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'परिवार और जिम्मेदारी'

एक गरीब मजदूर को एक दिन मजदूरी नहीं मिली। वह बड़ा परेशान था। जब कुछ न मिल सका तो उसने सामने के बिल्व पत्र के पेड़ पर चढ़कर कुछ बिल्व पत्र तोड़कर उन्हें बेचने की सोची। यह सोचकर वह पेड़ पर चढ़ गया। पेड़ पर चढऩे के बाद उसे अपने सामने उसके भूख से बिलखते बच्चे, उसकी पत्नी और बूढ़े माता पिता का चेहरा घूमने लगा। यह सोचकर उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े। इसी दु:ख में उसके हाथ से एक बिल्वपत्र छिटककर नीचे गिर गया। पेड़ के नीचे जहां पर बिल्व पत्र गिरा, वहां पर एक शिवलिंग था। उस मजदूर के आंसुओं की धार ने उस शिवलिंग का अभिषेक कर दिया। तभी अचानक एक सर्प ने मजदूर को डस लिया और मजदूर मर गया। यमदूत जब मजदूर को जब स्वर्ग के द्वार पर लाये तो स्वर्ग प्रभारी ने उसे स्वर्ग में लेने से मना करते हुए कहा कि मजदूर में कई बुराइयां है और वह स्वर्ग के काबिल नहीं है। तभी भगवान शिव प्रकट हुए। भगवान शिव ने कहा कि जिस व्यक्ति का हृदय अपने परिवार के लिये धड़कता हो, जिसमे परिवार के लिये जिम्मेदारी का बोध हो, उसे तो स्वर्ग मिलना ही चाहिये। मजदूर को स्वर्ग मिला। 

यही तो उत्तरदायित्व बोध या सेन्स ऑफ रेस्पोंसिबिलिटी कहलाता है। जब आप अपनी जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्ध होते हैं, ईश्वर सदा आपके साथ होता है। हो सकता है कि आपमें कई छोटे-बड़े दुर्गुण हों लेकिन यदि अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के लिये आपमें जिम्मेदारी का बोध है तो निश्चित जानिये कि आप पर ईश्वर की कृपादृष्टि रहेगी।
परिवार के लिये हृदय में करुणा का भाव होना ही पारिवारिक प्रेम को जन्म देता है। परिवार के भरण पोषण, उसकी उन्नति, माता पिता की सेवा, और आपसी सामंजस्य रखने का भाव ही परिवार को श्रेष्ठ बनाता है।
जरा सोचिये कि -
* क्या आपका परिवार आपके कृत्यों पर गर्व कर सकता है?
* कहीं आपके किसी कृत्य से परिवार के गौरव पर कलंक तो नहीं लगा है?
* क्या आप परिवार में अपनी आर्थिक, सामाजिक और भावनात्मक जिम्मेदारियों का निर्वहन ठीक प्रकार से कर पा रहे हैं?
* क्या आप स्वयं के स्वास्थ्य का उस स्तर पर ध्यान रखते हैं कि विपत्ति काल में आप सशक्त रूप से परिवार की सेवा कर सकें?
* कहीं आप और आपका स्वास्थ्य ही परिवार के लिये समस्या तो नहीं है?
इन प्रश्नों का उत्तर आपको बहुत कुछ समझा देगा। परिवार तब सशक्त होता है जब उसका प्रत्येक सदस्य स्वयं की जिम्मेदारियों के साथ ही अन्यों की भी जिम्मेदारी उठाने हेतु प्रतिबद्ध होवे। छोटी छोटी बातों को तिलांजलि देना, परस्पर समानुभूति का भाव होना और प्रति पल अन्य परिवारजनों को क्षमा करने का भाव ही सामान्य परिवार को श्रेष्ठ परिवार में परिवर्तित करता है।

DNR Reporter

DNR desk

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