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'आदर्श और फैशन'

* एक शराब के तस्कर पर बनी फिल्म ने रिकॉर्ड कमाई की।
* अंडरवल्र्ड डॉन पर बनी फिल्में सुपरहिट रही हैं।
* वर्तमान में नशा करने वाले, हथियार रखने के कारण जेल में रहने वाले अभिनेता पर बनी फिल्म हिट रही है।
* अब पोर्नस्टार पर फिल्म निर्माणाधीन है।
ये एक संकेत है। समाज कैसा बनना चाहता है? समाज का आदर्श कौन है? समाज किसकी नकल कर रहा है? यदि समाज में सम्मान टैक्स चोरोंए पोर्नस्टार्सए अपराधियों का होगा तो इनके जैसा बन जाना फैशन बनता चला जायेगा। प्रत्येक व्यक्ति जानता है कि यह मनोरंजन है। आप भी यही कहेंगे कि यह तो मनोरंजन मात्र है। इसका आपके मस्तिष्क पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। यह सोच तो ठीक नहीं है। कई विश्वविद्यालयों ने शोध के द्वारा 'अवचेतन मन के परसेप्शनÓ की व्याख्या की है जिसके अनुसार अवचेतन मन पर प्रभाव तो पड़ता ही है। यदि ऐसा न होता तो वषों पूर्व एक सिनेमा को देखकर सैकड़ों प्रेमी युगल घर से न भागे होत। एक फिल्म में नायक ने गले पर खोद-खोद कर अपना नाम लिखा था। उसे कॉपी करते हुए कई युवा घायल हुए थे।
हम समझते हैं कि यह सब व्यवसाय है। व्यवसाय में नैतिकता की उम्मीद करना मुश्किल होता जा रहा है। हम सभी यह समझ चुके हैं कि व्यवसाय 'ईगोइस्मÓ के सिद्धांत पर चल रहा है जिसका अर्थ है कि मेरा मुनाफा हो जाये, मैं सुखी हो जाऊं, शेष से मुझे सरोकार नहीं है। जिस समाज में 'ईगोइस्मÓ फैशन है, वहां राष्ट्रप्रेम, निर्बल की सेवा और देश के लिये कुछ कर गुजरने का भाव पैदा करना मुश्किल होता जायेगा।
जरा सोचिये कि:
* देशप्रेम फैशन कब बनेगा?
* शहीदों के चित्र हमारे घरों की दीवारों की शोभा कब बढ़ाएंगे? फिल्म स्टार्स के बजाय इन्हें राष्ट्र नायक माना जाना फैशन कब बनेगा?
* बाल विवाह नहीं करनाए दहेज नहीं लेना, मृत्यु भोज को नकारना फैशन कब बनेगा?
* निकृष्ट व्यक्तियों को नायक नहीं मानकर उन्हें दुत्कारना फैशन क्यों नहीं बन पा रहा?
* स्त्री संरक्षणए आर्थिक रूप से सशक्त महिला बनकर राष्ट्र की सेवा करना फैशन क्यों नहीं है?
* देशभक्तों की कथाओं को सुनाना, उनसे सीखना, अपनी संतान को राष्ट्र गौरव का पाठ पढ़ाना फैशन कब बनेगा?
* हेयर स्टाइल संवारने के बजाय ब्रेन की स्टाइल सुधारना फैशन क्यों नहीं है?
जरा सोचिये कि यदि हमारे आदर्श और प्रेरणा स्रोत ही चोर, डकैत, देशद्रोही, टैक्स को खुर्द-बुर्द करने वालेए बदमाश व्यक्ति होंगे तो समाज भी तो उन्हीं के जैसा बनेगा? समाज जिसका सम्मान करता है, व्यक्ति वैसा ही बनना चाहते हैं। यह शाश्वत सत्य है। यहां मन्त्र यही है कि राष्ट्र और समाज के लिये कुछ कीजिये। यही जीवन को सार्थक बनाता है।

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