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'बी द चेंज'

तालाब किनारे एक लड़के ने देखा कि एक बूढी महिला छोटे-छोटे कछुओं की पीठ को साफ कर रही थी। लड़के ने जब उस महिला से ऐसा करने का कारण पूछा तो महिला ने कहा कि कछुओं की पीठ पर जो कवच होता है उस पर कचरा जमा हो जाने की वजह से इनकी गर्मी पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है और कछुओं को तैरने में दिक्कत आती है। अत: वो कवच को साफ करते है। लड़के ने महिला से पूछा कि वो अकेली कब तक इन असंख्य कछुओं की पीठ साफ करेगी और इससे आखिर कितना परिवर्तन हो सकेगा? महिला ने बड़ा ही मार्मिक जवाब दिया कि भले ही उसके इस कार्य से से संसार में कोई बड़ा बदलाव नहीं आये लेकिन कछुए की जिन्दगी तो बदलेगी ही। 

छोटा ही सही पर सकारात्मक दिशा में चेंज होना सीखिये। जिन्दगी में बहुत सारे अवसर ऐसे आते हैं जब हम बुरे हालात का सामना कर रहे होते है। हम परिवर्तन की सोचते हैं लेकिन कर नहीं पाते। मन मसोसकर यही कहते हैं कि क्या किया जा सकता है? इतनी जल्दी तो सिस्टम को बदलना संभव नहीं है। ऐसा सोचकर वह कार्य भी नहीं करते जिससे समाज में कुछ नई क्रान्ति आये। इससे निकलिये। गांधीजी ने कहा है - 'बी द चेंजÓ। जो परिवर्तन आप समाज और राष्ट्र में लाना चाहते हैं उसे पहले खुद में लाइये। स्वयं से शुरुआत कीजिये।
* आप चाहते हैं कि लोग ट्रैफिक नियमों का पालन करें। उन्हें मत सिखाइये। स्वयं पालन करना प्रारम्भ कीजिये। खुद से पूछिये कि क्या आप हेलमेट लगाते हैं या सीट बेल्ट बांधते हैं? यदि नहीं तो क्रान्ति नहीं आयेगी।
* आप चाहते हैं कि नारी का सम्मान हो। बहन बेटियां पड़ें। आगे बड़ें।
जरा सोचिये कि क्या आप अपनी पुत्रियों को उच्च शिक्षा दे रहे हैं?
* आप चाहते हैं कि विवाह से फिजूलखर्ची मिटे। क्या आप अपने पुत्र का आडम्बर विहीन विवाह करवाएंगे?
* आप चाहते हैं कि दान के नाम पर समर्थ पुत्रियों और बहनों को टिफिन/नकद बांटना बंद हो। समाज में कईयों को आपके दान की आवश्यकता है और यह आवश्यकता उन बेटियों से अधिक है। क्या आप टिफिन या नकद बांटना रोक सकेंगे?
क्या पता आपका छोटा सा बदलाव कुछ क्रांति लेकर आये। हर बदलाव की शुरुआत स्वयं से होती है। कई बार तो सफलता हमसे बस थोड़ी ही दूर होती है कि हम हार मान लेते है। अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखें। कोई भी सकारात्मक परिवर्तन आसान नहीं होता। परिवर्तन में सदियां लगती हैं। आप परिवर्तन के संवाहक बनें तभी राष्ट्र प्रगति करेगा। 'बी ए चेंजमेकरÓ। यहाँ मन्त्र यही है कि अपनी क्षमताओं पर भरोसा रख कर किया जाने वाला कोई भी परिवर्तन छोटा नहीं होता। सिस्टम तभी बदलेगा जब हम खुद बदलने को तैयार होंगे।

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DNR desk

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