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'ऑर्थोडॉक्स संस्थान'

आपने देखा होगा कि दफ्तर में कई कर्मचारी अत्यधिक व्यस्त और कार्य से घिरे हुए दिखते हैं। ये कर्मचारी देर तक दफ्तर में डटे रहते हैं। ऐसा करने से उनके सीनियर्स को लगता है कि वे बड़ी निष्ठा से अपना कत्र्तव्य पालन कर रहे हैं। भारत में अधिकांश संस्थान ऑर्थोडॉक्स आधार पर कार्य करते हैं। ऑर्थोडॉक्स संस्थान को देसी भाषा में लाला की दुकान भी कहा जाता है। ऐसे संस्थानों में संस्थान गौरव, कार्य संस्कृति, कार्मिक उत्पादकता आदि शब्दों का प्रयोग वर्जित है। यहां तो लाला जी का फायदा और उनके निकट रहना ही हर कर्मचारी का प्रथम और आखिरी लक्ष्य होता है। ऐसी अवस्था में यदि आप बहुत तेज गति से अपने सभी कार्यों को पूर्ण कर लेते हैं अर्थात ओवर एफिशिएंसी रोग के शिकार हैं तो सावधान होने का समय आ गया है। ऐसे संस्थानों में आपको सिर्फ कार्य पूर्ण नहीं करना है अपितु हर पल कार्य कर रहे हो - ऐसा दिखाना भी जरूरी है। आप क्या हैं-यह महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह यह है कि आप स्वयं के कार्य व्यवहार से स्वयं को कैसा दिखाते या प्रस्तुत करते हैं। स्वयं को व्यस्त और कार्य में डूबा हुआ दिखाना भी कॉर्पोरेट में जरूरी है। यह आपको सीखना ही होगा।

स्वयं को सदा कार्य से परेशान दिखाना, कार्य से त्रस्त दिखाना - आज की आवश्यकता है। याद रहे कि श्रेष्ठ कार्य का एक जोरदार परिणाम है - और ज्यादा कार्य। स्वयं को कार्य में व्यस्त दिखाने का यह अर्थ कतई नहीं कि आप कार्य न करें। आप खूब मेहनत से कार्य करें लेकिन ऑर्थोडॉक्स संस्थान में व्यस्त न दिखना भी अपराध है। अत: ऑर्थोडॉक्स संस्थानों में अपना कार्य पूर्ण हो जाने के बाद भी स्वयं को निम्नलिखित तरीकों से व्यस्त दर्शायें -
* बॉस और कर्मचारियों के मध्य ज्यादा वर्कलोड का रोना सदा रोते रहें।
* सप्ताह में कुछ दिन देर तक ऑफिस में रुकें। लगना चाहिये कि बहुत काम है और आप जुटे पड़े हैं।
* अंतिम तिथि से पूर्व कोई एसाइन्मेंट जमा नहीं करें। भले ही वो पूर्ण हो चुका हो।
* ऑफिस के कम्प्यूटर पर सदा एक अधखुली ईमेल रखें ताकि लगे कि आप मेल करने में व्यस्त हैं।
* अपनी टेबल पर सदा 2 या 3 फाइल्स फैलाये रखें ताकि लगे कि आप बहुत व्यस्त हैं।
यहां मन्त्र यही है कि कार्य तो अवश्य करें लेकिन ये भी जतायें कि आप बहुत ही व्यस्त और कार्य से घिरे हुए कार्मिक हैं। कुर्सी से बंधे रहकर, स्वयं को अति व्यस्त दिखाकर और निस्संदेह श्रेष्ठ कार्य करके ही आप सफलता प्राप्त कर सकते हैं। यही कॉर्पोरेट मैनेजमेंट का शाश्वत सत्य है।

DNR Reporter

DNR desk

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