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नोट के साथ वोट

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भारत में पहले आम चुनाव 1952 में हुए। इसी क्रम में बीकानेर में पहले सांसद का चुनाव बीकानेर रियासत के तत्कालीन महाराजा करणीसिंह ने लड़ा था। करणीसिंह महाराजा गंगासिंह के पौत्र और महाराजा सार्दुलसिंह के पुत्र थे। आजादी के बाद पहले आम चुनाव तक राजा-महाराजाओं के प्रति विशेष सम्मान व प्रेम नजर आता था। तब राजा-महाराजाओं से जब भी कोई व्यक्ति मिलता था तो अपनी हैसियत के अनुसार कुछ न कुछ लेकर जरूर जाता था, जिसको नजराना या भेंट कहा करते थे। राजा महाराजा से खाली हाथ मिलने का रिवाज उस समय नहीं था। इसी सोच व भावना के साथ बीकानेर की जनता ने महाराजा करणीसिंह को वोट दिए तो वोट के साथ एक नोट भी डाला। सोच यह थी कि महाराजा को खाली वोट कैसे दें! आखिर तो राजा है और राजा को पहली बार बिना मिले ही मिलना था तो खाली हाथ नहीं मिला जा सकता था।

इसलिए वोट के साथ नोट भी मतपेटी में डाले गए। एक और बात थी कि महाराजा गंगासिंह बीकानेर रियासत में गंगनहर लाए थे और गंगानगर व हनुमानगढ़ का इलाका इसी कारण समृद्ध हुआ था। यह इलाका नाली क्षेत्र कहलाता था। अत: इस क्षेत्र के किसान ने अपना राजकीय ऋण उतारने की भावना और राजपरिवार के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने के लिए वोट के साथ नोट भी डाले। इस तरह लोकतंत्र का यह पहला उत्सव अपने साथ एक रिवाज लेकर सम्पन्न हुआ और महाराजा करणीसिंह चुनाव में विजयी हुए।

DNR Reporter

DNR desk

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