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'सास, बहु और प्रतिक्रिया'

एक विवाहिता अपनी सास की शिकायत लेकर एक साधु के पास गई। उसने साधु से कहा कि सास दिन भर उसे कार्य करने, व्यवस्था सुदृढ करने आदि पर कुछ न कुछ समझाती रहती है। इसी कारण उसकी रोज सास से लड़ाई होती रहती है। साधु ने विवाहिता को पानी की एक बोतल देकर कहा कि इस बोतल में देश की सभी पवित्र नदियों का पानी मिला है। साधु ने कहा कि 'जब भी सास कुछ कहे तो इस बोतल से एक घूंट पानी अपने मुंह में डालना और दो मिनिट तक उस पानी को मुंह में ही रखना। न पानी को निगलना और न ही कुल्ला करना। दो मिनिट बाद पानी पी लेना। समस्या हल हो जायेगीÓ। विवाहिता ने वैसा ही किया। जब भी सास कुछ उपदेश देती, तो बहु मुंह में पानी डाल कर बैठ जाती। अब लड़ाई कम होने लगी। एक माह बाद वो साधु के पास आई और कहा कि पवित्र नदियों के पानी में जादू है अत: उसे एक और बोतल चाहिये। साधु ने एक बोतल और दे दी। दो माह बाद जब विवाहिता फिर से बोतल लेने आई तो साधु ने कहा कि अब वो बोतल का निर्माण घर पर ही कर लेवे क्योंकि यह सामान्य जल ही है। प्रतिक्रिया नहीं देने की प्रवृत्ति को सिखाने के लिए साधु ने यह खेल खेला था। 

सास और बहु में समस्या होना निश्चित है। दोनों की पारिवारिक पृष्ठभूमि, उम्र, अनुभव, शिक्षा, सोच का तरीका आदि अलग-अलग होता है। अत: मतभिन्नता होनी स्वाभाविक है। कथा सांकेतिक है लेकिन इसमें जीवन जीने के और परिवार को श्रेष्ठ तरीके से चलाने के कई गूढ़ सूत्र छिपे हैं-
* तुरंत प्रतिक्रिया देना घातक है। तुरंत प्रतिक्रिया देने का अर्थ बचपना है। बच्चा सुलभ रूप से तुरंत प्रतिक्रिया देता है और नकल करता है। यहां यह समझना होगा कि भले ही आप उम्र में बड़े हो गये हैं लेकिन समझ में बच्चे ही हैं क्योंकि आप तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं। तुरंत प्रतिक्रिया न देवें। सबसे पहले सामने वाले की सुनें। उसके बाद विश्लेषण करें कि ऐसा क्यों कहा गया? सोचें कि इस मुद्दे पर बोलना जरूरी है या नहीं? जरूरी हो तो ही बोलें , अन्यथा नहीं।
* प्रतिक्रिया देने से कुतर्क शुरू हो जाता है। 'क्या सही हैÓ की जगह पर 'कौन सही हैÓ-का युद्ध प्रारम्भ हो जाता है। इससे बचिये।
* क्रोध को रोकने का या कम करने का एक ही तरीका है-उसे स्थगित करना, डिले करना यानि प्रतिक्रिया देने में देर करना। देर करते ही कई मुसीबतें तो अपने आप ही समाप्त हो जायेंगी।
यहां मन्त्र यही है कि यदि आप परिवार में सुख चाहते हैं तो एक नियम बना लेवें कि एक समय में एक व्यक्ति ही क्रोध कर सकेगा। जीवन और परिवार स्वत: सुखी हो जायेगा।

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