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हर बॉल को हुक कर गए सीपी

एयरपोर्ट बनने से बीकानेर वालों को जयपुर और दिल्ली जाने का लाभ तो हुआ ही है यहां के पत्रकारों को भी खूब फायदा हुआ है। एयरपोर्ट बना है तो नेता अब यहीं से होकर आसपास के शहरों में जाते हैं। हमारे पत्रकार भाई भी पहुंच जाते हैं अपना माइक लेकर। आदत से मजबूर है सवाल ऐसा करेंगे कि सामने वाले के तीर सा चुभे। अब सी पी जोशी आये तो उनसे हजार सवाल किए जा सकते थे लेकिन पूछे वो ही सवाल जिसका दर्द साफ नजर आ जाये। पहला सवाल था कि गुजरात मे क्या होगा? अब अच्छा बताए तो संकट बुरा बताए तो संकट। सो बोल दिया अशोक जी से पूछो। अरे भाई आप ही अच्छा बता देते तो कौनसा अशोक जी सर्वसम्मति से विधायक दल के नेता घोषित हो रहे थे।


दूसरा सवाल किया तो वो भी बाउंसर था। जोशी क्रिकेट के प्रशासनिक खिलाड़ी है तो इस बॉल को भी हुक कर दिया। सवाल था राजस्थान में अगले चुनाव में चेहरा कौन होगा। जवाब था कांग्रेस तय करेगी। हम तो सोच रहे थे आप ही कांग्रेस है लेकिन यहां भी कुछ उत्साहजनक जवाब नहीं दिया। खैर हम खबरनवीस तो इसे भी खबर बना लेते हैं। रवि की हर बॉल पर सीपी ने बचाव किया लेकिन खबर तो फिर भी बनी। अब गुजरात और हिमाचल प्रदेश के बाद राजस्थान में कभी भी चुनावी माहौैल शुरू होने में देरी नहीं होगी। इसे लेकर भाजपा और कांग्रेस ने भीतरी तौर पर गतिविधियां भी शुरू कर दी है। लेकिन हमारे पत्रकार भाइयों के पास पहला सवाल यही होगा की कांग्रेस का मुख्यमंत्री का चेहरा कौन सा होगा। जबकि वसुंधरा का पांच साल का कार्यकाल कैसा रहा। ये इन सवालों का जवाब सभी के पास होगा लेकिन अंतिम जवाब हाइकमान पर आकर रुक जाएगा।

स्वागत में कमी नहीं
कहते हैं दिल मिले ना मिले हाथ मिलने चाहिए। पिछले दिनों कांग्रेस नेताओं ने ऐसा ही जज्बा दिखाया। एयरपोर्ट पर जोशी का स्वागत करने वालों में अधिकांश वो थे जो हाथ मिलाने गए थे ताकि आगे रोडऩा डालें। अच्छी पहल है। क्योंकि अब राजस्थान में भी चुनाव होने हैं। इसलिए बाहर से आने वाले नेताओं के स्वागत में कंजूसी क्यों बरती जाए। क्या मालूम कौन सा नेता जयपुर में बैठा अपनी फिल्डिंग बिगाड़ सके और कौन सा नेता फिल्डिंग को सही तरीके से जमा सके। खैर अभी तो एक साल तक मालाएं वाहन की डिक्की में ही रखी जाएगी। क्या मालूम कब माला काम आ जाए।

यहां पार्टी मायने नहीं रखती
विचार बड़ा हो तो मानसिकता बदल लेनी चाहिए। अच्छे काम के लिए समझौता कर लेना चाहिए। सिद्धान्त भी किनारे रख देने चाहिए। अभी कांग्रेस और भाजपा के नेता दो मामलों में ये सदाशयता दिखा रहे हैं। अब आपको उन मुद्दों से क्या मतलब कि कहां दोनों ने समझौता किया। आप नहीं मानों तो बता देते हैं। दीमापुर औऱ दे माताजी वाला मामले में दोनों एक थे। होना भी जरूरी था क्योंकि चुनाव में ये ही रुठों को मनाने और अपनों को बूथ पर पहुंचाने में काम आएंगे। पुत्र तो दे जिसको माताजी को हर साल सड़क पर ले आते हैं। इन पुत्रों को अगर भय लगता है तो खाकी से लगता है और खाकी से इन दोनों पार्टियों के नेता ही बचा सकते हैं। खैर अब अगले सप्ताह फिर करेंगे चिकचिक।

लो निकल गई दिपावली
दीपावली ऐसा त्योहार है जिस दिन घर की हर मुंडेर पर दीपक टिमटिमाते नजर आते हैं। लेकिन हमारी नगर निगम को शायद दीपावली की याद नहीं आई थी। इस वजह से कई मोहल्लों में रोड लाइट भी नहीं लगाई गई थी। कहने को यह कहा गया कि इस बार 1500 रोड लाइट मंगाई गई है लेकिन ये लाइटें कहां लगाई गई शायद ही किसी पार्षद और अन्य नेताओं को मालूम हो। जबकि दिपावली से पहले यह घोषणा की गई थी कि सारा शहर रोशनी से सराबोर होगा लेकिन एक गली में भी नई लाइट नहीं लगाई गई। कभी कर्मचारी नहीं मिला तो कभी पार्षदों ने अपनी नाराजगी दिखा दी।

भाजपा सदसयता अभियान में व्यस्त है। भाजपा नेता इन दिनों सब जगह पहुंच रहे हैँ। ये भी नही देख रहे कि अपने वोटर है या नहीं। पिछले दिनों एक कार्यक्रम में अध्यक्ष जी काफी सक्रिय नजर आये। तालाब में खूब पानी बजी डलवाया। पूजा भी करवाई। बाद में किसी ने बताया कि उनमें से कोई भी अपना वोटर नहीं है। अधिकांश का तो वोटर लिस्ट में ही नाम नहीं है। खैर कभी कभार भगवान ही अच्छा काम करवा लेते हैं । जाने अनजाने ही सही।

DNR Reporter

DNR desk

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