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'जीवन, मृत्यु और योगदान'

प्राचीन कथा के अनुसार भगवान विष्णु शिवजी से मिलने गये। विष्णु के वाहन गरुड़ बाहर उनका इंतजार कर रहे थे। तभी गरुडज़ी की नजर द्वार के ऊपर बैठे कबूतर पर पड़ी। कबूतर भय से कांप रहा था। गरुडज़ी के पूछने पर कबूतर ने कहा कि कुछ देर पूर्व यमराज भी भगवान शिव से मिलने गये थे। उस समय उन्होंने कबूतर को देखकर अपने यमपाश को झटकाया और मुस्कुराकर कबूतर को देखा। इसका अर्थ है कबूतर की मृत्यु सुनिश्चित है। यह सुनकर गरुडज़ी ने कहा कि कबूतर को घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि गरुडज़ी उसे ऐसे पर्वत पर ले कर जायेंगे जहाँ कोई जीव रहता ही नहीं है। अत: वहां मृत्यु का भय ही नहीं रहेगा। यह कहकर गरुडज़ी कबूतर को बिठाकर उस पर्वत पर ले गये और उसे वहां छोड़ दिया। थोड़ी देर बाद जब यमराज आये तो उन्होंने गरुडज़ी से कबूतर के बारे में पूछा। गरुडज़ी ने बताया कि वो कबूतर अभी दिव्य पर्वत पर है। यमराज ने प्रसन्न होकर कहा कि उनकी चिंता यही थी कि वो कबूतर उस पर्वत पर कैसे पहुँच पायेगा क्योंकि उसी पर्वत से गिरकर उसकी मृत्यु होनी है। यमराज ने गरुडज़ी का धन्यवाद दिया। 

मृत्यु सुनिश्चित है और यही शाश्वत सत्य भी है। जीवन के प्रारम्भ होने का दूसरा अर्थ है मृत्यु का तय होना। जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु सुनिश्चित है अत: मृत्यु को स्वीकारने में कैसा भय या संशय? यह तो अवश्यम्भावी है। मूल प्रश्न यह नहीं है कि जीवन की सीमा कितनी लम्बी है या आप कितने वर्षों तक जीवित रहे? प्रश्न यह है कि इस जन्म और मृत्यु होने के अंतराल में आपने ऐसे क्या कार्य किये जिससे परिवार, समाज और राष्ट्र को कुछ प्राप्त हुआ? पूर्वजों पर गौरव करने की बात कहने वाले यह कब समझेंगे कि हमने ऐसा क्या किया है कि हमारी संतान हम पर गर्व कर सके।
जरा सोचिये कि-
* आज दिन तक आपने समाज को क्या दिया?
* आपका ऐसा कौनसा कृत्य है जो मृत्यु के उपरान्त लोगों को याद रहेगा?
* यदि इसी पल आपकी मृत्यु हो जाये तो आपको किस रूप में जाना जायेगा?
* क्या परिवार के अलावा ऐसा एक भी व्यक्ति है जिसके जीवन के निर्माता आप हैं?
* आपकी मृत्यु होने पर परिवार, मित्र और रिश्तेदारों के अलावा कितने लोगों की आँखों में आंसू होंगे?
* मृत्यु होने से पूर्व क्या आपने अपने महान राष्ट्र हेतु कुछ किया है?
इन प्रश्नों का उत्तर यह तय करता है कि आपका योगदान क्या है? यहां मन्त्र यही है कि जीवन - जन्म से मृत्यु तक की एक यात्रा है जिसका समय निश्चित है। इस यात्रा के दौरान समाज और राष्ट्र को इतना ज्यादा दीजिये ताकि आप युगों - युगों तक लोगों के हृदयों में बसे रह सकें। यही जीवन का सार है।

DNR Reporter

DNR desk

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