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'जीवन एक उत्सव'

जीवन क्या है और इसकी परिभाषा क्या है? जीवन की परिभाषा देना आसान नहीं है. क्या भोजन करना, प्रजनन करना, मकान बनवा लेना, बच्चों का विवाह कर देना और समाज में सुख - दु:ख के अवसरों में भाग लेना ही जीवन है? अधिकांश व्यक्ति इसी को जीवन मानते हैं. कुछ लोग धनार्जन को तो कुछ लोग आनंद के साथ जीने को ही जीवन मान लेते हैं. यह जीवन नहीं है. ये सभी कार्य (भोजन व्यवस्था आदि) तो पशु, पक्षी और कीट - पतंगे तक भी करते हैं. वास्तविक जीवन को हम जैसा परिभाषित करते हैं, हमारा जीवन वैसा ही बनता जाता है. 

जीवन एक संग्राम है : जो व्यक्ति ऐसा सोचते हैं उन्हें लगता है कि जीवन एक 'गला काटÓ प्रतिस्पर्धा है जहाँ प्रत्येक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति पर जीत हासिल करना चाहता है. ऐसा सोचना गलत नहीं है लेकिन ऐसे में प्रतिस्पर्धा का भाव महत्वपूर्ण हो जाता है. जहां प्रतिस्पर्धा है वहां टीमवर्क, सहयोग और समन्वय का लोप हो जाता है. ऐसे व्यक्ति पल प्रति पल और अधिक हासिल करने, प्राप्त करने और ऊंचा चढऩे की लिप्सा से आगे बढ़ते जाते हैं. उनमे अत्यधिक महत्वाकांक्षा होती है. जीवन को संग्राम या प्रतिस्पर्धा मानने वालों को सोचना चाहिये कि यदि वे शहर की सारी सीढिय़ों को मिलाकर एक ऊंचाई पर पहुँच भी जायें तो वे यह पायेंगे कि ऐसी ऊंचाई पर कोई भी नहीं रहता. अत: जीवन को सिर्फ संग्राम न समझें.
जीवन एक संघर्ष है : कुछ व्यक्ति जीवन को संघर्ष मानकर चलते हैं. जब संघर्ष का भाव होता है तो व्यक्ति को लगता है प्रत्येक संसाधन की प्राप्ति हेतु अथाह श्रम और संघर्ष करना ही पडेगा. यह उसकी नियति बन जाती है. यही से व्यक्ति में परस्पर द्वेष, क्लेश और कुटिलता का जन्म होता जाता है. यदि आप जीवन को संघर्ष मानते हैं तो यह कुछेक अर्थों में तो सही है लेकिन पूर्ण रूप से सत्य नहीं है.
जीवन एक उत्सव : तो आखिर जीवन क्या है? जीवन एक उत्सव है. इस उत्सव रूपी जीवन में हमें समाज और राष्ट्र के लिये कुछ योगदान देना चाहिये. जीवन की सार्थकता यह समझने में है कि-
* आपने अपने कर्तव्यों का कितनी उत्कृष्टता से पालन किया?
* आपके कारण कितने लोगों के चेहरे पर मुस्कराहट आई?
* आपने अपने माता पिता की सेवा किस मनोयोग से की?
* आप अपने बच्चों के लिए एक रोल मॉडल या हीरो बन पाये क्या?
यहां मन्त्र यही है कि जीवन का प्रति पल ईश्वर का आशीर्वाद है. प्रति पल जीयें. समाज के लिये जियें. राष्ट्र के लिये जियें. दूसरों की खुशी के लिये जियें. सुबह उठते ही आपके पैरों तले जमीन मिलना एक उत्सव से बढ़कर है क्योंकि इससे सिद्ध होता है कि आप जीवित हैं. जीवन के हानि - लाभ आदि को त्यागिये और जीवन्तता से जीना सीखिये. यही जीवन है.

DNR Reporter

DNR desk

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