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'सफलता निजी अनुभूति है'

सफलता का तात्पर्य है श्रेष्ठ लक्ष्यों को निरंतर, बिना रुके प्राप्त करते जाना. सफलता प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा है - मेंटल केओस या मस्तिष्क में बिखराव. हमने कुछ धारणाएं बना राखी हैं और हम उन्हीं को सत्य मान बैठे हैं. एक बच्चे ने अपने पिता से कहा कि वो रोजाना अपनी टेबल को जमाता है लेकिन अगले दिन वो फिर से बिखर जाती है. ऐसा क्यों होता है? पिता ने समझाया कि यदि वो पुस्तक को उठाकर टेढा रख दे या पेन्सिल को उठाकर इधर से उधर कर दे तो क्या होगा? बच्चे ने कहा कि उसके दोस्तों और अध्यापकों ने उसे सिखाया है कि यह बिखराव है. पिता ने समझाया कि अन्यों द्वारा बनाये गये स्टैंडड्र्स की नकल करना मूर्खता है. वास्तविक बिखराव टेबल पर नहीं अपितु बच्चे के मस्तिष्क में है क्योंकि उस बच्चे ने यह धारणा बना रखी है कि जमी हुई टेबल ही श्रेष्ठ है. दूसरों के विचारों या मानदण्डों की नकल नहीं करें. 

उदाहरण से यह स्पष्ट है कि बिखराव हमारे मस्तिष्क में होता है. हमने किसी एक आकृति या व्यवस्था या क्रम को सही मान लिया है. वही क्रम या व्यवस्था सही हो, यह जरूरी नहीं है. वह निश्चित क्रम या व्यवस्था हमने स्वयं ने नहीं अपितु किसी अन्य ने बनाकर हमारे मस्तिष्क में डाली है. हमने कुछ मानदंड बना रखे हैं. ये मानदण्ड स्वयं के द्वारा या समाज के प्रेशर के कारण बना लिये जाते हैं और हम उन मानदण्डों को पूरा करने हेतु अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं. यही तो समस्या है कि सफलता के या प्रसन्नता के पैमाने हमने खुद ने नहीं बनाये हैं. उन्हें औरों ने बनाया है. और जब हम उस पैमाने तक नहीं पहुंच पाते तो निराश हो जाते हैं.
एक विद्यार्थी जिसकी दिलचस्पी विधिवेत्ता बनने में है, उसे हम जबरन विज्ञान पड़ा कर पशुओं का डॉक्टर बना देते हैं. फिर उससे पूछते हैं कि क्या वो सफल या प्रसन्न है? वो प्रसन्न नहीं होगा क्योंकि खुशी का जो मानदंड उस विद्यार्थी ने बनाया था वह तो पूरा हुआ ही नहीं. ऐसे पैमाने नहीं बनायें जो कष्टकारी हों.
जीवन बहुत छोटा है. सफलता एक निजी अनुभूति है. प्रत्येक व्यक्ति अलग - अलग लक्ष्य प्राप्त करके सफलता महसूस करता है. प्रत्येक व्यक्ति के सफलता के पैमाने अलग - अलग होते हैं. खुद पर अत्यधिक दबाव न डालें. लोगों के बनाये पैमानों की प्रवाह न करें. स्वयं का पैमाना बनायें. प्रसन्न रहना सीखें. ईश्वर ने जो दिया वही उचित है का भाव ही संतोष देता है. संतोष के आगे सब व्यर्थ है. यही जीवन प्रबंध है.

DNR Reporter

DNR desk

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