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'जैसा करोगे, वैसा भरोगे'

एक व्यक्ति चोरी की नीयत से रात के समय किसी मकान की खिड़की से भीतर जाने लगा। तभी खिड़की की चौखट टूट जाने से वह गिर पड़ा और उसकी टांग टूट गयी। अगले दिन उसने अदालत में जाकर अपनी टांग के टूटने का दोष उस मकान के मालिक पर लगाया। मकान मालिक को बुलाकर पूछा गया तो उसने अपनी सफाई में कहा कि इसका जिम्मेदार वह बढ़ई है जिसने खिड़की बनाई थी। बढ़ई को बुलाया गया तो उसने कहा कि उससे यह गलती एक औरत की वजह से हुई जो उस दिन वहां से गुजर रही थी। उस औरत ने बढ़ई का ध्यान खींचा था। जब उस औरत को अदालत में पेश किया गया तो औरत ने कहा कि उस समय उसने बहुत बढिय़ा ड्रेस पहन रखी थी अत: कसूर उस ड्रेस का है जो इतनी बढिय़ा सिली हुई थी। न्यायाधीश ने कहा कि दर्जी ही अपराधी है अत: उसे बुलाया जाये। वह दर्जी उस स्त्री का पति निकला और वही वह चोर भी था जिसकी टांग टूटी थी। सांकेतिक कथा से यह सन्देश मिलता है कि-

1। इस जगत का सर्वाधिक आश्चर्यजनक नियम है- 'जो गड्ढे आप दूसरों के लिये खोदते हो, उनमें स्वयं गिरना पड़ता हैÓ। यह शाश्वत सत्य है। जो षड्यंत्र, राजनीति, ओछापन आप दूसरों के लिये करते हो, वही पलटकर आपके पास लौटता है। जीवन एक गूंज या ईको की तरह है। आप पहाडी से एक बार कुछ चिल्लाते हो-वही आवाज कई बार पुन: आपको सुनाई पड़ती है।
2। कार्यालयों में कई कर्मचारी तो समूचा जीवन इसी कार्य में खपा देते हैं। बॉस की 'मक्खन पॉलिशÓ, उसके समस्त निजी कार्यों को करने वाले इन विलक्षण कर्मचारियों में एक खास बात यह भी होती है कि ये सदा निर्दोष ही होते हैं। दूसरों को फंसाना, उन्हें कष्ट देना, बॉस के कान भरना, दूसरों के लिये षड्यंत्र करना, स्वयं शक्ति का भंडारण करना आदि इनकी खास अदा होती है। कुछ समय तक तो ये शक्तिमान रहते हैं लेकिन कुछ समय बाद इनकी कोई इज्जत नहीं रहती।
3। संगठनों में ऐसे वाकये होना आम बात है। जिम्मेदारी से बचने के लिये दूसरे पर दोष मढने वाले कर्मचारियों को आजकल की भाषा में 'स्मार्ट, कूल, फास्टट्रेकÓ आदि संबोधन दिये जाते हैं। जब सभी जिम्मेदारी से बचना चाहेंगे तो कार्य कौन करेगा?
4। आपने देखा होगा कि सड़क के टूटे होने के कारण यदि दुर्घटना हो जाये तो उसका दोषी क्या आज तक पकड़ा गया है? यह फुटबॉल के उस खेल की तरह होता है जहां एक खिलाड़ी दूसरे को पास देता रहता है, गोल कभी नहीं करता और मैच का कोई निर्णय नहीं निकल पाता।
यहां मन्त्र यही है कि जिम्मेदारी लीजिये। जिम्मेदारी से बचने का प्रयास आपको छोटा बनाता है। दूसरों के लिये किये गये षड्यंत्र आपको ही नेस्तोनाबूत कर देते हैं। यही जीवन का सत्य है।

DNR Reporter

DNR desk

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