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'विजेता कौन?'

एक विश्वविजेता सम्राट ने एक तपस्वी को तपस्या करते देखा. सेनानायक ने बताया कि तपस्वी बहुत बड़ा संत है. सम्राट ने तुरंत ही तपस्वी को प्रस्थान हेतु तैयार होने को कहा. सम्राट ने तपस्वी से कहा कि उसके चमत्कारों के कारण वो उसे अपने साथ लेकर जाना चाहता है. तपस्वी ने मुस्कुराते हुए ना कह दिया. सम्राट क्रोधित हो गया और उसने अपनी तलवार तपस्वी की गर्दन पर रख दी और गुस्से में पूछने लगा कि तपस्वी चलेगा या नहीं? तपस्वी ने कहा कि वो गुलामों के साथ नहीं जा सकता. आश्चर्यचकित सम्राट ने पूछा कि यहाँ गुलाम कौन है? तपस्वी ने कहा कि सम्राट अपने क्रोध और अपनी इन्द्रियों का गुलाम है. जो सम्राट अपनी इन्द्रियों पर और अपने क्रोध पर ही विजय प्राप्त न कर सका वो विश्वविजेता कैसे हुआ? वह तो पराजित गुलाम ही हुआ. सम्राट शांत हो गया और चला गया. वह समझ गया कि विजेता वही है जिसने अपनी इन्द्रियों और क्रोध को वश में रखना सीखा हो. 

कथा से स्पष्ट है कि विजेता वह नहीं है जिसने अन्यों को जीत लिया हो. विजेता वह है जिसने अपनी इन्द्रियों को, मन को और अपने क्रोध को जीत लिया हो. इन्द्रिय निग्रह आसान नहीं है. मन को वश में करना या क्रोध प्रकट नहीं करना; बहुत मुश्किल है लेकिन हम यह कर सकते हैं. यदि हमें अपने क्रोध पर नियंत्रण करना हो या अपनी इन्द्रियों पर विजय पानी हो तो उसके निम्नलिखित उपाय हैं-
* उत्तम स्वाध्याय करना, अच्छी पुस्तकें पडऩा. श्रेष्ठ साहित्य जीता जागता देवता होता है. इनके अध्ययन से परिपक्वता और चरित्र का निर्माण होता है.
ड़ कुंठित होने से बचना अत्यावश्यक है. कुंठा क्रोध को जन्म देती है. कुंठा का प्रमुख कारण है ईर्ष्या, तुलना, और नकारात्मक नजरिया. इससे बचने के लिए योग, प्राणायाम किया जा सकता है. मैदान में जाकर खेलना भी तनाव और क्रोध को कम कर सकता है.
* स्वयं अपने कार्य में इतनी उत्कृष्टता लाने का प्रयत्न करना कि दूसरों के कृत्यों का ख्याल ही न रहे अर्थात तुलना, ईष्र्या, अन्य जनों के कृत्य आदि के लिए कोई समय शेष नहीं रहना चाहिये.
* सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी से भाग लेना. समाज से जुड़कर समाजोत्थान का कार्य करने से मन में लगता है कि हम समाज को कुछ दे रहे हैं. यह भाव आनंद का संचार करता है.
यहां मन्त्र यही है कि कोध पर नियंत्रण और इन्द्रियों पर जीत ही व्यक्ति को स्थिरचित्त और परिपक्व बनाती है. बिना वजह छोटी - छोटी बातों पर क्रोध करने से बचें. ईष्र्या न रखें. विजेता वही होगा जो क्रोध को जीतेगा. यही सत्य है.

DNR Reporter

DNR desk

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