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'ईश्वर सर्वश्रेष्ठ मित्र'

एक फार्म में दो घोड़े रहते थे। वे एक से दिखते थे लेकिन उनमे से एक घोड़ा अंधा था। मालिक ने एक दूसरे घोड़े के गले में एक घंटी बांध रखी थी। घंटी की आवाज सुनकर अंधा घोड़ा उसके पास पहुंच जाता और उसके पीछे - पीछे बाड़े में घूमता। घंटी वाला घोड़ा भी अपने अंधे मित्र की परेशानी समझता था और उसका पूरा ख्याल रखता था। वह बीच-बीच में पीछे मुड़कर देखता और इस बात को सुनिश्चित करता कि कहीं अंधा घोड़ा रास्ता न भटक जाये। वह ये भी सुनिश्चित करता कि उसका मित्र सुरक्षित रहे। 

इसी को कहते हैं 'ईश्वर की मददÓ। ईश्वर कष्ट में पड़े जीव को कभी भी अकेला नहीं छोड़ता। ईश्वर मनुष्य का सबसे अच्छा मित्र होता है। हम भले ही नासमझी में ईश्वर को भला-बुरा कहें लेकिन वो कभी भी, किसी भी स्थिति में हमारा साथ नहीं छोड़ता। यदि कोई मुसीबत है तो वो उसका समाधान अवश्य ही देता है। दृष्टिहीन घोड़े में एक ही कमी थी कि वो देख नहीं सकता था। ईश्वर ने उसे 'अनअटेंडेडÓ नहीं छोड़ा। उसकी समस्या का भी निराकरण किया। उसे मित्र दिया जो उसकी मदद करता था। ईश्वर हमारा पूरा ख्याल रखता हैं। कवि प्रेम भाटिया कहते हैं-
तू मेरा कितना ख्याल रखता है,
मेरे ख्याल का भी ख्याल रखता है,
जमाना कहता है तुझमें बड़ा कमाल है,
मुझे तो सब कुछ ही कमाल लगता है.
हमें जब भी जरुरत होती है, तो वो किसी न किसी को हमारी मदद के लिए भेज देता हैं। कभी-कभी हम वो अंधे घोड़े होते हैं, जो भगवान द्वारा बांधी गयी घंटी की मदद से अपनी परेशानियों से निजात पाते हैं तो कभी हम अपने गले में बंधीघंटी द्वारा यानि अपनी कुशलता द्वारा दूसरों को रास्ता दिखाने के काम आते हैं। यही तो जीवन है। मदद करो और मदद दो। यदि दोनों ही काम न किये तो जीवन का क्या मोल है? यहां मन्त्र यही है कि ईश्वर पर विश्वास रखें। वो गलत नहीं कर सकता। वो जो करता है, सही है। इसी को मानने से जीवन सुखद और संतुलित रहता है।

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