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'गृहिणी - देश का गौरव'

एक व्यक्ति को कहीं से खजाना मिल गया। उसे लगा कि यदि उसकी पत्नी को यह पता चल गया तो शायद वो सारे मोहल्ले में इसका ढिंढोरा पीट देगी। पत्नियों पर बेकार के चुटकुले पड़-पड़ कर उस व्यक्ति ने यह धारणा बना ली थी कि महिलाएं धन की प्रेमी होती हैं। यह सोच कर उस व्यक्ति ने खजाने को अपने बरामदे मे गाड़ा और फिर उसपर मिट्टी डालने लगा। तभी उसकी पत्नी वहां पहुंची। उसने पूछताछ की तो पति ने खजाने के बारे में बताया। पत्नी का जवाब भारतीय राष्ट्र जीवन की महान परंपरा और गृहिणी के त्याग को दर्शाता है। पत्नी बोली कि 'यह तो अवैध तरीके से कमाया धन है। यह धन हमारे लिये मिट्टी है। आप इस मिट्टी पर और मिट्टी क्यों डाल रहे होÓ? यह है हमारे राष्ट्र की गृहिणी। 

भारतीय गृहिणियों का त्याग, उनका बलिदान, उनकी कार्यक्षमता और अद्भुत श्रम कर सकने की ताकत का तो विदेशी भी लोहा मानते हैं। वर्तमान में अनेकानेक मीडिया साधनों में पत्नियों पर जोक्स, चुटकुले आदि भेजने का चलन या ट्रेंड सा बन गया है। यह सही नहीं है। भारतीय गृहिणियां बचत, सेवा, संस्कार और त्याग की जीवंत देव प्रतिमाएं हैं। यह शाश्वत सत्य भी है। भारतीय समाज में नारी और विशेषतया पत्नी को सदा से ही उच्च स्थान प्राप्त है। सिन्धु घाटी सभ्यता में सर्वाधिक मूर्तियां स्त्रियों की मिली हैं। इतिहासकार कहते हैं कि सिन्धु घाटी सभ्यता मातृसतात्मक थी यानि महिलाओं का प्रभुत्व था। वैदिक काल को खंगालने पर पता चलता है कि महिलाएं सक्रीय रूप से सामजिक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में भागीदारी निभाती रही हैं। भारतीय बौद्ध शास्त्रों में गृहिणी या पत्नी के चार रूप बताये गये हैं-
1. मातृसमा अर्थात जो सभी के साथ सद्व्यवहार करे और माता के सामान व्यवहार रखे।
2. भागिनीसमा अर्थात जो सभी से भाई-बहन जैसा स्नेह रखे और सदा अन्यों की प्रसन्नता हेतु स्वयं का सुख न्योछावर करे।
3. चोरसमा अर्थात जो सम्पत्ति केन्द्रित हो और उपभोग करने मात्र को श्रेयस्कर समझे।
4. बधिकसमा अर्थात क्रोधी और अन्यों का अपमान करने को तत्पर।
भारतीय समाज में सिर्फ मातृसमा या भागिनीसमा गृहिणियां होती हैं। विदेशी उपभोक्तावाद से प्रभावित चोरसमा गृहिणियां परिवार को एक सूत्र में पिरो नहीं पाती। वर्तमान समय में यह सोचा जाना अनिवार्य है कि हमारा व्यवहार कैसा है? स्वान्त: सुखाय यानि सिर्फ मैं सुखी हो जाऊं तो विदेशी परम्परा है। यहां मन्त्र यही है कि भारतीय गृहिणी तो आज भी घर, समाज और राष्ट्र के कल्याण को ही सर्वोपरि मानती है। देश के विकास में इनकी सबसे बड़ी भूमिका है।

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