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'सफलता और समाज'

एक साधु कुछ लोगों को पड़ा रहे थे। तभी साधु के गांव के दो व्यक्ति पधारे। दोनों व्यक्ति साधु के गाँव के होने के कारण साधु को भली भांति जानते थे। वे दोनों ही साधु के वर्तमान आभामंडल और उपलब्धियों से परिचित नहीं थे। अत: उन्होंने तुरंत ही साधु को कहा कि "गणपतिये, तू यहां बैठा क्या पाखण्ड कर रहा है। तुझ जैसा व्यक्ति यदि साधु है तो देश का क्या होगा"। यह कहकर वे हंसने लगे। 

यहां यह स्पष्ट हो गया है कि:
* व्यक्ति चाहकर भी अपनी पुरानी छवि को समाप्त नहीं कर सकता।
* समझने की बात यह है कि हमारे बचपन में, या सफलता के शिखर छूने से पूर्व जिन व्यक्तियों ने हमें जिस रूप में देखा होता है; वे बाद में भी हमें उसी रूप में देखते हैं। हमें उन्हें अन्यथा नहीं लेना चाहिये।
* लोगों के विषय में नकारात्मक बातें बोलना समाज की आदत है। इससे घबराएं नहीं।
* सफल व्यक्तियों को ज्यादा कष्ट, समस्या, व्यंग्यबाण और मुसीबतें झेलनी पड़ती हैं। जैसा कि उदाहरण से स्पष्ट है कि यदि गणपतिया साधु न बना होता तो उसे भी प्रतिकूल टिप्पणी नहीं सुननी पड़ती।
गोस्वामी तुलसीदास ने इस सन्दर्भ में कहा है कि:
तुलसी वहां न जाइये, जन्मभूमि के ठाम,
गुण - अवगुण चीन्हें नहीं, लेत पुरानो नाम।
इसका अर्थ है कि व्यक्ति को बड़ा या सफल बनकर अपने गाँव नहीं जाना चाहिये। उस गांव के लोग, उस व्यक्ति के बचपन के प्रेमीजन, उस सफल व्यक्ति के गुणों और क्वालिटी को नहीं समझ सकेंगे। उनके लिये तो वह ज्ञानी सफल व्यक्ति अब भी वही होगा जो वह बचपन में था।
यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ हद तक समाज को सफल व्यक्तियों को कोसने की आदत सी है। यह एक उदाहरण से स्पष्ट हो जाएगा। फुटबॉल खेलते समय कुछ बालक एक बच्चे को जानबूझकर परेशान करते थे। उसे टंगड़ी मारते, परेशान करते और हंसते रहते। वो बच्चा उस राज्य के सूबेदार का पुत्र था और तथा खेलकूद में निपुण था। जब उन बालकों से किसी ने पूछा कि वे उस बालक को तंग क्यों करते हैं तो उन लड़कों ने जवाब दिया कि सूबेदार पुत्र भविष्य में सूबेदार बनेगा। चाहे वो भविष्य में कुछ भी बन जाये लेकिन हम तो यही कहते रहेंगे कि हमने इसे खूब टंगड़ी मारी थे। यह निकृष्ट भाव है। ऐसे भाव होने से आप अपनी प्रगति को रोकते हैं। यहां मन्त्र यही है कि लोगों की, समाज की प्रतिकूल टिप्पणियों से न घबराकर कार्य करते रहें और यह स्वीकार कर लेवें कि जिस व्यक्ति ने आपको जिस दशा में देखा होगा, आप उसके लिये ताउम्र वही रहेंगे। जिस पेड़ पर सर्वाधिक आम लगे होंगे, उसी पेड़ पर सबसे ज्यादा पत्थर मारे जायेंगे। यही शाश्वत सत्य है।

DNR Reporter

DNR desk

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