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प्रार्थना सभा में प्रधानाचार्य ने सैनिकों को बताया दुष्कर्मी, गिरफ्तार व निलम्बित

प्रतापगढ़/बीकानेर। वैसे तो शिक्षक अच्छी शिक्षा देने वाले होते हैं लेकिन राजस्थान के प्रतापगढ़ के सरकारी विद्यालय के प्रधानाचार्य ने शनिवार को देश की सेना के लिए इतने अपशब्द बोले कि स्वयं विद्यार्थी उत्तेजित हो गए। मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। बाद में बीकानेर से माध्यमिक शिक्षा निदेशक नथमल डिडेल ने इस प्रधानाचार्य को निलम्बित कर दिया।
प्रतापगढ़ जिले की एक स्कूल के प्रधानाचार्य मोहम्द इकराम अजमेरी ने शनिवार को प्रार्थना सभा के दौरान भारतीय सैनिकों के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द कहे थे। दरअसल पुलवामा आतंकी हमले में भारतीय सेना के 40 जवान शहीद हो गए थे। इसे लेकर स्कूल में जब प्रार्थना सभा आयोजित हो रही थी तब स्कूल के प्राधानाचार्य मोहम्मद इकराम अजमेरी ने देश के वीर शहीदों और सैनिकों को लेकर आपत्तिजनक शब्द कहे थे। उन्होंने अपने संबोधन में छात्रों के सामने सैनिकों को कथित तौर पर बलात्कारी बताया था। स्कूल में हुई यह बात जैसे ही ग्रामीणों तक पहुंची तो इसका विरोध शुरू हो गया। गुस्साए ग्रामीणों ने राजमार्ग तक जाम लगा दिया। जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घटनाक्रम की जानकारी ली। बाद में थाने में आपत्ति दर्ज होने पर प्रधानाचार्य मोहम्मद इकराम अजमेरी को गिरफ्तार कर लिया गया। प्रतापगढ़ जिले के हरथुनिया थाना इलाके में पडऩे वाले कुणी गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यायल में प्रधानाचार्य अकरम ने प्रार्थना स्थल में ही अपने संबोधन में देश के सैनिकों को कथित तौर पर बलात्कारी कह दिया था। उनके इस कथन को लेकर स्कूल में पढऩे वाले छात्रों ने इस बात की जानकारी अपने परिजनों को दी जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया। स्कूल के बाहर गांव के लोग एकत्र हो गए और शिक्षक का पुतला दहन कर हटाने की मांग करने लगे। घटना की जानकारी पर हरथुनिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी प्रधानाचार्य को गिरफ्तार कर लिया।
उधर, घटना की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा निदेशक नथमल डिडेल ने इकराम अजमेरी को निलंबित कर दिया और निलंबन काल में उसका मुख्यालय शिक्षा निदेशालय रहेगा।

जिस मां ने जीवन दिया, बेटे ने उसी की हत्या कर दी

डीएनआर ब्यूरो.नोखा

'जर-जोरू-जमीनÓ के लिए इंसान कुछ भी कर सकता है लेकिन अपनी ही मां की हत्या कर देगा, ऐसा कभी नहीं सोचा था। बीकानेर के नोखा गांव में यह अनोखा काम भी हो गया। जहां एक बेटे ने अपनी ही मां के सिर पर लाठी से इतने वार किए कि न सिर्फ उसकी मौत हो गई बल्कि लाश के टुकड़े एकत्र करने में पुलिस को जोर आ गया।
जिस मां ने कोख में बेटे को नौ महीने अपने खून से सींचा और परवरिश कर उसे जमानेभर का प्यार दिया, उसी बेटे ने जमीन के लिए अपनी मां को मौत के घाट उतार दिया।
क्या है घटनाक्रम?
नोखा थानान्तर्गत सलुंडिया गांव की रोही स्थित खेत में बुधवार देर रात को एक बेटे ने मां के सिर पर लाठियों से ताबड़तोड़ वार कर उसकी हत्या कर दी। नोखा थानाधिकारी मनोज शर्मा ने बताया कि इस संदर्भ में मृतका के बड़े पुत्र मांगीलाल ने आरोपी अपने ही छोटे भाई निहालचन्द के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। मामले में मांगीलाल ने बताया कि उसका परिवार सलुंडिया गांव की रोही स्थित खेत ढाणी में रहता है। इसी खेत स्थित दूसरी ढाणी में उसका भाई निहालचन्द अपनी पत्नी के साथ रह रहा है। मां बाधुदेवी पत्नी हजारीराम भी उसी के साथ रहती थी।
एक दिन मां के साथ मारपीट कर उसे ढाणी से निकाल दिया। तब से बाधुदेवी उसके साथ रह रही थी। 22 जनवरी को निहालचन्द मां बाधूदेवी को वापस अपनी ढाणी ले गया। 23 जनवरी को मैं किसी विवाह में काम करने के लिए गया था। रात को वापस आया तो निहालचन्द की ढाणी से चिल्लाने की आवाजें सुनाई दी। इस पर मैं और मेरी पत्नी शारदा दोनों भागकर निहालचन्द की ढाणी गए। जहां देखा कि निहालचन्द व उसकी पत्नी पार्वती देवी दोनों मां बाधुदेवी के सिर पर लाठियां बरसा रहे थे।
खेत जमीन का मामला
आरोप है कि इस दौरान निहाल चन्द की पत्नी पार्वती देवी अपने पति से कह रही थी कि सास को मार दो ये खेत अपने नाम नहीं कर रही है। इस पर मां बाधुदेवी की मौके पर ही मौत हो गई। उसने बताया कि मैंने व मेरी पत्नी ने बीचबचाव करने की कोशिश की, लेकिन निहालचन्द कुल्हाड़ी लेकर मेरी व मेरी पत्नी को जान से मारने के लिए पीछे भागा और अपने ढाणी में घुसकर दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया। निहालचन्द दरवाजा तोड़ ढाणी के अन्दर घुस आया और जैसे ही उसने मेरे ऊपर हमला बोला, मैंने उसको अपनी बाहों में पकड़ लिया। इसी दरम्यान चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। पड़ौसियों ने पुलिस को घटना की इत्तिला दी।
इस पर मौके वहां पहुंची पुलिस ने आरोपी निहालचन्द को पकड़ लिया। गुरुवार को शव का पोस्टमार्टम कर उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

