिर्फ 1.2 प्रतिशत बढ़ा जबकि एक साल पहले यह बढ़ोतरी 4.5 प्रतिशत रही थी।
औद्योगिक उत्पादन को दर्शाने वाले सूचकांक में विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा 77.6 प्रतिशत है। विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर जुलाई में घटकर 0.1 प्रतिशत रही जो कि 2016 के जुलाई महीने में 5.3 प्रतिशत थी।
उल्लेखनीय है कि जीएसटी का कार्यान्वयन एक जुलाई से किया गया है।
सरकार ने जीएसटी के कार्यान्वयन के पहले ही दो महीने में जीएसटी के रूप में लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपए का संग्रहण किया हालांकि छोटे कारोबारी व निर्यातक कड़े अनुपालन नियमों के खिलाफ शिकायत कर रहे हैं।

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