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'प्राथमिकता क्या है?

एक महिला ने एक तोता खरीदा। विक्रेता ने कहा कि तोता बड़ा वाचाल है। पहले दिन जब तोता एक शब्द नहीं बोला तो महिला ने विक्रेता से इसकी शिकायत की। विक्रेता ने महिला को कहा कि वो पिंजरे में शीशा लगा दे तो तोता बोल पड़ेगा। तोता नहीं बोला। दूसरे दिन विक्रेता ने एक छोटी सीढ़ी पिंजरे में रखने को कहा। तोता फिर भी नहीं बोला। तीसरे दिन विक्रेता ने पिंजरे में झूला रखने को कहा लेकिन तोता झूला देख कर भी नहीं बोला। चौथे दिन तोता मर गया। जब महिला ने विक्रेता से इसकी शिकायत की तो विक्रेता ने महिला से तोते को दिये गये आहार की जानकारी मांगी। महिला ने धीरे से दुखी होकर कहा कि उसने तोते को आहार तो दिया ही नहीं। जीवन की सबसे बड़ी प्राथमिकता थी- आहार। वह नहीं दिया तो बाकी सब दिया जाना निरर्थक रहा। महिला प्राथमिकता नहीं तय कर सकी कि तोते को क्या देना है।


इस कथा से यह संकेत मिलता है कि यदि हम प्राथमिकताएं तय नहीं करेंगे तो इसका परिणाम घातक होगा। करियर, परिवार, स्वास्थ्य, नेटवर्क, समाज, कार्यस्थल आदि समस्त क्षेत्रों हेतु हमारे पास में लिखित प्राथमिकता सूची होनी चाहिये जिससे हम हमारे लक्ष्य को निर्बाध रूप से प्राप्त कर सकें। वास्तव में महत्वपूर्ण कार्यों के स्थान पर अनर्गल और व्यर्थ कार्यों में व्यस्त होना मूर्खता का संकेत है। "हम बहुत व्यस्त हैं"। यह बेकार बात है। "हम महत्वपूर्ण और उत्पादक कार्यों को करने में व्यस्त हैं"। यह श्रेष्ठ बात है। व्यस्त तो जानवर, कीड़े मकौड़े, पक्षी भी हैं लेकिन क्या उनका कार्य उत्पादक है? हम जो भी कार्य करें उसको करने के पीछे एक लक्ष्य होना चाहिये और उस कार्य से इन प्रश्नों का उत्तर मिलना चाहिये।
* क्या ये कार्य सही है?
* क्या इस कार्य से मेरा या संगठन व समाज का हित होगा?
* क्या यह कार्य किसी के जीवन में सुधार ला सकता है?
* क्या इस कार्य को करने से किसी एक व्यक्ति को भी लाभ हो सकता है?
हम इस भौतिकतावादी दौर में उन कार्यों को प्राथमिकता नहीं दे रहे जिन्हें वास्तव में प्राथमिकता देनी चाहिये। अर्थ प्रधान युग जहां धन का अर्जन और संपत्ति का वर्धन ही प्रमुख हो चला है, वहां हम भी इसी अंधी दौड़ का अंग बन चुके हैं। परिवार, मित्रों, दु:ख सुख में काम आने वाले सज्जनों से मिलना हमारी प्राथमिकता सूची से गायब है। स्वास्थ्य में लगातार गिरावट है। यहां मन्त्र यही है कि धन और कीर्ति को प्राप्त करने की दौड़ में कहीं हम अपनी वास्तविक प्राथमिकता अर्थात परिवार, स्वास्थ्य और प्रेमी जनों के स्नेह को न खो देवें, यह ध्यान रखना जरूरी है।

DNR Reporter

DNR desk

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