अमित शाह की तबीयत बिगड़ी, लौट रहे हैं दिल्ली, झारग्राम की रैली में शामिल होने की संभावना नहीं

मालदाI भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अपनी खराब सेहत के कारण मंगलवार की शाम को नई दिल्ली लौट रहे हैं। पश्चिम बंगाल के झारग्राम में निर्धारित रैली में उनके शामिल होने की संभावना नहीं है। भाजपा के नेताओं ने यह जानकारी दी। 

भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, अमित शाह बहुत बीमार हैं। उन्हें तेज बुखार है, लेकिन फिर भी उन्होंने यहां आज की रैली में हिस्सा लिया। स्वाइन फ्लू की चपेट में आने के बाद अस्पताल में उनका इलाज हुआ था और कुछ दिन पहले ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी।
घोष ने कहा कि शाह आज नई दिल्ली लौटेंगे, क्योंकि उनके डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी है कि वे खराब सेहत के कारण किसी रैली में हिस्सा नहीं लें। उन्होंने कहा, यदि कल उनकी तबीयत ठीक रहती है तो वह कल झारग्राम में रैली को संबोधित करेंगे।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि शाह ने उन्हें यह सुनिश्चित करने को कहा है कि अन्य निर्धारित रैलियां समय पर हों।
इससे पहले, शाह ने मालदा में रैली को संबोधित कर चुनाव अभियान की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक पारित होने के बाद सभी बंगाली शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी।

रेतीले धोरों पर ऊंटों की मस्ती से पर्यटक रोमांचित

बीकानेर। 
रेतीले धोरों के बीच एक तरफ विदेशी सैलानी और दूसरी तरफ गांव के बांके जवान। दोनों के बीच में है रस्सा। दोनों तरफ से पूरा दम लगाया जाता है, पलड़ा कभी इधर झुकता है तो कभी उधर। आखिरकार जीतते ठेठ गांव के जवान ही है। हालांकि इस हार के बाद भी विदेशी पुरुष नारी प्रफुल्लित व रोमांचित नजर आते हैं। यह नजारा है बीकानेर में आयोजित हो रहे ऊंट उत्सव का। 
दो दिवसीय ऊंट उत्सव में सैकड़ों विदेशी सैलानियों ने जबर्दस्त तरीके से मस्ती की और राजस्थान की परम्पराओं से रूबरू हुए। पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित होने वाले इस अनूठे आयोजन में मरुस्थलीय क्षेत्र की संस्कृति का अनुभव होता है। शनिवार देर रात सर्द हवाओं के बीच किसी ने भवई नृत्य पेश किया तो किसी ने कालबेलिया। महिला बने पुरुषों ने जब कालबेलिया के दौरान जमीन पर घूमर डालनी शुरू की तो मैदान में जमीन पर बैठे हजारों देशी और विदेशी सैलानियों ने खड़े होकर समूचे क्षेत्र को तालियों से गुंजायमान कर दिया।
इन प्रतियोगिताओं में विदेशी लेते हैं लुत्फ
ऊंट उत्सव के दौरान पर्यटक रस्सा कस्सी में सर्वाधिक मजा लेते हैं। एक ओर आकर्षक स्पद्र्धा साफा बांधने की होती है। जिसमें विदेशी पर्यटक अपने माथे पर उस साफे को बांधते हैं, जो जीवन में पहले कभी नहीं पहना होता। बेतरतीब ही सही लेकिन विदेशियों के सिर पर बंधे साफे बड़े ही आकर्षक नजर आते हैं। सबसे पहले साफा बांधने वाला विजेता घोषित होता है। इसी तरह विदेशी महिलाएं बीकानेर की ग्रामीण महिलाओं के साथ एक मजेदार 'रेसÓ में हिस्सा लेती है। 'मटका रेसÓ में देशी और विदेशी महिलाएं अपने सिर पर मटका रखकर दौड़ लगाती है। सिर पर रखा मटका गिरते ही खिलाड़ी दौड़ से बाहर। इस दौड़ में विदेशी पर्यटक जीत तो नहीं पाती, लेकिन हारकर भी उसके चेहरे पर रौनक नजर आती है। 
 
नाचते ऊंट कर देते हैं रोमांचित
अब तक आपने ऊंटों को सड़कों पर या फिर रेतीली जमीन पर चलते ही देखा होगा लेकिन बीकानेर के ऊंट उत्सव में रविवार को नाचते भी नजर आए। बकायदा फिल्मी गीतों पर नाचते यह ऊंट दर्शकों को नाचने के लिए मजबूर कर देते हैं। प्रशिक्षित ऊंटों के बीच बकायदा मुकाबला होता है। रविवार दोपहर हुई स्पद्र्धा में ऊंटों का नृत्य लाजवाब रहा।
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