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जब एक कांस्टेबल ने कलक्टर को कहा: बाहर ही रहो भीड मत करो Featured

बात दो फरवरी 1982 की है जब बीकानेर में अखिल भारतीय पंचायत राज सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा था। सम्मेलन में कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव राजीव गांधी, राजस्थान के मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी, केन्द्रीय मंत्री बूटासिंह, बलराम जाखड़ सहित कई राष्ट्रीय स्तर के नेता मौजूद थे। राजकीय स्टेडियम में आयोजित हो रहे इस सम्मेलन की पंचायत राज से संबंधित प्रदर्शनी साईकिल वेलोड्रम के मैदान पर रखी गई थी। सभी लोग इस प्रदर्शनी का अवलोकन कर रहे थे कि अचानक एक हलचल हुई और सबने देखा कि राजस्थान के कद्दावर कांग्रेसी नेता मोहनलाल सुखाडिया बेहोश होकर गिर पडे। सुखाडिया 17 साल तक राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे थे और उसके बाद कर्नाटक, आंध्रप्रदेश व तमिलनाडू के राज्यपाल भी रहे। सब हक्के-बक्के व हतप्रद रह गए। सुखाडिया को बेहोशी की हालत में पीबीएम अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सभी लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। सुखाडिया का शव पीबीएम था। बीकानेर के तत्कालीन जिला कलक्टर एमकेश खन्ना को जैसे ही सूचना मिली वे जहां थे जैसे थे पीबीएम की तरफ रवाना हुए। अस्पताल के बाहर भारी भीड थी। लोग अपने नेता के अंतिम दर्शन करना चाहते थे। पीबीएम के मुख्य दरवाजे के बाहर एक पुलिस कांस्टेबल को नियुक्त कर दिया गया कि किसी को भी अंदर न आने दिया जाए। उधर अपनी गाडी से उतर कर जिला कलक्टर एमकेश खन्ना अस्पताल के दरवाजे की और दौडे पर जैसे ही उन्होंने अंदर प्रवेश की कोशिश की कांस्टेबल ने हाथ पकड कर रोक लिया और बांह पकड कर किनारे कर दिया कि भीड मत करो बाहर ही रहो। जिला कलक्टर अपने साथ हुए इस व्यवहार से भौचक्के रह गए पर तुरंत संभले और दुबारा उसी तरफ बढ़े इस बार फिर कांस्टेबल ने कलक्टर साहब को रोक दिया कि समझ नहीं आता एक बार कह दिया बाहर ही रहो। इतना सुनते ही कलक्टर के साथ आए उनके स्टाफ के एक सदस्य ने कहा कि तुम नहीं जानते क्या ये खन्ना साहब है जिले के कलक्टर। इतना सुनते की कांस्टेबल के होश उए गए और उसने सेल्यूट किया और माफी मांगी परंतु खन्ना साहब ने हालात की मजबूरी समझी और उस कांस्टेबल को सराहा कि आपने कोई गलत काम नहीं किया बल्कि अपनी ड्यूटी निभाई है। इसके लिए आप बधाई के पात्र है और यहीं खडे रहकर ऐसे ही अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से करते रहिए। वहां खडे लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम को देखा तो देखकर आश्चर्य किया कि कैसे जिले के सुप्रीम अधिकारी ने बजाय बुरा मानने के एक छोटे कर्मचारी को उसकी कत्र्तव्यनिष्ठा के लिए सराहा।

DNR Reporter

DNR desk

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