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'अति भावुकता से बचें'

संगठनों में कार्य करना आसान नहीं है। नौकरी अर्थात सेवाधर्म को हमारे ग्रंथों में अत्यधिक मुश्किल बताते हुए यहां तक कहा गया है कि नौकरी तो योगियों के लिए भी निभाना मुश्किल है। इस बात के नेपथ्य में एक सूत्र है। वह सूत्र है कि - यदि संगठन में नौकरी करोगे तो वहाँ पर राजनीति भी होगी ही। कार्यस्थल की राजनीति से पार पाना बहुत ही आसान है यदि हम किसी के सॉफ्ट टारगेट नहीं बनें। सॉफ्ट टार्गेट का अर्थ है किसी का मोहरा बन जाना और स्वयं की अक्ल न लगाना। प्रत्येक कर्मचारी चाहता है कि बॉस सुधरे। कई कर्मचारियों को बॉस से अपने स्कोर सैटल करने होते हैं। ऐसे में वे सीधे तौर पर बॉस से न भिड़कर संगठन के किसी भावुक व्यक्ति को सॉफ्ट टारगेट बना कर उसका इस्तेमाल बॉस की मुखालफत करने में करते हैं। वे उस भावुक व्यक्ति को समझाकर या भड़काकर उसे बॉस के विरुद्ध वह बातें बोलने को कहते हैं जिन्हें असल में वे बोलना चाहते थे। वह भावुक जूनियर कर्मचारी जब तक यह समझ पाता है कि वो तो बॉस की खिलाफत में किसी का मोहरा है, तब तक राजनीति से प्रेरित व्यक्ति अपना काम कर चुका होता है। 

ऐसे में हमें स्वयं का विवेक इस्तेमाल करते हुए क्षण प्रतिक्षण खुद से यह प्रश्न करते रहना चाहिए कि मुझे अमुक व्यक्ति ने ऐसा क्यों कहा? इसके कितने अर्थ और परिणाम हो सकते हैं। मजदूरों की हडताल, राजनैतिक दलों द्वारा आयोजित बंद, और अनेकानेक धरना - प्रदर्शनों में कुछ भावुक लोग पिटते रहते हैं और राजनीति करने वाला उनका फायदा उठा के ले जाता है। सॉफ्ट टारगेट बनने वाले मूलतया भावुक और मूल्यवान लोग ही होते हैं। तेज, चतुर, डेढ़ होशियार व्यक्ति को कोई भी सॉफ्ट टार्गेट नहीं बनाता। चाणक्य नीति के अनुसार, सीधे वृक्षों को उपयोग हेतु तुरंत काट दिया जाता है लेकिन टेढ़े-मेढ़े वृक्षों को कोई नहीं काटता। इस इशारे को समझने की जरूरत है।
निष्कर्षत: हम यह कह सकते हैं कि कॉर्पोरेट जगत में भावुक होना अपराध से कम नहीं है। यहां जो मूल सूत्र है वो सिर्फ यही है कि हम प्रत्येक की सुनें। अपना रिएक्शन बिलकुल न देवें। फिर गहराई से व्यवहार की विवेचना करें और सोचें कि कहीं हमें सॉफ्ट टारगेट तो नहीं बनाया जा रहा है? भावुकता से नहीं, तार्किक होकर निर्णय लेवें। अपने कार्य को सौ फीसदी बेहतरीन बनाए रखें ताकि उसपर कोई प्रश्न चिन्ह न लगा सके। याद रहे, दूसरों का मोहरा बनने से आप अपनी मौलिकता खो देते हैं, इससे बचें।

DNR Reporter

DNR desk

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