Menu

'सांचे में न ढाले'

एक राजा अपनी श्वास सम्बन्धी बीमारी से बड़ा ही दुखी था। अपने दुखों के निवारण हेतु वो गुरूजी से मिलने पहुंचा। गुरूजी ने उसे सलाह दी कि वह हरे रंग की चीजों को ज्यादा से ज्यादा देखे। राजा ने मंर्तियों से कहकर राज्य की हर इमारत, फर्नीचर, वृक्ष के तने आदि को हरे रंग से पुतवा दिया। प्रजा हेतु शहर में हरे रंग के वस्त्र पहनकर चलना कानूनन लागू कर दिया। इतना होने के बावजूद जब बीमारी ठीक नहीं हुई तो राजा वापिस गुरूजी के पास गया। गुरूजी ने राजा को समझाया कि हरे रंग की चीजों को ज्यादा देखने का अर्थ था - प्रकृति से जुड़ाव और बाग बगीचों व जंगल आदि में घूमना ताकि फेफड़ों को ताजा वायु मिले और श्वास सम्बन्धी रोगों का निदान हो। गुरूजी ने कहा कि समूचे राज्य को हरा पुतवाने की बजाय हरा चश्मा भी तो पहना जा सकता था।
यह एक मैनेजमेंट सिखाने वाली प्रेरक कथा है। इस कथा का मर्म यह है कि :


* स्वयं को बदलना अच्छा है। समूचे संसार को बदलने का प्रयास मूर्खता है। राजा ने समूचे संसार को बदलने का मूर्खतापूर्ण प्रयास किया जो गलत है।
* मैनेजमेंट हर कर्मचारी को अपने बनाये सांचे में या फ्रेम में ढालना चाहता है। जैसा राजा ने सभी को हरे रंग में पुतवायाए ठीक उसी तरह। ऐसे में मैनेजमेंट को सोचना चाहिये कि प्रत्येक कर्मचारी की शक्ति, क्षमता, दिलचस्पी और कार्य करने का अंदाज भिन्न होता है। जब पाँचों अंगुलियाँ एक सी नहीं हैं तो सभी कर्मचारी एक जैसे कैसे हो सकते हैं?ï सभी को एक फ्रेम या सांचे में ढालने जैसा मूर्खतापूर्ण फरमान कष्टप्रद हो सकता है।
* यह नियंत्रण केन्द्रित मैनेजमेंट है जिसमे जो बॉस ने कहा वही सही है। कर्मचारी भय के चलते ऐसे फरमान एक बार स्वीकार तो कर लेते हैं लेकिन वे इस ताक में रहते हैं कि कब इस फरमान से छूटने का मौका मिले। इस परिस्थिति में लीडर को कर्मचारियों से सम्मान नहीं मिलता।
* नियंत्रण प्रधान मैनेजमेंट प्रणाली विनाशकारी होती है क्योंकि यह प्रणाली समूचे संगठन में अविश्वास का बीजारोपण कर उसमे अविश्वास की खेती को बल देती है। अत: प्रेमपूर्ण सम्बन्ध समाप्त हो जाते हैं और सभी कर्मचारी रोबोट में परिवर्तित हो जाते हैं। यहाँ मूल मन्त्र यह है कि मैनेजमेंट को सकारात्मक दृष्टिकोण से कार्मिकों को देखना चाहिये। अयोग्य या कम कार्य करने वाले कार्मिक की मूल समस्या को समझना चाहिये कि वह काम क्यों नहीं कर पा रहा- अयोग्यता के कारणों को समझकर उसे प्रेम से समझाना उचित है। डांट, फटकार, लड़ाई, नोटिस आदि से ज्यादा मुफीद समाधान है प्रेमपूर्वक वार्तालाप तथा मूल समस्या को समझकर उसका प्रेम से निपटारा।

DNR Reporter

DNR desk

Leave a comment

Make sure you enter the (*) required information where indicated. HTML code is not allowed.

back to top

Bikaner Trusted News Portal

  • Bikaner Local News
  • National News
  • Sports News
  • Bikaner Events
  • Rajasthan News